وَكَيْفَ أَخَافُ مَآ أَشْرَكْتُمْ وَلَا تَخَافُونَ أَنَّكُمْ أَشْرَكْتُم بِٱللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِۦ عَلَيْكُمْ سُلْطَٰنًۭا ۚ فَأَىُّ ٱلْفَرِيقَيْنِ أَحَقُّ بِٱلْأَمْنِ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
और जिन्हें तुम ख़ुदा का शरीक बताते हो मै उन से क्यों डरुँ जब तुम इस बात से नहीं डरते कि तुमने ख़ुदा का शरीक ऐसी चीज़ों को बनाया है जिनकी ख़ुदा ने कोई सनद तुम पर नहीं नाज़िल की फिर अगर तुम जानते हो तो (भला बताओ तो सही कि) हम दोनों फरीक़ (गिरोह) में अमन क़ायम रखने का ज्यादा हक़दार कौन है
मैं उन मूर्तियों से कैसे डर सकता हूँ, जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो, जबकि तुम्हें अल्लाह के साथ शिर्क करते हुए डर नहीं लगता, जब तुम बिना किसी प्रमाण के अल्लाह के साथ उन चीज़ों को साझी बनाते हो जिन्हें उसने पैदा किया है?! तो दोनों दलों अर्थात् : एकेश्वरवादियों के दल और बहुदेववादियों के दल में से : कौन-सा दल शांति और सुरक्षा के अधिक योग्य है? यदि तुम उनमें से अधिक योग्य को जानते हो, तो उसका अनुसरण करो। और उनमें से अधिक योग्य - बिना किसी संदेह के - एकेश्वरवादी मोमिनों का दल है।