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4. An-Nisaa

The Women · Medinan · 176 ayahs

سُورَةُ النِّسَاءِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 161–170 of 176

161

وَأَخْذِهِمُ ٱلرِّبَوٰا۟ وَقَدْ نُهُوا۟ عَنْهُ وَأَكْلِهِمْ أَمْوَٰلَ ٱلنَّاسِ بِٱلْبَٰطِلِ ۚ وَأَعْتَدْنَا لِلْكَٰفِرِينَ مِنْهُمْ عَذَابًا أَلِيمًۭا

और बावजूद मुमानिअत सूद खा लेने और नाहक़ ज़बरदस्ती लोगों के माल खाने की वजह से उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके वास्ते हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है

तथा उनके ब्याज का लेन-देन करने के कारण, जबकि अल्लाह ने उन्हें उसे लेने से मना किया था, तथा लोगों के धन को बिना किसी उचित अधिकार के लेने के कारण। और हमने उनमें से काफ़िरों के लिए एक दर्दनाक अज़ाब तैयार किया है।

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162

لَّٰكِنِ ٱلرَّٰسِخُونَ فِى ٱلْعِلْمِ مِنْهُمْ وَٱلْمُؤْمِنُونَ يُؤْمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ ۚ وَٱلْمُقِيمِينَ ٱلصَّلَوٰةَ ۚ وَٱلْمُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ أُو۟لَٰٓئِكَ سَنُؤْتِيهِمْ أَجْرًا عَظِيمًا

लेकिन (ऐ रसूल) उनमें से जो लोग इल्म (दीन) में बड़े मज़बूत पाए पर फ़ायज़ हैं वह और ईमान वाले तो जो (किताब) तुमपर नाज़िल हुई है (सब पर ईमान रखते हैं) और से नमाज़ पढ़ते हैं और ज़कात अदा करते हैं और ख़ुदा और रोज़े आख़ेरत का यक़ीन रखते हैं ऐसे ही लोगों को हम अनक़रीब बहुत बड़ा अज्र अता फ़रमाएंगे

परंतु यहूदियों में से ठोस ज्ञान रखने वाले तथा ईमान लाने वाले लोग, उस क़ुरआन को सच्चा मानते हैं, जो अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है, तथा वे उन किताबों को भी सत्य मानते हैं, जो आपसे पहले के रसूलों पर उतारी गई थीं, जैसे तौरात और इंजील, और वे नमाज़ क़ायम करते और अपने धन की ज़कात देते हैं, तथा इस बात पर विश्वास रखते हैं कि अल्लाह ही अकेला पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं, और क़ियामत के दिन को सत्य मानते हैं; ये लोग जिनके पास ये गुण हैं हम उन्हें बहुत बड़ा बदला प्रदान करेंगे।

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163

۞ إِنَّآ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ كَمَآ أَوْحَيْنَآ إِلَىٰ نُوحٍۢ وَٱلنَّبِيِّۦنَ مِنۢ بَعْدِهِۦ ۚ وَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْمَٰعِيلَ وَإِسْحَٰقَ وَيَعْقُوبَ وَٱلْأَسْبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَٰرُونَ وَسُلَيْمَٰنَ ۚ وَءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ زَبُورًۭا

(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (भी) तो इसी तरह 'वही' भेजी जिस तरह नूह और उसके बाद वाले पैग़म्बरों पर भेजी थी और जिस तरह इबराहीम और इस्माइल और इसहाक़ और याक़ूब और औलादे याक़ूब व ईसा व अय्यूब व युनुस व हारून व सुलेमान के पास 'वही' भेजी थी और हमने दाऊद को ज़ुबूर अता की

हमने (ऐ रसूल!) आपकी ओर वैसे ही वह़्य (प्रकाशना) भेजी है, जैसे कि हमने आपसे पहले के नबियों की ओर वह़्य भेजी थी। इसलिए आप कोई अनोखे रसूल नहीं हैं। चुनाँचे हमने नूह की ओर वह़्य भेजी तथा उनके बाद आने वाले नबियों की ओर वह़्य भेजी, और हमने इबराहीम की ओर, उनके दोनों सुपुत्रों इसमाईल एवं इसहाक़ की ओर, तथा याक़ूब बिन इसहाक़ की ओर और असबात (यानी याक़ूब अलैहिस्सलाम के बेटों से निकलने वाले बनी इसराईल के बारह वंशों में होने वाले नबियों) की ओर वह़्य भेजी। तथा हमने ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की ओर वह़्य भेजी, और हमने दाऊद अलैहिस्सलाम को ज़बूर नामी पुस्तक दी।

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164

وَرُسُلًۭا قَدْ قَصَصْنَٰهُمْ عَلَيْكَ مِن قَبْلُ وَرُسُلًۭا لَّمْ نَقْصُصْهُمْ عَلَيْكَ ۚ وَكَلَّمَ ٱللَّهُ مُوسَىٰ تَكْلِيمًۭا

जिनका हाल हमने तुमसे पहले ही बयान कर दिया और बहुत से ऐसे रसूल (भेजे) जिनका हाल तुमसे बयान नहीं किया और ख़ुदा ने मूसा से (बहुत सी) बातें भी कीं

हमने कुछ रसूल ऐसे भेजे, जिनके वृत्तांत हमने आपसे क़ुरआन में बयान कर दिए हैं, तथा कुछ रसूल ऐसे भेजे जिनके बारे में हमने आपसे उसमें कुछ बयान नहीं किया और किसी हिकमत के तहत उसमें उनका उल्लेख करना छोड़ दिया। तथा अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम से उनके सम्मान में उन्हें नबी बनाने के संबंध में - बिना मध्यस्थता के - वास्तविक रूप से बात की, जैसा उसकी महिमा के योग्य है।

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165

رُّسُلًۭا مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى ٱللَّهِ حُجَّةٌۢ بَعْدَ ٱلرُّسُلِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًۭا

और हमने नेक लोगों को बेहिश्त की ख़ुशख़बरी देने वाले और बुरे लोगों को अज़ाब से डराने वाले पैग़म्बर (भेजे) ताकि पैग़म्बरों के आने के बाद लोगों की ख़ुदा पर कोई हुज्जत बाक़ी न रह जाए और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त हकीम है (ये कुफ्फ़ार नहीं मानते न मानें)

हमने उन्हें अल्लाह पर ईमान लाने वालों को अच्छे प्रतिफल की शुभ सूचना देने वाला तथा उसके साथ कुफ़्र करने वालों को दर्दनाक यातना से डराने वाला बनाकर भेजा, ताकि रसूलों को भेजने के बाद लोगों के लिए अल्लाह के ख़िलाफ़ कोई तर्क न रह जाए, जिसे वे बहाना बना सकें। तथा अल्लाह अपने राज्य में प्रभुत्वशाली, अपने फ़ैसले में हिकमत वाला है।

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166

لَّٰكِنِ ٱللَّهُ يَشْهَدُ بِمَآ أَنزَلَ إِلَيْكَ ۖ أَنزَلَهُۥ بِعِلْمِهِۦ ۖ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ يَشْهَدُونَ ۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًا

मगर ख़ुदा तो इस पर गवाही देता है जो कुछ तुम पर नाज़िल किया है ख़ूब समझ बूझ कर नाज़िल किया है (बल्कि) उसकी गवाही तो फ़रिश्ते तक देते हैं हालॉकि ख़ुदा गवाही के लिए काफ़ी है

यदि यहूद आपका इनकार करते हैं, तो अल्लाह उस क़ुरआन की प्रामाणिकता के संबंध में आपकी पुष्टि करता है, जो उसने (ऐ रसूल!) आपकी ओर उतारा है। अल्लाह ने उसमें अपना वह ज्ञान उतारा है, जिससे वह अपने बंदों को अवगत कराना चाहता है, कि वह किन चीज़ों को पसंद करता और उनसे प्रसन्न होता है या किन चीज़ों को नापसंद करता और उनसे नफरता करता है। अल्लाह की गवाही के साथ फ़रिश्ते भी उसकी सच्चाई की गवाही देते हैं जो आप लेकर आए हैं। तथा अल्लाह गवाह के रूप में पर्याप्त है। क्योंकि उसकी गवाही के बाद किसी दूसरे की गवाही की ज़रूरत नहीं।

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167

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ قَدْ ضَلُّوا۟ ضَلَٰلًۢا بَعِيدًا

बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और ख़ुदा की राह से (लोगों) को रोका वह राहे रास्त से भटक के बहुत दूर जा पडे

निःसंदेह जिन लोगों ने आपके नबी होने का इनकार किया और लोगों को इस्लाम के मार्ग से रोका, निश्चय वे सत्य से बहुत दूर जा पड़े।

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168

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَظَلَمُوا۟ لَمْ يَكُنِ ٱللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ طَرِيقًا

बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और (उस पर) ज़ुल्म (भी) करते रहे न तो ख़ुदा उनको बख्शेगा ही और न ही उन्हें किसी तरीक़े की हिदायत करेगा

जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों के साथ कुफ़्र किया और कुफ़्र पर बने रहकर ख़ुद पर ज़ुल्म किया, अल्लाह उनके कुफ़्र पर अटल रहने को कभी क्षमा नहीं करेगा, और न ही उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने वाला मार्ग दर्शाएगा।

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169

إِلَّا طَرِيقَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرًۭا

मगर (हॉ) जहन्नुम का रास्ता (दिखा देगा) जिसमें ये लोग हमेशा (पडे) रहेंगे और ये तो ख़ुदा के वास्ते बहुत ही आसान बात है

सिवाय उस रास्ते के जो जहन्नम में प्रवेश की ओर ले जाता है, जिसमें वे सदा-सर्वदा रहने वाले हैं। और यह काम अल्लाह के लिए बहुत ही आसान है, क्योंकि कोई भी चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती।

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170

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدْ جَآءَكُمُ ٱلرَّسُولُ بِٱلْحَقِّ مِن رَّبِّكُمْ فَـَٔامِنُوا۟ خَيْرًۭا لَّكُمْ ۚ وَإِن تَكْفُرُوا۟ فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًۭا

ऐ लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से रसूल (मोहम्मद) दीने हक़ के साथ आ चुके हैं ईमान लाओ (यही) तुम्हारे हक़ में बेहतर है और अगर इन्कार करोगे तो (समझ रखो कि) जो कुछ ज़मीन और आसमानों में है सब ख़ुदा ही का है और ख़ुदा बड़ा वाक़िफ़कार हकीम है

ऐ लोगो! रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुम्हारे पास मार्गदर्शन और सत्य धर्म के साथ अल्लाह की ओर से आए हैं। अतः वह तुम्हारे पास जो कुछ लाए हैं उसपर ईमान ले आओ, यह दुनिया तथा आख़िरत में तुम्हारे लिए बेहतर होगा। यदि तुम अल्लाह के साथ कुफ़्र करते हो, तो अल्लाह तुम्हारे ईमान से बेनियाज़ है, तुम्हारा कुफ़्र करना उसे नुक़सान नहीं पहुँचाएगा। क्योंकि जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में तथा इन दोनों के बीच है, सब उसके अधिकार में है। तथा अल्लाह उसके बारे में जानने वाला है जो मार्गदर्शन का पात्र है, इसलिए उसके लिए मार्गदर्शन को आसान बना देता है, और जो उसका हक़दार नहीं है, इसलिए उसे उससे अंधा कर देता है। वह अपनी बातों, कार्यों, विधान और नियति में पूर्ण हिकमत वाला है।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.