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4. An-Nisaa

The Women · Medinan · 176 ayahs

سُورَةُ النِّسَاءِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 131–140 of 176

131

وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ وَلَقَدْ وَصَّيْنَا ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ مِن قَبْلِكُمْ وَإِيَّاكُمْ أَنِ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ وَإِن تَكْفُرُوا۟ فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ غَنِيًّا حَمِيدًۭا

और जिन लोगों को तुमसे पहले किताबे ख़ुदा अता की गयी है उनको और तुमको भी उसकी हमने वसीयत की थी कि (ख़ुदा) (की नाफ़रमानी) से डरते रहो और अगर (कहीं) तुमने कुफ़्र इख्तेयार किया तो (याद रहे कि) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ुदा ही का है (जो चाहे कर सकता है) और ख़ुदा तो सबसे बेपरवा और (हमा सिफ़त) मौसूफ़ हर हम्द वाला है

जो कुछ आकाशों और धरती में तथा जो कुछ उन दोनों के बीच है, उन सब का मालिक केवल अल्लाह है। हमने किताब वाले यहूदियों और ईसाइयों को आदेश दिया था और तुम्हें भी आदेश दिया है कि अल्लाह के आदेशों का पालन करो और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचो। यदि तुम इस आदेश का इनकार करोगे, तो केवल अपने आप को नुक़सान पहुँचाओग।क्योंकि अल्लाह तुम्हारी आज्ञाकारिता से बेपरवाह है। वह तो आसमानों और ज़मीन की सारी चीज़ों का मालिक है, और वह अपनी सारी रचनाओं से बेनियाज़ और अपने सभी गुणों और कार्यों पर स्तुति के योग्य है।

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132

وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلًا

जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ास ख़ुदा ही का है और ख़ुदा तो कारसाज़ी के लिये काफ़ी है

आसमानों और ज़मीन की सारी चीज़ें केवल अल्लाह की हैं, जो आज्ञापालन के योग्य है और अल्लाह अपनी रचना के सभी मामलों का प्रभार लेने के लिए पर्याप्त है।

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133

إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ أَيُّهَا ٱلنَّاسُ وَيَأْتِ بِـَٔاخَرِينَ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ ذَٰلِكَ قَدِيرًۭا

ऐ लोगों अगर ख़ुदा चाहे तो तुमको (दुनिया के परदे से) बिल्कुल उठा ले और (तुम्हारे बदले) दूसरों को ला (बसाए) और ख़ुदा तो इसपर क़ादिर व तवाना है

यदि वह चाहे, तो - ऐ लोगो - वह तुम्हें विनष्ट कर दे और तुम्हारे स्थान पर दूसरे लोगों को ले आए, जो अल्लाह की आज्ञा मानें और उसकी अवज्ञा न करें। तथा अल्लाह ऐसा करने में सक्षम है।

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134

مَّن كَانَ يُرِيدُ ثَوَابَ ٱلدُّنْيَا فَعِندَ ٱللَّهِ ثَوَابُ ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ سَمِيعًۢا بَصِيرًۭا

और जो शख्स (अपने आमाल का) बदला दुनिया ही में चाहता है तो ख़ुदा के पास दुनिया व आख़िरत दोनों का अज्र मौजूद है और ख़ुदा तो हर शख्स की सुनता और सबको देखता है

- ऐ लोगो! - तुममें से जो व्यक्ति अपने कार्य से केवल दुनिया का बदला चाहता है, वह जान ले कि अल्लाह के पास दुनिया और आखिरत दोनों का बदला है। इसलिए वह अल्लाह से दोनों का बदला माँगे। अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे कार्यों को देखने वाला है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।

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135

۞ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ كُونُوا۟ قَوَّٰمِينَ بِٱلْقِسْطِ شُهَدَآءَ لِلَّهِ وَلَوْ عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمْ أَوِ ٱلْوَٰلِدَيْنِ وَٱلْأَقْرَبِينَ ۚ إِن يَكُنْ غَنِيًّا أَوْ فَقِيرًۭا فَٱللَّهُ أَوْلَىٰ بِهِمَا ۖ فَلَا تَتَّبِعُوا۟ ٱلْهَوَىٰٓ أَن تَعْدِلُوا۟ ۚ وَإِن تَلْوُۥٓا۟ أَوْ تُعْرِضُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًۭا

ऐ ईमानवालों मज़बूती के साथ इन्साफ़ पर क़ायम रहो और ख़ुदा के लये गवाही दो अगरचे (ये गवाही) ख़ुद तुम्हारे या तुम्हारे मॉ बाप या क़राबतदारों के लिए खिलाफ़ (ही क्यो) न हो ख्वाह मालदार हो या मोहताज (क्योंकि) ख़ुदा तो (तुम्हारी बनिस्बत) उनपर ज्यादा मेहरबान है तो तुम (हक़ से) कतराने में ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और अगर घुमा फिरा के गवाही दोगे या बिल्कुल इन्कार करोगे तो (याद रहे जैसी करनी वैसी भरनी क्योंकि) जो कुछ तुम करते हो ख़ुद उससे ख़ूब वाक़िफ़ है

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! अपनी सभी परिस्थितियों में न्याय पर जमे रहने वाले, हर एक के साथ सच्ची गवाही देने वाले बन जाओ। भले ही इसके लिए तुम्हें अपने आपके, या अपने माता-पिता या अपने रिश्तेदारों के विरुद्ध सच्च का इक़रार करना पड़े। किसी की ग़रीबी या अमीरी तुम्हें गवाही देने या न देने के लिए बाध्य न करे। क्योंकि अल्लाह उस ग़रीब और अमीर का तुमसे अधिक हक़दार है और उनके हितों को तुमसे अधिक जानता है। इसलिए अपनी गवाही में इच्छाओं का पालन न करें ताकि ऐसा न हो कि आप उसमें सत्य से हट जाएँ। यदि तुम गवाही को गलत तरीक़े से पेश करके उसमें हेर-फेर करोगे या गवाही देने से उपेक्षा करोगे, तो जान लो कि अल्लाह तुम्हारे सभी कार्यों से अवगत है।

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136

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ ءَامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَٱلْكِتَٰبِ ٱلَّذِى نَزَّلَ عَلَىٰ رَسُولِهِۦ وَٱلْكِتَٰبِ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ مِن قَبْلُ ۚ وَمَن يَكْفُرْ بِٱللَّهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَكُتُبِهِۦ وَرُسُلِهِۦ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَٰلًۢا بَعِيدًا

ऐ ईमानवालों ख़ुदा और उसके रसूल (मोहम्मद) पर और उसकी किताब पर जो उसने अपने रसूल (मोहम्मद) पर नाज़िल की है और उस किताब पर जो उसने पहले नाज़िल की ईमान लाओ और (ये भी याद रहे कि) जो शख्स ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों और रोज़े आख़िरत का मुन्किर हुआ तो वह राहे रास्त से भटक के जूर जा पड़ा

ऐ ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल पर अपने ईमान, उस कुरआन पर ईमान जिसे अल्लाह ने अपने रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर अवतरित किया तथा उन किताबों पर अपने ईमान पर सुदृढ़ रहो जिन्हें उसने आपसे पहले रूसलूों पर अवतरित किया। जो अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों, उसके रसूलों और क़यामत के दिन का इनकार करे, तो वह सीधे रास्ते से बहुत दूर हो गया।

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137

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ثُمَّ كَفَرُوا۟ ثُمَّ ءَامَنُوا۟ ثُمَّ كَفَرُوا۟ ثُمَّ ٱزْدَادُوا۟ كُفْرًۭا لَّمْ يَكُنِ ٱللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ سَبِيلًۢا

बेशक जो लोग ईमान लाए उसके बाद फ़िर काफ़िर हो गए फिर ईमान लाए और फिर उसके बाद काफ़िर हो गये और कुफ़्र में बढ़ते चले गए तो ख़ुदा उनकी मग़फ़िरत करेगा और न उन्हें राहे रास्त की हिदायत ही करेगा

जो लोग ईमान लाने के बाद बार-बार कुफ़्र करते रहे, इस प्रकार कि वे ईमान लाए, फिर उससे पलट गए, इसके बाद उन्होंने फिर से ईमान में प्रवेश किया, फिर उससे पलट गए और कुफ़्र पर जमे रहे और उसी हाल में मर गए; तो अल्लाह उनके पापों को क्षमा नहीं करेगा और न ही उन्हें उस सीधे रास्ते का मार्गदर्शन करेगा जो उस सर्वशक्तिमान तक पहुँचाने वाला है।

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138

بَشِّرِ ٱلْمُنَٰفِقِينَ بِأَنَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا

(ऐ रसूल) मुनाफ़िक़ों को ख़ुशख़बरी दे दो कि उनके लिए ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है

- ऐ रसूल! - मुनाफ़िकों को, जो ईमान का प्रदर्शन करते हैं और अपने दिलों में कुफ़्र छिपाए होते हैं, शुभ-सूचना सुना दें कि उनके लिए क़यामत के दिन अल्लाह के पास दर्दनाक यातना है।

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139

ٱلَّذِينَ يَتَّخِذُونَ ٱلْكَٰفِرِينَ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِ ٱلْمُؤْمِنِينَ ۚ أَيَبْتَغُونَ عِندَهُمُ ٱلْعِزَّةَ فَإِنَّ ٱلْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًۭا

जो लोग मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना सरपरस्त बनाते हैं क्या उनके पास इज्ज़त (व आबरू) की तलाश करते हैं इज्ज़त सारी बस ख़ुदा ही के लिए ख़ास है

इस यातना कारण यह है कि उन्होंने मोमिनों को छोड़कर काफ़िरों को अपना समर्थक और सहायक बना लिया। यह बात आश्चर्यजनक है जिसने उन्हें उनका वफादार बना दिया। क्या वे उनसे शक्ति एवं बल-प्रतिष्ठा प्राप्त करके अपना वैभव बढ़ाना चाहते हैं?! तो उन्हें याद रखना चाहिए कि सारी शक्ति एवं बल-प्रतिष्ठा का मालिक केवल अल्लाह है।

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140

وَقَدْ نَزَّلَ عَلَيْكُمْ فِى ٱلْكِتَٰبِ أَنْ إِذَا سَمِعْتُمْ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ يُكْفَرُ بِهَا وَيُسْتَهْزَأُ بِهَا فَلَا تَقْعُدُوا۟ مَعَهُمْ حَتَّىٰ يَخُوضُوا۟ فِى حَدِيثٍ غَيْرِهِۦٓ ۚ إِنَّكُمْ إِذًۭا مِّثْلُهُمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ جَامِعُ ٱلْمُنَٰفِقِينَ وَٱلْكَٰفِرِينَ فِى جَهَنَّمَ جَمِيعًا

(मुसलमानों) हालॉकि ख़ुदा तुम पर अपनी किताब कुरान में ये हुक्म नाज़िल कर चुका है कि जब तुम सुन लो कि ख़ुदा की आयतों से ईन्कार किया जाता है और उससे मसख़रापन किया जाता है तो तुम उन (कुफ्फ़ार) के साथ मत बैठो यहॉ तक कि वह किसी दूसरी बात में ग़ौर करने लगें वरना तुम भी उस वक्त उनके बराबर हो जाओगे उसमें तो शक ही नहीं कि ख़ुदा तमाम मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों को (एक न एक दिन) जहन्नुम में जमा ही करेगा

- ऐ मोमिनो! - अल्लाह ने तुम्हारे लिए पवित्र क़ुरआन में अवतरित किया है कि जब तुम किसी सभी में बैठो और वहाँ किसी को अल्लाह की आयतों का इनकार करते हुए और उनका मज़ाक़ उड़ाते हुए सुनो; तो उनके साथ न बैठो और वहाँ से उठकर चल दो, यहाँ तक कि वे अल्लाह की आयतों का इनकार और उनका मज़ाक़ छोड़कर कोई दूसरी बात शुरू कर दें। यदि तुमने ऐसा नहीं किया और सब कुछ सुनने के बावजूद बैठे रहे, तो उन्हीं की तरह अल्लाह के आदेश का उल्लंघन करने वाले बन जाओगे। क्योंकि तुमने वहाँ बैठकर अल्लाह की अवज्ञा की है, जिस तरह कि उन्होंने कुफ़्र करके अल्लाह की अवज्ञा की है। निःसंदेह, अल्लाह मुनाफ़िक़ों को जो ईमान को प्रदर्शित करते और कुफ़्र को गुप्त रखते हैं, क़यामत के दिन काफ़िरों के साथ जहन्नम में एकत्रित करेगा।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.