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7. Al-A'raaf

The Heights · Meccan · 206 ayahs

سُورَةُ الأَعۡرَافِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 41–50 of 206

41

لَهُم مِّن جَهَنَّمَ مِهَادٌۭ وَمِن فَوْقِهِمْ غَوَاشٍۢ ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلظَّٰلِمِينَ

और उनके ऊपर से (आग ही का) ओढ़ना भी और हम ज़ालिमों को ऐसी ही सज़ा देते हैं और जिन लोगों ने ईमान कुबुल किया

इन अहंकारी झुठलाने वालों के लिए जहन्नम ही का बिछौना होगा और उनके ऊपर आग के ओढ़ने (कंबल) होंगे। इसी तरह का बदला हम उन लोगों को देते हैं, जो अल्लाह का इनकार करके और उससे मुँह मोड़कर उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।

Al-A'raaf 7:41Listen in Qur'an →
42

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَا نُكَلِّفُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَآ أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَٰلِدُونَ

और अच्छे अच्छे काम किये और हम तो किसी शख्स को उसकी ताकत से ज्यादा तकलीफ देते ही नहीं यहीं लोग जन्नती हैं कि वह हमेशा जन्नत ही में रहा (सहा) करेगें

और जो लोग अपने रब पर ईमान लाए और जितना हो सका अच्छे कर्म किए - और अल्लाह किसी आत्मा पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालता - वही जन्नत वाले हैं, जो उसमें प्रवेश करके हमेशा के लिए उसी में रहेंगे।

Al-A'raaf 7:42Listen in Qur'an →
43

وَنَزَعْنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهِمُ ٱلْأَنْهَٰرُ ۖ وَقَالُوا۟ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى هَدَىٰنَا لِهَٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِىَ لَوْلَآ أَنْ هَدَىٰنَا ٱللَّهُ ۖ لَقَدْ جَآءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِٱلْحَقِّ ۖ وَنُودُوٓا۟ أَن تِلْكُمُ ٱلْجَنَّةُ أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

और उन लोगों के दिल में जो कुछ (बुग़ज़ व कीना) होगा वह सब हम निकाल (बाहर कर) देगें उनके महलों के नीचे नहरें जारी होगीं और कहते होगें शुक्र है उस ख़ुदा का जिसने हमें इस (मंज़िले मक़सूद) तक पहुंचाया और अगर ख़ुदा हमें यहाँ न पहुंचाता तो हम किसी तरह यहाँ न पहुंच सकते बेशक हमारे परवरदिगार के पैग़म्बर दीने हक़ लेकर आये थे और उन लोगों से पुकार कर कह दिया जाएगा कि वह बेहिश्त हैं जिसके तुम अपनी कारग़ुज़ारियों की जज़ा में वारिस व मालिक बनाए गये हों

जन्नत में उनके आनंद की पूर्णता में से एक यह है कि अल्लाह उनके दिलों में जो भी द्वेष और ईर्ष्या होगी निकालकर दूर कर देगा और उनके नीचे से नहरें जारी कर देगा। तथा वे अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को स्वीकार करते हुए कहेंगे : हर प्रकार की स्तुति अल्लाह के लिए है, जिसने हमें इस नेक कार्य की तौफ़ीक़ दी जिसके कारण हमें यह स्थान प्राप्त हुआ। तथा हम अपने दम पर इसमें सफल नहीं हो सकते थे, यदि ऐसा न होता कि अल्लाह ने हमें उसकी ओर मार्गदर्शन किया। निश्चय हमारे रब के रसूल निर्विवाद सत्य तथा वा'दे और वईद (धमकी) में सच्चाई के साथ आए, और एक पुकारने वाला उनके बीच पुकारकर कहेगा : यही वही जन्नत है जिसके बारे में मेरे रसूलों ने तुम्हें दुनिया में बताया था। यह जन्नत अल्लाह ने तुम्हें उन नेक कामों के बदले में दी है जो तुम करते थे, जिनसे तुम अल्लाह की प्रसन्नता चाहते थे।

Al-A'raaf 7:43Listen in Qur'an →
44

وَنَادَىٰٓ أَصْحَٰبُ ٱلْجَنَّةِ أَصْحَٰبَ ٱلنَّارِ أَن قَدْ وَجَدْنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقًّۭا فَهَلْ وَجَدتُّم مَّا وَعَدَ رَبُّكُمْ حَقًّۭا ۖ قَالُوا۟ نَعَمْ ۚ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنٌۢ بَيْنَهُمْ أَن لَّعْنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّٰلِمِينَ

और जन्नती लोग जहन्नुमी वालों से पुकार कर कहेगें हमने तो बेशक जो हमारे परवरदिगार ने हमसे वायदा किया था ठीक ठीक पा लिया तो क्या तुमने भी जो तुमसे तम्हारे परवरदिगार ने वायदा किया था ठीक पाया (या नहीं) अहले जहन्नुम कहेगें हाँ (पाया) एक मुनादी उनके दरमियान निदा करेगा कि ज़ालिमों पर ख़ुदा की लानत है

जब जन्नत वाले जन्नत में और जहन्नम वाले जहन्नम में चले जाएँगे, तो जन्नत के निवासी जहन्नम वालों को आवाज़ देंगे : हमारे रब ने हमसे जिस जन्नत का वादा किया था, निश्चय हमने उसे सच्चा व सिद्ध पाया और हम उसमें प्रवेश पा चुके हैं। तो क्या (ऐ काफ़िरों!) अल्लाह ने तुम्हें जिस जहन्नम की धमकी दी थी तुमने उसको सच्चा व सिद्ध पाया? काफिर कहेंगे : वास्तव में, हमने भी उसे सच्चा पाया जो उसने हमें जहन्नम की धमकी दी थी। फिर एक आवाज़ देने वाला अल्लाह से दुआ करते हुए आवाज़ देगा कि अल्लाह ज़ालिमों को अपनी दया से दूर कर दे। क्योंकि उसने दुनिया के जीवन में उनके लिए अपनी दया के द्वार खोल दिए, परंतु उन्होंने उससे मुँह फेर लिया।

Al-A'raaf 7:44Listen in Qur'an →
45

ٱلَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًۭا وَهُم بِٱلْءَاخِرَةِ كَٰفِرُونَ

जो ख़ुदा की राह से लोगों को रोकते थे और उसमें (ख्वामख्वाह) कज़ी (टेढ़ापन) करना चाहते थे और वह रोज़े आख़ेरत से इन्कार करते थे

ये ज़ालिम वही हैं, जो खुद भी अल्लाह की राह से दूर रहते थे और दूसरों को भी उससे दूर कर रहे थे, और आशा करते थे कि सत्य का रास्ता टेढ़ा हो जाए, ताकि लोग उसपर न चलें, तथा ये लोग आख़िरत का इनकार करने वाले हैं, उसके लिए तैयारी करने वाले नहीं हैं।

Al-A'raaf 7:45Listen in Qur'an →
46

وَبَيْنَهُمَا حِجَابٌۭ ۚ وَعَلَى ٱلْأَعْرَافِ رِجَالٌۭ يَعْرِفُونَ كُلًّۢا بِسِيمَىٰهُمْ ۚ وَنَادَوْا۟ أَصْحَٰبَ ٱلْجَنَّةِ أَن سَلَٰمٌ عَلَيْكُمْ ۚ لَمْ يَدْخُلُوهَا وَهُمْ يَطْمَعُونَ

और बेहश्त व दोज़ख के दरमियान एक हद फ़ासिल है और कुछ लोग आराफ़ पर होगें जो हर शख्स को (बेहिश्ती हो या जहन्नुमी) उनकी पेशानी से पहचान लेगें और वह जन्नत वालों को आवाज़ देगें कि तुम पर सलाम हो या (आराफ़ वाले) लोग अभी दाख़िले जन्नत नहीं हुए हैं मगर वह तमन्ना ज़रूर रखते हैं

इन दो समूहों : जन्नत के निवासियों तथा दोज़ख के निवासियों के बीच एक ऊँची आड़ होगी, जिसका नाम 'आराफ़' है, और इस ऊँची आड़ पर वे लोग होंगे जिनके अच्छे और बुरे कर्म बराबर होंगे। वे जन्नतियों को उनके लक्षणों, जैसे कि उनके चेहरे की सफेदी से, तथा जहन्नमियों को उनके लक्षणों, जैसे कि उनके चेहरों के कालेपन से पहचान लेंगे। ये लोग जन्नत वालों को उनके सम्मान में आवाज़ देकर कहेंगे : "तुम पर शांति हो"। 'आराफ़' वाले अभी जन्नत में दाखिल नहीं हुए होंगे और वे अल्लाह की दया से उसमें प्रवेश करने की आशा रखते होंगे।

Al-A'raaf 7:46Listen in Qur'an →
47

۞ وَإِذَا صُرِفَتْ أَبْصَٰرُهُمْ تِلْقَآءَ أَصْحَٰبِ ٱلنَّارِ قَالُوا۟ رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ ٱلْقَوْمِ ٱلظَّٰلِمِينَ

और जब उनकी निगाहें पलटकर जहन्नुमी लोगों की तरफ जा पड़ेगीं (तो उनकी ख़राब हालत देखकर ख़ुदा से अर्ज़ करेगें) ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना

और जब 'आराफ़' वालों की निगाहें आग वालों की ओर फेरी जाएँगी और वे उनकी गंभीर यातना को देखेंगे, तो अल्लाह से प्रार्थना करते हुए कहेंगे : ऐ हमारे रब! हमें कुफ़्र एवं शिर्क करने वाले इन ज़ालिमों के साथ मत कर।

Al-A'raaf 7:47Listen in Qur'an →
48

وَنَادَىٰٓ أَصْحَٰبُ ٱلْأَعْرَافِ رِجَالًۭا يَعْرِفُونَهُم بِسِيمَىٰهُمْ قَالُوا۟ مَآ أَغْنَىٰ عَنكُمْ جَمْعُكُمْ وَمَا كُنتُمْ تَسْتَكْبِرُونَ

और आराफ वाले कुछ (जहन्नुमी) लोगों को जिन्हें उनका चेहरा देखकर पहचान लेगें आवाज़ देगें और और कहेगें अब न तो तुम्हारा जत्था ही तुम्हारे काम आया और न तुम्हारी शेखी बाज़ी ही (सूद मन्द हुई)

और 'आराफ़' वाले काफ़िरों में से कुछ नरकवासी लोगों को, जिन्हें वे उनके लक्षणों, जैसे कि उनके चेहरे के कालेपन और उनकी आँखों के नीलेपन से पहचानते होंगे, आवाज़ देकर कहेंगे : तुम्हारा धन और संख्या में बहुत अधिक होना तुम्हारे कुछ काम न आया, और न ही अभिमान और अहंकार में तुम्हारे सत्य से मुँह फेर लेने से तुम्हें कुछ फायदा हुआ।

Al-A'raaf 7:48Listen in Qur'an →
49

أَهَٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ أَقْسَمْتُمْ لَا يَنَالُهُمُ ٱللَّهُ بِرَحْمَةٍ ۚ ٱدْخُلُوا۟ ٱلْجَنَّةَ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمْ وَلَآ أَنتُمْ تَحْزَنُونَ

जो तुम दुनिया में किया करते थे यही लोग वह हैं जिनकी निस्बत तुम कसमें खाया करते थे कि उन पर ख़ुदा (अपनी) रहमत न करेगा (देखो आज वही लोग हैं जिनसे कहा गया कि बेतकल्लुफ) बेहश्त में चलो जाओ न तुम पर कोई खौफ है और न तुम किसी तरह आर्ज़ुदा ख़ातिर परेशानी होगी

और अल्लाह काफ़िरों को फटकार लगाते हुए कहेगा : क्या ये वही लोग हैं, जिनके बारे में तुमने क़सम खाई थी कि अल्लाह उन्हें अपने पास से कोई दया प्रदान नहीं करेगा?! तथा अल्लाह मोमिनों से कहेगा : (ऐ मोमिनो!) जन्नत में प्रवेश कर जाओ। न तुम्हें आगे कोई डर है और न ही तुम दुनिया के छूटे हुए आनंद पर शोक करोगे; क्योंकि तुम्हें शाश्वत आनंद प्राप्त हो चुका है।

Al-A'raaf 7:49Listen in Qur'an →
50

وَنَادَىٰٓ أَصْحَٰبُ ٱلنَّارِ أَصْحَٰبَ ٱلْجَنَّةِ أَنْ أَفِيضُوا۟ عَلَيْنَا مِنَ ٱلْمَآءِ أَوْ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ ۚ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى ٱلْكَٰفِرِينَ

और दोज़ख वाले अहले बेहिश्त को (लजाजत से) आवाज़ देगें कि हम पर थोड़ा सा पानी ही उंडेल दो या जो (नेअमतों) खुदा ने तुम्हें दी है उसमें से कुछ (दे डालो दो तो अहले बेहिश्त जवाब में) कहेंगें कि ख़ुदा ने तो जन्नत का खाना पानी काफिरों पर कतई हराम कर दिया है

नरक वाले जन्नत के निवासियों को आवाज़ देकर उनसे याचना करते हुए कहेंगे : (ऐ जन्नत वालो!) हमपर थोड़ा-सा पानी बहा दो, अथवा उस खाने में से कुछ (दे दो) जो अल्लाह ने तुम्हें प्रदान किया है। जन्नत वाले जवाब देंगे : अल्लाह ने ये दोनों चीज़ें काफ़िरों पर उनके कुफ़्र के कारण हराम कर दी हैं और हम उस चीज़ के साथ तुम्हारी कदापि मदद नहीं करेंगे जो अल्लाह ने तुमपर हराम कर दी है।

Al-A'raaf 7:50Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.