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7. Al-A'raaf

The Heights · Meccan · 206 ayahs

سُورَةُ الأَعۡرَافِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 51–60 of 206

51

ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُوا۟ دِينَهُمْ لَهْوًۭا وَلَعِبًۭا وَغَرَّتْهُمُ ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا ۚ فَٱلْيَوْمَ نَنسَىٰهُمْ كَمَا نَسُوا۟ لِقَآءَ يَوْمِهِمْ هَٰذَا وَمَا كَانُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا يَجْحَدُونَ

जिन लोगों ने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया था और दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी ने उनको फरेब दिया था तो हम भी आज (क़यामत में) उन्हें (क़सदन) भूल जाएगें

ये काफ़िर वही लोग हैं, जिन्होंने अपने धर्म को उपहास और मनोरंजन बना लिया और दुनिया के जीवन ने उन्हें अपने अलंकरण और शोभा से धोखे में डाल दिया। इसलिए क़ियामत के दिन अल्लाह उन्हें भुला देगा और उन्हें यातना भुगतने के लिए छोड़ देगा, जिस तरह वे क़ियामत के दिन की भेंट को भूल गए थे। जिसके कारण उन्होंने इसके लिए काम नहीं किया और तैयारी नहीं की। और इसलिए भी कि वे अल्लाह के तर्कों और प्रमाणों को नकारते तथा यह जानने के बावजूद कि वह सत्य है उसका इनकार करते थे।

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52

وَلَقَدْ جِئْنَٰهُم بِكِتَٰبٍۢ فَصَّلْنَٰهُ عَلَىٰ عِلْمٍ هُدًۭى وَرَحْمَةًۭ لِّقَوْمٍۢ يُؤْمِنُونَ

जिस तरह यह लोग (हमारी) आज की हुज़ूरी को भूलें बैठे थे और हमारी आयतों से इन्कार करते थे हालांकि हमने उनके पास (रसूल की मारफत किताब भी भेज दी है)

निश्चय हम उनके पास यह क़ुरआन लाए हैं, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारी गई एक किताब है। हमने उसे अपने ज्ञान के आधार पर स्पष्ट रूप से बयान किया है। यह किताब मोमिनों को धार्मिकता और सच्चाई के मार्ग पर ले जाने वाली है, तथा उनके लिए एक दया है क्योंकि इसमें दुनिया और आख़िरत की भलाई के बारे में मार्गदर्शन मौजूद है।

Al-A'raaf 7:52Listen in Qur'an →
53

هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا تَأْوِيلَهُۥ ۚ يَوْمَ يَأْتِى تَأْوِيلُهُۥ يَقُولُ ٱلَّذِينَ نَسُوهُ مِن قَبْلُ قَدْ جَآءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِٱلْحَقِّ فَهَل لَّنَا مِن شُفَعَآءَ فَيَشْفَعُوا۟ لَنَآ أَوْ نُرَدُّ فَنَعْمَلَ غَيْرَ ٱلَّذِى كُنَّا نَعْمَلُ ۚ قَدْ خَسِرُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَفْتَرُونَ

जिसे हर तरह समझ बूझ के तफसीलदार बयान कर दिया है (और वह) ईमानदार लोगों के लिए हिदायत और रहमत है क्या ये लोग बस सिर्फ अन्जाम (क़यामत ही) के मुन्तज़िर है (हालांकि) जिस दिन उसके अन्जाम का (वक्त) आ जाएगा तो जो लोग उसके पहले भूले बैठे थे (बेसाख्ता) बोल उठेगें कि बेशक हमारे परवरदिगार के सब रसूल हक़ लेकर आये थे तो क्या उस वक्त हमारी भी सिफरिश करने वाले हैं जो हमारी सिफारिश करें या हम फिर (दुनिया में) लौटाएं जाएं तो जो जो काम हम करते थे उसको छोड़कर दूसरें काम करें

काफ़िर लोग केवल उस दर्दनाक यातना के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके बारे में उन्हें बताया गया है और जो आख़िरत में उनका अंजाम होने वाले है। जिस दिन वह यातना आ जाएगी जिसके बारे में उन्हें बताया गया है और वह प्रतिफल भी सामने आ जाएगा जिसके बारे में ईमान वालों को बताया गया है, तो वे लोग जिन्होंने इस दुनिया में क़ुरआन को भुला दिया और उसके निर्देशों के अनुसार काम नहीं किया, कहेंगे : निश्चय हमारे रब के रसूल उस सच्चाई के साथ आए थे जिसमें कोई संदेह नहीं, और इसमें कोई संदेह नहीं कि यह अल्लाह की ओर से है। तो काश! हमारे लिए कोई मध्यस्थ होते जो हमारे लिए अल्लाह के पास सिफ़ारिश करते कि वह हमें यातना से मुक्त कर दे, या काश! हम दुनिया के जीवन में वापस भेज दिए जाते ताकि हम उन बुरे कामों के बजाय जो हम किया करते थे, अच्छे कर्म करके मोक्ष प्राप्त कर लेते। इन काफ़िरों ने अपने कुफ़्र के कारण अपने आपको विनाश के संसाधनों पर लाकर खुद को घाटे में डाल दिया, और जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा करते थे, वे उनसे लुप्त हो गए, इसलिए वे उनके कुछ भी काम न आए।

Al-A'raaf 7:53Listen in Qur'an →
54

إِنَّ رَبَّكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍۢ ثُمَّ ٱسْتَوَىٰ عَلَى ٱلْعَرْشِ يُغْشِى ٱلَّيْلَ ٱلنَّهَارَ يَطْلُبُهُۥ حَثِيثًۭا وَٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ وَٱلنُّجُومَ مُسَخَّرَٰتٍۭ بِأَمْرِهِۦٓ ۗ أَلَا لَهُ ٱلْخَلْقُ وَٱلْأَمْرُ ۗ تَبَارَكَ ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَٰلَمِينَ

बेशक उन लोगों ने अपना सख्त घाटा किया और जो इफ़तेरा परदाज़िया किया करते थे वह सब गायब (ग़ल्ला) हो गयीं बेशक तुम्हारा परवरदिगार ख़ुदा ही है जिसके (सिर्फ) 6 दिनों में आसमान और ज़मीन को पैदा किया फिर अर्श के बनाने पर आमादा हुआ वही रात को दिन का लिबास पहनाता है तो (गोया) रात दिन को पीछे पीछे तेज़ी से ढूंढती फिरती है और उसी ने आफ़ताब और माहताब और सितारों को पैदा किया कि ये सब के सब उसी के हुक्म के ताबेदार हैं

निःसंदेह (ऐ लोगो!) तुम्हारा रब वह अल्लाह है, जिसने आकाशों तथा धरती को बिना किसी पूर्व उदाहरण के छः दिनों में बनाया। फिर वह सर्वशक्तिमान अपनी महिमा के अनुरूप अर्श पर बुलंद हुआ, जिसकी कैफ़ियत (विवरण) हम नहीं जानते। वह दिन के उजाले से रात के अँधेरे को और रात के अँधेरे से दिन के उजाले को दूर करता है। रात और दिन में से प्रत्येक दूसरे के पीछे इस तरह तेज़ी से पहुँच जाता है कि उससे विलंब नहीं होता। एक गया कि दूसरा आ गया। तथा उस महिमावान ने सूरज बनाया, चाँद बनाया और सितारे बनाए, इस हाल में कि वे उसके आदेश के अधीन किए हुए हैं। सुन लो! सारी चीज़ों का पैदा करना केवल अल्लाह ही का काम है, तो क्या उसके अलावा भी कोई पैदा करने वाला है?! तथा केवल उसी का काम है आदेश देना। उसकी भलाई महान और उसका उपकार बहुत अधिक है। क्योंकि वह ऐश्वर्य और पूर्णता के गुणों से विशेषित है, जो सारे संसारों का पालनहार है।

Al-A'raaf 7:54Listen in Qur'an →
55

ٱدْعُوا۟ رَبَّكُمْ تَضَرُّعًۭا وَخُفْيَةً ۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلْمُعْتَدِينَ

देखो हुकूमत और पैदा करना बस ख़ास उसी के लिए है वह ख़ुदा जो सारे जहाँन का परवरदिगार बरक़त वाला है

(ऐ ईमान वालो!) अपने रब को पूरी विनम्रता के साथ और गुप्त रूप से पुकारो, निष्ठावान होकर केवल उसी से दुआ करो, दिखावा करने वाले या दुआ में उसके साथ किसी को साझी करने वाले न हो। निःसंदेह वह उन लोगों को पसंद नहीं करता, जो दुआ में उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, और दुआ में उसकी सीमाओं का सबसे बड़ा उल्लंघन उसके साथ किसी अन्य को पुकारना है, जैसा कि बहुदेववादी करते हैं।

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56

وَلَا تُفْسِدُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ بَعْدَ إِصْلَٰحِهَا وَٱدْعُوهُ خَوْفًۭا وَطَمَعًا ۚ إِنَّ رَحْمَتَ ٱللَّهِ قَرِيبٌۭ مِّنَ ٱلْمُحْسِنِينَ

(लोगों) अपने परवरदिगार से गिड़गिड़ाकर और चुपके - चुपके दुआ करो, वह हद से तजाविज़ करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता और ज़मीन में असलाह के बाद फसाद न करते फिरो और (अज़ाब) के ख़ौफ से और (रहमत) की आस लगा के ख़ुदा से दुआ मांगो

तथा पाप करके धरती में बिगाड़ न फैलाओ, जबकि अल्लाह ने रसूलों को भेजकर और उसे केवल अपनी आज्ञाकारिता के साथ आबाद करके उसे सुधारा है। और केवल अल्लाह को पुकारो, उसकी सज़ा से डर महसूस करते हुए, और उसके प्रतिफल के प्राप्त होने की प्रतीक्षा करते हुए। निःसंदेह अल्लाह की दया अच्छे कर्म करने वालों के क़रीब है, अतः तुम भी उन्हीं में शामिल हो जाओ।

Al-A'raaf 7:56Listen in Qur'an →
57

وَهُوَ ٱلَّذِى يُرْسِلُ ٱلرِّيَٰحَ بُشْرًۢا بَيْنَ يَدَىْ رَحْمَتِهِۦ ۖ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَقَلَّتْ سَحَابًۭا ثِقَالًۭا سُقْنَٰهُ لِبَلَدٍۢ مَّيِّتٍۢ فَأَنزَلْنَا بِهِ ٱلْمَآءَ فَأَخْرَجْنَا بِهِۦ مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ ۚ كَذَٰلِكَ نُخْرِجُ ٱلْمَوْتَىٰ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ

(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले

और अल्लाह ही है जो बारिश की शुभ सूचना देने वाली हवाओं को भेजता है, यहाँ तक कि जब हवाएँ पानी से लदे बादल को उठाती हैं, तो हम बादल को किसी बंजर भूमि की ओर ले जाते हैं। फिर हम उस भूमि पर पानी बरसाते हैं। फिर पानी से सभी प्रकार के कुछ फल पैदा करते हैं। इस रूप से फल को निकालने के समान ही, हम मृतकों को उनकी कब्रों से जीवित करके निकालेंगे। हमने ऐसा इस आशा में किया है कि (ऐ लोगो!) तुम अल्लाह की शक्ति और उसके अद्भुत कार्य को याद रखो, और यह कि वह मरे हुओं को पुनर्जीवित करने में सक्षम है।

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58

وَٱلْبَلَدُ ٱلطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُۥ بِإِذْنِ رَبِّهِۦ ۖ وَٱلَّذِى خَبُثَ لَا يَخْرُجُ إِلَّا نَكِدًۭا ۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ ٱلْءَايَٰتِ لِقَوْمٍۢ يَشْكُرُونَ

हम यूं ही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है

अच्छी भूमि अल्लाह की अनुमति से अपने पौधे अच्छे और पूर्ण रूप से निकालती है। यही हाल ईमान वाले का है, वह उपदेश को सुनता और उससे लाभ उठाता है, जिसके परिणामस्वरूप वह अच्छे कार्य करता है। जबकि दलदली और खारी भूमि अपना पौधा कठिनाई से निकालती है, जिसमें कोई अच्छाई नहीं होती। यही हाल काफ़िर का है, वह उपदेशों से लाभ नहीं उठाता है, इसलिए उसके परिणामस्वरूप वह नेक कार्य नहीं करता है, जिससे उसे लाभ प्राप्त हो। इस अद्भुत विविधीकरण की तरह, हम उन लोगों के लिए सत्य को साबित करने के लिए प्रमाणों और तर्कों में विविधता लाते हैं, जो अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करते हैं। इसलिए वे उनकी नाशुक्री नहीं करते हैं, और अपने रब की आज्ञा का पालन करते हैं।

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59

لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦ فَقَالَ يَٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُۥٓ إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍۢ

हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ

निःसंदेह हमने नूह को उनकी जाति की ओर रसूल बनाकर भेजा, जो उन्हें अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसके अलावा की पूजा छोड़ने के लिए बुला रहे थे। चुनाँचे उन्होंने अपनी जाति से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो, क्योंकि उसके सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं है। निश्चय मुझे तुमपर एक महान दिन की यातना का डर है, यदि तुम अपने कुफ़्र पर अड़े रहे।

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60

قَالَ ٱلْمَلَأُ مِن قَوْمِهِۦٓ إِنَّا لَنَرَىٰكَ فِى ضَلَٰلٍۢ مُّبِينٍۢ

तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो यक़ीनन देखते हैं कि तुम खुल्लम खुल्ला गुमराही में (पड़े) हो

उनकी जाति के सरदारों और प्रमुखों ने उनसे कहा : निःसंदेह (ऐ नूह!) हम तुम्हें सत्य से स्पष्ट दूरी पर देख रहे हैं।

Al-A'raaf 7:60Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.