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6. Al-An'aam

The Cattle · Meccan · 165 ayahs

سُورَةُ الأَنۡعَامِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 101–110 of 165

101

بَدِيعُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ أَنَّىٰ يَكُونُ لَهُۥ وَلَدٌۭ وَلَمْ تَكُن لَّهُۥ صَٰحِبَةٌۭ ۖ وَخَلَقَ كُلَّ شَىْءٍۢ ۖ وَهُوَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌۭ

सारे आसमान और ज़मीन का मवविद (बनाने वाला) है उसके कोई लड़का क्योंकर हो सकता है जब उसकी कोई बीबी ही नहीं है और उसी ने हर चीज़ को पैदा किया और वही हर चीज़ से खूब वाक़िफ है

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान आकाशों तथा धरती को बिना किसी पूर्व उदाहरण के बनाने वाला है। उसकी संतान कैसे होगी, जबकि उसकी कोई पत्नी ही नहीं?! तथा उसी ने सब कुछ पैदा किया है और वह हर चीज़ का ज्ञान रखने वाला है, कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है।

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102

ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمْ ۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ خَٰلِقُ كُلِّ شَىْءٍۢ فَٱعْبُدُوهُ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ وَكِيلٌۭ

(लोगों) वही अल्लाह तुम्हारा परवरदिगार है उसके सिवा कोई माबूद नहीं वही हर चीज़ का पैदा करने वाला है तो उसी की इबादत करो और वही हर चीज़ का निगेह बान है

(ऐ लोगो!) यह अल्लाह, जो इन गुणों से विशेषित हैं, वही तुम्हारा रब है। अतः उसके अलावा तुम्हारा कोई रब नहीं, और न ही उसके अलावा कोई सच्चा पूज्य है। तथा वही हर चीज़ का अविष्कारक है। इसलिए केवल उसी की इबादत करो। क्योंकि वही इबादत के योग्य है और वह हर चीज़ का संरक्षक है।

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103

لَّا تُدْرِكُهُ ٱلْأَبْصَٰرُ وَهُوَ يُدْرِكُ ٱلْأَبْصَٰرَ ۖ وَهُوَ ٱللَّطِيفُ ٱلْخَبِيرُ

उसको ऑंखें देख नहीं सकती (न दुनिया में न आख़िरत में) और वह (लोगों की) नज़रों को खूब देखता है और वह बड़ा बारीक बीन (देख़ने वाला) ख़बरदार है

उसे निगाहें नहीं पातीं, परंतु वह महिमावान सब निगाहों को पाता है और उन्हें घेरे हुए है। तथा वह अपने नेक बंदों के प्रति दयालु, उनकी ख़बर रखने वाला है।

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104

قَدْ جَآءَكُم بَصَآئِرُ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَنْ عَمِىَ فَعَلَيْهَا ۚ وَمَآ أَنَا۠ عَلَيْكُم بِحَفِيظٍۢ

तुम्हारे पास तो सुझाने वाली चीज़े आ ही चुकीं फिर जो देखे (समझे) तो अपने दम के लिए और जो अन्धा बने तो (उसका ज़रर (नुकसान) भी) ख़ुद उस पर है और (ऐ रसूल उन से कह दो) कि मै तुम लोगों का कुछ निगेहबान तो हूँ नहीं

(ऐ लोगो!) तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से स्पष्ट तर्क और खुले प्रमाण आ चुके हैं। तो जिसने उन्हें समझा और मान लिया, तो उसका लाभ उसी को मिलेगा, और जो उनसे अंधा बन गया, न उन्हें समझा और न उन्हें स्वीकार किया, तो उसका नुकसान उसी तक सीमित है। और मैं तुमपर कोई निगरानी करने वाला नहीं हूँ कि तुम्हारे कार्यों की गणना करूँ। मैं तो केवल अपने रब की ओर से एक रसूल हूँ, और वही तुम्हारा निरीक्षक है।

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105

وَكَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ ٱلْءَايَٰتِ وَلِيَقُولُوا۟ دَرَسْتَ وَلِنُبَيِّنَهُۥ لِقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ

और हम (अपनी) आयतें यूं उलट फेरकर बयान करते है (ताकि हुज्जत तमाम हो) और ताकि वह लोग ज़बानी भी इक़रार कर लें कि तुमने (क़ुरान उनके सामने) पढ़ दिया और ताकि जो लोग जानते है उनके लिए (क़ुरान का) खूब वाजेए करके बयान कर दें

जिस तरह हमने अल्लाह की शक्ति के प्रमाणों और दलीलों को विविध तरीक़े से बयान किया है, उसी तरह हम वादे, धमकी तथा उपदेश से संबंधित आयतों में विविधता लाते हैं। तथा मुश्रिक लोग कहेंगे कि यह कोई वह़्य नहीं हैं, बल्कि तुमने इसे अपने से पहले किताब वाले लोगों से पढ़ा है। और ताकि हम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत में से ईमान वालों के लिए इन आयतों में विविधता लाकर लोगों के लिए सत्य को स्पष्ट कर दें। क्योंकि वही लोग हैं जो सत्य को स्वीकार करते हैं और उसका पालन करते हैं।

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106

ٱتَّبِعْ مَآ أُوحِىَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ وَأَعْرِضْ عَنِ ٱلْمُشْرِكِينَ

जो कुछ तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से 'वही' की जाए बस उसी पर चलो अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और मुशरिको से किनारा कश रहो

(ऐ रसूल!) आप उस सत्य का पालन करें, जो आपका पालनहार आपकी ओर वह़्य करता है। क्योंकि उस महिमावान के अलावा कोई सत्य पूज्य नहीं। तथा आप काफ़िरों और उनके हठ पर ध्यान न दें। क्योंकि उनका मामला अल्लाह के हवाले है।

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107

وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَآ أَشْرَكُوا۟ ۗ وَمَا جَعَلْنَٰكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًۭا ۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيْهِم بِوَكِيلٍۢ

और अगर ख़ुदा चाहता तो ये लोग शिर्क ही न करते और हमने तुमको उन लोगों का निगेहबान तो बनाया नहीं है और न तुम उनके ज़िम्मेदार हो

यदि अल्लाह की इच्छा होती कि वे उसके साथ किसी को साझी न बनाएँ, तो वे उसके साथ किसी को भी साझी न बनाते। तथा (ऐ रसूल!) हमने आपको उनपर निरीक्षक नहीं बनाया कि आप उनके कार्यों की गणना करें, तथा आप उनके प्रभारी नहीं हैं। आप तो केवल एक रसूल हैं और आपका दायित्व केवल अल्लाह के संदेश को पहुँचा देना है।

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108

وَلَا تَسُبُّوا۟ ٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ فَيَسُبُّوا۟ ٱللَّهَ عَدْوًۢا بِغَيْرِ عِلْمٍۢ ۗ كَذَٰلِكَ زَيَّنَّا لِكُلِّ أُمَّةٍ عَمَلَهُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّهِم مَّرْجِعُهُمْ فَيُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

और ये (मुशरेकीन) जिन की अल्लाह के सिवा (ख़ुदा समझ कर) इबादत करते हैं उन्हें तुम बुरा न कहा करो वरना ये लोग भी ख़ुदा को बिना समझें अदावत से बुरा (भला) कह बैठें (और लोग उनकी ख्वाहिश नफसानी के) इस तरह पाबन्द हुए कि गोया हमने ख़ुद हर गिरोह के आमाल उनको सॅवाकर अच्छे कर दिखाए फिर उन्हें तो (आख़िरकार) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना है तब जो कुछ दुनिया में कर रहे थे ख़ुदा उन्हें बता देगा

ऐ मोमिनो! उन मूर्तियों को बुरा न कहो, जिन्हें बहुदेववादी अल्लाह के साथ पूजते हैं। भले ही वे सबसे तुच्छ तथा बुरा कहे जाने के सबसे योग्य हों। ताकि ऐसा न हो कि बहुदेववादी अल्लाह के प्रति सीमा से आगे बढ़ते हुए (मर्यादा का उल्लंघन करते हुए) और उस चीज़ से अज्ञानता के कारण जो उस महिमावान के योग्य है, उसे बुरा कहने लगें। जिस तरह इन लोगों के लिए उनकी पथभ्रष्टता को सुशोभित कर दिया गया है, उसी तरह हमने हर जाति के लिए उसके कर्म को सुशोभित कर दिया, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। चुनाँचे उन्होंने वही किया, जिसे हमने उनके लिए सुंदर बना दिया था। फिर क़ियामत के दिन उन्हें अपने रब ही की ओर लौटकर जाना है। तो वह उन्हें बताएगा जो कुछ वे दुनिया में किया करते थे और उन्हें उसका बदला देगा।

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109

وَأَقْسَمُوا۟ بِٱللَّهِ جَهْدَ أَيْمَٰنِهِمْ لَئِن جَآءَتْهُمْ ءَايَةٌۭ لَّيُؤْمِنُنَّ بِهَا ۚ قُلْ إِنَّمَا ٱلْءَايَٰتُ عِندَ ٱللَّهِ ۖ وَمَا يُشْعِرُكُمْ أَنَّهَآ إِذَا جَآءَتْ لَا يُؤْمِنُونَ

और उन लोगों ने ख़ुदा की सख्त सख्त क़समें खायीं कि अगर उनके पास कोई मौजिजा आए तो वह ज़रूर उस पर ईमान लाएँगे (ऐ रसूल) तुम कहो कि मौजिज़े तो बस ख़ुदा ही के पास हैं और तुम्हें क्या मालूम ये यक़ीनी बात है कि जब मौजिज़ा भी आएगा तो भी ये ईमान न लाएँगे

बहुदेववादियों ने अपनी सबसे मज़बूत शपथ लेते हुए अल्लाह की क़सम खाई : निःसंदेह यदि मुहम्मद उनके पास उन निशानियों में से कोई निशानी लेकर आए, जिनका उन्होंने सुझाव दिया है, तो वे अवश्य ही उसपर ईमान ले आएँगे। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निशानियाँ मेरे पास नहीं हैं कि मैं उन्हें उतार दूँ। बल्कि वे अल्लाह के पास हैं, वह जब चाहे उन्हें उतारता है। और (ऐ मोमिनो!) तुम्हें क्या मालूम कि जब ये निशानियाँ उनके प्रस्ताव के अनुसार आ जाएँ, वे उनपर ईमान नहीं लाएँगे? बल्कि वे अपने हठ और इनकार पर बने रहेंगे; क्योंकि वे मार्गदर्शन नहीं चाहते हैं।

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110

وَنُقَلِّبُ أَفْـِٔدَتَهُمْ وَأَبْصَٰرَهُمْ كَمَا لَمْ يُؤْمِنُوا۟ بِهِۦٓ أَوَّلَ مَرَّةٍۢ وَنَذَرُهُمْ فِى طُغْيَٰنِهِمْ يَعْمَهُونَ

और हम उनके दिल और उनकी ऑंखें उलट पलट कर देंगे जिस तरह ये लोग कुरान पर पहली मरतबा ईमान न लाए और हम उन्हें उनकी सरकशी की हालत में छोड़ देंगे कि सरगिरदाँ (परेशान) रहें

हम उनके दिलों और उनकी आँखों को, उनके तथा सच्चाई के मार्ग पर चलने के बीच रुकावट डालकर फेर देंगे, जैसे हम उनके हठ के कारण पहली बार उनके और क़ुरआन पर ईमान लाने के बीच रुकावट बन गए थे। तथा हम उन्हें उनकी गुमराही और अपने रब के विरुद्ध सरकशी (विद्रोह) में भ्रमित भटकता छोड़ देंगे।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.