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6. Al-An'aam

The Cattle · Meccan · 165 ayahs

سُورَةُ الأَنۡعَامِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 41–50 of 165

41

بَلْ إِيَّاهُ تَدْعُونَ فَيَكْشِفُ مَا تَدْعُونَ إِلَيْهِ إِن شَآءَ وَتَنسَوْنَ مَا تُشْرِكُونَ

(दूसरों को तो क्या) बल्कि उसी को पुकारोगे फिर अगर वह चाहेगा तो जिस के वास्ते तुमने उसको पुकारा है उसे दफा कर देगा और (उस वक्त) तुम दूसरे माबूदों को जिन्हे तुम (ख़ुदा का) शरीक समझते थे भूल जाओगे

सच तो यह है कि उस समय तुम उस अल्लाह के अलावा किसी और को नहीं पुकारोगे, जिसने तुम्हें पैदा किया है, फिर यदि वह चाहेगा तो तुम से विपत्ति को दूर कर देगा और तुम्हारी हानि को हटा देगा। क्योंकि वही उसका ज़िम्मेदार और उसे करने में सक्षम है। रही बात तुम्हारे उन पूज्यों की, जिन्हें तुमने अल्लाह के साथ साझी बनाया है, तो तुम उन्हें छोड़ दोगे; क्योंकि तुम्हें मालूम है कि उनसे न कोई लाभ होता है और न ही हानि।

Al-An'aam 6:41Listen in Qur'an →
42

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٍۢ مِّن قَبْلِكَ فَأَخَذْنَٰهُم بِٱلْبَأْسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمْ يَتَضَرَّعُونَ

और (ऐ रसूल) जो उम्मतें तुमसे पहले गुज़र चुकी हैं हम उनके पास भी बहुतेरे रसूल भेज चुके हैं फिर (जब नाफ़रमानी की) तो हमने उनको सख्ती

और हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले कई समुदायों की ओर रसूल भेजे, लेकिन उन्होंने उन्हें झुठला दिया और वे जो कुछ उनके पास लेकर आए थे उससे मुँह फेर लिया, तो हमने उन्हें ग़रीबी जैसी कठिनाइयों के साथ, तथा बीमारी जैसी उनके शरीर को नुक़सान पहुँचाने वाली चीज़ों के साथ दंडित किया, ताकि वे अपने पालनहार के प्रति समर्पित हो जाएँ और उसके लिए विनम्र हो जाएँ।

Al-An'aam 6:42Listen in Qur'an →
43

فَلَوْلَآ إِذْ جَآءَهُم بَأْسُنَا تَضَرَّعُوا۟ وَلَٰكِن قَسَتْ قُلُوبُهُمْ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيْطَٰنُ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

और तकलीफ़ में गिरफ्तार किया ताकि वह लोग (हमारी बारगाह में) गिड़गिड़ाए तो जब उन (के सर) पर हमारा अज़ाब आ खड़ा हुआ तो वह लोग क्यों नहीं गिड़गिड़ाए (कि हम अज़ाब दफा कर देते) मगर उनके दिल तो सख्त हो गए थे ओर उनकी कारस्तानियों को शैतान ने आरास्ता कर दिखाया था (फिर क्योंकर गिड़गिड़ाते)

यदि उनपर हमारी विपत्ति आने के समय, वे अल्लाह के प्रति विनम्र हो जाते और उसके अधीन हो जाते, ताकि वह उन पर से विपत्ति को दूर कर दे, तो हम अवश्य उनपर दया करते, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया, बल्कि उनके दिल कठोर हो गए। चुनाँचे उन्होंने न सीख प्राप्त की और न उपदेश ग्रहण किया, तथा शैतान ने उनके लिए उसे सुशोभित कर दिया, जो कुफ्र तथा पाप वे किया करते थे। इसलिए वे उसी पर बने रहे जिसपर वे क़ायम थे।

Al-An'aam 6:43Listen in Qur'an →
44

فَلَمَّا نَسُوا۟ مَا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ فَتَحْنَا عَلَيْهِمْ أَبْوَٰبَ كُلِّ شَىْءٍ حَتَّىٰٓ إِذَا فَرِحُوا۟ بِمَآ أُوتُوٓا۟ أَخَذْنَٰهُم بَغْتَةًۭ فَإِذَا هُم مُّبْلِسُونَ

फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल गए तो हमने उन पर (ढील देने के लिए) हर तरह की (दुनियावी) नेअमतों के दरवाज़े खोल दिए यहाँ तक कि जो नेअमतें उनको दी गयी थी जब उनको पाकर ख़ुश हुए तो हमने उन्हें नागाहाँ (एक दम) ले डाला तो उस वक्त वह नाउम्मीद होकर रह गए

जब उन्होंने गंभीर गरीबी तथा बीमारी के द्वारा उपदेश किए जाने को छोड़ दिया और अल्लाह के आदेशों के अनुसार काम नहीं किया, तो हमने उन्हें ढील देते हुए उनके लिए रोज़ी के द्वार खोल दिए, ग़रीबी के बाद उन्हें समृद्ध कर दिया और बीमारी के बाद उनके शरीर को स्वस्थ कर दिया, यहाँ तक कि जब वे अहंकार से ग्रस्त हो गए और उन्हें जो सुख-सुविधा प्राप्त था उसपर मगन हो गए, उनपर अचानक हमारी यातना आ गई, तो सहसा वे चकित और उस चीज़ से निराश थे, जिसकी वे आशा करते थे।

Al-An'aam 6:44Listen in Qur'an →
45

فَقُطِعَ دَابِرُ ٱلْقَوْمِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ۚ وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

फिर ज़ालिम लोगों की जड़ काट दी गयी और सारे जहाँन के मालिक ख़ुदा का शुक्र है

काफिरों का पूरी तरह से सर्वनाश करके उनकी जड़ काट दी गई, और अल्लाह के रसूलों को विजय प्राप्त हुआ। और हर प्रकार का आभार और प्रशंसा अकेले अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का रब है कि उसने अपने शत्रुओं का नाश किया और अपने दोस्तों की सहायता की।

Al-An'aam 6:45Listen in Qur'an →
46

قُلْ أَرَءَيْتُمْ إِنْ أَخَذَ ٱللَّهُ سَمْعَكُمْ وَأَبْصَٰرَكُمْ وَخَتَمَ عَلَىٰ قُلُوبِكُم مَّنْ إِلَٰهٌ غَيْرُ ٱللَّهِ يَأْتِيكُم بِهِ ۗ ٱنظُرْ كَيْفَ نُصَرِّفُ ٱلْءَايَٰتِ ثُمَّ هُمْ يَصْدِفُونَ

(कि क़िस्सा पाक हुआ) (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर ख़ुदा तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे लें ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर कर दे तो ख़ुदा के सिवा और कौन मौजूद है जो (फिर) तुम्हें ये नेअमतें (वापस) दे (ऐ रसूल) देखो तो हम किस किस तरह अपनी दलीले बयान करते हैं इस पर भी वह लोग मुँह मोडे ज़ाते हैं

ऐ रसूल! आप इन मुश्रिकों से कह दें : मुझे बताओ कि यदि अल्लाह तुमसे सुनने की शक्ति छीनकर तुम्हें बहरा कर दे, तुम्हारी दृष्टि छीनकर तुम्हें अंधा कर दे, और तुम्हारे दिलों पर मुहर लगा दे, फिर तुम कुछ भी न समझ सको; तो कौन-सा सत्य पूज्य है, जो तुम्हें ये खोई हुई चीज़ें वापस ला दे? ऐ रसूल! ग़ौर करें कि कैसे हम इन्हें विभिन्न प्रकार के प्रमाण दिखलाते हैं, फिर ये उनसे मुँह मोड़ लेते हैं!

Al-An'aam 6:46Listen in Qur'an →
47

قُلْ أَرَءَيْتَكُمْ إِنْ أَتَىٰكُمْ عَذَابُ ٱللَّهِ بَغْتَةً أَوْ جَهْرَةً هَلْ يُهْلَكُ إِلَّا ٱلْقَوْمُ ٱلظَّٰلِمُونَ

(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर तुम्हारे सर पर ख़ुदा का अज़ाब बेख़बरी में या जानकारी में आ जाए तो क्या गुनाहगारों के सिवा और लोग भी हलाक़ किए जाएंगें (हरगिज़ नहीं)

(ऐ रसूल!) आप इनसे कह दें : मुझे बताओ कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना तुम्हें उसका एहसास हुए बिना अचानक आ जाए, अथवा वह तुमपर खुल्लम-खुल्ला सबके देखते हुए आ जाए, तो उस यातना के शिकार केवल वही लोग होंगे, जो अल्लाह के साथ कुफ़्र करके तथा उसके रसूलों को झुठलाकर अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।

Al-An'aam 6:47Listen in Qur'an →
48

وَمَا نُرْسِلُ ٱلْمُرْسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ ۖ فَمَنْ ءَامَنَ وَأَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ

और हम तो रसूलों को सिर्फ इस ग़रज़ से भेजते हैं कि (नेको को जन्नत की) खुशख़बरी दें और (बदो को अज़ाब जहन्नुम से) डराएं फिर जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो ऐसे लोगों पर (क़यामत में) न कोई ख़ौफ होगा और न वह ग़मग़ीन होगें

हम अपने रसूलों में से जिन्हें भेजते हैं, उन्हें केवल इसलिए भेजते हैं कि वे ईमान और आज्ञाकारिता वालों को उस स्थायी नेमत की शुभ सूचना दें, जो न कभी ख़त्म होगी और न बाधित होगी, एवं काफिरों तथा पापियों को हमारी कठोर यातना से डराएँ। फिर जो व्यक्ति रसूलों पर ईमान लाए और अपने कर्मों को ठीक कर ले, तो उनपर उस बारे में कोई भय नहीं, जो आख़िरत में उन्हें प्राप्त होगा और न ही वे उसपर दुखी एवं शोकग्रस्त होंगे, जो सांसारिक सुखों में से उनसे छूट गया है।

Al-An'aam 6:48Listen in Qur'an →
49

وَٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا يَمَسُّهُمُ ٱلْعَذَابُ بِمَا كَانُوا۟ يَفْسُقُونَ

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो चूंकि बदकारी करते थे (हमारा) अज़ाब उनको पलट जाएगा

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया, वे अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकल जाने के कारण यातना से पीड़ित होंगे।

Al-An'aam 6:49Listen in Qur'an →
50

قُل لَّآ أَقُولُ لَكُمْ عِندِى خَزَآئِنُ ٱللَّهِ وَلَآ أَعْلَمُ ٱلْغَيْبَ وَلَآ أَقُولُ لَكُمْ إِنِّى مَلَكٌ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰٓ إِلَىَّ ۚ قُلْ هَلْ يَسْتَوِى ٱلْأَعْمَىٰ وَٱلْبَصِيرُ ۚ أَفَلَا تَتَفَكَّرُونَ

(ऐ रसूल) उनसे कह दो कि मै तो ये नहीं कहता कि मेरे पास ख़ुदा के ख़ज़ाने हैं (कि ईमान लाने पर दे दूंगा) और न मै गैब के (कुल हालात) जानता हूँ और न मै तुमसे ये कहता हूँ कि मै फरिश्ता हूँ मै तो बस जो (ख़ुदा की तरफ से) मेरे पास वही की जाती है उसी का पाबन्द हूँ (उनसे पूछो तो) कि अन्धा और ऑंख वाला बराबर हो सकता है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं सोचते

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मैं तुमसे नहीं कहता : मेरे पास अल्लाह की रोज़ी के ख़ज़ाने हैं, इसलिए मैं उन्हें अपनी इच्छानुसार ख़र्च करता हूँ। और न ही मैं तुमसे यह कहता हूँ : मुझे ग़ैब का ज्ञान है, सिवाय उस वह़्य के जिससे अल्लाह ने मुझे सूचित किया है। और न मैं तुमसे यह कहता हूँ : मैं फ़रिश्तों में से एक फ़रिश्ता हूँ। क्योंकि मैं अल्लाह का रसूल हूँ। मैं केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है। मैं उसका दावा नहीं करता, जिसका मुझे अधिकार नहीं। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या वह काफ़िर जिसकी अन्तर्दृष्टि सत्य से अंधी हो गई है, और वह मोमिन जिसने सत्य को देखा और उसपर ईमान लाया, क्या दोनों बराबर हो सकते हैं? तो क्या (ऐ मुश्रिको!) तुम अपनी बुद्धियों से अपने चारों ओर फैली हुई निशानियों पर ग़ौर नहीं करते।

Al-An'aam 6:50Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.