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2. Al-Baqara

The Cow · Medinan · 286 ayahs

سُورَةُ البَقَرَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 91–100 of 286

91

وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ ءَامِنُوا۟ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ قَالُوا۟ نُؤْمِنُ بِمَآ أُنزِلَ عَلَيْنَا وَيَكْفُرُونَ بِمَا وَرَآءَهُۥ وَهُوَ ٱلْحَقُّ مُصَدِّقًۭا لِّمَا مَعَهُمْ ۗ قُلْ فَلِمَ تَقْتُلُونَ أَنۢبِيَآءَ ٱللَّهِ مِن قَبْلُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ

और जब उनसे कहा गया कि (जो क़ुरान) खुदा ने नाज़िल किया है उस पर ईमान लाओ तो कहने लगे कि हम तो उसी किताब (तौरेत) पर ईमान लाए हैं जो हम पर नाज़िल की गई थी और उस किताब (कुरान) को जो उसके बाद आई है नहीं मानते हैं हालाँकि वह (क़ुरान) हक़ है और उस किताब (तौरेत) की जो उनके पास है तसदीक़ भी करती है मगर उस किताब कुरान का जो उसके बाद आई है इन्कार करते हैं (ऐ रसूल) उनसे ये तो पूछो कि तुम (तुम्हारे बुर्जुग़) अगर ईमानदार थे तो फिर क्यों खुदा के पैग़म्बरों का साबिक़ क़त्ल करते थे

जब इन यहूदियों से कहा जाता है : उस सत्य और हिदायत पर ईमान ले आओ, जो अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारी है। तो वे कहते हैं : हम उसपर ईमान रखते हैं, जो हमारे नबियों पर उतारा गया है। तथा वे उसका इनकार करते हैं जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा गया है। हालाँकि यह क़ुरआन ही सत्य है, जो उसके अनुरूप है जो अल्लाह की ओर से उनके पास है। और यदि वे वास्तव में उस पर ईमान रखते होते, जो उन पर उतारा गया है, तो वे क़ुरआन पर अवश्य ईमान लाते। (ऐ नबी!) आप उनके जवाब में कह दें : तुम इससे पहले नबियों की हत्या क्यों किया करते थे, यदि तुम उस सत्य पर सही मायने में ईमान रखने वाले थे, जो वे तुम्हारे पास लेकर आए थे?!

Al-Baqara 2:91Listen in Qur'an →
92

۞ وَلَقَدْ جَآءَكُم مُّوسَىٰ بِٱلْبَيِّنَٰتِ ثُمَّ ٱتَّخَذْتُمُ ٱلْعِجْلَ مِنۢ بَعْدِهِۦ وَأَنتُمْ ظَٰلِمُونَ

और तुम्हारे पास मूसा तो वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आ ही चुके थे फिर भी तुमने उनके बाद बछड़े को खुदा बना ही लिया और उससे तुम अपने ही ऊपर ज़ुल्म करने वाले थे

निश्चय तुम्हारे रसूल मूसा अलैहिस्सलाम तुम्हारे पास अपने सच्चे नबी होने की पुष्टि करने वाली स्पष्ट निशानियाँ लेकर आए। फिर उसके बाद, जब मूसा अलैहिस्सलाम अपने रब से मिलने चले गए, तो तुम बछड़े को पूज्य बनाकर उसकी पूजा करने लगे। और तुम अल्लाह के साथ साझी ठहराने के कारण अत्याचार करने वाले थे। हालाँकि वही अकेला इबादत के योग्य है, कोई और नहीं।

Al-Baqara 2:92Listen in Qur'an →
93

وَإِذْ أَخَذْنَا مِيثَٰقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ ٱلطُّورَ خُذُوا۟ مَآ ءَاتَيْنَٰكُم بِقُوَّةٍۢ وَٱسْمَعُوا۟ ۖ قَالُوا۟ سَمِعْنَا وَعَصَيْنَا وَأُشْرِبُوا۟ فِى قُلُوبِهِمُ ٱلْعِجْلَ بِكُفْرِهِمْ ۚ قُلْ بِئْسَمَا يَأْمُرُكُم بِهِۦٓ إِيمَٰنُكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ

और (वह वक्त याद करो) जब हमने तुमसे अहद लिया और (क़ोहे) तूर को (तुम्हारी उदूले हुक्मी से) तुम्हारे सर पर लटकाया और (हमने कहा कि ये किताब तौरेत) जो हमने दी है मज़बूती से लिए रहो और (जो कुछ उसमें है) सुनो तो कहने लगे सुना तो (सही लेकिन) हम इसको मानते नहीं और उनकी बेईमानी की वजह से (गोया) बछड़े की उलफ़त घोल के उनके दिलों में पिला दी गई (ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि अगर तुम ईमानदार थे तो तुमको तुम्हारा ईमान क्या ही बुरा हुक्म करता था

तथा उस समय को याद करो, जब हमने तुमसे मूसा अलैहिस्सलाम का अनुसरण करने और जो कुछ वह अल्लाह के पास से लाए हैं उसे क़बूल करने का पक्का वचन लिया। हमने तुम्हें डराने के लिए तुम्हारे ऊपर पहाड़ उठा लिया, और हमने तुमसे कहा : हमने तुम्हें जो तौरात दिया है उसे पूरी ताक़त से पकड़ लो, तथा स्वीकार करने और पालन करने के उद्देश्य से सुनो; अन्यथा हम तुम्हारे ऊपर पहाड़ को गिरा देंगे। तो तुमने कहा : हमने अपने कानों से सुना और हमने अपने कार्यों से अवज्ञा की। और उनके कुफ़्र के कारण उनके दिलों में बछड़े की पूजा घर कर चुकी थी। ऐ नबी! आप कह दीजिए : बहुत बुरा है वह काम (अल्लाह के साथ कुफ़्र), जिसका आदेश तुम्हें यह ईमान दे रहा है, यदि तुम ईमान वाले हो; क्योंकि सच्चे ईमान के साथ कुफ़्र इकट्ठा नहीं हो सकता।

Al-Baqara 2:93Listen in Qur'an →
94

قُلْ إِن كَانَتْ لَكُمُ ٱلدَّارُ ٱلْءَاخِرَةُ عِندَ ٱللَّهِ خَالِصَةًۭ مِّن دُونِ ٱلنَّاسِ فَتَمَنَّوُا۟ ٱلْمَوْتَ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ

(ऐ रसूल) इन लोगों से कह दो कि अगर खुदा के नज़दीक आख़ेरत का घर (बेहिश्त) ख़ास तुम्हारे वास्ते है और लोगों के वासते नहीं है पस अगर तुम सच्चे हो तो मौत की आरजू क़रो

(ऐ नबी!) आप कह दीजिए : यदि आख़िरत में जन्नत (ऐ यहूदियो!) केवल तुम्हारे ही लिए है और तुम्हारे सिवा और कोई उसमें प्रवेश नहीं करेगा; तो तुम मरने की कामना करो; ताकि तुम इस स्थान को जल्दी से प्राप्त कर लो और सांसारिक जीवन के बोझ और उसकी चिंताओं से आराम पा जाओ, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो।

Al-Baqara 2:94Listen in Qur'an →
95

وَلَن يَتَمَنَّوْهُ أَبَدًۢا بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ ۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِٱلظَّٰلِمِينَ

(ताकि जल्दी बेहिश्त में जाओ) लेकिन वह उन आमाले बद की वजह से जिनको उनके हाथों ने पहले से आगे भेजा है हरगिज़ मौत की आरज़ू न करेंगे और खुदा ज़ालिमों से खूब वाक़िफ है

वे हरगिज़ मौत की कामना कभी नहीं करेंगे; क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में अल्लाह के साथ कुफ़्र, उसके रसूलों को झुठलाने और उसकी किताबों को विकृत करने जैसे पाप करके आगे भेजे हैं। तथा अल्लाह उनमें से और उनके अलावा में से ज़ालिमों को ख़ूब जानने वाला है और वह प्रत्येक को उसके कार्य का बदला देगा।

Al-Baqara 2:95Listen in Qur'an →
96

وَلَتَجِدَنَّهُمْ أَحْرَصَ ٱلنَّاسِ عَلَىٰ حَيَوٰةٍۢ وَمِنَ ٱلَّذِينَ أَشْرَكُوا۟ ۚ يَوَدُّ أَحَدُهُمْ لَوْ يُعَمَّرُ أَلْفَ سَنَةٍۢ وَمَا هُوَ بِمُزَحْزِحِهِۦ مِنَ ٱلْعَذَابِ أَن يُعَمَّرَ ۗ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِمَا يَعْمَلُونَ

और (ऐ रसूल) तुम उन ही को ज़िन्दगी का सबसे ज्यादा हरीस पाओगे और मुशरिक़ों में से हर एक शख्स चाहता है कि काश उसको हज़ार बरस की उम्र दी जाती हालाँकि अगर इतनी तूलानी उम्र भी दी जाए तो वह ख़ुदा के अज़ाब से छुटकारा देने वाली नहीं, और जो कुछ वह लोग करते हैं खुदा उसे देख रहा है

निश्चय (ऐ नबी!) आप यहूदियों को लोगों में सबसे अधिक जीवन के लिए उत्सुक पाएँगे, चाहे वह कितना भी तुच्छ और अपमानजनक क्यों न हो। बल्कि, वे उन बहुदेववादियों से भी अधिक उत्सुक हैं जो पुनर्जीवन और हिसाब पर ईमान नहीं रखते हैं। वे अह्ले किताब होने तथा दोबारा ज़िंदा होने और हिसाब पर ईमान रखने के बावजूद; उन में से हर व्यक्ति चाहता है कि उसे हज़ार साल की आयु मिले। हालाँकि उसकी लंबी आयु उसे अल्लाह के अज़ाब से बचा नहीं सकती, चाहे वह कितनी भी दीर्घ हो। तथा अल्लाह उनके कर्मों से अवगत और उन्हें देखने वाला है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है और वह उन्हें उनका बदला प्रदान करेगा।

Al-Baqara 2:96Listen in Qur'an →
97

قُلْ مَن كَانَ عَدُوًّۭا لِّجِبْرِيلَ فَإِنَّهُۥ نَزَّلَهُۥ عَلَىٰ قَلْبِكَ بِإِذْنِ ٱللَّهِ مُصَدِّقًۭا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهِ وَهُدًۭى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ

(ऐ रसूल उन लोगों से) कह दो कि जो जिबरील का दुशमन है (उसका खुदा दुशमन है) क्योंकि उस फ़रिश्ते ने खुदा के हुक्म से (इस कुरान को) तुम्हारे दिल पर डाला है और वह उन किताबों की भी तसदीक करता है जो (पहले नाज़िल हो चुकी हैं और सब) उसके सामने मौजूद हैं और ईमानदारों के वास्ते खुशख़बरी है

(ऐ नबी!) आप उन यहूदियों से कह दीजिए, जिन्होंने कहा : "जिब्रील फ़रिश्तों में से हमारा दुश्मन है।" : जो जिब्रील से दुश्मनी रखता हो, तो (वह सुन ले कि) वही अल्लाह के आदेश से आपके दिल पर क़ुरआन लेकर उतरे हैं, जो पिछली आसमानी किताबों; जैसे तौरात तथा इन्जील की पुष्टि करता है, भलाई का मार्ग दिखाता है और ईमान वालों को उन नेमतों की शुभ सूचना देता है, जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार कर रखी हैं। अतः जो कोई भी उससे दुश्मनी रखने वाला है, जिसकी यह विशेषता और यह कार्य है, तो वह पथभ्रष्टों में से है।

Al-Baqara 2:97Listen in Qur'an →
98

مَن كَانَ عَدُوًّۭا لِّلَّهِ وَمَلَٰٓئِكَتِهِۦ وَرُسُلِهِۦ وَجِبْرِيلَ وَمِيكَىٰلَ فَإِنَّ ٱللَّهَ عَدُوٌّۭ لِّلْكَٰفِرِينَ

जो शख्स ख़ुदा और उसके फरिश्तों और उसके रसूलों और (ख़ासकर) जिबराईल व मीकाइल का दुशमन हो तो बेशक खुदा भी (ऐसे) काफ़िरों का दुश्मन है

जो कोई अल्लाह और उसके फ़रिश्तों और उसके रसूलों से दुश्मनी रखता हो तथा उसके दो निकटवर्ती फ़रिश्तों : जिबरील और मीकाईल से बैर रखता हो, तो निःसंदेह अल्लाह तुम में से और तुम्हारे अलावा में से सभी काफ़िरों का दुश्मन है। और जिसका दुश्मन अल्लाह हो, तो निश्चय वह स्पष्ट घाटे के साथ लौटा।

Al-Baqara 2:98Listen in Qur'an →
99

وَلَقَدْ أَنزَلْنَآ إِلَيْكَ ءَايَٰتٍۭ بَيِّنَٰتٍۢ ۖ وَمَا يَكْفُرُ بِهَآ إِلَّا ٱلْفَٰسِقُونَ

और (ऐ रसूल) हमने तुम पर ऐसी निशानियाँ नाज़िल की हैं जो वाजेए और रौशन हैं और ऐसे नाफरमानों के सिवा उनका कोई इन्कार नहीं कर सकता

हमने (ऐ नबी!) आपकी तरफ़ आप जो कुछ नुबुव्वत और वह़्य लेकर आए हैं, उसमें आपकी सत्यता की स्पष्ट निशानियाँ उतारी हैं। और उनकी स्पष्टता और स्पष्टीकरण के बावजूद, उनका इनकार वही लोग करते हैं, जो अल्लाह के दीन से निकलने वाले हों।

Al-Baqara 2:99Listen in Qur'an →
100

أَوَكُلَّمَا عَٰهَدُوا۟ عَهْدًۭا نَّبَذَهُۥ فَرِيقٌۭ مِّنْهُم ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ

और उनकी ये हालत है कि जब कभी कोई अहद किया तो उनमें से एक फरीक़ ने तोड़ डाला बल्कि उनमें से अक्सर तो ईमान ही नहीं रखते

यहूदियों की बुरी स्थिति में से एक यह है कि जब भी उन्होंने अपने आपसे कोई वचन लिया - जिसमें तौरात में मौजूद मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत पर ईमान लाना भी शामिल है - तो उनके एक गिरोह ने उसे तोड़ दिया। बल्कि तथ्य यह है कि इन यहूदियों में से अधिकांश लोग उसपर सही मायने में ईमान नहीं रखते, जो अल्लाह ने अवतरित किया है; क्योंकि ईमान वचन को पूरा करने की प्रेरणा देता है।

Al-Baqara 2:100Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.