وَأَنذِرْ بِهِ ٱلَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحْشَرُوٓا۟ إِلَىٰ رَبِّهِمْ ۙ لَيْسَ لَهُم مِّن دُونِهِۦ وَلِىٌّۭ وَلَا شَفِيعٌۭ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
और इस क़ुरान के ज़रिए से तुम उन लोगों को डराओ जो इस बात का ख़ौफ रखते हैं कि वह (मरने के बाद) अपने ख़ुदा के सामने जमा किये जायेंगे (और यह समझते है कि) उनका ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त हे और न कोई सिफारिश करने वाला ताकि ये लोग परहेज़गार बन जाएं
और (ऐ रसूल!) इस क़ुरआन के द्वारा उन लोगों को डराएँ, जो इस बात का भय रखते हैं कि वे क़ियामत के दिन अपने रब के पास एकत्र किए जाएँगे, उनके लिए अल्लाह के अलावा कोई संरक्षक नहीं होगा जो उन्हें लाभ पहुँचाए, और न कोई सिफारिश करने वाला होगा, जो उनसे हानि को दूर कर सके। ताकि वे अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरें। क्योंकि यही लोगो हैं, जो क़ुरआन से लाभान्वित होते हैं।