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2. Al-Baqara

The Cow · Medinan · 286 ayahs

سُورَةُ البَقَرَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 81–90 of 286

81

بَلَىٰ مَن كَسَبَ سَيِّئَةًۭ وَأَحَٰطَتْ بِهِۦ خَطِيٓـَٔتُهُۥ فَأُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ

हाँ (सच तो यह है) कि जिसने बुराई हासिल की और उसके गुनाहों ने चारों तरफ से उसे घेर लिया है वही लोग तो दोज़ख़ी हैं और वही (तो) उसमें हमेशा रहेंगे

मामला वैसा नहीं है, जैसा ये समझ रहे हैं; अल्लाह हर उस व्यक्ति को यातना देगा, जिसने कुफ़्र की बुराई की और उसके गुनाहों ने उसे चारों ओर से घेर लिया। अल्लाह उन्हें जहन्नम में दाख़िल करेगा, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे।

Al-Baqara 2:81Listen in Qur'an →
82

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ

और जो लोग ईमानदार हैं और उन्होंने अच्छे काम किए हैं वही लोग जन्नती हैं कि हमेशा जन्नत में रहेंगे

तथा जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और सत्कर्म किए, अल्लाह के निकट उनका बदला जन्नत में प्रवेश है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहने वाले हैं।

Al-Baqara 2:82Listen in Qur'an →
83

وَإِذْ أَخَذْنَا مِيثَٰقَ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ لَا تَعْبُدُونَ إِلَّا ٱللَّهَ وَبِٱلْوَٰلِدَيْنِ إِحْسَانًۭا وَذِى ٱلْقُرْبَىٰ وَٱلْيَتَٰمَىٰ وَٱلْمَسَٰكِينِ وَقُولُوا۟ لِلنَّاسِ حُسْنًۭا وَأَقِيمُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُوا۟ ٱلزَّكَوٰةَ ثُمَّ تَوَلَّيْتُمْ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّنكُمْ وَأَنتُم مُّعْرِضُونَ

और (वह वक्त याद करो) जब हमने बनी ईसराइल से (जो तुम्हारे बुर्जुग़ थे) अहद व पैमान लिया था कि खुदा के सिवा किसी की इबादत न करना और माँ बाप और क़राबतदारों और यतीमों और मोहताजों के साथ अच्छे सुलूक करना और लोगों के साथ अच्छी तरह (नरमी) से बातें करना और बराबर नमाज़ पढ़ना और ज़कात देना फिर तुममें से थोड़े आदिमियों के सिवा (सब के सब) फिर गए और तुम लोग हो ही इक़रार से मुँह फेरने वाले

और - ऐ बनी इसराईल! - उस दृढ़ वचन को याद करो, जो हमने तुमसे लिया था, कि तुम अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानोगे और उसके साथ किसी की इबादत नहीं करोगे, और यह कि तुम माता-पिता, रिश्तेदारों, अनाथों और ज़रूरतमंद निर्धनों के साथ अच्छा व्यवहार करोगे। और यह कि तुम लोगों से अच्छी बात बोलो, बिना सख़्ती और कठोरता के भलाई का आदेश देते हुए एवं बुराई से रोकते हुए। और यह कि तुम पूरी तरह से नमाज़ अदा करो जैसा मैंने तुम्हें आदेश दिया है, और यह कि तुम ज़कात अदा करो उसे उसके हक़दारों को खुशी के साथ देकर। फिर, इस वचन के बाद, जो तुमसे लिया गया था, तुम उसे पूरा करने से मुँह मोड़ते हुए फिर गए, सिवाय उसके जिसे अल्लाह ने तुममें से बचा लिया, तो उसने अल्लाह के लिए उसके वचन और प्रतिज्ञा को पूरा किया।

Al-Baqara 2:83Listen in Qur'an →
84

وَإِذْ أَخَذْنَا مِيثَٰقَكُمْ لَا تَسْفِكُونَ دِمَآءَكُمْ وَلَا تُخْرِجُونَ أَنفُسَكُم مِّن دِيَٰرِكُمْ ثُمَّ أَقْرَرْتُمْ وَأَنتُمْ تَشْهَدُونَ

और (वह वक्त याद करो) जब हमने तुम (तुम्हारे बुर्ज़ुगों) से अहद लिया था कि आपस में खूरेज़ियाँ न करना और न अपने लोगों को शहर बदर करना तो तुम (तुम्हारे बुर्जुग़ों) ने इक़रार किया था और तुम भी उसकी गवाही देते हो

तथा उस पक्के वचन को याद करो, जो हमने तौरात में तुमसे लिया था कि तुम आपस में एक-दूसरे का ख़ून नहीं बहाओगे और न एक-दूसरे को उनके घरों से निकालोगे। फिर तुमने उस वचन को मान लिया जो हमने तुमसे लिया था, और तुम स्वयं इसके सही होने की गवाही देते हो।

Al-Baqara 2:84Listen in Qur'an →
85

ثُمَّ أَنتُمْ هَٰٓؤُلَآءِ تَقْتُلُونَ أَنفُسَكُمْ وَتُخْرِجُونَ فَرِيقًۭا مِّنكُم مِّن دِيَٰرِهِمْ تَظَٰهَرُونَ عَلَيْهِم بِٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ وَإِن يَأْتُوكُمْ أُسَٰرَىٰ تُفَٰدُوهُمْ وَهُوَ مُحَرَّمٌ عَلَيْكُمْ إِخْرَاجُهُمْ ۚ أَفَتُؤْمِنُونَ بِبَعْضِ ٱلْكِتَٰبِ وَتَكْفُرُونَ بِبَعْضٍۢ ۚ فَمَا جَزَآءُ مَن يَفْعَلُ ذَٰلِكَ مِنكُمْ إِلَّا خِزْىٌۭ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَيَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ يُرَدُّونَ إِلَىٰٓ أَشَدِّ ٱلْعَذَابِ ۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ

(कि हाँ ऐसा हुआ था) फिर वही लोग तो तुम हो कि आपस में एक दूसरे को क़त्ल करते हो और अपनों से एक जत्थे के नाहक़ और ज़बरदस्ती हिमायती बनकर दूसरे को शहर बदर करते हो (और लुत्फ़ तो ये है कि) अगर वही लोग क़ैदी बनकर तम्हारे पास (मदद माँगने) आए तो उनको तावान देकर छुड़ा लेते हो हालाँकि उनका निकालना ही तुम पर हराम किया गया था तो फिर क्या तुम (किताबे खुदा की) बाज़ बातों पर ईमान रखते हो और बाज़ से इन्कार करते हो पस तुम में से जो लोग ऐसा करें उनकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं कि ज़िन्दगी भर की रूसवाई हो और (आख़िरकार) क़यामत के दिन सख्त अज़ाब की तरफ लौटा दिये जाए और जो कुछ तुम लोग करते हो खुदा उससे ग़ाफ़िल नहीं है

फिर तुम ही इस वचन का उल्लंघन करते हो; चुनाँचे तुम एक-दूसरे की हत्या करते हो और अपने ही में से कुछ लोगों को उनके विरुद्ध दुश्मनों की मदद लेकर नाहक़ और अन्यायपूर्वक उनके घरों से निकालते हो। और यदि वे शत्रुओं के हाथों बंदी बनकर तुम्हारे पास आते हैं, तो उन्हें क़ैद से छुड़ाने के लिए छुड़ौती देने हेतु दौड़-भाग करते हो, जबकि उन्हें उनके घरों से बाहर निकालना तुम्हारे लिए निषिद्ध है। फिर कैसे तुम तौरात के कुछ आदेशों, जैसे बंदियों को फ़िदया देकर छुड़ाने पर ईमान रखते हो और कुछ शिक्षाओं, जैसे खून का संरक्षण करने और एक-दूसरे को उनके घरों से न निकालने के आदेश का इनकार करते हो?! अतः तुम में से ऐसा करने वाले के लिए सांसारिक जीवन में अपमान के अलावा कोई बदला नहीं है, रही बात आख़िरत की तो वह सबसे कठोर यातना की ओर लौटाया जाएगा। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उससे असावधान नहीं, बल्कि वह उससे अवगत है और तुम्हें उसका बदला देगा।

Al-Baqara 2:85Listen in Qur'an →
86

أُو۟لَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱشْتَرَوُا۟ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا بِٱلْءَاخِرَةِ ۖ فَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُمُ ٱلْعَذَابُ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ

यही वह लोग हैं जिन्होंने आख़ेरत के बदले दुनिया की ज़िन्दगी ख़रीद पस न उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी और न वह लोग किसी तरह की मदद दिए जाएँगे

यही लोग हैं, जिन्होंने अमर पर नश्वर को वरीयता देते हुए सांसारिक जीवन को आख़िरत के बदले चुन लिया। इसलिए आख़िरत में उनकी यातना हल्की नहीं की जाएगी और उस दिन उनकी मदद करने के लिए उनके पास कोई सहायक नहीं होगा।

Al-Baqara 2:86Listen in Qur'an →
87

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَى ٱلْكِتَٰبَ وَقَفَّيْنَا مِنۢ بَعْدِهِۦ بِٱلرُّسُلِ ۖ وَءَاتَيْنَا عِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ٱلْبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدْنَٰهُ بِرُوحِ ٱلْقُدُسِ ۗ أَفَكُلَّمَا جَآءَكُمْ رَسُولٌۢ بِمَا لَا تَهْوَىٰٓ أَنفُسُكُمُ ٱسْتَكْبَرْتُمْ فَفَرِيقًۭا كَذَّبْتُمْ وَفَرِيقًۭا تَقْتُلُونَ

और ये हक़ीक़ी बात है कि हमने मूसा को किताब (तौरेत) दी और उनके बाद बहुत से पैग़म्बरों को उनके क़दम ब क़दम ले चलें और मरियम के बेटे ईसा को (भी बहुत से) वाजेए व रौशन मौजिजे दिए और पाक रूह जिबरील के ज़रिये से उनकी मदद की क्या तुम उस क़दर बददिमाग़ हो गए हो कि जब कोई पैग़म्बर तुम्हारे पास तुम्हारी ख्वाहिशे नफ़सानी के ख़िलाफ कोई हुक्म लेकर आया तो तुम अकड़ बैठे फिर तुमने बाज़ पैग़म्बरों को तो झुठलाया और बाज़ को जान से मार डाला

हमने मूसा को तौरात प्रदान किया तथा उनके बाद उनके पीछे ही बहुत से रसूल भेजे, और ईसा बिन मरयम को उनकी सच्चाई को दर्शाने वाली स्पष्ट निशानियाँ प्रदान कीं; जैसे मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित करना, अंधे पैदा हुए लोगों को ठीक करना और कोढ़ी को चंगा करना। तथा हमने उन्हें जिबरील नामी फ़रिश्ते द्वारा शक्ति प्रदान की। फिर क्या जब भी - ऐ बनी इसराईल! - अल्लाह की ओर से कोई रसूल तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आया, जो तुम्हारी इच्छाओं के अनुकूल नहीं थी, तो तुमने सत्य को स्वीकार करने से अभिमान किया और अल्लाह के रसूलों पर बड़ा बनने लगे; चुनाँचे उनमें से एक समूह को तुम झुठलाते रहे और एक समूह की हत्या करते रहे?।

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88

وَقَالُوا۟ قُلُوبُنَا غُلْفٌۢ ۚ بَل لَّعَنَهُمُ ٱللَّهُ بِكُفْرِهِمْ فَقَلِيلًۭا مَّا يُؤْمِنُونَ

और कहने लगे कि हमारे दिलों पर ग़िलाफ चढ़ा हुआ है (ऐसा नहीं) बल्कि उनके कुफ्र की वजह से खुदा ने उनपर लानत की है पस कम ही लोग ईमान लाते हैं

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का अनुसरण न करने का यहूदियों का तर्क उनका यह कहना था : वास्तव में, हमारे दिलों पर पर्दे पड़े हुए हैं, आप जो कहते हैं, उसमें से कुछ भी उन तक नहीं पहुँचता और वे उसे नहीं समझते हैं। हालाँकि स्थिति वैसी नहीं है जैसा उन्होंने दावा किया है। बल्कि सच्चाई यह है कि उनके कुफ़्र के कारण अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से दूर कर दिया। अतः वे अल्लाह की उतारी हुई बातों में से केवल बहुत कम ही पर ईमान लाते हैं।

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89

وَلَمَّا جَآءَهُمْ كِتَٰبٌۭ مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ مُصَدِّقٌۭ لِّمَا مَعَهُمْ وَكَانُوا۟ مِن قَبْلُ يَسْتَفْتِحُونَ عَلَى ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فَلَمَّا جَآءَهُم مَّا عَرَفُوا۟ كَفَرُوا۟ بِهِۦ ۚ فَلَعْنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلْكَٰفِرِينَ

और जब उनके पास खुदा की तरफ़ से किताब (कुरान आई और वह उस किताब तौरेत) की जो उन के पास तसदीक़ भी करती है। और उससे पहले (इसकी उम्मीद पर) काफ़िरों पर फतेहयाब होने की दुआएँ माँगते थे पस जब उनके पास वह चीज़ जिसे पहचानते थे आ गई तो लगे इन्कार करने पस काफ़िरों पर खुदा की लानत है

जब उनके पास अल्लाह की ओर से क़ुरआन आया, जो सही सामान्य सिद्धांतों में उसके अनुरूप है, जो कुछ तौरात तथा इन्जील में है। जबकि वे इसके उतरने से पहले कहा करते थे : हम बहुदेववादियों पर विजयी होंगे और हमें जीत प्राप्त होगी जब एक नबी भेजा जाएगा, जिसपर हम ईमान लाएँगे और उसका अनुसरण करेंगे। फिर जब क़ुरआन और मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उस विशेषता के साथ आ गए, जिसे उन्होंने पहचान लिया और उस सत्य के साथ, जिसे उन्होंने जान लिया; तो उन्होंने उसके साथ कुफ़्र किया। अतः अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र करने वालों पर अल्लाह की ला'नत है।

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90

بِئْسَمَا ٱشْتَرَوْا۟ بِهِۦٓ أَنفُسَهُمْ أَن يَكْفُرُوا۟ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بَغْيًا أَن يُنَزِّلَ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ ۖ فَبَآءُو بِغَضَبٍ عَلَىٰ غَضَبٍۢ ۚ وَلِلْكَٰفِرِينَ عَذَابٌۭ مُّهِينٌۭ

क्या ही बुरा है वह काम जिसके मुक़ाबले में (इतनी बात पर) वह लोग अपनी जानें बेच बैठे हैं कि खुदा अपने बन्दों से जिस पर चाहे अपनी इनायत से किताब नाज़िल किया करे इस रश्क से जो कुछ खुदा ने नाज़िल किया है सबका इन्कार कर बैठे पस उन पर ग़ज़ब पर ग़ज़ब टूट पड़ा और काफ़िरों के लिए (बड़ी) रूसवाई का अज़ाब है

बहुत बुरी है वह चीज़ जिसे उन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान के बदले ले लिया; चुनाँचे उन्होंने अल्लाह की उतारी हुई शरीयत का इनकार कर दिया और उसके रसूलों को झुठलाया, केवल इस कारण अन्याय और ईर्ष्या करते हुए कि नुबुव्वत (पैगंबरी) और क़ुरआन को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित किया गया है। अतः मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का इनकार करने और इससे पहले तौरात में फेर-बदल करने के कारण, वे अल्लाह की ओर से दोहरे क्रोध के भागी बन गए। तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत का इनकार करने वालों के लिए क़ियामत के दिन अपमानजनक यातना है।

Al-Baqara 2:90Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.