ٱتَّخَذُوٓا۟ أَحْبَارَهُمْ وَرُهْبَٰنَهُمْ أَرْبَابًۭا مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَٱلْمَسِيحَ ٱبْنَ مَرْيَمَ وَمَآ أُمِرُوٓا۟ إِلَّا لِيَعْبُدُوٓا۟ إِلَٰهًۭا وَٰحِدًۭا ۖ لَّآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ سُبْحَٰنَهُۥ عَمَّا يُشْرِكُونَ
उन लोगों ने तो अपने ख़ुदा को छोड़कर अपनी आलिमों को और अपने ज़ाहिदों को और मरियम के बेटे मसीह को अपना परवरदिगार बना डाला हालॉकि उन्होनें सिवाए इसके और हुक्म ही नहीं दिया गया कि ख़ुदाए यक़ता (सिर्फ़ ख़ुदा) की इबादत करें उसके सिवा (और कोई क़ाबिले परसतिश नहीं)
यहूदियों ने अपने विद्वानों और इसाइयों ने अपने पुजारियों को अल्लाह के अलावा रब बना लिए। वे उनके लिए उस चीज़ को हलाल करते हैं, जो अल्लाह ने उनपर हराम की है और उस चीज़ को उनपर हराम कर देते हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए हलाल की है। तथा ईसाइयों ने मरयम के पुत्र ईसा मसीह को अल्लाह के साथ पूज्य बना लिया। हालाँकि, अल्लाह ने यहूदियों के विद्वानों और ईसाइयों के पुजारियों को तथा उज़ैर और ईसा बिन मरयम को इसके सिवा कोई आदेश नहीं दिया था कि वे एक अल्लाह की इबादत करें और उसके साथ किसी चीज़ को शरीक न करें। क्योंकि वह सर्वशक्तिमान केवल एक पूज्य है, उसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। अल्लाह इस बात से पवित्र है कि उसका कोई साझी हो, जैसा कि इन मुश्रिकों तथा अन्य लोगों का दावा है।