وَيَقُولُونَ طَاعَةٌۭ فَإِذَا بَرَزُوا۟ مِنْ عِندِكَ بَيَّتَ طَآئِفَةٌۭ مِّنْهُمْ غَيْرَ ٱلَّذِى تَقُولُ ۖ وَٱللَّهُ يَكْتُبُ مَا يُبَيِّتُونَ ۖ فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ ۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلًا
(ये लोग तुम्हारे सामने) तो कह देते हैं कि हम (आपके) फ़रमाबरदार हैं लेकिन जब तुम्हारे पास से बाहर निकले तो उनमें से कुछ लोग जो कुछ तुमसे कह चुके थे उसके ख़िलाफ़ रातों को मशवरा करते हैं हालॉकि (ये नहीं समझते) ये लोग रातों को जो कुछ भी मशवरा करते हैं उसे ख़ुदा लिखता जाता है पास तुम उन लोगों की कुछ परवाह न करो और ख़ुदा पर भरोसा रखो और ख़ुदा कारसाज़ी के लिए काफ़ी है
मुनाफ़िक़ लोग आपसे अपने मुँह से कहते हैं कि हम आपके आदेश को मानते हैं और उसका पालन करते हैं। परन्तु, जब वे आपके पास से निकलकर जाते हैं, तो उनका एक समूह गुप्त रूप से उसके विपरीत षड्यंत्र करता है जो उन्होंने आपके सामने ज़ाहिर किया है। हालाँकि अल्लाह उनके षड्यंत्र से अवगत है और उनकी इस चाल का उन्हें बदला देगा। अतः आप उनपर कोई ध्यान न दें; वे आपको कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकेंगे। आप अपना मामला अल्लाह के हवाले कर दें और उस पर भरोसा करें और अल्लाह कार्यसाधक के तैर पर काफी है जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं।