تِلْكَ ٱلْقُرَىٰ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنۢبَآئِهَا ۚ وَلَقَدْ جَآءَتْهُمْ رُسُلُهُم بِٱلْبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُوا۟ لِيُؤْمِنُوا۟ بِمَا كَذَّبُوا۟ مِن قَبْلُ ۚ كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلْكَٰفِرِينَ
(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियाँ हैं जिन के हालात हम तुमसे बयान करते हैं और इसमें तो शक़ ही नहीं कि उनके पैग़म्बर उनके पास वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर आए मगर ये लोग जिसके पहले झुठला चुके थे उस पर भला काहे को ईमान लाने वाले थे ख़ुदा यूं काफिरों के दिलों पर अलामत मुकर्रर कर देता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
ये पिछली बस्तियाँ हैं (अर्थात नूह, हूद, सालेह, लूत और शुऐब अलैहिमुस्सलाम की बस्तियाँ), जिनकी खबरें और उनके झुठलाने तथा हठधर्मी की दास्तानें और उनके विनाश का विवरण हम आपको सुना रहे हैं, ताकि यह शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए एक शिक्षा और नसीहत हासिल करने वालों के लिए एक नसीहत हो। इन बस्तियों वालों के पास उनके रसूल अपने सच्चे रसूल होने के स्पष्ट प्रमाण लेकर आए थे, परंतु उनसे यह न हो सका कि जब रसूल आ गए, तो उन्हें मान लेते, क्योंकि यह बात पहले ही से अल्लाह के ज्ञान में थी कि वे उन्हें झुठला देंगे। जिस तरह इन बस्तियों वालों के दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी थी, वैसे ही अल्लाह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने वालों के दिलों पर भी मुहर लगा देगा, फिर वे ईमान की राह प्राप्त नहीं कर सकेंगे।