Muslim99Muslim99
← Tafsir library

2. Al-Baqara

The Cow · Medinan · 286 ayahs

سُورَةُ البَقَرَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 191–200 of 286

191

وَٱقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْ وَأَخْرِجُوهُم مِّنْ حَيْثُ أَخْرَجُوكُمْ ۚ وَٱلْفِتْنَةُ أَشَدُّ مِنَ ٱلْقَتْلِ ۚ وَلَا تُقَٰتِلُوهُمْ عِندَ ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ حَتَّىٰ يُقَٰتِلُوكُمْ فِيهِ ۖ فَإِن قَٰتَلُوكُمْ فَٱقْتُلُوهُمْ ۗ كَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلْكَٰفِرِينَ

और तुम उन (मुशरिकों) को जहाँ पाओ मार ही डालो और उन लोगों ने जहाँ (मक्का) से तुम्हें शहर बदर किया है तुम भी उन्हें निकाल बाहर करो और फितना परदाज़ी (शिर्क) खूँरेज़ी से भी बढ़ के है और जब तक वह लोग (कुफ्फ़ार) मस्ज़िद हराम (काबा) के पास तुम से न लडे तुम भी उन से उस जगह न लड़ों पस अगर वह तुम से लड़े तो बेखटके तुम भी उन को क़त्ल करो काफ़िरों की यही सज़ा है

उन्हें जहाँ पाओ, क़त्ल करो और उन्हें उस जगह - अर्थात् मक्का - से निकाल दो, जहाँ से उन्होंने तुम्हें निकाला है। मोमिन को उसके धर्म से रोकने और उसके कुफ़्र की ओर लौटने के परिणामस्वरूप सामने आने वाला फ़ितना क़त्ल से बड़ा है। और मस्जिदे-ह़राम का सम्मान करते हुए उसके पास उनसे लड़ाई की शुरूआत न करो, यहाँ तक कि वे उसमें तुमसे लड़ना शुरू कर दें। यदि वे मस्जिदे-ह़राम में तुमसे लड़ना शुरू कर दें, तो उन्हें क़त्ल करो। इसी तरह का बदला - अर्थात् मस्जिदे-ह़राम में उनके युद्ध करने पर उन्हें क़त्ल करना - काफ़िरों का बदला है।

Al-Baqara 2:191Listen in Qur'an →
192

فَإِنِ ٱنتَهَوْا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ

फिर अगर वह लोग बाज़ रहें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

यदि वे तुमसे लड़ना बंद कर दें और अपने कुफ़्र से बाज़ आ जाएँ, तो उनसे हाथ उठा लो। निःसंदेह अल्लाह तौबा करने वालों को क्षमा करने वाला है, इसलिए उनके पिछले गुनाहों पर उनकी पकड़ नहीं करता। उनपर दया करने वाला है, उन्हें दंड देने में जल्दी नहीं करता।

Al-Baqara 2:192Listen in Qur'an →
193

وَقَٰتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌۭ وَيَكُونَ ٱلدِّينُ لِلَّهِ ۖ فَإِنِ ٱنتَهَوْا۟ فَلَا عُدْوَٰنَ إِلَّا عَلَى ٱلظَّٰلِمِينَ

और उन से लड़े जाओ यहाँ तक कि फ़साद बाक़ी न रहे और सिर्फ ख़ुदा ही का दीन रह जाए फिर अगर वह लोग बाज़ रहे तो उन पर ज्यादती न करो क्योंकि ज़ालिमों के सिवा किसी पर ज्यादती (अच्छी) नहीं

काफ़िरों से युद्ध करो, यहाँ तक कि वे शिर्क, लोगों को अल्लाह के मार्ग से रोकने और कुफ़्र से बाज़ आ जाएँ, तथा प्रभावी धर्म अल्लाह का धर्म हो जाए। यदि वे अपने कुफ़्र तथा अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आ जाएँ, तो उनसे लड़ाई करना छोड़ दो। क्योंकि कुफ़्र और अल्लाह के मार्ग से रोकने के द्वारा अत्याचार करने वालों के सिवा किसी पर कोई अत्याचार उचित नहीं है।

Al-Baqara 2:193Listen in Qur'an →
194

ٱلشَّهْرُ ٱلْحَرَامُ بِٱلشَّهْرِ ٱلْحَرَامِ وَٱلْحُرُمَٰتُ قِصَاصٌۭ ۚ فَمَنِ ٱعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ فَٱعْتَدُوا۟ عَلَيْهِ بِمِثْلِ مَا ٱعْتَدَىٰ عَلَيْكُمْ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلْمُتَّقِينَ

हुरमत वाला महीना हुरमत वाले महीने के बराबर है (और कुछ महीने की खुसूसियत नहीं) सब हुरमत वाली चीजे एक दूसरे के बराबर हैं पस जो शख्स तुम पर ज्यादती करे तो जैसी ज्यादती उसने तुम पर की है वैसी ही ज्यादती तुम भी उस पर करो और ख़ुदा से डरते रहो और खूब समझ लो कि ख़ुदा परहेज़गारों का साथी है

वर्ष 7 हिजरी का हुरमत वाला महीना, जिसमें अल्लाह ने तुम्हें हरम में प्रवेश करने और उम्रा अदा करने में सक्षम किया, उस हुरमत वाले महीने के बदले है, जिसमें मुश्रिकों ने तुम्हें वर्ष 6 हिजरी में ह़रम में प्रवेश कने से रोक दिया था। सभी हुरमत वाली चीज़ों - जैसे हुरमत वाले नगर की हुरमत, हुरमत वाले महीने की हुरमत और एह़राम की हुरमत - में ज़्यादती करने वालों पर क़िसास का नियम लागू होगा। अतः जिसने भी इनमें तुमपर ज़्यादती की है, उसके साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा उसने किया है, और समानता की सीमा से आगे न बढ़ो। निश्चय अल्लाह अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने वालों से प्रेम नहीं करता। तथा अल्लाह ने तुम्हें जो कुछ करने की अनुमति दी है, उससे आगे न बढ़ो, और जान लो कि अल्लाह सामर्थ्य एवं समर्थन के द्वारा उन लोगों के साथ है, जो उससे डरने वाले हैं।

Al-Baqara 2:194Listen in Qur'an →
195

وَأَنفِقُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَا تُلْقُوا۟ بِأَيْدِيكُمْ إِلَى ٱلتَّهْلُكَةِ ۛ وَأَحْسِنُوٓا۟ ۛ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ

और ख़ुदा की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है

अल्लाह की आज्ञाकारिता के कार्यों, जैसे जिहाद आदि में धन खर्च करो, तथा अपने आपको विनाश में न डालो, इस प्रकार कि उसके रास्ते में जिहाद और खर्च करना छोड़ दो, या अपने आपको ऐसी चीज़ में डाल दो जो तुम्हारे विनाश का कारण हो। तथा अपनी इबादतों, मामलों और आचरण में अच्छा बनो। निःसंदेह अल्लाह अपने सभी मामलों में अच्छा करने वालों से प्यार करता है। इसलिए वह उनके सवाब को बढ़ा देता है और उन्हें सीधे रास्ते पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करता है।

Al-Baqara 2:195Listen in Qur'an →
196

وَأَتِمُّوا۟ ٱلْحَجَّ وَٱلْعُمْرَةَ لِلَّهِ ۚ فَإِنْ أُحْصِرْتُمْ فَمَا ٱسْتَيْسَرَ مِنَ ٱلْهَدْىِ ۖ وَلَا تَحْلِقُوا۟ رُءُوسَكُمْ حَتَّىٰ يَبْلُغَ ٱلْهَدْىُ مَحِلَّهُۥ ۚ فَمَن كَانَ مِنكُم مَّرِيضًا أَوْ بِهِۦٓ أَذًۭى مِّن رَّأْسِهِۦ فَفِدْيَةٌۭ مِّن صِيَامٍ أَوْ صَدَقَةٍ أَوْ نُسُكٍۢ ۚ فَإِذَآ أَمِنتُمْ فَمَن تَمَتَّعَ بِٱلْعُمْرَةِ إِلَى ٱلْحَجِّ فَمَا ٱسْتَيْسَرَ مِنَ ٱلْهَدْىِ ۚ فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلَٰثَةِ أَيَّامٍۢ فِى ٱلْحَجِّ وَسَبْعَةٍ إِذَا رَجَعْتُمْ ۗ تِلْكَ عَشَرَةٌۭ كَامِلَةٌۭ ۗ ذَٰلِكَ لِمَن لَّمْ يَكُنْ أَهْلُهُۥ حَاضِرِى ٱلْمَسْجِدِ ٱلْحَرَامِ ۚ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ

और सिर्फ ख़ुदा ही के वास्ते हज और उमरा को पूरा करो अगर तुम बीमारी वगैरह की वजह से मजबूर हो जाओ तो फिर जैसी क़ुरबानी मयस्सर आये (कर दो) और जब तक कुरबानी अपनी जगह पर न पहुँच जाये अपने सर न मुँडवाओ फिर जब तुम में से कोई बीमार हो या उसके सर में कोई तकलीफ हो तो (सर मुँडवाने का बदला) रोजे या खैरात या कुरबानी है पस जब मुतमइन रहों तो जो शख्स हज तमत्तो का उमरा करे तो उसको जो कुरबानी मयस्सर आये करनी होगी और जिस से कुरबानी ना मुमकिन हो तो तीन रोजे ज़माना ए हज में (रखने होंगे) और सात रोजे ज़ब तुम वापस आओ ये पूरा दहाई है ये हुक्म उस शख्स के वास्ते है जिस के लड़के बाले मस्ज़िदुल हराम (मक्का) के बाशिन्दे न हो और ख़ुदा से डरो और समझ लो कि ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब वाला है

अल्लाह तआला की प्रसन्नता की तलाश में, ह़ज्ज और उम्रा संपूर्ण रूप से अदा करो। यदि बीमारी या दुश्मन या इसी प्रकार के अन्य कारणों से उन्हें पूरा करने से तुम्हें रोक दिया जाए; तो तुम्हें अपने एह़राम से हलाल होने के लिए - ऊँट या गाय अथवा बकरी में से - जो भी क़ुर्बानी का जानवर उपलब्ध हो, उसे ज़बह़ करना होगा। तथा उस समय तक अपने सिर न मुँडाओ या बाल न कटाओ, जब तक क़ुर्बानी उस स्थान पर न पहुँच जाए, जहाँ उसे ज़बह करना हलाल है। यदि उसे ह़रम पहुँचने से रोक दिया जाए, तो वहीं ज़बह़ कर दिया जाए, जहाँ उसे रोक दिया गया है। यदि ह़रम से नहीं रोका गया है, तो हरम में क़ुर्बानी के दिन और उसके बाद 'तशरीक़ के दिनों' में ज़बह किया जाना चाहिए। फिर तुममें से जो व्यक्ति बीमार हो, अथवा उसके सिर के बालों में कोई तकलीफ़ हो, जैसे जूँ आदि, और इसके कारण वह अपना सिर मुँडा ले, तो उसपर कोई गुनाह नहीं है। लेकिन उसके बदले उसे फ़िदया अदा करना पड़ेगा। फ़िदया के तौर पर या तो तीन रोज़े रखे, या ह़रम के निर्धनों में से तीन निर्धनों को खाना खिलाए, या एक बकरी ज़बह करके हरम के ग़रीबों में बाँट दे। फिर यदि तुम्हें कोई भय न हो, तो तुममें से जो व्यक्ति ह़ज्ज के महीनों में उम्रा अदा करने के बाद एह़राम खोलना चाहे और उसी साल ह़ज्ज का एहराम बाँधने तक उन वस्तुओं से लाभान्वित होना चाहे, जो एह़राम की अवस्था में हराम हैं; तो जो कुछ उसके पास उपलब्ध हो उसे ज़बह करे : एक बकरी ज़बह करे अथवा एक ऊँट या गाय में सात आदमी शरीक हो जाएँ। यदि वह क़ुर्बानी न कर सके, तो उसके बदले ह़ज्ज के दिनों में तीन रोज़े रखे और सात रोज़े अपने घर वापस आने के बाद रखे, ताकि कुल दस दिन पूरे हो जाएँ। क़ुर्बानी अथवा उसकी शक्ति न होने की स्थिति में रोज़े की अनिवार्यता के साथ उम्रा का यह लाभ उठाना उस व्यक्ति के लिए है, जो ह़रम का निवासी और हरम के आस-पास रहने वाला न हो। तथा अल्लाह की शरीयत का अनुसरण करके और उसकी सीमाओं का सम्मान करके उससे डरो और जान लो कि अल्लाह अपने आदेशों का उल्लंघन करने वालों को कठोर दंड देने वाला है।

Al-Baqara 2:196Listen in Qur'an →
197

ٱلْحَجُّ أَشْهُرٌۭ مَّعْلُومَٰتٌۭ ۚ فَمَن فَرَضَ فِيهِنَّ ٱلْحَجَّ فَلَا رَفَثَ وَلَا فُسُوقَ وَلَا جِدَالَ فِى ٱلْحَجِّ ۗ وَمَا تَفْعَلُوا۟ مِنْ خَيْرٍۢ يَعْلَمْهُ ٱللَّهُ ۗ وَتَزَوَّدُوا۟ فَإِنَّ خَيْرَ ٱلزَّادِ ٱلتَّقْوَىٰ ۚ وَٱتَّقُونِ يَٰٓأُو۟لِى ٱلْأَلْبَٰبِ

हज के महीने तो (अब सब को) मालूम हैं (शव्वाल, ज़ीक़ादा, जिलहज) पस जो शख्स उन महीनों में अपने ऊपर हज लाज़िम करे तो (एहराम से आख़िर हज तक) न औरत के पास जाए न कोई और गुनाह करे और न झगडे और नेकी का कोई सा काम भी करों तो ख़ुदा उस को खूब जानता है और (रास्ते के लिए) ज़ाद राह मुहिय्या करो और सब मे बेहतर ज़ाद राह परहेज़गारी है और ऐ अक्लमन्दों मुझ से डरते रहो

ह़ज्ज का समय कुछ ज्ञात महीने हैं, जो शव्वाल के महीने से शुरू होते हैं और ज़ुल-ह़िज्जा के दस दिनों के साथ समाप्त हो जाते हैं। जो व्यक्ति इन महीनों में अपने आपको ह़ज्ज के लिए बाध्य कर ले और उसका एहराम बाँध ले; उसके लिए संभोग और संभोग पूर्व क्रीड़ाएँ ह़राम हैं। तथा समय और जगह की महानता के कारण, उसके लिए पाप करके अल्लाह के आज्ञापालन से निकलने का निषेध (दोष) बढ़ जाता है। इसी तरह उसके लिए ऐसी बहस (वाद-विवाद) में पड़ना भी हराम है, जो क्रोध और झगड़े की ओर ले जाती है। तथा तुम जो भी अच्छा कार्य करोगे, अल्लाह उसे जान लेगा और तुम्हें उसका बदला प्रदान करेगा। तथा खाने-पीने की ज़रूरत की चीजें लेकर ह़ज्ज की अदायगी में मदद हासिल करो और जान लो कि तुम्हारे सभी मामलों में तुम्हारी मदद के लिए सबसे अच्छी चीज़ अल्लाह का तक़्वा (डर) है। अतः ऐ स्वस्थ बुद्धि वालो! मेरी आज्ञाओं का पालन करके और मेरे निषेधों से बचकर मुझसे डरो।

Al-Baqara 2:197Listen in Qur'an →
198

لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَن تَبْتَغُوا۟ فَضْلًۭا مِّن رَّبِّكُمْ ۚ فَإِذَآ أَفَضْتُم مِّنْ عَرَفَٰتٍۢ فَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ عِندَ ٱلْمَشْعَرِ ٱلْحَرَامِ ۖ وَٱذْكُرُوهُ كَمَا هَدَىٰكُمْ وَإِن كُنتُم مِّن قَبْلِهِۦ لَمِنَ ٱلضَّآلِّينَ

इस में कोई इल्ज़ाम नहीं है कि (हज के साथ) तुम अपने परवरदिगार के फज़ल (नफ़ा तिजारत) की ख्वाहिश करो और फिर जब तुम अरफात से चल खड़े हो तो मशअरुल हराम के पास ख़ुदा का जिक्र करो और उस की याद भी करो तो जिस तरह तुम्हे बताया है अगरचे तुम इसके पहले तो गुमराहो से थे

ह़ज्ज के दौरान व्यापार और अन्य चीज़ों के माध्यम से ह़लाल जीविका की तलाश करने में तुमपर कोई पाप नहीं है। जब तुम ज़ुल-ह़िज्जा की नौ तारीख़ को अरफ़ा में ठहरने के बाद, दसवीं तारीख़ की रात को वहाँ से मुज़दलिफ़ा की ओर प्रस्थान करो; तो मुज़दलिफ़ा में मश्अरे ह़राम के पास तसबीह़ (सुब्ह़ानल्लाह), तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह) और दुआ करके अल्लाह को याद करो। तथा अल्लाह को इसलिए याद करो कि उसने अपने धर्म के स्थलों और अपने घर के ह़ज्ज के अनुष्ठानों के लिए तुम्हारा मार्गदर्शन किया, क्योंकि इससे पहले तुम उन लोगों में से थे जो उसकी शरीयत से अनजान थे।

Al-Baqara 2:198Listen in Qur'an →
199

ثُمَّ أَفِيضُوا۟ مِنْ حَيْثُ أَفَاضَ ٱلنَّاسُ وَٱسْتَغْفِرُوا۟ ٱللَّهَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ

फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम भी चल खड़े हो और उससे मग़फिरत की दुआ माँगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

फिर तुम अरफ़ात से वापस आओ, जैसे कि इबराहीम अलैहिस्सलाम का अनुसरण करने वाले लोग करते थे, उन जाहिलिय्यत के लोगों की तरह नहीं, जो यहाँ ठहरते ही नहीं थे। तथा तुम अल्लाह के आदेश का पालन करने में अपनी कोताही पर उससे क्षमा माँगो। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है।

Al-Baqara 2:199Listen in Qur'an →
200

فَإِذَا قَضَيْتُم مَّنَٰسِكَكُمْ فَٱذْكُرُوا۟ ٱللَّهَ كَذِكْرِكُمْ ءَابَآءَكُمْ أَوْ أَشَدَّ ذِكْرًۭا ۗ فَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِى ٱلدُّنْيَا وَمَا لَهُۥ فِى ٱلْءَاخِرَةِ مِنْ خَلَٰقٍۢ

फिर जब तुम अरक़ाने हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह ज़िक्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का ज़िक्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आख़िरत में उनका कुछ हिस्सा नहीं

जब तुम ह़ज्ज के कार्य पूरे कर लो और उनसे फारिग़ हो जाओ, तो अल्लाह को याद करो और उसकी अत्यधिक प्रशंसा करो, जैसे तुम अपने बाप-दादा पर गर्व और उनकी प्रशंसा किया करते थे, अथवा अल्लाह को अपने बाप-दादा को याद करने से कहीं बढ़कर याद करो। क्योंकि हर वह नेमत जिसका तुम आनंद ले रहे हो, वह अल्लाह ही की दी हुई है। इस विषय में लोग अलग-अलग प्रकार के हैं। उनमें से एक बहुदेववादी काफ़िर है, जो केवल इस सांसारिक जीवन पर विश्वास करता है। इसलिए वह अपने पालनहार से केवल संसार की नेमतों और उसकी शोभा, जैसे स्वास्थ्य, धन और संतान को माँगता है। ऐसे लोगों के लिए, उनके दुनिया की इच्छा रखने और आख़िरत से उपेक्षा करने के कारण, उसमें कोई हिस्सा नहीं है, जो अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के लिए आख़िरत में तैयार कर रखा है।

Al-Baqara 2:200Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.