قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌۭ لَّا ذَلُولٌۭ تُثِيرُ ٱلْأَرْضَ وَلَا تَسْقِى ٱلْحَرْثَ مُسَلَّمَةٌۭ لَّا شِيَةَ فِيهَا ۚ قَالُوا۟ ٱلْـَٰٔنَ جِئْتَ بِٱلْحَقِّ ۚ فَذَبَحُوهَا وَمَا كَادُوا۟ يَفْعَلُونَ
मूसा ने कहा खुदा ज़रूर फरमाता है कि वह गाय न तो इतनी सधाई हो कि ज़मीन जोते न खेती सीचें भली चंगी एक रंग की कि उसमें कोई धब्बा तक न हो, वह बोले अब (जा के) ठीक-ठीक बयान किया, ग़रज़ उन लोगों ने वह गाय हलाल की हालाँकि उनसे उम्मीद न थी वह कि वह ऐसा करेंगे
मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : अल्लाह तआला कहता है : वह गाय ऐसी है जो जुताई में काम करने और भूमि को सींचने के लिए सधाई हुई नहीं है, और वह दोषों से मुक्त है, तथा उसमें उसके पीले रंग के अलावा किसी और रंग का निशान नहीं है। तब उन्होंने कहा : अब तू सटीक विवरण के साथ आया है जो पूरी तरह से उस गाय का निर्धारण करता है। और उन्होंने उस गाय को ज़बह किया, जबकि वे वाद-विवाद और हठ के कारण क़रीब थे कि उसे ज़बह न करें।