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4. An-Nisaa

The Women · Medinan · 176 ayahs

سُورَةُ النِّسَاءِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 31–40 of 176

31

إِن تَجْتَنِبُوا۟ كَبَآئِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مُّدْخَلًۭا كَرِيمًۭا

जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेंगे और तुमको बहुत अच्छी इज्ज़त की जगह पहुंचा देंगे

- ऐ मोमिनो! - यदि तुम बड़े गुनाहों से बचते रहोगे, जैसे अल्लाह का साझी बनाना, माता-पिता की अवज्ञा करना, किसी की हत्या करना और ब्याज लेना, तो हम तुम्हारे छोटे गुनाहों को क्षमा कर देंगे और तुम्हें अल्लाह के पास एक सम्मानित स्थान अर्थात जन्नत में प्रवेश का सौभाग्य प्रदान करेंगे।

32

وَلَا تَتَمَنَّوْا۟ مَا فَضَّلَ ٱللَّهُ بِهِۦ بَعْضَكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ ۚ لِّلرِّجَالِ نَصِيبٌۭ مِّمَّا ٱكْتَسَبُوا۟ ۖ وَلِلنِّسَآءِ نَصِيبٌۭ مِّمَّا ٱكْتَسَبْنَ ۚ وَسْـَٔلُوا۟ ٱللَّهَ مِن فَضْلِهِۦٓ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمًۭا

और ख़ुदा ने जो तुममें से एक दूसरे पर तरजीह दी है उसकी हवस न करो (क्योंकि फ़ज़ीलत तो आमाल से है) मर्दो को अपने किए का हिस्सा है और औरतों को अपने किए का हिस्सा और ये और बात है कि तुम ख़ुदा से उसके फज़ल व करम की ख्वाहिश करो ख़ुदा तो हर चीज़े से वाक़िफ़ है

(ऐ मोमिनो!) अल्लाह ने जिस चीज़ के द्वारा तुममें से कुछ को दूसरों पर श्रेष्ठता प्रदान की है, उसकी कामना न करो; ताकि ऐसा न हो कि यह असंतोष और ईर्ष्या पैदा कर दे। अतः स्त्रियों के लिए उचित नहीं है कि अल्लाह ने पुरुषों को जो विशिष्टताएँ प्रदान की हैं, उनकी आकांक्षा करें। क्योंकि प्रत्येक वर्ग के लिए उसके अनुरूप प्रतिफल का एक हिस्सा है।तथा अल्लाह से प्रार्थना करो कि वह तुम्हें अपने अनुदान से अधिक प्रदान करे। इसमें कोई शक नहीं कि अल्लाह हर वस्तु का ज्ञान रखता है; इसलिए उसने हर वर्ग को वही दिया है जो उसके अनुकूल है।

33

وَلِكُلٍّۢ جَعَلْنَا مَوَٰلِىَ مِمَّا تَرَكَ ٱلْوَٰلِدَانِ وَٱلْأَقْرَبُونَ ۚ وَٱلَّذِينَ عَقَدَتْ أَيْمَٰنُكُمْ فَـَٔاتُوهُمْ نَصِيبَهُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدًا

और मां बाप (या) और क़राबतदार (ग़रज़) तो शख्स जो तरका छोड़ जाए हमने हर एक का (वाली) वारिस मुक़र्रर कर दिया है और जिन लोगों से तुमने मुस्तहकम (पक्का) एहद किया है उनका मुक़र्रर हिस्सा भी तुम दे दो बेशक ख़ुदा तो हर चीज़ पर गवाह है

हमने तुममें से हर एक के हक़दार बना दिए हैं, जो माता-पिता और निकटवर्ती रिश्तेदारों की छोड़ी हुई संपत्ति के वारिस होंगे। रही बात उनकी जिनसे तुमने क़समें खाकर आपसी एकता एवं सहोग का मुआहदा कर रखा है, तो उन्हें मीरास से उनका हिस्सा दो। बेशक अल्लाह हर वस्तु से सूचित है, और इसी में उसका तुम्हारी इन क़समों और वचनों से अवगत होना भी शामिल है। आपसी एकता एवं सहोग के मुआहदा के द्वारा विरासत का नियम शुरू इस्लाम में थे, फिर उसे निरस्त कर दिया गया।

34

ٱلرِّجَالُ قَوَّٰمُونَ عَلَى ٱلنِّسَآءِ بِمَا فَضَّلَ ٱللَّهُ بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ وَبِمَآ أَنفَقُوا۟ مِنْ أَمْوَٰلِهِمْ ۚ فَٱلصَّٰلِحَٰتُ قَٰنِتَٰتٌ حَٰفِظَٰتٌۭ لِّلْغَيْبِ بِمَا حَفِظَ ٱللَّهُ ۚ وَٱلَّٰتِى تَخَافُونَ نُشُوزَهُنَّ فَعِظُوهُنَّ وَٱهْجُرُوهُنَّ فِى ٱلْمَضَاجِعِ وَٱضْرِبُوهُنَّ ۖ فَإِنْ أَطَعْنَكُمْ فَلَا تَبْغُوا۟ عَلَيْهِنَّ سَبِيلًا ۗ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيًّۭا كَبِيرًۭا

मर्दो का औरतों पर क़ाबू है क्योंकि (एक तो) ख़ुदा ने बाज़ आदमियों (मर्द) को बाज़ अदमियों (औरत) पर फ़ज़ीलत दी है और (इसके अलावा) चूंकि मर्दो ने औरतों पर अपना माल ख़र्च किया है पस नेक बख्त बीवियॉ तो शौहरों की ताबेदारी करती हैं (और) उनके पीठ पीछे जिस तरह ख़ुदा ने हिफ़ाज़त की वह भी (हर चीज़ की) हिफ़ाज़त करती है और वह औरतें जिनके नाफरमान सरकश होने का तुम्हें अन्देशा हो तो पहले उन्हें समझाओ और (उसपर न माने तो) तुम उनके साथ सोना छोड़ दो और (इससे भी न माने तो) मारो मगर इतना कि खून न निकले और कोई अज़ो न (टूटे) पस अगर वह तुम्हारी मुतीइ हो जाएं तो तुम भी उनके नुक़सान की राह न ढूंढो ख़ुदा तो ज़रूर सबसे बरतर बुजुर्ग़ है

पुरुष गण स्त्रियों की देखभाल करते हैं और उनके मामलों का प्रबंधन करते हैं, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें स्त्रियों पर विशेष प्रधानता दी है तथा इस कारण कि उनपर खर्च करना और उनकी देख-रेख करना पुरुषों पर अनिवार्य है। सदाचारी स्त्रियाँ अपने पालनहार की आज्ञाकारी, अपने पतियों की बात मानने वाली और अल्लाह की तौफ़ीक़ से अपने पतियों की अनुपस्थिति में उनके अधिकारों की रक्षा करने वाली होती हैं। तथा - ऐ पतियो! - जिन स्त्रियों के विषय में किसी बात या कार्य में अपने पतियों के आज्ञापालन से उपेक्षा करने का डर हो, तो पहले उन्हें समझाओ-बुझाओ और अल्लाह का भय दिलाओ। यदि वे न मानें, तो उन्हें बिस्तर में अलग रखो, जैसे सोते समय उनकी ओर पीठ कर लो और उनसे संभोग न करो। यदि वे इसपर भी न मानें तो हल्की मार मारो। यदि वे आज्ञापालन की ओर लौट आएँ, तो उनपर किसी प्रकार का अत्याचार न करो या उन्हें बुरा भला न कहो। अल्लाह हर चीज़ से सर्वोच्च और अपने व्यक्तित्व और गुणों में महान है, इसलिए उससे डरो।

35

وَإِنْ خِفْتُمْ شِقَاقَ بَيْنِهِمَا فَٱبْعَثُوا۟ حَكَمًۭا مِّنْ أَهْلِهِۦ وَحَكَمًۭا مِّنْ أَهْلِهَآ إِن يُرِيدَآ إِصْلَٰحًۭا يُوَفِّقِ ٱللَّهُ بَيْنَهُمَآ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيمًا خَبِيرًۭا

और ऐ हुक्काम (वक्त) अगर तुम्हें मियॉ बीवी की पूरी नाइत्तेफ़ाक़ी का तरफैन से अन्देशा हो तो एक सालिस (पन्च) मर्द के कुनबे में से एक और सालिस औरत के कुनबे में मुक़र्रर करो अगर ये दोनों सालिस दोनों में मेल करा देना चाहें तो ख़ुदा उन दोनों के दरमियान उसका अच्छा बन्दोबस्त कर देगा ख़ुदा तो बेशक वाक़िफ व ख़बरदार है

यदि तुम्हें - ऐ पति-पत्नी के अभिभावको! - इस बात का भय हो कि दोनों के बीच का विवाद दुश्मनी और परस्पर संबंध-विच्छेद की सीमा तक पहुँच जाएगा, तो पति के परिवार से एक न्यायी पुरुष और पत्नी के परिवार से एक न्यायी पुरुष को भेजो; ताकि वे दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके बीच जुदाई अथवा मिलाप का निर्णय करें।जबकि मेलमिलाप ही ज़्यादा प्रिय और बेहतर है। यदि दोनों मध्यस्थों ने मेलमिलाप चाहा और उसके लिए बेहतरीन प्रयास किए, तो अल्लाह पति-पत्नी के बीच मिलाप पैदा कर देगा और उनके बीच का विवाद समाप्त हो जाएगा। अल्लाह पर उसके बंदों की कोई बात छिपी नहीं है और वह उनके दिलों के निहित भेदों से भी अवगत है।

36

۞ وَٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُشْرِكُوا۟ بِهِۦ شَيْـًۭٔا ۖ وَبِٱلْوَٰلِدَيْنِ إِحْسَٰنًۭا وَبِذِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْيَتَٰمَىٰ وَٱلْمَسَٰكِينِ وَٱلْجَارِ ذِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْجَارِ ٱلْجُنُبِ وَٱلصَّاحِبِ بِٱلْجَنۢبِ وَٱبْنِ ٱلسَّبِيلِ وَمَا مَلَكَتْ أَيْمَٰنُكُمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ مَن كَانَ مُخْتَالًۭا فَخُورًا

और ख़ुदा ही की इबादत करो और किसी को उसका शरीक न बनाओ और मॉ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों और रिश्तेदार पड़ोसियों और अजनबी पड़ोसियों और पहलू में बैठने वाले मुसाहिबों और पड़ोसियों और ज़र ख़रीद लौन्डी और गुलाम के साथ एहसान करो बेशक ख़ुदा अकड़ के चलने वालों और शेख़ीबाज़ों को दोस्त नहीं रखता

अल्लाह के प्रति अधीनता के साथ अकेले उसी की इबादत करो और उसके साथ किसी की इबादत न करो। तथा माता-पिता का सम्मान और उनके साथ अच्छा व्यवहार करो। और रिश्तेदारों, अनाथों और ज़रूरतमंदों के साथ अच्छा व्यवहार करो। तथा रिश्तेदार पड़ोसी एवं गैर-रिश्तेदार पड़ोसी के साथ भलाई करो। तथा साथ रहने वाले साथी के साथ अच्छा व्यवहार करो। तथा उस अनजान यात्री के साथ भलाई करो जिसका रास्ता कट गया है। तथा अपने दास-दासियों के साथ अच्छा व्यवहार करो। निःसंदेह अल्लाह ऐसे व्यक्ति से प्रेम नहीं करता, जो आत्ममुग्ध हो, उसके बंदों के समक्ष अपनी बड़ाई दिखाता हो और लोगों पर गर्व करने के लिए स्वयं की प्रशंसा करता हो।

37

ٱلَّذِينَ يَبْخَلُونَ وَيَأْمُرُونَ ٱلنَّاسَ بِٱلْبُخْلِ وَيَكْتُمُونَ مَآ ءَاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ ۗ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَٰفِرِينَ عَذَابًۭا مُّهِينًۭا

ये वह लोग हैं जो ख़ुद तो बुख्ल करते ही हैं और लोगों को भी बुख्ल का हुक्म देते हैं और जो माल ख़ुदा ने अपने फ़ज़ल व (करम) से उन्हें दिया है उसे छिपाते हैं और हमने तो कुफ़राने नेअमत करने वालों के वास्ते सख्त ज़िल्लत का अज़ाब तैयार कर रखा है

अल्लाह उन लोगों से प्रेम नहीं करता, जो अल्लाह के दिए हुए धन को खर्च नहीं करते, जो अल्लाह ने उन पर ज़रूरी कर दिया है तथा वे अपने कथन एवं कर्म से दूसरों को भी ऐसा करने का आदेश देते हैं। वे अल्लाह की दी हुई जीविका तथा ज्ञान आदि को छिपाते हैं। अतः वे लोगों के सामने सत्य को बयान नहीं करते हैं, बल्जाकि उसे छिपाकर रखते हैं और असत्य को ज़ाहिर करते हैं। ये दरअसल काफ़िरों की विशेषताएँ हैं और हमने काफ़िरों के लिए अपमानकारी यातना तैयार कर रखी है।

38

وَٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُمْ رِئَآءَ ٱلنَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَلَا بِٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ ۗ وَمَن يَكُنِ ٱلشَّيْطَٰنُ لَهُۥ قَرِينًۭا فَسَآءَ قَرِينًۭا

और जो लोग महज़ लोगों को दिखाने के वास्ते अपने माल ख़र्च करते हैं और न खुदा ही पर ईमान रखते हैं और न रोजे आख़ेरत पर ख़ुदा भी उनके साथ नहीं क्योंकि उनका साथी तो शैतान है और जिसका साथी शैतान हो तो क्या ही बुरा साथी है

तथा हमने उन लोगों के लिए भी अज़ाब तैयार कर रखा है, जो अपना धन इसलिए ख़र्च करते हैं कि लोग उन्हें देखें और उनकी प्रशंसा करें। उनका अल्लाह एवं क़यामत के दिन पर ईमान नहीं होता है। हमने उनके लिए वह अपमानकारी यातना तैयार किया है। उन्हें दरअसल शैतान के अनुसरण ही ने गुमराह किया है। और शैतान जिसका साथी बन गया, वह जान जाए कि शैतान बहुत बुरा साथी है।

39

وَمَاذَا عَلَيْهِمْ لَوْ ءَامَنُوا۟ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ وَأَنفَقُوا۟ مِمَّا رَزَقَهُمُ ٱللَّهُ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ بِهِمْ عَلِيمًا

अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाक़िफ़ है

इन लोगों का क्या नुक़सान होता, यदि वे वास्तव में अल्लाह पर और क़ियामत के दिन पर ईमान ले आते और जो कुछ अल्लाह ने उन्हें प्रदान किया है उसमें से उन रास्तों में खर्च करते जिनसे वह प्यार करता है और प्रसन्न होता है?! बल्कि उसमें भलाई ही भलाई है। और अल्लाह अन्हें भली-भाँति जानने वाला है, उनकी स्थिति उससे छिपी नहीं है और वह हर एक को उसके कार्य का बदला देगा।

40

إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٍۢ ۖ وَإِن تَكُ حَسَنَةًۭ يُضَٰعِفْهَا وَيُؤْتِ مِن لَّدُنْهُ أَجْرًا عَظِيمًۭا

ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि अगर ज़र्रा बराबर भी किसी की कोई नेकी हो तो उसको दूना करता है और अपनी तरफ़ से बड़ा सवाब अता फ़रमाता है

निश्चय अल्लाह, न्यायवान् है, अपने बंदों पर ज़रा भी अत्याचार नहीं करता। अतः वह उनकी नेकियों में एक छोटी चींटी के बराबर कमी नहीं करता और न उनके गुनाहों में कुछ वृद्धि करता है। बल्कि यदि ज़र्रा बराबर भी नेकी हो, तो उसका सवाब अपनी कृपा से कई गुना बढ़ा देता है और उसके अतिरिक्त अपनी ओर से बड़ा बदला प्रदान करता है।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.