بَلْ إِيَّاهُ تَدْعُونَ فَيَكْشِفُ مَا تَدْعُونَ إِلَيْهِ إِن شَآءَ وَتَنسَوْنَ مَا تُشْرِكُونَ
(दूसरों को तो क्या) बल्कि उसी को पुकारोगे फिर अगर वह चाहेगा तो जिस के वास्ते तुमने उसको पुकारा है उसे दफा कर देगा और (उस वक्त) तुम दूसरे माबूदों को जिन्हे तुम (ख़ुदा का) शरीक समझते थे भूल जाओगे
सच तो यह है कि उस समय तुम उस अल्लाह के अलावा किसी और को नहीं पुकारोगे, जिसने तुम्हें पैदा किया है, फिर यदि वह चाहेगा तो तुम से विपत्ति को दूर कर देगा और तुम्हारी हानि को हटा देगा। क्योंकि वही उसका ज़िम्मेदार और उसे करने में सक्षम है। रही बात तुम्हारे उन पूज्यों की, जिन्हें तुमने अल्लाह के साथ साझी बनाया है, तो तुम उन्हें छोड़ दोगे; क्योंकि तुम्हें मालूम है कि उनसे न कोई लाभ होता है और न ही हानि।