Muslim99Muslim99
← Tafsir library

3. Aal-i-Imraan

The Family of Imraan · Medinan · 200 ayahs

سُورَةُ آلِ عِمۡرَانَ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 1–10 of 200

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

1

الٓمٓ

अलिफ़ लाम मीम

{अलिफ़, लाम, मीम} इन्हें 'ह़ुरूफ़े मुक़त्तआत' कहा जाता है। इनके समान अक्षर सूरतुल-बक़रा के शुरू में भी आए हैं। ये इस प्रकार का क़ुरआन लाने में अरबों की अक्षमता को इंगित करते हैं, हालाँकि पूरा क़ुरआन उन्हीं जैसे अक्षरों से बना है, जो इस सूरत के आरंभ में आए हैं और जिनसे वे अपने शब्दों का निर्माण करते हैं।

Aal-i-Imraan 3:1Listen in Qur'an →
2

ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْحَىُّ ٱلْقَيُّومُ

अल्लाह ही वह (ख़ुदा) है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं है वही ज़िन्दा (और) सारे जहान का सॅभालने वाला है

अल्लाह वह है जिस अकेले के सिवा कोई भी वास्तविक रूप से इबादत के लायक़ नहीं है। वह जीवित है, एक पूर्ण जीवन वाला है जिसमें कोई मृत्यु या कमी नहीं है। हर चीज़ को सँभालने वाला है, जो स्वयं क़ायम है, अतः वह अपनी सारी सृष्टि से बेनियाज़ है। जबकि सभी प्राणी उसी के द्वारा क़ायम हैं, इसलिए वे अपनी सभी स्थितियों में उससे बेनियाज़ नहीं हो सकते।

Aal-i-Imraan 3:2Listen in Qur'an →
3

نَزَّلَ عَلَيْكَ ٱلْكِتَٰبَ بِٱلْحَقِّ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَأَنزَلَ ٱلتَّوْرَىٰةَ وَٱلْإِنجِيلَ

(ऐ रसूल) उसी ने तुम पर बरहक़ किताब नाज़िल की जो (आसमानी किताबें पहले से) उसके सामने मौजूद हैं उनकी तसदीक़ करती है और उसी ने उससे पहले लोगों की हिदायत के वास्ते तौरेत व इन्जील नाज़िल की

(ऐ नबी!) उसने आपपर सच्चे समाचारों और न्यायपूर्ण नियमों के साथ क़ुरआन उतारा, जो इससे पहले की ईश्वरीय पुस्तकों के अनुकूल है। अतः उनके बीच कोई विरोधाभास नहीं है। उसने आपपर क़ुरआन उतारने से पहले मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरात और ईसा अलैहिस्सलाम पर इंजील उतारी। ये सभी ईश्वरीय पुस्तकें लोगों के लिए उस चीज़ की ओर मार्गदर्शन के स्रोत हैं, जिसमें उनके धर्म और उनकी दुनिया की भलाई है। और उसने फुरक़ान (सत्य और असत्य में अंतर करने वाला मानदंड) उतारा, जिसके द्वारा सत्य को झूठ से और मार्गदर्शन को पथभ्रष्टता से पहचाना जाता है। और जिन लोगों ने अल्लाह की उन आयतों का इनकार किया जो उसने आपपर उतारी हैं, उनके लिए बहुत कठोर यातना है। तथा अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह उससे बदला लेने वाला है, जिसने उसके रसूलों को झुठलाया और उसके आदेश का उल्लंघन किया।

Aal-i-Imraan 3:3Listen in Qur'an →
4

مِن قَبْلُ هُدًۭى لِّلنَّاسِ وَأَنزَلَ ٱلْفُرْقَانَ ۗ إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ لَهُمْ عَذَابٌۭ شَدِيدٌۭ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌۭ ذُو ٱنتِقَامٍ

और हक़ व बातिल में तमीज़ देने वाली किताब (कुरान) नाज़िल की बेशक जिन लोगों ने ख़ुदा की आयतों को न माना उनके लिए सख्त अज़ाब है और ख़ुदा हर चीज़ पर ग़ालिब बदला लेने वाला है

(ऐ नबी!) उसने आपपर सच्चे समाचारों और न्यायपूर्ण नियमों के साथ क़ुरआन उतारा, जो इससे पहले की ईश्वरीय पुस्तकों के अनुकूल है। अतः उनके बीच कोई विरोधाभास नहीं है। उसने आपपर क़ुरआन उतारने से पहले मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरात और ईसा अलैहिस्सलाम पर इंजील उतारी। ये सभी ईश्वरीय पुस्तकें लोगों के लिए उस चीज़ की ओर मार्गदर्शन के स्रोत हैं, जिसमें उनके धर्म और उनकी दुनिया की भलाई है। और उसने फुरक़ान (सत्य और असत्य में अंतर करने वाला मानदंड) उतारा, जिसके द्वारा सत्य को झूठ से और मार्गदर्शन को पथभ्रष्टता से पहचाना जाता है। और जिन लोगों ने अल्लाह की उन आयतों का इनकार किया जो उसने आपपर उतारी हैं, उनके लिए बहुत कठोर यातना है। तथा अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह उससे बदला लेने वाला है, जिसने उसके रसूलों को झुठलाया और उसके आदेश का उल्लंघन किया।

Aal-i-Imraan 3:4Listen in Qur'an →
5

إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَخْفَىٰ عَلَيْهِ شَىْءٌۭ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِى ٱلسَّمَآءِ

बेशक ख़ुदा पर कोई चीज़ पोशीदा नहीं है (न) ज़मीन में न आसमान में

अल्लाह से धरती पर या आकाश में कोई चीज़ छिपी नहीं है। उसके ज्ञान ने बाहरी और आंतरिक सभी चीज़ों को घेर रखा है।

Aal-i-Imraan 3:5Listen in Qur'an →
6

هُوَ ٱلَّذِى يُصَوِّرُكُمْ فِى ٱلْأَرْحَامِ كَيْفَ يَشَآءُ ۚ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

वही तो वह ख़ुदा है जो माँ के पेट में तुम्हारी सूरत जैसी चाहता है बनाता हे उसके सिवा कोई माबूद नहीं

वही है जो तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेटों में विभिन्न रूपों में पैदा करता है, जैसा वह चाहता है, चाहे पुरुष हो या महिला, अच्छा हो या बुरा, गोरा हो या काला। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य (सच्चा मा'बूद) नहीं। वह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।

Aal-i-Imraan 3:6Listen in Qur'an →
7

هُوَ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ عَلَيْكَ ٱلْكِتَٰبَ مِنْهُ ءَايَٰتٌۭ مُّحْكَمَٰتٌ هُنَّ أُمُّ ٱلْكِتَٰبِ وَأُخَرُ مُتَشَٰبِهَٰتٌۭ ۖ فَأَمَّا ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِمْ زَيْغٌۭ فَيَتَّبِعُونَ مَا تَشَٰبَهَ مِنْهُ ٱبْتِغَآءَ ٱلْفِتْنَةِ وَٱبْتِغَآءَ تَأْوِيلِهِۦ ۗ وَمَا يَعْلَمُ تَأْوِيلَهُۥٓ إِلَّا ٱللَّهُ ۗ وَٱلرَّٰسِخُونَ فِى ٱلْعِلْمِ يَقُولُونَ ءَامَنَّا بِهِۦ كُلٌّۭ مِّنْ عِندِ رَبِّنَا ۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّآ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَٰبِ

वही (हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (ए रसूल) वही (वह ख़ुदा) है जिसने तुमपर किताब नाज़िल की उसमें की बाज़ आयतें तो मोहकम (बहुत सरीह) हैं वही (अमल करने के लिए) असल (व बुनियाद) किताब है और कुछ (आयतें) मुतशाबेह (मिलती जुलती) (गोल गोल जिसके मायने में से पहलू निकल सकते हैं) पस जिन लोगों के दिलों में कज़ी है वह उन्हीं आयतों के पीछे पड़े रहते हैं जो मुतशाबेह हैं ताकि फ़साद बरपा करें और इस ख्याल से कि उन्हें मतलब पर ढाले लें हालाँकि ख़ुदा और उन लोगों के सिवा जो इल्म से बड़े पाए पर फ़ायज़ हैं उनका असली मतलब कोई नहीं जानता वह लोग (ये भी) कहते हैं कि हम उस पर ईमान लाए (यह) सब (मोहकम हो या मुतशाबेह) हमारे परवरदिगार की तरफ़ से है और अक्ल वाले ही समझते हैं

वही अल्लाह है, जिसने (ऐ नबी!) आपपर क़ुरआन उतारा। उसमें से कुछ आयतें ऐसी हैं जिनके अर्थ स्पष्ट हैं, उनमें कोई संदेह नहीं है। यही किताब का मूल और उसका अधिकांश भाग हैं और यही मतभेद के समय संदर्भ हैं। जबकि उसमें से कुछ दूसरी आयतें ऐसी हैं, जिनके एक से अधिक अर्थ हो सकते हैं, उनका अर्थ अधिकांश लोगों के लिए अस्पष्ट (संदिग्ध) होता है। फिर जिनके दिलों में सत्य से विचलन है, वे मोहकम (स्पष्ट अर्थ वाली) आयतों को छोड़कर मुतशाबेह (एक से अधिक अर्थ वाली) आयतों का पालन करते हैं; इसके द्वारा वे संदेह को भड़काने और लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं, तथा इसके द्वारा वे अपने भ्रष्ट सिद्धांतों के अनुरूप अपनी इच्छा के अनुसार इसकी व्याख्या करना चाहते हैं। हालाँकि इन आयतों के अर्थों की वास्तविकता और उनके परिणाम को अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। जो लोग ज्ञान में दृढ़ हैं और उस पर पकड़ रखते हैं, कहते हैं : हम पूरे क़ुरआन पर ईमान रखते हैं; क्योंकि यह पूरा का पूरा हमारे पालनहार की ओर से है और वे मुतशाबेह आयतों की व्याख्या मोहकम आयतों के अनुसार करते हैं। तथा शुद्ध (स्वस्थ) बुद्धि वाले लोग ही नसीहत हासिल करते और उपदेश ग्रहण करते हैं।

Aal-i-Imraan 3:7Listen in Qur'an →
8

رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْوَهَّابُ

(और दुआ करते हैं) ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है

ये ज्ञान में दृढ़ लोग कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हमारे दिलों को सत्य से न फेर, इसके बाद कि तूने हमारा उसकी ओर मार्गदर्शन किया। तथा हमें सत्य से भटकने वाले पथभ्रष्टों के परिणाम से सुरक्षित रख। और हमें अपनी ओर से एक व्यापक दया प्रदान कर, जिसके द्वारा तू हमारे दिलों का मार्गदर्शन कर और उसके द्वारा तू हमें पथभ्रष्ट होने से बचा ले। निःसंदेह - ऐ हमारे पालनहार! - तू महान दाता है।

Aal-i-Imraan 3:8Listen in Qur'an →
9

رَبَّنَآ إِنَّكَ جَامِعُ ٱلنَّاسِ لِيَوْمٍۢ لَّا رَيْبَ فِيهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ

ऐ हमारे परवरदिगार बेशक तू एक न एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा (तो हम पर नज़रे इनायत रहे) बेशक ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ़ नहीं करता

ऐ हमारे पालनहार! तू सभी लोगों को हिसाब के लिए अपने पास एक ऐसे दिन एकत्रित करेगा, जिसमें कोई संदेह नहीं। क्योंकि वह अनिवार्य रूप से आने वाला है। निःसंदेह - ऐ हमारे पालनहार! - तू वादाखिलाफ़ी नहीं करता।

Aal-i-Imraan 3:9Listen in Qur'an →
10

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَن تُغْنِىَ عَنْهُمْ أَمْوَٰلُهُمْ وَلَآ أَوْلَٰدُهُم مِّنَ ٱللَّهِ شَيْـًۭٔا ۖ وَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمْ وَقُودُ ٱلنَّارِ

बेशक जिन लोगों ने कुफ्र किया इख्तेयार किया उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से न उनके माल ही कुछ बचाएंगे, न उनकी औलाद (कुछ काम आएगी) और यही लोग जहन्नुम के ईधन होंगे

जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया, उनके धन और उनकी औलाद उनसे अल्लाह की यातना को हरगिज़ नहीं रोक सकते, न दुनिया में और न ही आख़िरत में। वे लोग जिनकी ये विशेषताएँ हैं, वही जहन्नम के ईंधन हैं, जिसके द्वारा उसे क़ियामत के दिन भड़काया जाएगा।

Aal-i-Imraan 3:10Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.