لَّيْسَ عَلَى ٱلضُّعَفَآءِ وَلَا عَلَى ٱلْمَرْضَىٰ وَلَا عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يَجِدُونَ مَا يُنفِقُونَ حَرَجٌ إِذَا نَصَحُوا۟ لِلَّهِ وَرَسُولِهِۦ ۚ مَا عَلَى ٱلْمُحْسِنِينَ مِن سَبِيلٍۢ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ
(ऐ रसूल जिहाद में न जाने का) न तो कमज़ोरों पर कुछ गुनाह है न बीमारों पर और न उन लोगों पर जो कुछ नहीं पाते कि ख़र्च करें बशर्ते कि ये लोग ख़ुदा और उसके रसूल की ख़ैर ख्वाही करें नेकी करने वालों पर (इल्ज़ाम की) कोई सबील नहीं और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
महिलाओं, बच्चों, बीमारों, बुज़ुर्गों, अंधों और उन गरीबों पर जिनके पास युद्ध की तैयारी में खर्च करने को कुछ नहीं होता, इन सभी लोगों पर जिहाद में निकलने से पीछे रहने में कोई गुनाह नहीं है; क्योंकि उनके पास उचित बहाने मौजूद हैं, जबकि वे अल्लाह और उसके रसूल के प्रति निष्ठावान हों और उसकी शरीयत पर अमल करें। इन बहाने वालों में से भलाई करने वालों को दंडित करने के लिए कोई रास्ता नहीं है। और अल्लाह भलाई करने वालों के पापों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।