مَّثَلُ ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمْوَٰلَهُمْ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنۢبَتَتْ سَبْعَ سَنَابِلَ فِى كُلِّ سُنۢبُلَةٍۢ مِّا۟ئَةُ حَبَّةٍۢ ۗ وَٱللَّهُ يُضَٰعِفُ لِمَن يَشَآءُ ۗ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌ
जो लोग अपने माल खुदा की राह में खर्च करते हैं उनके (खर्च) की मिसाल उस दाने की सी मिसाल है जिसकी सात बालियॉ निकलें (और) हर बाली में सौ (सौ) दाने हों और ख़ुदा जिसके लिये चाहता है दूना कर देता है और खुदा बड़ी गुन्जाइश वाला (हर चीज़ से) वाक़िफ़ है
अल्लाह के मार्ग में अपना धन खर्च करने वाले मोमिनों के सवाब का उदहारण एक दाने की तरह है, जिसे किसान एक अच्छी भूमि में डालता है, फिर उससे सात बालियाँ निकलती हैं, जिनमें से प्रत्येक बाली में एक सौ दाने होते हैं। अल्लाह अपने बंदों में से जिसका चाहता है, सवाब बढ़ा देता है, चुनाँचे वह उन्हें उनका प्रतिफल बिना हिसाब देता है। और अल्लाह अनुग्रह और देने में बहुत विस्तार वाला है, वह ख़ूब जानता है कि कौन कई गुना बढ़ाकर दिए जाने का हक़दार है।