يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَوْفُوا۟ بِٱلْعُقُودِ ۚ أُحِلَّتْ لَكُم بَهِيمَةُ ٱلْأَنْعَٰمِ إِلَّا مَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ غَيْرَ مُحِلِّى ٱلصَّيْدِ وَأَنتُمْ حُرُمٌ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ يَحْكُمُ مَا يُرِيدُ
ऐ ईमानदारों (अपने) इक़रारों को पूरा करो (देखो) तुम्हारे वास्ते चौपाए जानवर हलाल कर दिये गये उन के सिवा जो तुमको पढ़ कर सुनाए जाएंगे हलाल कर दिए गए मगर जब तुम हालते एहराम में हो तो शिकार को हलाल न समझना बेशक ख़ुदा जो चाहता है हुक्म देता है
ऐ ईमान वालो! तुम उन सभी वचनों एवं प्रतिज्ञाओं को पूरा करो, जो तुमने अपने और अपने स्रष्टा के बीच तथा अपने और उसकी रचना के बीच किए हैं। अल्लाह ने तुमपर दया करते हुए तुम्हारे लिए पशुधन : (ऊँट, गाय तथा बकरी) को हलाल किया है, सिवाय उन जानवरों के जिनका हराम होना तुम्हें पढ़कर सुनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त हज्ज या उम्रा का एहराम बाँधे होने की स्थिति में तुमपर जंगली जानवरों का शिकार करना भी हराम है। अल्लाह अपनी हिकमत के अनुसार जो चाहता है हलाल या हराम होने का फैसला करता है। क्योंकि उसे कोई बाध्य करने वाला नहीं और न ही कोई उसके हुक्म पर आपत्ति कर सकता है।