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6. Al-An'aam

The Cattle · Meccan · 165 ayahs

سُورَةُ الأَنۡعَامِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 91–100 of 165

91

وَمَا قَدَرُوا۟ ٱللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِۦٓ إِذْ قَالُوا۟ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ عَلَىٰ بَشَرٍۢ مِّن شَىْءٍۢ ۗ قُلْ مَنْ أَنزَلَ ٱلْكِتَٰبَ ٱلَّذِى جَآءَ بِهِۦ مُوسَىٰ نُورًۭا وَهُدًۭى لِّلنَّاسِ ۖ تَجْعَلُونَهُۥ قَرَاطِيسَ تُبْدُونَهَا وَتُخْفُونَ كَثِيرًۭا ۖ وَعُلِّمْتُم مَّا لَمْ تَعْلَمُوٓا۟ أَنتُمْ وَلَآ ءَابَآؤُكُمْ ۖ قُلِ ٱللَّهُ ۖ ثُمَّ ذَرْهُمْ فِى خَوْضِهِمْ يَلْعَبُونَ

और बस और उन लोगों (यहूद) ने ख़ुदा की जैसी क़दर करनी चाहिए न की इसलिए कि उन लोगों ने (बेहूदे पन से) ये कह दिया कि ख़ुदा ने किसी बशर (इनसान) पर कुछ नाज़िल नहीं किया (ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि फिर वह किताब जिसे मूसा लेकर आए थे किसने नाज़िल की जो लोगों के लिए रौशनी और (अज़सरतापा(सर से पैर तक)) हिदायत (थी जिसे तुम लोगों ने अलग-अलग करके काग़जी औराक़ (कागज़ के पन्ने) बना डाला और इसमें को कुछ हिस्सा (जो तुम्हारे मतलब का है वह) तो ज़ाहिर करते हो और बहुतेरे को (जो ख़िलाफ मदआ है) छिपाते हो हालॉकि उसी किताब के ज़रिए से तुम्हें वो बातें सिखायी गयी जिन्हें न तुम जानते थे और न तुम्हारे बाप दादा (ऐ रसूल वह तो जवाब देगें नहीं) तुम ही कह दो कि ख़ुदा ने (नाज़िल फरमाई)

मुश्रिकों ने अल्लाह का उसकी महिमा के योग्य सम्मान नहीं किया, जब उन्होंने अपने नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहा कि अल्लाह ने किसी इनसान पर कोई वह़्य नहीं उतारी। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मूसा पर तौरात किसने उतारी, जो उनकी जाति के लिए प्रकाश, मार्गदर्शन तथा निर्देश पर आधारित थी?! जिसे यहूदी पत्रों में संचय करते हैं, उनमें से वे केवल उन्हीं बातों को ज़ाहिर करते हैं, जो उनकी इच्छाओं के अनुसार होती हैं, और जो उनके विपरीत होती हैं, उन्हें छिपाते हैं, जैसे कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का वर्णन। और (ऐ अरब वासियो!) तुम्हें क़ुरआन से वे बातें सिखाई गई हैं, जो न तो तुम और न तुम्हारे पूर्वज पहले से जानते थे। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें कि उसे अल्लाह ने उतारा है। फिर उन्हें उनकी अज्ञानता और पथभ्रष्टता में छोड़ दें, मज़ाक़ उड़ाएँ और ठट्ठा करें यहाँ तक कि उनके पास निश्चितता (अर्थात् मौत) आ जाए।

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92

وَهَٰذَا كِتَٰبٌ أَنزَلْنَٰهُ مُبَارَكٌۭ مُّصَدِّقُ ٱلَّذِى بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ ٱلْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا ۚ وَٱلَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِٱلْءَاخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِهِۦ ۖ وَهُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ

उसके बाद उन्हें छोड़ के (पडे झक मारा करें (और) अपनी तू तू मै मै में खेलते फिरें और (क़ुरान) भी वह किताब है जिसे हमने बाबरकत नाज़िल किया और उस किताब की तसदीक़ करती है जो उसके सामने (पहले से) मौजूद है और (इस वास्ते नाज़िल किया है) ताकि तुम उसके ज़रिए से अहले मक्का और उसके एतराफ़ के रहने वालों को (ख़ौफ ख़ुदा से) डराओ और जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं वह तो उस पर (बे ताम्मुल) ईमान लाते है और वही अपनी अपनी नमाज़ में भी पाबन्दी करते हैं

यह क़ुरआन एक पुस्तक है, जिसे हमने (ऐ नबी!) आपपर उतारा है। यह एक बरकत वाली किताब है, जो अपने से पूर्व उरतने वाली आसमानी किताबों की पुष्टि करने वाली है। ताकि आप इसके साथ मक्का के लोगों और धरती के पूर्व और पश्चिम के सभी लोगों को सचेत करें ताकि उन्हें मार्गदर्शन प्राप्त हो। तथा जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं, वे इस क़ुरआन पर ईमान लाते हैं, उसकी शिक्षाओं पर अमल करते हैं और अपनी नमाज़ की, उसके अरकान (स्तंभों), फ़राइज़ (दायित्वों) और मुसतह़ब्बात (वांछनीय चीज़ों) को शरीयत द्वारा निर्धारित समय पर स्थापित करके, रक्षा करते हैं।

Al-An'aam 6:92Listen in Qur'an →
93

وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَوْ قَالَ أُوحِىَ إِلَىَّ وَلَمْ يُوحَ إِلَيْهِ شَىْءٌۭ وَمَن قَالَ سَأُنزِلُ مِثْلَ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ ۗ وَلَوْ تَرَىٰٓ إِذِ ٱلظَّٰلِمُونَ فِى غَمَرَٰتِ ٱلْمَوْتِ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ بَاسِطُوٓا۟ أَيْدِيهِمْ أَخْرِجُوٓا۟ أَنفُسَكُمُ ۖ ٱلْيَوْمَ تُجْزَوْنَ عَذَابَ ٱلْهُونِ بِمَا كُنتُمْ تَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ غَيْرَ ٱلْحَقِّ وَكُنتُمْ عَنْ ءَايَٰتِهِۦ تَسْتَكْبِرُونَ

और उससे बढ़ कर ज़ालिम कौन होगा जो ख़ुदा पर झूठ (मूठ) इफ़तेरा करके कहे कि हमारे पास वही आयी है हालॉकि उसके पास वही वगैरह कुछ भी नही आयी या वह शख़्श दावा करे कि जैसा क़ुरान ख़ुदा ने नाज़िल किया है वैसा मै भी (अभी) अनक़रीब (जल्दी) नाज़िल किए देता हूँ और (ऐ रसूल) काश तुम देखते कि ये ज़ालिम मौत की सख्तियों में पड़ें हैं और फरिश्ते उनकी तरफ (जान निकाल लेने के वास्ते) हाथ लपका रहे हैं और कहते जाते हैं कि अपनी जानें निकालो आज ही तो तुम को रुसवाई के अज़ाब की सज़ा दी जाएगी क्योंकि तुम ख़ुदा पर नाहक़ (नाहक़) झूठ छोड़ा करते थे और उसकी आयतों को (सुनकर उन) से अकड़ा करते थे

उससे बड़ा अत्याचारी कोई नहीं, जिसने यह कहते हुए अल्लाह के विरुद्ध झूठ गढ़ा कि : अल्लाह ने किसी मनुष्य पर कोई चीज़ नहीं उतारी। या उसने झूठ कहा : अल्लाह ने उसकी ओर वह़्य की है, जबकि अल्लाह ने उसकी ओर कोई वह़्य नहीं भेजी। या उसने यह कहा : अल्लाह ने जो क़ुरआन उतारा है, मैं भी वैसा ही उतार दूँगा। और काश! (ऐ रसूल!) आप उस समय को देखें, जब ये अत्याचारी लोग मौत की पीड़ा से ग्रस्त होते हैं और फ़रिश्ते प्रताड़ना और मार-पीट के साथ उनकी ओर हाथ बढ़ाए होते हैं, उन्हें डाँटते हुए कहते हैं : अपने प्राण निकालो, क्योंकि हम उन्हें क़ब्ज़ करने वाले हैं। आज के दिन तुम्हें ऐसी यातना दी जाएगी, जो तुम्हें अपमानित और तिरस्कृत कर देगी। इसका कारण यह है कि तुम नुबुव्वत, वह़्य और अल्लाह की उतारी हुई किताब की तरह उतारने का दावा करके अल्लाह पर झूठ गढ़ते थे, तथा इस कारण कि तुम अल्लाह की आयतों पर ईमान लाने से अहंकार करते थे। (ऐ नबी!) यदि आप यह दृश्य देखें, तो आपको एक भयानक चीज़ दिखाई देगी।

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94

وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَٰدَىٰ كَمَا خَلَقْنَٰكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍۢ وَتَرَكْتُم مَّا خَوَّلْنَٰكُمْ وَرَآءَ ظُهُورِكُمْ ۖ وَمَا نَرَىٰ مَعَكُمْ شُفَعَآءَكُمُ ٱلَّذِينَ زَعَمْتُمْ أَنَّهُمْ فِيكُمْ شُرَكَٰٓؤُا۟ ۚ لَقَد تَّقَطَّعَ بَيْنَكُمْ وَضَلَّ عَنكُم مَّا كُنتُمْ تَزْعُمُونَ

और आख़िर तुम हमारे पास इसी तरह तन्हा आए (ना) जिस तरह हमने तुम को पहली बार पैदा किया था और जो (माल व औलाद) हमने तुमको दिया था वह सब अपने पस्त पुश्त (पीछे) छोड़ आए और तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफारिश करने वालों को भी नहीं देखते जिन को तुम ख्याल करते थे कि वह तुम्हारी (परवरिश वगैरह) मै (हमारे) साझेदार है अब तो तुम्हारे बाहरी ताल्लुक़ात मनक़तआ (ख़त्म) हो गए और जो कुछ ख्याल करते थे वह सब तुम से ग़ायब हो गए

(मरने के बाद) दोबारा उठाए जाने के दिन उनसे कहा जाएगा : आज के दिन तुम हमारे पास अकेले आए हो, न तो तुम्हारे पास धन है और न ही सरदारी। जैसे हमने तुम्हें पहली बार नंगे पाँव, नंगे शरीर और खतनारहित पैदा किया था। और जो कुछ हमने तुम्हें दिया था, वह तुमने अपनी इच्छा के विरुद्ध संसार में छोड़ दिया। और हम आज तुम्हारे साथ तुम्हारे उन पूज्यों को नहीं देखते हैं, जिन्हें तुमने अपने लिए मध्यस्थ (सिफारिशी) होने का दावा किया था, तथा तुमने दावा किया था कि वे इबादत के योग्य होने में अल्लाह के साझी हैं। निश्चय तुम्हारे बीच का संबंध टूट गया, तथा जो कुछ तुम उनकी सिफारिश का दावा करते थे और यह कि वे अल्लाह के साझी हैं, वह (भ्रम) तुमसे दूर हो गया।

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95

۞ إِنَّ ٱللَّهَ فَالِقُ ٱلْحَبِّ وَٱلنَّوَىٰ ۖ يُخْرِجُ ٱلْحَىَّ مِنَ ٱلْمَيِّتِ وَمُخْرِجُ ٱلْمَيِّتِ مِنَ ٱلْحَىِّ ۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ

ख़ुदा ही तो गुठली और दाने को चीर (करके दरख्त ऊगाता) है वही मुर्दे में से ज़िन्दे को निकालता है और वही ज़िन्दा से मुर्दे को निकालने वाला है (लोगों) वही तुम्हारा ख़ुदा है फिर तुम किधर बहके जा रहे हो

निःसंदेह केवल अल्लाह ही है जो दाने को फाड़ता है, तो उससे फसलें निकलती हैं, तथा गुठली को फाड़ता है, तो उससे पेड़ निकलते हैं, जैसे खजूर के पेड़,अंगूर आदि। वह सजीव को निर्जीव से निकालता है; जैसे मनुष्य और बाकी जानदार को वीर्य से निकालता है। तथा निर्जीव को सजीव से निकालता है; जैसे वीर्य को मनुष्य से तथा अंडे को मुर्गी से निकालता है। यह सब जो करता है, वही अल्लाह है जिसने तुम्हें पैदा किया है। फिर (ऐ मुश्रिको!) तुम सत्य से कैसे फेर दिए जाते हो, जबकि तुम अल्लाह की अद्भुत रचना का मुशाहदा करते हो?!

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96

فَالِقُ ٱلْإِصْبَاحِ وَجَعَلَ ٱلَّيْلَ سَكَنًۭا وَٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ حُسْبَانًۭا ۚ ذَٰلِكَ تَقْدِيرُ ٱلْعَزِيزِ ٱلْعَلِيمِ

उसी के लिए सुबह की पौ फटी और उसी ने आराम के लिए रात और हिसाब के लिए सूरज और चाँद बनाए ये ख़ुदाए ग़ालिब व दाना के मुक़र्रर किए हुए किरदा (उसूल) हैं

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जो रात के अंधेरे से सुबह के प्रकाश को फाड़ निकालता है, और वही है जिसने रात को लोगों के आराम करने का स्थान बनाया जिसमें वे आजीविका की तलाश में गतिविधि से स्थिर हो जाते हैं; ताकि वे दिन में उसकी खोज में अपनी थकान से आराम करें। तथा वही है जिसने सूरज और चाँद को एक पूर्वनिर्धारित गणना के अनुसार चलाया। यह उल्लिखित अद्भुत रचना उस प्रभुत्वशाली अस्तित्व का निर्धारित किया हुआ है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, वह अपनी रचना के बारे में और उनके हितों को जानने वाला है।

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97

وَهُوَ ٱلَّذِى جَعَلَ لَكُمُ ٱلنُّجُومَ لِتَهْتَدُوا۟ بِهَا فِى ظُلُمَٰتِ ٱلْبَرِّ وَٱلْبَحْرِ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا ٱلْءَايَٰتِ لِقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ

और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे (नफे के) वास्ते सितारे पैदा किए ताकि तुम जॅगलों और दरियाओं की तारिक़ियों (अंधेरों) में उनसे राह मालूम करो जो लोग वाक़िफकार हैं उनके लिए हमने (अपनी क़ुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफ़सील से बयान कर दी हैं

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जिसने (ऐ आदम की संतान!) तुम्हारे लिए आकाश में तारे बनाए, ताकि तुम अपनी यात्राओं में मार्ग पा सको यदि थल और समुद्र में तुमपर रास्ता संदिग्ध हो जाए। निश्चय हमने अपनी क्षमता को दर्शाने वाले प्रमाणों और सबूतों को उन लोगों के लिए स्पष्ट कर दिए हैं, जो उनपर विचार करते हैं, फिर उनसे लाभ उठाते हैं।

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98

وَهُوَ ٱلَّذِىٓ أَنشَأَكُم مِّن نَّفْسٍۢ وَٰحِدَةٍۢ فَمُسْتَقَرٌّۭ وَمُسْتَوْدَعٌۭ ۗ قَدْ فَصَّلْنَا ٱلْءَايَٰتِ لِقَوْمٍۢ يَفْقَهُونَ

और वह वही ख़ुदा है जिसने तुम लोगों को एक शख़्श से पैदा किया फिर (हर शख़्श के) क़रार की जगह (बाप की पुश्त (पीठ)) और सौंपने की जगह (माँ का पेट) मुक़र्रर है हमने समझदार लोगों के वास्ते (अपनी कुदरत की) निशानियाँ ख़ूब तफसील से बयान कर दी हैं

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जिसने तुम्हें एक आत्मा से पैदा किया जो तुम्हारे पिता आदम की आत्मा है। क्योंकि उसने तुम्हारी रचना का आरंभ तुम्हारे पिता आदम को मिट्टी से पैदा करके किया, फिर उनसे तुम्हें पैदा किया। तथा तुम्हारे लिए ठहरने का स्थान बनाया, जैसे तुम्हारी माँओं के गर्भ और तुम्हारे सौंपे जाने की जगह बनाई, जैसे तुम्हारे बापों की पीठ। हमने आयतों (निशानियों) को उन लोगों के लिए स्पष्ट कर दिया है जो अल्लाह की वाणी को समझते हैं।

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99

وَهُوَ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَخْرَجْنَا بِهِۦ نَبَاتَ كُلِّ شَىْءٍۢ فَأَخْرَجْنَا مِنْهُ خَضِرًۭا نُّخْرِجُ مِنْهُ حَبًّۭا مُّتَرَاكِبًۭا وَمِنَ ٱلنَّخْلِ مِن طَلْعِهَا قِنْوَانٌۭ دَانِيَةٌۭ وَجَنَّٰتٍۢ مِّنْ أَعْنَابٍۢ وَٱلزَّيْتُونَ وَٱلرُّمَّانَ مُشْتَبِهًۭا وَغَيْرَ مُتَشَٰبِهٍ ۗ ٱنظُرُوٓا۟ إِلَىٰ ثَمَرِهِۦٓ إِذَآ أَثْمَرَ وَيَنْعِهِۦٓ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكُمْ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يُؤْمِنُونَ

और वह वही (क़ादिर तवाना है) जिसने आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने उसके ज़रिए से हर चीज़ के कोए निकालें फिर हम ही ने उससे हरी भरी टहनियाँ निकालीं कि उससे हम बाहम गुत्थे दाने निकालते हैं और छुहारे के बोर (मुन्जिर) से लटके हुए गुच्छे पैदा किए और अंगूर और ज़ैतून और अनार के बाग़ात जो बाहम सूरत में एक दूसरे से मिलते जुलते और (मजे में) जुदा जुदा जब ये पिघले और पक्के तो उसके फल की तरफ ग़ौर तो करो बेशक अमन में ईमानदार लोगों के लिए बहुत सी (ख़ुदा की) निशानियाँ हैं

वही महिमावान और सर्वशक्तिमान (अल्लाह) है, जिसने आकाश से बारिश का पानी उतारा, तो हमने उसके द्वारा हर प्रकार के पौधे उगाए। फिर हमने पौधे से फसल तथा हरे-भरे वृक्ष निकाले, जिसमें से हम तह-ब-तह चढ़े हुए दाने निकालते हैं, जैसे कि बालियों में होता है। तथा खजूर के गाभे से निकलने वाले उसके गुच्छे पास ही होते हैं, जिन्हें खड़ा हुआ और बैठा हुआ व्यक्ति तोड़ सकता है। और हमने अंगूर के बाग़ निकाले, तथा ज़ैतून और अनार निकाले, जिनके पत्ते एक जैसे और फल भिन्न-भिन्न होते हैं। (ऐ लोगो!) उसके फल को देखो, जब वह पहली बार प्रकट होता है, और जब वह पकता है। निःसंदेह इसमें अल्लाह पर ईमान रखने वाले लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति के स्पष्ट प्रमाण हैं। क्योंकि वही लोग इन प्रमाणों और सबूतों से लाभ उठाते हैं।

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100

وَجَعَلُوا۟ لِلَّهِ شُرَكَآءَ ٱلْجِنَّ وَخَلَقَهُمْ ۖ وَخَرَقُوا۟ لَهُۥ بَنِينَ وَبَنَٰتٍۭ بِغَيْرِ عِلْمٍۢ ۚ سُبْحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يَصِفُونَ

और उन (कम्बख्तों) ने जिन्नात को ख़ुदा का शरीक बनाया हालॉकि जिन्नात को भी ख़ुदा ही ने पैदा किया उस पर भी उन लोगों ने बे समझे बूझे ख़ुदा के लिए बेटे बेटियाँ गढ़ डालीं जो बातों में लोग (उसकी शान में) बयान करते हैं उससे वह पाक व पाकीज़ा और बरतर है

मुश्रिकों ने जिन्नों को इबादत में अल्लाह का साझीदार बना लिया, जब उन्होंने यह मान लिया कि वे लाभ और हानि पहुँचाते हैं। जबकि अल्लाह ही ने उन्हें बनाया है, उसके अलावा किसी और ने उन्हें नहीं बनाया। इसलिए वही इस बात का अधिक योग्य है कि उसकी इबादत की जाए। तथा उन्होंने (अल्लाह के लिए) बेटे गढ़ लिए, जैसा कि यहूदियों ने उज़ैर के साथ और ईसाइयों ने ईसा के साथ किया। और बेटियाँ गढ़ लीं, जैसा कि मुश्रिकों ने फरिश्तों के साथ किया। अल्लाह तआला उससे बहुत पवित्र और सर्वोच्च है, जो झूठे लोग उसके बारे में वर्णन करते हैं।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.