فَمَنۢ بَدَّلَهُۥ بَعْدَمَا سَمِعَهُۥ فَإِنَّمَآ إِثْمُهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ يُبَدِّلُونَهُۥٓ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌۭ
फिर जो सुन चुका उसके बाद उसे कुछ का कुछ कर दे तो उस का गुनाह उन्हीं लोगों की गरदन पर है जो उसे बदल डालें बेशक ख़ुदा सब कुछ जानता और सुनता है
फिर जो व्यक्ति वसीयत के बारे में जानने के बाद, कोई वृद्धि या कमी करके या उसे रोककर वसीयत में बदलाव कर दे; तो उस परिवर्तन का पाप परिवर्तन करने वालों पर होगा, वसीयतकर्ता पर नहीं। निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला और उनके कार्यों को जानने वाला है। उनकी स्थितियों में से कोई चीज़ उससे छूटती नहीं है।