Muslim99Muslim99
← Tafsir library

2. Al-Baqara

The Cow · Medinan · 286 ayahs

سُورَةُ البَقَرَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 221–230 of 286

221

وَلَا تَنكِحُوا۟ ٱلْمُشْرِكَٰتِ حَتَّىٰ يُؤْمِنَّ ۚ وَلَأَمَةٌۭ مُّؤْمِنَةٌ خَيْرٌۭ مِّن مُّشْرِكَةٍۢ وَلَوْ أَعْجَبَتْكُمْ ۗ وَلَا تُنكِحُوا۟ ٱلْمُشْرِكِينَ حَتَّىٰ يُؤْمِنُوا۟ ۚ وَلَعَبْدٌۭ مُّؤْمِنٌ خَيْرٌۭ مِّن مُّشْرِكٍۢ وَلَوْ أَعْجَبَكُمْ ۗ أُو۟لَٰٓئِكَ يَدْعُونَ إِلَى ٱلنَّارِ ۖ وَٱللَّهُ يَدْعُوٓا۟ إِلَى ٱلْجَنَّةِ وَٱلْمَغْفِرَةِ بِإِذْنِهِۦ ۖ وَيُبَيِّنُ ءَايَٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ

और (मुसलमानों) तुम मुशरिक औरतों से जब तक ईमान न लाएँ निकाह न करो क्योंकि मुशरिका औरत तुम्हें अपने हुस्नो जमाल में कैसी ही अच्छी क्यों न मालूम हो मगर फिर भी ईमानदार औरत उस से ज़रुर अच्छी है और मुशरेकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हे कैसा ही अच्छा क्यो न मालूम हो मगर फिर भी ईमानदार औरत उस से ज़रुर अच्छी है और मुशरेकीन जब तक ईमान न लाएँ अपनी औरतें उन के निकाह में न दो और मुशरिक तुम्हें क्या ही अच्छा क्यों न मालूम हो मगर फिर भी बन्दा मोमिन उनसे ज़रुर अच्छा है ये (मुशरिक मर्द या औरत) लोगों को दोज़ख़ की तरफ बुलाते हैं और ख़ुदा अपनी इनायत से बेहिश्त और बख़्शिस की तरफ बुलाता है और अपने एहकाम लोगों से साफ साफ बयान करता है ताकि ये लोग चेते

(ऐ मोमिनो!) अल्लाह के साथ शिर्क करने वाली स्त्रियों से शादी न करो, यहाँ तक कि वे एक अल्लाह पर ईमान ले आएँ और इस्लाम में प्रवेश कर जाएँ। निश्चय अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखने वाली दासी, एक मूर्ति की पूजा करने वाली आज़ाद स्त्री से उत्तम है, भले ही वह अपनी सुंदरता और धन के कारण आपको पसंद हो। इसी तरह मुसलमान स्त्रियों का निकाह मुश्रिक मर्दों से न करो, निश्चय अल्लाह और उसके रसूल पर विश्वास रखने वाला एक मोमिन ग़ुलाम, एक आज़ाद मुश्रिक से उत्तम है, भले ही वह तुम्हें अच्छा लगे। ये शिर्क में लिप्त लोग - पुरुष और महिलाएँ - अपने शब्दों और कार्यों के साथ उसकी ओर बुलाते हैं, जो जहन्नम में प्रवेश करने की ओर ले जाता है। जबकि अल्लाह अच्छे कार्यों की ओर बुलाता है, जो उसकी अनुमति और अनुग्रह से जन्नत में प्रवेश करने और पापों की क्षमा का कारण बनते हैं। तथा वह अपनी आयतों को लोगों के लिए स्पष्ट करता है, ताकि वे उसपर विचार कर सकें जो उनसे इंगित होता है, फिर उसके अनुसार कार्य करें।

Al-Baqara 2:221Listen in Qur'an →
222

وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْمَحِيضِ ۖ قُلْ هُوَ أَذًۭى فَٱعْتَزِلُوا۟ ٱلنِّسَآءَ فِى ٱلْمَحِيضِ ۖ وَلَا تَقْرَبُوهُنَّ حَتَّىٰ يَطْهُرْنَ ۖ فَإِذَا تَطَهَّرْنَ فَأْتُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ أَمَرَكُمُ ٱللَّهُ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلتَّوَّٰبِينَ وَيُحِبُّ ٱلْمُتَطَهِّرِينَ

(ऐ रसूल) तुम से लोग हैज़ के बारे में पूछते हैं तुम उनसे कह दो कि ये गन्दगी और घिन की बीमारी है तो (अय्यामे हैज़) में तुम औरतों से अलग रहो और जब तक वह पाक न हो जाएँ उनके पास न जाओ पस जब वह पाक हो जाएँ तो जिधर से तुम्हें ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन के पास जाओ बेशक ख़ुदा तौबा करने वालो और सुथरे लोगों को पसन्द करता है तुम्हारी बीवियाँ (गोया) तुम्हारी खेती हैं

(ऐ नबी!) आपके साथी आपसे मासिक धर्म (यह एक प्राकृतिक रक्त है जो विशिष्ट समय पर महिला के गर्भाशय से निकलता है) के बारे में पूछते हैं। आप उन्हें जवाब देते हुए कह दीजिए : मासिक धर्म पुरुष और महिला दोनों के लिए कष्टदायक (हानिकारक) है, इसलिए उसके समय पर महिलाओं के साथ संभोग करने से बचो, तथा संभोग के उद्देश्य से उनके पास न जाओ, यहाँ तक कि उनका रक्त बंद हो जाए और वे स्नान करके उससे अच्छी तरह पाक-साफ़ हो जाएँ। जब रक्त बंद हो जाए और वे उससे पवित्र हो जाएँ, तो उनसे उस तरीक़े से संभोग करो, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए अनुमेय किया है : इस हाल में कि वे पाक हों और उनकी योनि में संभोग किया जाए। अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है, जो गुनाहों से बहुत ज़्यादा तौबा करने वाले और गंदगियों से पवित्रता हासिल करने में अतिशयोक्ति से काम लेने वाले हैं।

Al-Baqara 2:222Listen in Qur'an →
223

نِسَآؤُكُمْ حَرْثٌۭ لَّكُمْ فَأْتُوا۟ حَرْثَكُمْ أَنَّىٰ شِئْتُمْ ۖ وَقَدِّمُوا۟ لِأَنفُسِكُمْ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّكُم مُّلَٰقُوهُ ۗ وَبَشِّرِ ٱلْمُؤْمِنِينَ

तो तुम अपनी खेती में जिस तरह चाहो आओ और अपनी आइन्दा की भलाई के वास्ते (आमाल साके) पेशगी भेजो और ख़ुदा से डरते रहो और ये भी समझ रखो कि एक दिन तुमको उसके सामने जाना है और ऐ रसूल ईमानदारों को नजात की ख़ुश ख़बरी दे दो

तुम्हारी पत्नियाँ तुम्हारे लिए रोपण स्थान हैं, वे तुम्हारे लिए बच्चे जनती हैं; वैसे ही जैसे भूमि फल देती है। इसलिए रोपने के स्थान पर - जो कि योनि है - जिस दिशा से भी चाहो और जिस तरह भी चाहो आओ, बशर्ते कि वह योनि में हो। तथा अपने लिए अच्छे कार्य आगे भेजो, जिसमें यह भी शामिल है कि आदमी अपनी पत्नी के साथ अल्लाह की निकटता प्राप्त करने और नेक संतान की उम्मीद में संभोग करे। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरो। जिसमें वह भी शामिल है जो उसने महिलाओं के बारे में तुम्हारे लिए निर्धारित किया है। और जान लो कि तुम क़ियामत के दिन उससे मिलने वाले हो, उसके सामने खड़े होने वाले हो और वह तुम्हें तुम्हारे कार्यों का बदला देने वाला है। और - ऐ नबी! - मोमिनों को शुभ समाचार सुना दीजिए कि उन्हें अपने पालनहार से मुलाक़ात के समय हमेशा बाक़ी रहने वाली नेमतें मिलेंगी और अल्लाह के सम्मानित चेहरे को देखने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

Al-Baqara 2:223Listen in Qur'an →
224

وَلَا تَجْعَلُوا۟ ٱللَّهَ عُرْضَةًۭ لِّأَيْمَٰنِكُمْ أَن تَبَرُّوا۟ وَتَتَّقُوا۟ وَتُصْلِحُوا۟ بَيْنَ ٱلنَّاسِ ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ

और (मुसलमानों) तुम अपनी क़समों (के हीले) से ख़ुदा (के नाम) को लोगों के साथ सुलूक करने और ख़ुदा से डरने और लोगों के दरमियान सुलह करवा देने का मानेअ न ठहराव और ख़ुदा सबकी सुनता और सब को जानता है

अल्लाह की क़सम को नेकी करने, परहेज़गारी तथा लोगों के बीच मेल-मिलाप कराने के विरुद्ध तर्क मत बनाओ। बल्कि अगर तुम भलाई न करने की क़सम खा लो; तो भलाई का कार्य करो और अपनी क़समों का कफ़्फ़ारा अदा कर दो। तथा अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे कार्यों को जानने वाला है, और वह तुम्हें उनका बदला देगा।

Al-Baqara 2:224Listen in Qur'an →
225

لَّا يُؤَاخِذُكُمُ ٱللَّهُ بِٱللَّغْوِ فِىٓ أَيْمَٰنِكُمْ وَلَٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا كَسَبَتْ قُلُوبُكُمْ ۗ وَٱللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٌۭ

तुम्हारी लग़ो (बेकार) क़समों पर जो बेइख्तेयार ज़बान से निकल जाए ख़ुदा तुम से गिरफ्तार नहीं करने का मगर उन कसमों पर ज़रुर तुम्हारी गिरफ्त करेगा जो तुमने क़सदन (जान कर) दिल से खायीं हो और ख़ुदा बख्शने वाला बुर्दबार है

अल्लाह तुम्हें उन क़समों के कारण नहीं पकड़ता, जो बिना इरादे के तुम्हारी ज़बानों पर आ जाती हैं, जैसे तुममें से किसी व्यक्ति का : 'ला वल्लाह' (नहीं, अल्लाह की क़सम!) और 'बला वल्लाह' (हाँ, अल्लाह की क़सम!) कहना। इन क़समों में तुमपर न कोई कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) है और न कोई दंड। परंतु उन क़समों में से जिसका तुमने इरादा किया है, उसपर वह तुम्हारी पकड़ करेगा। तथा अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को बहुत क्षमा करने वाला, अत्यंत सहनशील है, उन्हें सज़ा देने में जल्दी नहीं करता।

Al-Baqara 2:225Listen in Qur'an →
226

لِّلَّذِينَ يُؤْلُونَ مِن نِّسَآئِهِمْ تَرَبُّصُ أَرْبَعَةِ أَشْهُرٍۢ ۖ فَإِن فَآءُو فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ

जो लोग अपनी बीवियों के पास जाने से क़सम खायें उन के लिए चार महीने की मोहलत है पस अगर (वह अपनी क़सम से उस मुद्दत में बाज़ आए) और उनकी तरफ तवज्जो करें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

जो लोग अपनी पत्नियों से संभोग न करने की क़सम खा लेते हैं, उन्हें क़सम खाने के समय से लेकर अधिकतम चार महीने तक प्रतीक्षा करना है। जिसे 'ईला' के नाम से जाना जाता है। यदि वे संभोग न करने की क़सम खाने के बाद चार महीने या उससे कम की अवधि के भीतर अपनी पत्नियों के साथ संभोग करने की ओर वापस लौट आएँ; तो अल्लाह बहुत क्षमा करने वाला है, जो कुछ उनसे हुआ है (अल्लाह) उसे उनके लिए क्षमा कर देगा, तथा उनपर बहुत दया करने वाला है क्योंकि उसने उनके लिए इस क़सम से बाहर निकलने के लिए कफ़्फ़ारा निर्धारित किया है।

Al-Baqara 2:226Listen in Qur'an →
227

وَإِنْ عَزَمُوا۟ ٱلطَّلَٰقَ فَإِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ

और अगर तलाक़ ही की ठान ले तो (भी) बेशक ख़ुदा सबकी सुनता और सब कुछ जानता है

तथा यदि वे अपनी स्त्रियों के साथ संभोग को छोड़ना जारी रखते हुए और उसकी ओर वापस न लौटकर तलाक़ का इरादा कर लें, तो अल्लाह उनकी बातों को सुनने वाला है, जिनमें से तलाक़ भी शामिल है, उनकी स्थितियों और उनके इरादों को जानता है और उन्हें उनका बदला देगा।

Al-Baqara 2:227Listen in Qur'an →
228

وَٱلْمُطَلَّقَٰتُ يَتَرَبَّصْنَ بِأَنفُسِهِنَّ ثَلَٰثَةَ قُرُوٓءٍۢ ۚ وَلَا يَحِلُّ لَهُنَّ أَن يَكْتُمْنَ مَا خَلَقَ ٱللَّهُ فِىٓ أَرْحَامِهِنَّ إِن كُنَّ يُؤْمِنَّ بِٱللَّهِ وَٱلْيَوْمِ ٱلْءَاخِرِ ۚ وَبُعُولَتُهُنَّ أَحَقُّ بِرَدِّهِنَّ فِى ذَٰلِكَ إِنْ أَرَادُوٓا۟ إِصْلَٰحًۭا ۚ وَلَهُنَّ مِثْلُ ٱلَّذِى عَلَيْهِنَّ بِٱلْمَعْرُوفِ ۚ وَلِلرِّجَالِ عَلَيْهِنَّ دَرَجَةٌۭ ۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ

और जिन औरतों को तलाक़ दी गयी है वह अपने आपको तलाक़ के बाद तीन हैज़ के ख़त्म हो जाने तक निकाह सानी से रोके और अगर वह औरतें ख़ुदा और रोजे आख़िरत पर ईमान लायीं हैं तो उनके लिए जाएज़ नहीं है कि जो कुछ भी ख़ुदा ने उनके रहम (पेट) में पैदा किया है उसको छिपाएँ और अगर उन के शौहर मेल जोल करना चाहें तो वह (मुद्दत मज़कूरा) में उन के वापस बुला लेने के ज्यादा हक़दार हैं और शरीयत मुवाफिक़ औरतों का (मर्दों पर) वही सब कुछ हक़ है जो मर्दों का औरतों पर है हाँ अलबत्ता मर्दों को (फ़जीलत में) औरतों पर फौक़ियत ज़रुर है और ख़ुदा ज़बरदस्त हिक़मत वाला है

तलाक़शुदा औरतें तीन मासिक धर्म तक प्रतीक्षा करेंगी, जिसके दौरान वे शादी नहीं करेंगी। तथा उनके लिए यह जायज़ नहीं है कि वे उस गर्भ को छिपाएँ, जो अल्लाह ने उनके गर्भाशयों में पैदा किया है, यदि वे अल्लाह तथा अंतिम दिन पर अपने ईमान में सच्ची हैं। तथा उन्हें तलाक़ देने वाले उनके पतियों को प्रतीक्षा अवधि के दौरान उन्हें लौटाने का अधिक अधिकार है, यदि उनके लौटाने का उद्देश्य प्यार-मोहब्बत (से रहना) और तलाक़ के कारण पैदा होने वाले मनमुटाव को दूर करना हो। तथा पत्नियों के लिए भी परंपरा के अनुसार उसी प्रकार अधिकार और कर्तव्य हैं, जिस तरह उनके पतियों के लिए उनके ऊपर हैं। जबकि पुरुषों को स्त्रियों पर एक दर्जा (वरीयता) प्राप्त है, जैसे संरक्षकता और तलाक़ का अधिकार। और अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसे कोई चीज़ परास्त नहीं कर सकती। वह अपनी शरीयत (विधान) और प्रबंधन में हिकमत वाला है।

Al-Baqara 2:228Listen in Qur'an →
229

ٱلطَّلَٰقُ مَرَّتَانِ ۖ فَإِمْسَاكٌۢ بِمَعْرُوفٍ أَوْ تَسْرِيحٌۢ بِإِحْسَٰنٍۢ ۗ وَلَا يَحِلُّ لَكُمْ أَن تَأْخُذُوا۟ مِمَّآ ءَاتَيْتُمُوهُنَّ شَيْـًٔا إِلَّآ أَن يَخَافَآ أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِ ۖ فَإِنْ خِفْتُمْ أَلَّا يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا فِيمَا ٱفْتَدَتْ بِهِۦ ۗ تِلْكَ حُدُودُ ٱللَّهِ فَلَا تَعْتَدُوهَا ۚ وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ ٱللَّهِ فَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ

तलाक़ रजअई जिसके बाद रुजू हो सकती है दो ही मरतबा है उसके बाद या तो शरीयत के मवाफिक़ रोक ही लेना चाहिए या हुस्न सुलूक से (तीसरी दफ़ा) बिल्कुल रूख़सत और तुम को ये जायज़ नहीं कि जो कुछ तुम उन्हें दे चुके हो उस में से फिर कुछ वापस लो मगर जब दोनों को इसका ख़ौफ़ हो कि ख़ुदा ने जो हदें मुक़र्रर कर दी हैं उन को दोनो मिया बीवी क़ायम न रख सकेंगे फिर अगर तुम्हे (ऐ मुसलमानो) ये ख़ौफ़ हो कि यह दोनो ख़ुदा की मुकर्रर की हुई हदो पर क़ायम न रहेंगे तो अगर औरत मर्द को कुछ देकर अपना पीछा छुड़ाए (खुला कराए) तो इसमें उन दोनों पर कुछ गुनाह नहीं है ये ख़ुदा की मुक़र्रर की हुई हदें हैं बस उन से आगे न बढ़ो और जो ख़ुदा की मुक़र्रर की हुईहदों से आगे बढ़ते हैं वह ही लोग तो ज़ालिम हैं

ऐसा तलाक़ जिसमें पति अपनी पत्नी को लौटाने का अधिकार रखता है, दो बार है। इस प्रकार कि वह तलाक़ दे, फिर लौटा ले, फिर (दूसरी बार) तलाक़ दे, फिर लौटा ले। फिर दो तलाक़ों के बाद या तो उसे अच्छे सहवास के साथ अपने पत्नीत्व में रखे, या उसके साथ भलाई करते हुए और उसके अधिकारों को पूरा करते हुए उसे तीसरा तलाक़ दे दे। तथा - ऐ पतियो! - तुम्हारे लिए अपनी पत्नियों को दी हुई महर में से कुछ भी लेना हलाल नहीं है। हाँ, यदि पत्नी अपने पति को उसके चरित्र अथवा रंग-रूप के कारण नापसंद करती हो और दंपति इस नफरत के कारण सोचते हैं कि वे अपने अधिकारों को पूरा नहीं कर सकेंगे, तो वे अपना मामला उस व्यक्ति के सामने पेश करें जिसके साथ उनकी रिश्तेदारी या संबंध हो। अब अगर अभिभावकों को डर है कि वे दोनों आपस में अपने वैवाहिक अधिकारों को पूरा नहीं कर सकेंगे, तो दोनों पर कोई पाप नहीं है कि पत्नी अपने पति को उसे अलग करने के बदले में कुछ धन भुगतान करके ख़ुला' ले ले। ये शरई अहकाम, हलाल एवं हराम (अनुमेय और निषिद्ध) के बीच विभाजक हैं, इसलिए उनसे आगे न बढ़ो, और जो कोई भी हलाल एवं हराम के बीच अल्लाह की सीमाओं को पार करता है; तो वही लोग अपने आपको विनाश के साधनों पर लाकर और उन्हें अल्लाह के क्रोध और दंड का भागी बनाकर स्वयं पर अत्याचार करने वाले हैं।

Al-Baqara 2:229Listen in Qur'an →
230

فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا تَحِلُّ لَهُۥ مِنۢ بَعْدُ حَتَّىٰ تَنكِحَ زَوْجًا غَيْرَهُۥ ۗ فَإِن طَلَّقَهَا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَآ أَن يَتَرَاجَعَآ إِن ظَنَّآ أَن يُقِيمَا حُدُودَ ٱللَّهِ ۗ وَتِلْكَ حُدُودُ ٱللَّهِ يُبَيِّنُهَا لِقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ

फिर अगर तीसरी बार भी औरत को तलाक़ (बाइन) दे तो उसके बाद जब तक दूसरे मर्द से निकाह न कर ले उस के लिए हलाल नही हाँ अगर दूसरा शौहर निकाह के बाद उसको तलाक़ दे दे तब अलबत्ता उन मिया बीबी पर बाहम मेल कर लेने में कुछ गुनाह नहीं है अगर उन दोनों को यह ग़ुमान हो कि ख़ुदा हदों को क़ायम रख सकेंगें और ये ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदें हैं जो समझदार लोगों के वास्ते साफ साफ बयान करता है

यदि उसका पति उसे तीसरा तलाक़ दे दे, तो पति के लिए उससे पुनर्विवाह करने की अनुमति नहीं है, यहाँ तक कि वह स्त्री किसी अन्य पुरुष से विवाह करे, जो (जीवन बसर करने की) इच्छा से, एक वैध विवाह हो, (प्रथम पति के लिए) हलाल करने के उद्देश्य से न हो, और वह इस विवाह में उसके साथ संभोग करे। फिर यदि दूसरा पति उसे तलाक़ दे दे या मर जाए; तो उस स्त्री और उसके प्रथम पति पर कोई पाप नहीं है कि वे एक नए अनुबंध और नयी महर के साथ आपस में रुजू' (दोबारा मिलाप) कर लें, अगर उन्हें प्रबल गुमान है कि वे अपने प्रति अनिवार्य शरई नियमों का पालन करेंगे। इन शरई नियमों को अल्लाह उन लोगों के लिए खोलकर बयान करता है, जो उसके नियमों और सीमाओं को जानते हैं; क्योंकि वही लोग इनसे लाभ उठाते हैं।

Al-Baqara 2:230Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.