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5. Al-Maaida

The Table · Medinan · 120 ayahs

سُورَةُ المَائـِدَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 71–80 of 120

71

وَحَسِبُوٓا۟ أَلَّا تَكُونَ فِتْنَةٌۭ فَعَمُوا۟ وَصَمُّوا۟ ثُمَّ تَابَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ ثُمَّ عَمُوا۟ وَصَمُّوا۟ كَثِيرٌۭ مِّنْهُمْ ۚ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِمَا يَعْمَلُونَ

और समझ लिया कि (इसमें हमारे लिए) कोई ख़राबी न होगी पस (गोया) वह लोग (अम्र हक़ से) अंधे और बहरे बन गए (मगर बावजूद इसके) जब इन लोगों ने तौबा की तो फिर ख़ुदा ने उनकी तौबा क़ुबूल कर ली (मगर) फिर (इस पर भी) उनमें से बहुतेरे अंधे और बहरे बन गए और जो कुछ ये लोग कर रहे हैं अल्लाह तो देखता है

उन्होंने सोचा कि उनके अनुबंधों और वचनों को तोड़ने, तथा नबियों को झुठलाने और उन्हें क़त्ल करने के परिणामस्वरूप उन्हें कोई नुक़सान नहीं होगा। परंतु उसका वह परिणाम सामने आया जो उन्होंने नहीं सोचा था। चुनाँचे वे सत्य से अंधे हो गए, उन्हें उसका रास्ता नज़र नहीं आता, तथा वे उसे स्वीकार करने के इरादे से सुनने से बहरे हो गए। फिर अल्लाह ने अपने अनुग्रह से उनकी तौबा क़बूल की। फिर इसके बाद वे पुनः सत्य से अंधे हो गए, और उसे सुनने से बहरे हो गए। उनमें से बहुतों के साथ ऐसा हुआ। तथा वे जो कुछ करते हैं, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है। इसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें इसका बदला देगा।

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72

لَقَدْ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْمَسِيحُ ٱبْنُ مَرْيَمَ ۖ وَقَالَ ٱلْمَسِيحُ يَٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبَّكُمْ ۖ إِنَّهُۥ مَن يُشْرِكْ بِٱللَّهِ فَقَدْ حَرَّمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِ ٱلْجَنَّةَ وَمَأْوَىٰهُ ٱلنَّارُ ۖ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنْ أَنصَارٍۢ

जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे ईसा मसीह ख़ुदा हैं वह सब काफ़िर हैं हालॉकि मसीह ने ख़ुद यूं कह दिया था कि ऐ बनी इसराईल सिर्फ उसी ख़ुदा की इबादत करो जो हमारा और तुम्हारा पालने वाला है क्योंकि (याद रखो) जिसने ख़ुदा का शरीक बनाया उस पर ख़ुदा ने बेहिश्त को हराम कर दिया है और उसका ठिकाना जहन्नुम है और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं

निःसंदेह उन ईसाइयों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा कि "अल्लाह तो ईसा बिन मरयम ही है।" क्योंकि उन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरे को पूज्य बना दिया। जबकि स्वयं ईसा बिन मरयम ने उनसे कहा था : ऐ बनी इसराईल! केवल अल्लाह की इबादत करो। क्योंकि वही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। इसलिए हम उसके बंदे होने में बराबर हैं। इसका कारण यह है कि जो कोई भी अल्लाह के साथ उसके अलावा किसी भी चीज़ को साझी ठहराता है, तो अल्लाह ने उसे हमेशा के लिए जन्नत में प्रवेश करने से रोक दिया है, और उसका ठिकाना जहन्नम की आग है। उसके लिए अल्लाह के पास न कोई सहायक है, न कोई मददगार, और न ही कोई उद्धारकर्ता है जो उसे उस यातना से बचा सके, जिसकी वह प्रतीक्षा कर रहा है।

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73

لَّقَدْ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ ثَالِثُ ثَلَٰثَةٍۢ ۘ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّآ إِلَٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۚ وَإِن لَّمْ يَنتَهُوا۟ عَمَّا يَقُولُونَ لَيَمَسَّنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنْهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ

जो लोग इसके क़ायल हैं कि ख़ुदा तीन में का (तीसरा) है वह यक़ीनन काफ़िर हो गए (याद रखो कि) ख़ुदाए यकता के सिवा कोई माबूद नहीं और (ख़ुदा के बारे में) ये लोग जो कुछ बका करते हैं अगर उससे बाज़ न आए तो (समझ रखो कि) जो लोग उसमें से (काफ़िर के) काफ़िर रह गए उन पर ज़रूर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल होगा

उन ईसाइयों ने (भी) कुफ़्र किया, जो कहते हैं : अल्लाह तीन से बना है, वे हैं : पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। अल्लाह उनकी इन बातों से बहुत बुलंद है। क्योंकि अल्लाह अनेक नहीं है। बल्कि वह केवल एक पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं। यदि वे इस जघन्य बात से नहीं रुके, तो उन्हें एक दर्दनाक यातना पहुँचेगी।

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74

أَفَلَا يَتُوبُونَ إِلَى ٱللَّهِ وَيَسْتَغْفِرُونَهُۥ ۚ وَٱللَّهُ غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ

तो ये लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा क्यों नहीं करते और अपने (क़सूरों की) माफ़ी क्यों नहीं मॉगते हालॉकि ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है

तो क्या ये लोग अपनी इस बात से, अल्लाह के समक्ष उससे तौबा करते हुए, पीछे नहीं हटते और उस शिर्क के लिए उससे क्षमा नहीं माँगते जो उन्होंने किया था?! तथा अल्लाह किसी भी गुनाह से तौबा करने वाले को क्षमा कर देने वाला है, भले ही वह गुनाह कुफ़्र ही क्यों न हो, वह ईमान वालों पर बहुत मेहरबान है।

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75

مَّا ٱلْمَسِيحُ ٱبْنُ مَرْيَمَ إِلَّا رَسُولٌۭ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ ٱلرُّسُلُ وَأُمُّهُۥ صِدِّيقَةٌۭ ۖ كَانَا يَأْكُلَانِ ٱلطَّعَامَ ۗ ٱنظُرْ كَيْفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ ٱلْءَايَٰتِ ثُمَّ ٱنظُرْ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ

मरियम के बेटे मसीह तो बस एक रसूल हैं और उनके क़ब्ल (और भी) बहुतेरे रसूल गुज़र चुके हैं और उनकी मॉ भी (ख़ुदा की) एक सच्ची बन्दी थी (और आदमियों की तरह) ये दोनों (के दोनों भी) खाना खाते थे (ऐ रसूल) ग़ौर तो करो हम अपने एहकाम इनसे कैसा साफ़ साफ़ बयान करते हैं

मरयम के पुत्र ईसा मसीह (अल्लाह के) रसूलों में से एक रसूल के अलावा कुछ नहीं हैं। उन्हें भी उन्हीं रसूलों की तरह मौत से गुज़रना पड़ेगा। तथा उनकी माँ मरयम - अलैहस्सलाम - बहुत सच्ची तथा अल्लाह की बातों की पुष्टि करने वाली थीं और वे दोनों ही खाना खाया करते थे, क्योंकि उन्हें इसकी आवश्यकता थी। फिर भला वे भोजन की आवश्यकता के साथ पूज्य कैसे हो सकते हैं?! (ऐ रसूल!) आप चिंतनशील दृष्टि से देखें : हम उनके लिए उन निशानियों को किस प्रकार खोल-खोलकर बयान करते हैें, जो अल्लाह के एकेश्वरवाद को दर्शाती हैं तथा अल्लाह के अलावा की ओर उलूहियत (पूज्य होने) की निस्बत करने में उनकी अतिशयोक्ति की अमान्यता को इंगित करती हैं। इसके बावजूद वे इन निशानियों की उपेक्षा करते हैं। फिर आप एक चिंतनशील दृष्टि से देखें : अल्लाह के एकत्व को दर्शाने वाली इन स्पष्ट निशानियों के बावजूद, वे किस प्रकार सत्य से पूरी तरह से फेरे जाते हैं।

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76

قُلْ أَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّۭا وَلَا نَفْعًۭا ۚ وَٱللَّهُ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ

फिर देखो तो कि (उसपर भी उलटे) ये लोग कहॉ भटके जा रहे हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम ख़ुदा (जैसे क़ादिर व तवाना) को छोड़कर (ऐसी ज़लील) चीज़ की इबादत करते हो जिसको न तो नुक़सान ही इख्तेयार है और न नफ़े का और ख़ुदा तो (सबकी) सुनता (और सब कुछ) जानता है

(ऐ रसूल!) आप उनके अल्लाह के अलावा की इबादत करने में उनके विरुद्ध तर्क देते हुए कह दें : क्या तुम ऐसी चीज़ की इबादत करते हो, जो न तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकती है और न तुमसे कोई नुक़सान दूर कर सकती है?! अतः वह अक्षम और विवश है, और अल्लाह विवशता से पाक है। तथा केवल अल्लाह ही तुम्हारी सभी बातों को सुनने वाला है, इसलिए उनमें से कोई भी चीज़ उससे नहीं छूटती है, तुम्हारे सभी कर्मों को जानने वाला है, इसलिए उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। तथा वह तुम्हें उनका बदला देगा।

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77

قُلْ يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ لَا تَغْلُوا۟ فِى دِينِكُمْ غَيْرَ ٱلْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوٓا۟ أَهْوَآءَ قَوْمٍۢ قَدْ ضَلُّوا۟ مِن قَبْلُ وَأَضَلُّوا۟ كَثِيرًۭا وَضَلُّوا۟ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ

ऐ रसूल तुम कह दो कि ऐ अहले किताब तुम अपने दीन में नाहक़ ज्यादती न करो और न उन लोगों (अपने बुज़ुगों) की नफ़सियानी ख्वाहिशों पर चलो जो पहले ख़ुद ही गुमराह हो चुके और (अपने साथ और भी) बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और राहे रास्त से (दूर) भटक गए

(ऐ रसूल!) आप ईसाइयों से कह दें : तुम्हें सत्य का अनुसरण करने का जो आदेश दिया गया है, उसमें सीमा से आगे न बढ़ो, तथा तुम्हें जिनके सम्मान का हुक्म दिया गया है (जैसे कि नबी गण), उनका सम्मान करने में अतिशयोक्ति न करो कि उनके बारे में ईश्वरत्व की आस्था रखने लगो, जैसा कि तुमने ईसा बिन मरयम के साथ किया। तुमने ऐसा अपने उन पथभ्रष्ट पूर्वजों का अनुसरण करने के कारण किया है, जिन्होंने बहुत-से लोगों को सीधे मार्ग से भटकाया और खुद भी सत्य के मार्ग से भटक गए।

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78

لُعِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنۢ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ عَلَىٰ لِسَانِ دَاوُۥدَ وَعِيسَى ٱبْنِ مَرْيَمَ ۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا۟ وَّكَانُوا۟ يَعْتَدُونَ

बनी इसराईल में से जो लोग काफ़िर थे उन पर दाऊद और मरियम के बेटे ईसा की ज़बानी लानत की गयी ये (लानत उन पर पड़ी तो सिर्फ) इस वजह से कि (एक तो) उन लोगों ने नाफ़रमानी की और (फिर हर मामले में) हद से बढ़ जाते थे

अल्लाह तआला बता रहा है कि उसने बनी इसराईल के काफ़िरों को अपनी दया से निष्कासित कर दिया। इसका वर्णन उस किताब में है, जो उसने दाऊद अलैहिस्सलाम पर उतारी अर्थात् ज़बूर, तथा उस किताब में है, जो उसने ईसा बिन मरयम पर अवतिरत की और वह इंजील है। दया से यह निष्कासन उनके द्वारा किए गए पापों और अल्लाह की वर्जनाओं की पवित्रता भंग करने के कारण था।

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79

كَانُوا۟ لَا يَتَنَاهَوْنَ عَن مُّنكَرٍۢ فَعَلُوهُ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ

और किसी बुरे काम से जिसको उन लोगों ने किया बाज़ न आते थे (बल्कि उस पर बावजूद नसीहत अड़े रहते) जो काम ये लोग करते थे क्या ही बुरा था

वे एक-दूसरे को बुराई करने से रोकते नहीं थे। बल्कि उनमें से अवज्ञाकारी लोग उन पापों और बुराइयों को सार्वजनिक रूप से किया करते थे। क्योंकि उन्हें बुराई से रोकने वाला कोई नहीं था। बुराई से रोकना छोड़कर वे बहुत बुरा कर रहे थे।

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80

تَرَىٰ كَثِيرًۭا مِّنْهُمْ يَتَوَلَّوْنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ۚ لَبِئْسَ مَا قَدَّمَتْ لَهُمْ أَنفُسُهُمْ أَن سَخِطَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ وَفِى ٱلْعَذَابِ هُمْ خَٰلِدُونَ

(ऐ रसूल) तुम उन (यहूदियों) में से बहुतेरों को देखोगे कि कुफ्फ़ार से दोस्ती रखते हैं जो सामान पहले से उन लोगों ने ख़ुद अपने वास्ते दुरूस्त किया है किस क़दर बुरा है (जिसका नतीजा ये है) कि (दुनिया में भी) ख़ुदा उन पर गज़बनाक हुआ और (आख़ेरत में भी) हमेशा अज़ाब ही में रहेंगे

(ऐ रसूल!) इन यहूदियों में से बहुत-से काफ़िरों को आप देखेंगे कि वे काफ़िरों से प्रेम करते हैं तथा उनकी ओर झुकाव रखते हैं, जबकि वे आपके प्रति शत्रुतापूर्ण हैं और एकेश्वरवादियों से शत्रुता रखते हैं। उनका काफ़िरों से दोस्ती रखने का यह कार्य बहुत बुरा है। क्योंकि यह अल्लाह के उनपर क्रोधित होने और उन्हें नरक की आग में डालने का कारण है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे, वहाँ से वे कभी न निकलेंगे।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.