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6. Al-An'aam

The Cattle · Meccan · 165 ayahs

سُورَةُ الأَنۡعَامِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 141–150 of 165

141

۞ وَهُوَ ٱلَّذِىٓ أَنشَأَ جَنَّٰتٍۢ مَّعْرُوشَٰتٍۢ وَغَيْرَ مَعْرُوشَٰتٍۢ وَٱلنَّخْلَ وَٱلزَّرْعَ مُخْتَلِفًا أُكُلُهُۥ وَٱلزَّيْتُونَ وَٱلرُّمَّانَ مُتَشَٰبِهًۭا وَغَيْرَ مُتَشَٰبِهٍۢ ۚ كُلُوا۟ مِن ثَمَرِهِۦٓ إِذَآ أَثْمَرَ وَءَاتُوا۟ حَقَّهُۥ يَوْمَ حَصَادِهِۦ ۖ وَلَا تُسْرِفُوٓا۟ ۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلْمُسْرِفِينَ

और वह तो वही ख़ुदा है जिसने बहुतेरे बाग़ पैदा किए (जिनमें मुख्तलिफ दरख्त हैं - कुछ तो अंगूर की तरह टट्टियों पर) चढ़ाए हुए और (कुछ) बे चढ़ाए हुए और खजूर के दरख्त और खेती जिसमें फल मुख्तलिफ़ किस्म के हैं और ज़ैतून और अनार बाज़ तो सूरत रंग मज़े में, मिलते जुलते और (बाज़) बेमेल (लोगों) जब ये चीज़े फलें तो उनका फल खाओ और उन चीज़ों के काटने के दिन ख़ुदा का हक़ (ज़कात) दे दो और ख़बरदार फज़ूल ख़र्ची न करो - क्यों कि वह (ख़ुदा) फुज़ूल ख़र्चे से हरगिज़ उलफत नहीं रखता

और अल्लाह ही है, जिसने बिना तने वाले बाग़ पैदा किए, जो धरती पर बिछे हुए होते हैं, और तनों वाले बाग़ पैदा किए, जो धरती से ऊपर उठे हुए होते हैं। तथा उसी ने खजूर के पेड़ पैदा किए। और उसी ने फसलों को पैदा किया, जिनके फल आकार एवं स्वाद में विभिन्न प्रकार के होते हैं। तथा उसी ने ज़ैतून और अनार पैदा किए, जिनके पत्ते एक जैसे होते हैं, लेकिन फलों का स्वाद अलग-अलग होता है। (ऐ लोगो!) जब वह फल दे, तो उसका फल खाओ और उसकी कटाई के दिन उसकी ज़कात अदा करो। और खाने तथा खर्च करने के मामले में शरीयत की सीमाओं का उल्लंघन न करो। क्योंकि अल्लाह उन लोगों से प्यार नहीं करता जो उनमें या उनके अलावा में उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, बल्कि उनसे नफ़रत करता है। निश्चय जिसने इन सारी चीज़ों को पैदा किया, उसी ने उन्हें अपने बंदों के लिए अनुमेय किया है। अतः बहुदेववादियों को उन्हें हराम ठहराने का कोई अधिकार नहीं है।

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142

وَمِنَ ٱلْأَنْعَٰمِ حَمُولَةًۭ وَفَرْشًۭا ۚ كُلُوا۟ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ وَلَا تَتَّبِعُوا۟ خُطُوَٰتِ ٱلشَّيْطَٰنِ ۚ إِنَّهُۥ لَكُمْ عَدُوٌّۭ مُّبِينٌۭ

और चारपायों में से कुछ तो बोझ उठाने वाले (बड़े बड़े) और कुछ ज़मीन से लगे हुए (छोटे छोटे) पैदा किए ख़ुदा ने जो तुम्हें रोज़ी दी है उस में से खाओ और शैतान के क़दम ब क़दम न चलो

उसी ने तुम्हारे लिए कुछ ऐसे जानवर पैदा किए, जो सामान लादे जाने के लिए उपयुक्त हैं, जैसे बड़े ऊँट, तथा कुछ ऐसे जानवर पैदा किए, जो उसके लिए उपयुक्त नहीं हैं, जैसे छोटे ऊँट और भेड़-बकरियाँ। (ऐ लोगो!) अल्लाह की दी हुई इन चीज़ों में से उन वस्तुओं को खाओ जो उसने तुम्हारे लिए हलाल की हैं, तथा हराम चीज़ों को हलाल करने एवं हलाल चीज़ों को हराम ठहराने के विषय में शैतान के चरणों का पालन न करो, जैसा कि बहुदेववादी करते हैं। निश्चय शैतान - ऐ लोगो! - तुम्हारा स्पष्ट दुश्मनी वाला दुश्मन है। क्योंकि वह चाहता है कि तुम इस तरह करके अल्लाह की अवज्ञा करो।

Al-An'aam 6:142Listen in Qur'an →
143

ثَمَٰنِيَةَ أَزْوَٰجٍۢ ۖ مِّنَ ٱلضَّأْنِ ٱثْنَيْنِ وَمِنَ ٱلْمَعْزِ ٱثْنَيْنِ ۗ قُلْ ءَآلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ ٱلْأُنثَيَيْنِ أَمَّا ٱشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ ٱلْأُنثَيَيْنِ ۖ نَبِّـُٔونِى بِعِلْمٍ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ

(क्यों कि) वह तो यक़ीनन तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है (ख़ुदा ने नर मादा मिलाकर) आठ (क़िस्म के) जोड़े पैदा किए हैं - भेड़ से (नर मादा) दो और बकरी से (नर मादा) दो (ऐ रसूल उन काफिरों से) पूछो तो कि ख़ुदा ने (उन दोनों भेड़ बकरी के) दोनों नरों को हराम कर दिया है या उन दोनों मादनियों को या उस बच्चे को जो उन दोनों मादनियों के पेट से अन्दर लिए हुए हैं

उसने तुम्हारे लिए पशुओं के आठ प्रकार पैदा किए; भेड़ में से दो : एक नर और एक मादा, तथा बकरी में से दो। (ऐ रसूल!) बहुदेववादियों से पूछें : क्या अल्लाह ने उन दोनों में से नर को उनके नर होने के कारण हराम किया है? यदि वे जवाब दें : हाँ, तो उनसे कहें : फिर तुम मादाओं को क्यों हराम कहते हो? या कि उसने मादाओं को स्त्रीत्व के कारण हराम किया है? यदि वे कहें : हाँ, तो आप उनसे कहें : फिर तुम नरों को क्यों हराम ठहराते हो? या कि उसने दोनों मादाओं के गर्भ में जो कुछ है इस कारण हराम किया है कि वह गर्भ में है? यदि वे कहें : हाँ, तो आप उनसे कहें : तुम कभी नर को हराम ठहराकर और कभी मादा को हराम करके गर्भ में जो कुछ है उसके बीच अंतर क्यों करते हो? ऐ बहुदेववादियो! यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि इसका निषेध अल्लाह की ओर से है, तो मुझे उस सच्चे ज्ञान के बारे में बताओ, जिसे तुम अपना आधार बनाते हो।

Al-An'aam 6:143Listen in Qur'an →
144

وَمِنَ ٱلْإِبِلِ ٱثْنَيْنِ وَمِنَ ٱلْبَقَرِ ٱثْنَيْنِ ۗ قُلْ ءَآلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ ٱلْأُنثَيَيْنِ أَمَّا ٱشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ ٱلْأُنثَيَيْنِ ۖ أَمْ كُنتُمْ شُهَدَآءَ إِذْ وَصَّىٰكُمُ ٱللَّهُ بِهَٰذَا ۚ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًۭا لِّيُضِلَّ ٱلنَّاسَ بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى ٱلْقَوْمَ ٱلظَّٰلِمِينَ

अगर तुम सच्चे हो तो ज़रा समझ के मुझे बताओ और ऊँट के (नर मादा) दो और गाय के (नर मादा) दो (ऐ रसूल तुम उनसे) पूछो कि ख़ुदा ने उन दोनों (ऊँट गाय के) नरों को हराम किया या दोनों मादनियोंको या उस बच्चे को जो दोनों मादनियों के पेट अपने अन्दर लिये हुए है क्या जिस वक्त ख़ुदा ने तुमको उसका हुक्म दिया था तुम उस वक्त मौजूद थे फिर जो ख़ुदा पर झूठ बोताहन बॉधे उससे ज्यादा ज़ालिम कौन होगा ताकि लोगों के वे समझे बूझे गुमराह करें ख़ुदा हरगिज़ ज़ालिम क़ौम में मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुचाता

आठ प्रकार के पशुओं में से शेष इस तरह हैं : ऊँटों के दो प्रकार और गायों के दो प्रकार। (ऐ रसूल!) बहुदेववादियों से पूछें : अल्लाह ने इनमें से जिसे हराम ठहराया है, क्या उसे नर होने के कारण या मादा होने के कारण या फिर गर्भ में होने के कारण हराम क्या है? (ऐ बहुदेववादियो!) क्या तुम (अपने दावे के अनुसार) उस समय उपस्थित थे जब अल्लाह ने तुम्हारे इन हराम ठहराए हुए जानवरों को हराम ठहराने की तुम्हें ताकीद की थी?! अतः उससे बड़ा अत्याचारी और उससे बड़ा अपराधी कोई नहीं, जिसने अल्लाह पर झूठा आरोप लगाया और उसकी ओर उस चीज़ को हराम करने का काम मनसूब किया, जिसे उसने हराम नहीं किया; उसने ऐसा इसलिए किया ताकि लोगों को बिना किसी ज्ञान के सीधे रास्ते से भटका दे। निश्चय अल्लाह उन ज़ालिमों को मार्गदर्शन की तौफ़ीक़ प्रदान नहीं करता, जो अल्लाह पर झूठा आरोप लगाते हैं।

Al-An'aam 6:144Listen in Qur'an →
145

قُل لَّآ أَجِدُ فِى مَآ أُوحِىَ إِلَىَّ مُحَرَّمًا عَلَىٰ طَاعِمٍۢ يَطْعَمُهُۥٓ إِلَّآ أَن يَكُونَ مَيْتَةً أَوْ دَمًۭا مَّسْفُوحًا أَوْ لَحْمَ خِنزِيرٍۢ فَإِنَّهُۥ رِجْسٌ أَوْ فِسْقًا أُهِلَّ لِغَيْرِ ٱللَّهِ بِهِۦ ۚ فَمَنِ ٱضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍۢ وَلَا عَادٍۢ فَإِنَّ رَبَّكَ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ

(ऐ रसूल) तुम कहो कि मै तो जो (क़ुरान) मेरे पास वही के तौर पर आया है उसमें कोई चीज़ किसी खाने वाले पर जो उसको खाए हराम नहीं पाता मगर जबकि वह मुर्दा या बहता हुआ ख़़ून या सूअर का गोश्त हो तो बेशक ये (चीजे) नापाक और हराम हैं या (वह जानवर) नाफरमानी का बाएस हो कि (वक्ते ़ज़िबहा) ख़ुदा के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो फिर जो शख्स (हर तरह) बेबस हो जाए (और) नाफरमान व सरकश न हो और इस हालत में खाए तो अलबत्ता तुम्हारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

(ऐ रसूल!) आप कह दें कि अल्लाह ने मुझपर जो वह़्य उतारी है, उसमें जिन हराम (निषिद्ध) वस्तुओं का उल्लेख है, वे केवल यह हैं : वह हलाल जानवर जो ज़बह किए बिना मर जाए, बहता खून, सूअर का मांस कि वह अशुद्ध और निषिद्ध है, वह जानवर जिसे अल्लाह के नाम के अलावा पर ज़बह किया गया हो, जैसेकि वह जानवर जिसे उनकी मूर्तियों के नाम पर ज़बह किया गया हो। परंतु जो व्यक्ति सख़्त भूख के कारण इन हराम चीज़ों मे से खाने के लिए मजबूर हो जाए, जबकि उसका उद्देश्य उन्हें खाने का आनंद लेना न हो तथा ज़रूरत से अधिक न खाए, तो इसमें उस पर कोई पाप नहीं है। निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार मजबूर को क्षमा करने वाला है, यदि वह इनमें से खा ले, तथा उसपर दयालु है।

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146

وَعَلَى ٱلَّذِينَ هَادُوا۟ حَرَّمْنَا كُلَّ ذِى ظُفُرٍۢ ۖ وَمِنَ ٱلْبَقَرِ وَٱلْغَنَمِ حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ شُحُومَهُمَآ إِلَّا مَا حَمَلَتْ ظُهُورُهُمَآ أَوِ ٱلْحَوَايَآ أَوْ مَا ٱخْتَلَطَ بِعَظْمٍۢ ۚ ذَٰلِكَ جَزَيْنَٰهُم بِبَغْيِهِمْ ۖ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ

और हमने यहूदियों पर तमाम नाख़ूनदार जानवर हराम कर दिये थे और गाय और बकरी दोनों की चरबियां भी उन पर हराम कर दी थी मगर जो चरबी उनकी दोनों पीठ या आतों पर लगी हो या हडड्ी से मिली हुई हो (वह हलाल थी) ये हमने उन्हें उनकी सरक़शी की सज़ा दी थी और उसमें तो शक ही नहीं कि हम ज़रूर सच्चे हैं

और हमने यहूदियों पर उन तमाम जानवरों को हराम कर दिया था, जिनकी उंगलियाँ अलग-अलग न हों, जैसे ऊँट तथा शुतुरमुर्ग़ आदि। तथा हमने उनपर गाय और बकरी की चर्बी को भी हराम कर दिया था, सिवाय उसके जो उनकी पीठ या आँत से लगी हो, या जो हड्डियों के साथ मिश्रित हो, जैसे नितंब और पहलू की चर्बी। हमने उनके अत्याचार के बदले के तौर पर, इन चीज़ों को उनपर हराम किया था। निःसंदेह हम जो कुछ भी बताते हैं, निश्चय उसमें सच्चे हैं।

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147

فَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل رَّبُّكُمْ ذُو رَحْمَةٍۢ وَٰسِعَةٍۢ وَلَا يُرَدُّ بَأْسُهُۥ عَنِ ٱلْقَوْمِ ٱلْمُجْرِمِينَ

(ऐ रसूल) पर अगर वह तुम्हें झुठलाएं तो तुम (जवाब) में कहो कि (अगरचे) तुम्हारा परवरदिगार बड़ी वसीह रहमत वाला है मगर उसका अज़ाब गुनाहगार लोगों से टलता भी नहीं

(ऐ रसूल!) यदि वे आपको झुठलाएँ और जो कुछ आप अपने रब के पास से लाए हैं, उसे न मानें, तो उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कह दें : तुम्हारा पालनहार बहुत दयालु है, और तुम्हारे प्रति उसकी दया में से उसका तुम्हें मोहलत देना और तुम्हें सज़ा देने में जल्दी न करना है। तथा उन्हें डराते हुए कह दें : जो लोग अवज्ञा और कुकर्म करते हैं, उनसे उसकी यातना टलती नहीं है।

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148

سَيَقُولُ ٱلَّذِينَ أَشْرَكُوا۟ لَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَآ أَشْرَكْنَا وَلَآ ءَابَآؤُنَا وَلَا حَرَّمْنَا مِن شَىْءٍۢ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ حَتَّىٰ ذَاقُوا۟ بَأْسَنَا ۗ قُلْ هَلْ عِندَكُم مِّنْ عِلْمٍۢ فَتُخْرِجُوهُ لَنَآ ۖ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَإِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَخْرُصُونَ

अनक़रीब मुशरेकीन कहेंगें कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम लोग शिर्क करते और न हमारे बाप दादा और न हम कोई चीज़ अपने ऊपर हराम करते उसी तरह (बातें बना बना के) जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं (पैग़म्बरों को) झुठलाते रहे यहाँ तक कि उन लोगों ने हमारे अज़ाब (के मज़े)े को चख़ा (ऐ रसूल) तुम कहो कि तुम्हारे पास कोई दलील है (अगर है) तो हमारे (दिखाने के) वास्ते उसको निकालो (दलील तो क्या) पेश करोगे तुम लोग तो सिर्फ अपने ख्याल ख़ाम की पैरवी करते हो और सिर्फ अटकल पच्चू बातें करते हो

बहुदेववादी लोग, अल्लाह के साथ अपने साझी बनाने की वैधता पर, अल्लाह की इच्छा और उसकी तक़दीर (नियति) को प्रमाण बनाते हुए कहेंगे : यदि अल्लाह चाहता कि हम और हमारे पूर्वज अल्लाह के साथ साझी न बनाएँ, तो हम उसके साथ साझी न बनाते। और यदि अल्लाह चाहता कि हम उस चीज़ को हराम न ठहराएँ जो हमने अपने ऊपर हराम ठहराया है, तो हम उसे हराम न ठहराते। इन लोगों के अमान्य तर्क के समान ही के साथ, उन लोगों ने भी अपने रसूलों को झुठलाया जो इनसे पहले थे, उन्होंने कहा : यदि अल्लाह चाहता कि हम उन्हें न झुठलाएँ, तो हम उन्हें कभी न झुठलाते। तथा वे निरंतर इस इनकार पर बने रहे यहाँ तक कि उन्होंने हमारी उस यातना का स्वाद चख लिया जो हमने उनपर उतारी। (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : क्या तुम्हारे पास कोई सबूत है जो इंगित करता है कि अल्लाह तुमसे प्रसन्न है कि तुम उसके साथ साझी ठहराओ तथा उसके हराम किए हुए को हलाल ठहरा लो और उसके हलाल किए हुए को हराम ठहरा दो? क्योंकि मात्र तुमसे इसका होना, इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह तुमसे संतुष्ट है। क्योंकि इस विषय में तुम केवल अनुमान का पालन करते हो, और अनुमान से सत्य का कुछ भी लाभ नहीं होता है, और तुम केवल झूठ बोलते हो।

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149

قُلْ فَلِلَّهِ ٱلْحُجَّةُ ٱلْبَٰلِغَةُ ۖ فَلَوْ شَآءَ لَهَدَىٰكُمْ أَجْمَعِينَ

(ऐ रसूल) तुम कहो कि (अब तुम्हारे पास कोई दलील नहीं है) ख़ुदा तक पहुंचाने वाली दलील ख़ुदा ही के लिए ख़ास है

(ऐ रसूल!) आप मुश्रिकों से कह दें : यदि तुम्हारे पास इन कमज़ोर तर्कों के अलावा कोई तर्क नहीं है, तो (सुन लो कि) अल्लाह के पास निश्चित तर्क है जिस पर तुम्हारे द्वारा प्रस्तुत किए गए बहाने कट जाते हैं, और उसके द्वारा तुम्हारे संदेह जिनका तुम सहारा लेते हो निराकृत हो जाते हैं। अतः (ऐ बहुदेववादियो!) यदि अल्लाह तुम सभी को सत्य की तौफ़ीक़ देना चाहता, तो तुम सब को उसकी तौफ़ीक़ प्रदान कर देता।

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150

قُلْ هَلُمَّ شُهَدَآءَكُمُ ٱلَّذِينَ يَشْهَدُونَ أَنَّ ٱللَّهَ حَرَّمَ هَٰذَا ۖ فَإِن شَهِدُوا۟ فَلَا تَشْهَدْ مَعَهُمْ ۚ وَلَا تَتَّبِعْ أَهْوَآءَ ٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا وَٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْءَاخِرَةِ وَهُم بِرَبِّهِمْ يَعْدِلُونَ

फिर अगर वही चाहता तो तुम सबकी हिदायत करता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ( अच्छा) अपने गवाहों को लाकर हाज़िर करो जो ये गवाही दें कि ये चीज़े (जिन्हें तुम हराम मानते हो) खुदा ही ने हराम कर दी हैं फिर अगर (बिलग़रज़) वह गवाही दे भी दे तो (ऐ रसूल) कहीं तुम उनके साथ गवाही न देना और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाते और दूसरों को अपने परवरदिगार का हम सर बनाते है उनकी नफ़सियानी ख्वाहिशों पर न चलना

(ऐ रसूल!) इन मुश्रिकों से, जो अल्लाह के हलाल किए हुए को हराम करते हैं और दावा करते हैं कि अल्लाह ही ने इसे हराम किया है, कह दें : तुम अपने गवाहों को प्रस्तुत करो, जो यह गवाही दें कि अल्लाह ने इन वस्तुओं को हराम किया है, जिन्हें तुमने हराम ठहरा लिया है। यदि वे बिना ज्ञान के गवाही दें कि अल्लाह ने उन्हें हराम किया है, तो (ऐ रसूल!) आप उनकी गवाही में उनको सच्चा न मानें; क्योंकि यह झूठी गवाही है। तथा आप उन लोगों की इच्छाओं का पालन न करें, जो अपनी इच्छाओं को ही निर्णायक मानते हैं। क्योंकि उन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया है जब उन्होंने उस चीज़ को हराम ठहरा दिया जिसे अल्लाह ने उनके लिए हलाल किया था। तथा आप उनका अनुसरण न करें, जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते और वे अपने रब के साथ साझी बनाते हैं। चुनाँचे उसके अलावा को उसके बराबर (समकक्ष) ठहराते हैं। और जिसका अपने पालनहार के साथ यह रवैया हो उसका अनुसरण कैसे किया जा सकता है?!

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.