أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ نَصِيبًۭا مِّنَ ٱلْكِتَٰبِ يُؤْمِنُونَ بِٱلْجِبْتِ وَٱلطَّٰغُوتِ وَيَقُولُونَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ هَٰٓؤُلَآءِ أَهْدَىٰ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ سَبِيلًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने उन लोगों के (हाल पर) नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था और (फिर) शैतान और बुतों का कलमा पढ़ने लगे और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया है उनकी निस्बत कहने लगे कि ये तो ईमान लाने वालों से ज्यादा राहे रास्त पर हैं
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते और आपको उन यहूदियों की दशा पर आश्चर्य नहीं होता, जिन्हें अल्लाह ने ज्ञान का कुछ हिस्सा दिया है, कि वे अल्लाह को छोड़कर अपने बनाए हुए माबूदों (देवताओं) पर ईमान रखते हैं और - मुश्रिकों के साथ बनाए रखने और उनकी चाटुकारिता के तौर पर - कहते हैं : ये (मुश्रिक लोग) मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों से अधिक हिदायत के मार्ग पर हैं?