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2. Al-Baqara

The Cow · Medinan · 286 ayahs

سُورَةُ البَقَرَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 251–260 of 286

251

فَهَزَمُوهُم بِإِذْنِ ٱللَّهِ وَقَتَلَ دَاوُۥدُ جَالُوتَ وَءَاتَىٰهُ ٱللَّهُ ٱلْمُلْكَ وَٱلْحِكْمَةَ وَعَلَّمَهُۥ مِمَّا يَشَآءُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ ٱللَّهِ ٱلنَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍۢ لَّفَسَدَتِ ٱلْأَرْضُ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ ذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلْعَٰلَمِينَ

फिर तो उन लोगों ने ख़ुदा के हुक्म से दुशमनों को शिकस्त दी और दाऊद ने जालूत को क़त्ल किया और ख़ुदा ने उनको सल्तनत व तदबीर तम्द्दुन अता की और इल्म व हुनर जो चाहा उन्हें गोया घोल के पिला दिया और अगर ख़ुदा बाज़ लोगों के ज़रिए से बाज़ का दफाए (शर) न करता तो तमाम रुए ज़मीन पर फ़साद फैल जाता मगर ख़ुदा तो सारे जहाँन के लोगों पर फज़ल व रहम करता है

उन्होंने अल्लाह के हुक्म से उन्हें पराजित कर दिया और दाऊद ने उनके सरदार जालूत को क़त्ल कर दिया। फिर अल्लाह ने दाऊद को बादशाहत और नुबुव्वत प्रदान की और उन्हें जिस प्रकार के भी ज्ञान चाहता था, सिखाया। इस तरह दुनिया और आख़िरत के लिए जो भी चीज़ उपयुक्त थी, उनके लिए एकत्रित कर दिया। यदि अल्लाह का यह नियम न होता कि वह कुछ लोगों द्वारा कुछ लोगों के उपद्रव को हटाता है; तो निश्चय धरती उसमें उपद्रव (भ्रष्टाचार) करने वालों के प्रभुत्व से भ्रष्ट हो जाती। लेकिन, अल्लाह सभी प्राणियों पर अनुग्रह वाला है।

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252

تِلْكَ ءَايَٰتُ ٱللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِٱلْحَقِّ ۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ

ऐ रसूल ये ख़ुदा की सच्ची आयतें हैं जो हम तुम को ठीक ठीक पढ़के सुनाते हैं और बेशक तुम ज़रुर रसूलों में से हो

ये अल्लाह की खुली हुई स्पष्ट आयतें हैं, जो हम - ऐ नबी! - आपको सुनाते हैं, जिनमें सच्ची सूचनाएँ और न्यायसंगत विधान मौजूद हैं। और निःसंदेह आप सर्व संसार के पालनहार की ओर से भेजे गए रसूलों में से हैं।

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253

۞ تِلْكَ ٱلرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ ۘ مِّنْهُم مَّن كَلَّمَ ٱللَّهُ ۖ وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَٰتٍۢ ۚ وَءَاتَيْنَا عِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ٱلْبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدْنَٰهُ بِرُوحِ ٱلْقُدُسِ ۗ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقْتَتَلَ ٱلَّذِينَ مِنۢ بَعْدِهِم مِّنۢ بَعْدِ مَا جَآءَتْهُمُ ٱلْبَيِّنَٰتُ وَلَٰكِنِ ٱخْتَلَفُوا۟ فَمِنْهُم مَّنْ ءَامَنَ وَمِنْهُم مَّن كَفَرَ ۚ وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقْتَتَلُوا۟ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ

यह सब रसूल (जो हमने भेजे) उनमें से बाज़ को बाज़ पर फज़ीलत दी उनमें से बाज़ तो ऐसे हैं जिनसे ख़ुद ख़ुदा ने बात की उनमें से बाज़ के (और तरह पर) दर्जे बुलन्द किये और मरियम के बेटे ईसा को (कैसे कैसे रौशन मौजिज़े अता किये) और रूहुलकुदस (जिबरईल) के ज़रिये से उनकी मदद की और अगर ख़ुदा चाहता तो लोग इन (पैग़म्बरों) के बाद हुये वह अपने पास रौशन मौजिज़े आ चुकने पर आपस में न लड़ मरते मगर उनमें फूट पड़ गई पस उनमें से बाज़ तो ईमान लाये और बाज़ काफ़िर हो गये और अगर ख़ुदा चाहता तो यह लोग आपस में लड़ते मगर ख़ुदा वही करता है जो चाहता है

ये रसूल जिनका हमने आपसे वर्णन किया है, उनमें से कुछ को हमने वह़्य, अनुयायियों और दर्जों के मामले में दूसरों पर श्रेष्ठता प्रदान की है। उनमें से कुछ वे हैं जिनसे अल्लाह ने बात की, जैसे- मूसा अलैहिस्सलाम, और उनमें से कुछ को ऊँचे पद प्रदान किए, जैसे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम; क्योंकि आपको सभी मानव जाति के लिए भेजा गया तथा आपपर नुबुव्वत (ईश्दूतत्व) की मुहर लगा दी गई (और ईश्दूतत्व का क्रम समाप्त हो गया) और आपकी उम्मत को दूसरी उम्मतों पर श्रेष्ठता दी गई। और हमने मरयम के पुत्र ईसा को, उनकी नुबुव्वत (ईश्दूतत्व) को प्रमाणित करने वाले स्पष्ट चमत्कार दिए; जैसे मरे हुए व्यक्ति को पुनर्जीवित करना और जन्मजात अंधे और कोढ़ी को ठीक करना। तथा अल्लाह के आदेश को पूरा करने के लिए शक्ति प्रदान करने हेतु, हमने जिबरील अलैहिस्सलाम के द्वारा उनका समर्थन किया। अगर अल्लाह चाहता, तो रसूलों के बाद आने वाले लोग, उनके पास स्पष्ट निशानियाँ आ जाने के पश्चात आपस में न लड़ते। परंतु उन लोगों ने विवाद किया और वे विभाजित हो गए; उनमें से कुछ अल्लाह पर ईमान लाए और कुछ ने उसका इनकार किया। अगर अल्लाह चाहता कि वे आपस में न लड़ें, तो वे आपस में न लड़ते, लेकिन अल्लाह जो चाहता है, करता है। अतः वह जिसे चाहता है अपनी दया और अनुग्रह से ईमान की हिदायत देता है और जिसे चाहता है अपने न्याय और हिकमत से गुमराह कर देता है।

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254

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَنفِقُوا۟ مِمَّا رَزَقْنَٰكُم مِّن قَبْلِ أَن يَأْتِىَ يَوْمٌۭ لَّا بَيْعٌۭ فِيهِ وَلَا خُلَّةٌۭ وَلَا شَفَٰعَةٌۭ ۗ وَٱلْكَٰفِرُونَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ

ऐ ईमानदारों जो कुछ हमने तुमको दिया है उस दिन के आने से पहले (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो जिसमें न तो ख़रीदो फरोख्त होगी और न यारी (और न आशनाई) और न सिफ़ारिश (ही काम आयेगी) और कुफ़्र करने वाले ही तो जुल्म ढाते हैं

ऐ अल्लाह पर ईमान लाने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! हमने तुम्हें विभिन्न हलाल (वैध) धन में से जो कुछ प्रदान किया है, उसमें से खर्च करो, इससे पहले कि क़ियामत का दिन आ जाए। उस समय, वहाँ न कोई क्रय-विक्रय होगा कि जिससे मनुष्य वह चीज़ प्राप्त कर सके जो उसे लाभ दे, न कोई दोस्ती होगी जो उसे संकट के समय में लाभ दे, और न ही कोई मध्यस्थता (सिफ़ारिश) होगी जो हानि को दूर करे या लाभ पहुँचाए। सिवाय इसके कि जब अल्लाह जिसे चाहे और जिससे वह प्रसन्न हो, अनुमति प्रदान कर दे। और काफ़िर लोग ही वास्तव में अत्याचारी हैं क्योंकि वे सर्वशक्तिमान अल्लाह का इनकार करते हैं।

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255

ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْحَىُّ ٱلْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُۥ سِنَةٌۭ وَلَا نَوْمٌۭ ۚ لَّهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ مَن ذَا ٱلَّذِى يَشْفَعُ عِندَهُۥٓ إِلَّا بِإِذْنِهِۦ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَىْءٍۢ مِّنْ عِلْمِهِۦٓ إِلَّا بِمَا شَآءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ ۖ وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ ٱلْعَلِىُّ ٱلْعَظِيمُ

ख़ुदा ही वो ज़ाते पाक है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वह) ज़िन्दा है (और) सारे जहान का संभालने वाला है उसको न ऊँघ आती है न नींद जो कुछ आसमानो में है और जो कुछ ज़मीन में है (गरज़ सब कुछ) उसी का है कौन ऐसा है जो बग़ैर उसकी इजाज़त के उसके पास किसी की सिफ़ारिश करे जो कुछ उनके सामने मौजूद है (वह) और जो कुछ उनके पीछे (हो चुका) है (खुदा सबको) जानता है और लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ पर भी अहाता नहीं कर सकते मगर वह जिसे जितना चाहे (सिखा दे) उसकी कुर्सी सब आसमानॊं और ज़मीनों को घेरे हुये है और उन दोनों (आसमान व ज़मीन) की निगेहदाश्त उसपर कुछ भी मुश्किल नहीं और वह आलीशान बुजुर्ग़ मरतबा है

अल्लाह वह है जिस अकेले के सिवा कोई भी वास्तविक रूप से इबादत के लायक़ नहीं है। वह जीवित है, एक पूर्ण जीवन वाला है जिसमें कोई मृत्यु या कमी नहीं है। हर चीज़ को सँभालने वाला है, जो स्वयं क़ायम है, अतः वह अपनी सारी सृष्टि से बेनियाज़ है। तथा उसी से सारी सृष्टि क़ायम है, इसलिए वे अपनी सभी स्थितियों में उससे बेनियाज़ नहीं हो सकते। उसके जीवन की पूर्णता और उसके संपूर्ण रूप से हर चीज़ को संभालने के कारण, उसे न कुछ ऊँघ आती है और न कोई नींद। जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, सबका अकेला वही मालिक है। उसकी अनुमति और सहमति के बिना किसी को भी उसके पास किसी के लिए सिफ़ारिश करने का अधिकार नहीं है। वह जानता है अपनी सृष्टि के पिछले मामलों को जो घटित हो चुके और जिनका वे भविष्य में सामना करने वाले हैं, जो अभी घटित नहीं हुए। और वे उस सर्वशक्तिमान के ज्ञान में से किसी भी चीज़ को अपने ज्ञान से नहीं घेर सकते, सिवाय उसके जिससे वह उन्हें स्वयं अवगत कराना चाहे। उसकी कुर्सी ने (जो उसके पाँव रखने का स्थान है) आकाशों और धरती को, उनकी विशालता और महानता के बावजूद घेर रखा है। उन दोनों का संरक्षण करना उसके लिए कुछ कठिन या भारी नहीं है। वह अपने अस्तित्व, अपनी नियति और अपने प्रभुत्व में सबसे ऊँचा, अपने राज्य और अधिकार में सबसे महान है।

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256

لَآ إِكْرَاهَ فِى ٱلدِّينِ ۖ قَد تَّبَيَّنَ ٱلرُّشْدُ مِنَ ٱلْغَىِّ ۚ فَمَن يَكْفُرْ بِٱلطَّٰغُوتِ وَيُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ فَقَدِ ٱسْتَمْسَكَ بِٱلْعُرْوَةِ ٱلْوُثْقَىٰ لَا ٱنفِصَامَ لَهَا ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ

दीन में किसी तरह की जबरदस्ती नहीं क्योंकि हिदायत गुमराही से (अलग) ज़ाहिर हो चुकी तो जिस शख्स ने झूठे खुदाओं बुतों से इंकार किया और खुदा ही पर ईमान लाया तो उसने वो मज़बूत रस्सी पकड़ी है जो टूट ही नहीं सकती और ख़ुदा सब कुछ सुनता और जानता है

इस्लाम धर्म में प्रवेश करने के लिए किसी को भी मजबूर नहीं किया जाएगा; क्योंकि यह स्पष्ट सत्य धर्म है। अतः किसी को इसे ग्रहण करने के लिए मजबूर करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हिदायत, गुमराही से बिल्कुल स्पष्ट हो चुकी है। इसलिए जो व्यक्ति अल्लाह के अलावा पूजा की जाने वाली हर चीज़ का इनकार करे और उससे अलगाव प्रकट करे और केवल अल्लाह पर ईमान रखे; तो उसने क़ियामत के दिन मोक्ष के लिए धर्म की सबसे मज़बूत रस्सी पकड़ ली है, जो कभी नहीं टूटेगी। और अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कर्मों को जानने वाला है और वह उन्हें उनका बदला देगा।

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257

ٱللَّهُ وَلِىُّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يُخْرِجُهُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ ۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَوْلِيَآؤُهُمُ ٱلطَّٰغُوتُ يُخْرِجُونَهُم مِّنَ ٱلنُّورِ إِلَى ٱلظُّلُمَٰتِ ۗ أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ

ख़ुदा उन लोगों का सरपरस्त है जो ईमान ला चुके कि उन्हें (गुमराही की) तारीक़ियों से निकाल कर (हिदायत की) रौशनी में लाता है और जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनके सरपरस्त शैतान हैं कि उनको (ईमान की) रौशनी से निकाल कर (कुफ़्र की) तारीकियों में डाल देते हैं यही लोग तो जहन्नुमी हैं (और) यही उसमें हमेशा रहेंगे

अल्लाह उन लोगों की देखभाल (संरक्षण) करता है जो उस पर ईमान लाए हैं, वह उन्हें सामर्थ्य प्रदान करता और उनकी सहायता करता है, तथा उन्हें कुफ़्र और अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ईमान और ज्ञान के प्रकाश में लाता है। और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके संरक्षक वे मूर्तियाँ और साझेदार हैं, जिन्होंने उनके लिए कुफ़्र को सुशोभित किया है। और उन्हें ईमान और ज्ञान के प्रकाश से निकालकर कुफ़्र और अज्ञानता के अँधियारों में डाल दिया है। वे लोग आग (दोज़ख़) वाले हैं, वे हमेशा उसी में रहेंगे।

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258

أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِى حَآجَّ إِبْرَٰهِۦمَ فِى رَبِّهِۦٓ أَنْ ءَاتَىٰهُ ٱللَّهُ ٱلْمُلْكَ إِذْ قَالَ إِبْرَٰهِۦمُ رَبِّىَ ٱلَّذِى يُحْىِۦ وَيُمِيتُ قَالَ أَنَا۠ أُحْىِۦ وَأُمِيتُ ۖ قَالَ إِبْرَٰهِۦمُ فَإِنَّ ٱللَّهَ يَأْتِى بِٱلشَّمْسِ مِنَ ٱلْمَشْرِقِ فَأْتِ بِهَا مِنَ ٱلْمَغْرِبِ فَبُهِتَ ٱلَّذِى كَفَرَ ۗ وَٱللَّهُ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّٰلِمِينَ

(ऐ रसूल) क्या तुम ने उस शख्स (के हाल) पर नज़र नहीं की जो सिर्फ़ इस बिरते पर कि ख़ुदा ने उसे सल्तनत दी थी इब्राहीम से उनके परवरदिगार के बारे में उलझ पड़ा कि जब इब्राहीम ने (उससे) कहा कि मेरा परवरदिगार तो वह है जो (लोगों को) जिलाता और मारता है तो वो भी (शेख़ी में) आकर कहने लगा मैं भी जिलाता और मारता हूं (तुम्हारे ख़ुदा ही में कौन सा कमाल है) इब्राहीम ने कहा (अच्छा) खुदा तो आफ़ताब को पूरब से निकालता है भला तुम उसको पश्चिम से निकालो इस पर वह काफ़िर हक्का बक्का हो कर रह गया (मगर ईमान न लाया) और ख़ुदा ज़ालिमों को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुंचाया करता

(ऐ नबी!) क्या आपने उस सरकश की जुर्अत (दुःसाहस) से अधिक आश्चर्यजनक चीज़ देखी, जिसने इबराहीम अलैहिस्सलाम से अल्लाह की रुबूबियत (ईश्वरत्व) और तौहीद (एकेश्वरवाद) के संबंध में बहस की? उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अल्लाह ने उसे राज्य प्रदान किया, जिससे वह सरकश हो गया। इसपर इबराहीम अलैहिस्सलाम ने उससे अपने पालनहार की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहा : मेरा रब वह है, जो प्राणियों को जीवन और मृत्यु देता है। उस सरकश ने दुराग्रह से कहा : मैं भी जीवन और मृत्यु देता हूँ, इस प्रकार कि मैं जिसे चाहता हूँ, क़त्ल कर देता हूँ और जिसे चाहता हूँ, छोड़ देता हूँ। तब इबराहीम अलैहिस्सलाम ने एक दूसरा उससे बड़ा तर्क प्रस्तुत किया, आपने उससे कहा : मेरा पालनहार, जिसकी मैं इबादत करता हूँ, पूर्व दिशा से सूर्य लाता है, अतः तू उसे पश्चिम की दिशा से ले आ। इसपर वह सरकश चकित रह गया और उससे कोई जवाब नहीं बन पड़ा, तथा तर्क की शक्ति से पराजित हो गया। और अल्लाह अत्याचारियों को, उनके अत्याचार और सरकशी के कारण, अपने पथ पर चलने की तौफीक़ नहीं देता।

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259

أَوْ كَٱلَّذِى مَرَّ عَلَىٰ قَرْيَةٍۢ وَهِىَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا قَالَ أَنَّىٰ يُحْىِۦ هَٰذِهِ ٱللَّهُ بَعْدَ مَوْتِهَا ۖ فَأَمَاتَهُ ٱللَّهُ مِا۟ئَةَ عَامٍۢ ثُمَّ بَعَثَهُۥ ۖ قَالَ كَمْ لَبِثْتَ ۖ قَالَ لَبِثْتُ يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍۢ ۖ قَالَ بَل لَّبِثْتَ مِا۟ئَةَ عَامٍۢ فَٱنظُرْ إِلَىٰ طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَنَّهْ ۖ وَٱنظُرْ إِلَىٰ حِمَارِكَ وَلِنَجْعَلَكَ ءَايَةًۭ لِّلنَّاسِ ۖ وَٱنظُرْ إِلَى ٱلْعِظَامِ كَيْفَ نُنشِزُهَا ثُمَّ نَكْسُوهَا لَحْمًۭا ۚ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۥ قَالَ أَعْلَمُ أَنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ

(ऐ रसूल तुमने) मसलन उस (बन्दे के हाल पर भी नज़र की जो एक गॉव पर से होकर गुज़रा और वो ऐसा उजड़ा था कि अपनी छतों पर से ढह के गिर पड़ा था ये देखकर वह बन्दा (कहने लगा) अल्लाह अब इस गॉव को ऐसी वीरानी के बाद क्योंकर आबाद करेगा इस पर ख़ुदा ने उसको (मार डाला) सौ बरस तक मुर्दा रखा फिर उसको जिला उठाया (तब) पूछा तुम कितनी देर पड़े रहे अर्ज क़ी एक दिन पड़ा रहा एक दिन से भी कम फ़रमाया नहीं तुम (इसी हालत में) सौ बरस पड़े रहे अब ज़रा अपने खाने पीने (की चीज़ों) को देखो कि बुसा तक नहीं और ज़रा अपने गधे (सवारी) को तो देखो कि उसकी हड्डियाँ ढेर पड़ी हैं और सब इस वास्ते किया है ताकि लोगों के लिये तुम्हें क़ुदरत का नमूना बनाये और अच्छा अब (इस गधे की) हड्डियों की तरफ़ नज़र करो कि हम क्योंकर जोड़ जाड़ कर ढाँचा बनाते हैं फिर उनपर गोश्त चढ़ाते हैं पस जब ये उनपर ज़ाहिर हुआ तो बेसाख्ता बोल उठे कि (अब) मैं ये यक़ीने कामिल जानता हूं कि ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है

या क्या आपने उस व्यक्ति की तरह कोई आदमी देखा है, जिसका गुज़र एक ऐसी बस्ती से हुआ, जिसकी छतें गिर गई थीं, उसकी दीवारें ढह गई थीं और उसके निवासी नष्ट हो गए थे, इसलिए वह एक सुनसान उजाड़ बन गई थी? उस आदमी ने आश्चर्य से कहा : अल्लाह इस बस्ती के लोगों को मरने के बाद कैसे पुनर्जीवित करेगा?! तो अल्लाह ने उसे एक सौ साल के लिए मौत दे दी, फिर उसे जीवित किया और उससे पूछा : तू कितने समय तक मरा हुआ रहा? उसने उत्तर दिया : मैं एक दिन या उसका कुछ भाग रहा हूँ। अल्लाह ने उससे कहा : बल्कि, तू पूरे सौ साल रहा है। इसलिए तेरे साथ जो खाना और पानी था उसे देख। वह अपनी हालत पर बाक़ी है, उसमें कोई बदलाव नही आया। हालाँकि सबसे तेज़ बदलाव खाना और पानी में होता है। तथा तू अपने मरे हुए गधे को देख। हमने ऐसा इसलिए किया, ताकि हम तुझे लोगों के लिए इस बात की स्पष्ट निशानी बना दें कि अल्लाह उन्हें दोबारा ज़िंदा करने की पूरी शक्ति रखता है। तथा तू अपने गधे की हड्डियों को देख जो बिखरी हुई और अलग हो गई हैं, हम उन्हें कैसे उठाते हैं और उन्हें एक साथ जोड़ते हैं, फिर उसके बाद उनपर माँस चढ़ाते हैं और उन्हें फिर से जीवित कर देते हैं। जब उसने यह देखा, तो उसके लिए मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो गई और उसने अल्लाह की शक्ति को जान लिया। इसलिए उसने इसे स्वीकारते हुए कहा : मैं जानता हूँ कि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

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260

وَإِذْ قَالَ إِبْرَٰهِۦمُ رَبِّ أَرِنِى كَيْفَ تُحْىِ ٱلْمَوْتَىٰ ۖ قَالَ أَوَلَمْ تُؤْمِن ۖ قَالَ بَلَىٰ وَلَٰكِن لِّيَطْمَئِنَّ قَلْبِى ۖ قَالَ فَخُذْ أَرْبَعَةًۭ مِّنَ ٱلطَّيْرِ فَصُرْهُنَّ إِلَيْكَ ثُمَّ ٱجْعَلْ عَلَىٰ كُلِّ جَبَلٍۢ مِّنْهُنَّ جُزْءًۭا ثُمَّ ٱدْعُهُنَّ يَأْتِينَكَ سَعْيًۭا ۚ وَٱعْلَمْ أَنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌۭ

और (ऐ रसूल) वह वाकेया भी याद करो जब इबराहीम ने (खुदा से) दरख्वास्त की कि ऐ मेरे परवरदिगार तू मुझे भी तो दिखा दे कि तू मुर्दों को क्योंकर ज़िन्दा करता है ख़ुदा ने फ़रमाया क्या तुम्हें (इसका) यक़ीन नहीं इबराहीम ने अर्ज़ की (क्यों नहीं) यक़ीन तो है मगर ऑंख से देखना इसलिए चाहता हूं कि मेरे दिल को पूरा इत्मिनान हो जाए फ़रमाया (अगर ये चाहते हो) तो चार परिन्दे लो और उनको अपने पास मॅगवा लो और टुकड़े टुकड़े कर डालो फिर हर पहाड़ पर उनका एक एक टुकड़ा रख दो उसके बाद उनको बुलाओ (फिर देखो तो क्यों कर वह सब के सब तुम्हारे पास दौड़े हुए आते हैं और समझ रखो कि ख़ुदा बेशक ग़ालिब और हिकमत वाला है

(ऐ नबी!) उस समय को याद कीजिए जब इबराहीम अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरे रब! मुझे मेरी दृष्टि से दिखा कि मुर्दों को पुनर्जीवित करना कैसे होगा? अल्लाह ने उनसे कहा : क्या तुमने इस बात पर विश्वास नहीं किया? इबराहीम ने उत्तर दिया : क्यों नहीं, मैंने विश्वास किया, परंतु यह मेरे दिल के आश्वासन में वृद्धि के उद्देश्य से है। अल्लाह ने उन्हें आदेश किया और फरमाया : चार पक्षियों को ले लो, फिर उन्हें अपने से अच्छी तरह परचा लो और उनके टुकड़े-दुकड़े कर दो, फिर अपने आस-पास के पहाड़ों में से हर पहाड़ पर उनका एक हिस्सा रख दो, फिर उन्हें बुलाओ। वे तुम्हारे पास दोड़ते हुए आएँगे, उनमें जीवन लौट आया होगा। और ऐ इबराहीम! जान लो कि अल्लाह अपने राज्य में बहुत प्रभुत्वशाली और अपने आदेश, विधान और रचना में पूर्ण हिकमत वाला है।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.