قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ
और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए
जादूगरों ने कहा : हम सारी सृष्टि के पालनहार पर ईमान लाए।
سُورَةُ الأَعۡرَافِ
Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies
Ayahs 121–130 of 206
قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ
और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए
जादूगरों ने कहा : हम सारी सृष्टि के पालनहार पर ईमान लाए।
رَبِّ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ
जो मूसा व हारून का परवरदिगार है
मूसा तथा हारून अलैहिमस्सलाम के पालनहार पर, क्योंकि वही उपासना का हक़दार है। उसके सिवा अन्य तथाकथित पूज्य उपासना के हक़दार नहीं हैं।
قَالَ فِرْعَوْنُ ءَامَنتُم بِهِۦ قَبْلَ أَنْ ءَاذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَمَكْرٌۭ مَّكَرْتُمُوهُ فِى ٱلْمَدِينَةِ لِتُخْرِجُوا۟ مِنْهَآ أَهْلَهَا ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
फिरऔन ने कहा (हाए) तुम लोग मेरी इजाज़त के क़ब्ल (पहले) उस पर ईमान ले आए ये ज़रूर तुम लोगों की मक्कारी है जो तुम लोगों ने उस शहर में फैला रखी है ताकि उसके बाशिन्दों को यहाँ से निकाल कर बाहर करो पस तुम्हें अन क़रीब ही उस शरारत का मज़ा मालूम हो जाएगा
जब वे एक अल्लाह पर ईमान ले आए, तो फ़िरऔन ने उन्हें धमकी देते हुए कहा : मेरी अनुमति से पहले ही तुमने मूसा को सच्चा मान लिया? निश्चय तुम्हारा मूसा पर ईमान लाना और उसके लाए हुए धर्म को सत्य मानना एक धोखा और साज़िश है, जो तुमने और मूसा ने इस नगर के निवासियों को यहाँ से निकालने के लिए रची है। तो (ऐ जादूगरो!) तुम्हें शीघ्र ही पता चल जाएगा कि तुम्हें कैसी सज़ा और यातना का सामना करना पड़ता है।
لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَٰفٍۢ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ
मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी तरफ के पॉव कटवा डालूंगा फिर तुम सबके सब को सूली दे दूंगा
मैं अवश्य तुममें से प्रत्येक व्यक्ति का दाहिना हाथ और बायाँ पैर, या उसका बायाँ हाथ और दाहिना पैर काट दूँगा। फिर मैं तुम सभी को खजूर के पेड़ के तने पर लटका दूँगा। ऐसा तुम्हें भयंकर सज़ा देने और इस स्थिति में तुम्हें देखने वाले सभी लोगों को डराने के लिए किया जाएगा।
قَالُوٓا۟ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
जादूगर कहने लगे हम को तो (आख़िर एक रोज़) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना (मर जाना) है
जादूगरों ने फिरऔन की धमकी के जवाब में कहा : निश्चय हम अकेले अपने पालनहार ही की ओर लौटने वाले हैं। इसलिए हमें तुम्हारी धमकी की परवाह नहीं है।
وَمَا تَنقِمُ مِنَّآ إِلَّآ أَنْ ءَامَنَّا بِـَٔايَٰتِ رَبِّنَا لَمَّا جَآءَتْنَا ۚ رَبَّنَآ أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًۭا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
तू हमसे उसके सिवा और काहे की अदावत रखता है कि जब हमारे पास ख़ुदा की निशानियाँ आयी तो हम उन पर ईमान लाए (और अब तो हमारी ये दुआ है कि) ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा)
और तुम्हारे निकट (ऐ फिरऔन!) हमारा दोष केवल यह है कि हमने अपने रब की निशानियों को सत्य मान लिया, जब वे मूसा अलैहिसल्लाम के हाथ पर हमारे पास आईं। यदि यह कोई दोष दिया जाने वाला पाप है, तो यह हमारा पाप है। फिर वे विनयपूर्वक अपने रब से दुआ करने लगे : ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उड़ेल दे, ताकि हम सत्य पर अडिग रहें। तथा हमें इस हाल में मौत दे कि हम तेरे प्रति समर्पित हों, तेरे आदेश का पालन करने वाले तथा तेरे रसूल का अनुसरण करने वाले हों।
وَقَالَ ٱلْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ أَتَذَرُ مُوسَىٰ وَقَوْمَهُۥ لِيُفْسِدُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ وَيَذَرَكَ وَءَالِهَتَكَ ۚ قَالَ سَنُقَتِّلُ أَبْنَآءَهُمْ وَنَسْتَحْىِۦ نِسَآءَهُمْ وَإِنَّا فَوْقَهُمْ قَٰهِرُونَ
और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले और फिरऔन की क़ौम के चन्द सरदारों ने (फिरऔन) से कहा कि क्या आप मूसा और उसकी क़ौम को उनकी हालत पर छोड़ देंगे कि मुल्क में फ़साद करते फिरे और आपके और आपके ख़ुदाओं (की परसतिश) को छोड़ बैठें- फिरऔन कहने लगा (तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब ही उनके बेटों की क़त्ल करते हैं और उनकी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते) जिन्दा रखते हैं और हम तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं
फ़िरऔन की जाति के प्रमुखों और बड़े लोगों ने, उसे मूसा तथा उनके साथ मोमिनों के खिलाफ भड़काते हुए कहा : क्या (ऐ फ़िरऔन!) तुम मूसा और उसकी जाति को छोड़े रखोगे कि वे देश में बिगाड़ फैलाएँ, तथा वे तुमसे और तुम्हारे पूज्यों से किनारा कर लें और (लोगों को) अकेले अल्लाह की इबादत की ओर बुलाएँ?! फ़िरऔन ने कहा : हम बनी इसराईल के बेटों को मार डालेंगे, और उनकी स्त्रियों को सेवा करने के लिए बाक़ी रखेंगे। और निश्चय हमें उनपर ज़ोर, ग़लबा और प्रभुत्व प्राप्त है।
قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ ٱسْتَعِينُوا۟ بِٱللَّهِ وَٱصْبِرُوٓا۟ ۖ إِنَّ ٱلْأَرْضَ لِلَّهِ يُورِثُهَا مَن يَشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦ ۖ وَٱلْعَٰقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَ
(ये सुनकर) मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि (भाइयों) ख़ुदा से मदद माँगों और सब्र करो सारी ज़मीन तो ख़ुदा ही की है वह अपने बन्दों में जिसकी चाहे उसका वारिस (व मालिक) बनाए और ख़ातमा बिल ख़ैर तो सब परहेज़गार ही का है
मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति के लोगों को वसीयत करते हुए कहा : ऐ लोगों! केवल एक अल्लाह से सहायता माँगो कि वह तुम्हारी मुसीबत दूर कर दे तथा तुम्हें लाभ पहुँचाए, और जिस आज़माइश से तुम पीड़ित हो, उसपर धैर्य रखो। क्योंकि यह धरती अकेले अल्लाह की है। फ़िरऔन या उसके सिवा किसी और की नहीं कि वह उसमें जो चाहे, करता फिरे। अल्लाह अपनी इच्छा अनुसार लोगों को बारी-बारी उसमें अवसर देता रहता है। लेकिन धरती पर अच्छा परिणाम केवल उन ईमान वालों के लिए है, जो अपने पालनहार के आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं। अंततः यह उन्हीं के लिए है, यद्यपि उन्हें कुछ आज़माइशों और परीक्षाओं से गुज़रना पड़े।
قَالُوٓا۟ أُوذِينَا مِن قَبْلِ أَن تَأْتِيَنَا وَمِنۢ بَعْدِ مَا جِئْتَنَا ۚ قَالَ عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يُهْلِكَ عَدُوَّكُمْ وَيَسْتَخْلِفَكُمْ فِى ٱلْأَرْضِ فَيَنظُرَ كَيْفَ تَعْمَلُونَ
वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) तुम्हारे आने के क़ब्ल (पहले) ही से और तुम्हारे आने के बाद भी हम को तो बराबर तकलीफ ही पहुँच रही है (आख़िर कहाँ तक सब्र करें) मूसा ने कहा अनकरीब ही तुम्हारा परवरदिगार तुम्हारे दुश्मन को हलाक़ करेगा और तुम्हें (उसका जानशीन) बनाएगा फिर देखेगा कि तुम कैसा काम करते हो
मूसा अलैहिस्सलाम की जाति बनी इसराईल ने उनसे कहा : हम तुम्हारे आने से पहले भी फ़िरऔन के हाथों सताए गए। वह हमारे पुत्रों को मार देता और हमारी स्त्रियों को जीवित रहने देता था। और तुम्हारे आने के पश्चात् भी सताए जा रहे हैं! मूसा अलैहिस्सलाम ने उन्हें समझाते हुए और मुसीबत से छुटकारे की खुशख़बरी देते हुए कहा : निकट है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारे शत्रु फिरऔन तथा उसकी जाति को विनष्ट कर दे और उनके बाद धरती में तुम्हारा आधिपत्य क़ायम कर दे, और फिर देखे कि तुम उसके बाद क्या करते हो, शुक्र या नाशुक्री?
وَلَقَدْ أَخَذْنَآ ءَالَ فِرْعَوْنَ بِٱلسِّنِينَ وَنَقْصٍۢ مِّنَ ٱلثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ
और बेशक हमने फिरऔन के लोगों को बरसों से कहत और फलों की कम पैदावार (के अज़ाब) में गिरफ्तार किया ताकि वह इबरत हासिल करें
हमने फ़िरऔन की जाति को सूखे और अकाल से दंडित किया, तथा हमने उनका धरती के फलों और उसकी पैदावार की कमी के साथ परीक्षण किया। इस आशा में कि वे सीख और उपदेश ग्रहण करें कि उनके साथ यह जो कुछ घटित हुआ है, वह उनके कुफ़्र की सज़ा के तौर पर है, इसलिए वे अल्लाह के सामने तौबा कर लें।
Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.