وَحَسِبُوٓا۟ أَلَّا تَكُونَ فِتْنَةٌۭ فَعَمُوا۟ وَصَمُّوا۟ ثُمَّ تَابَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ ثُمَّ عَمُوا۟ وَصَمُّوا۟ كَثِيرٌۭ مِّنْهُمْ ۚ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِمَا يَعْمَلُونَ
और समझ लिया कि (इसमें हमारे लिए) कोई ख़राबी न होगी पस (गोया) वह लोग (अम्र हक़ से) अंधे और बहरे बन गए (मगर बावजूद इसके) जब इन लोगों ने तौबा की तो फिर ख़ुदा ने उनकी तौबा क़ुबूल कर ली (मगर) फिर (इस पर भी) उनमें से बहुतेरे अंधे और बहरे बन गए और जो कुछ ये लोग कर रहे हैं अल्लाह तो देखता है
उन्होंने सोचा कि उनके अनुबंधों और वचनों को तोड़ने, तथा नबियों को झुठलाने और उन्हें क़त्ल करने के परिणामस्वरूप उन्हें कोई नुक़सान नहीं होगा। परंतु उसका वह परिणाम सामने आया जो उन्होंने नहीं सोचा था। चुनाँचे वे सत्य से अंधे हो गए, उन्हें उसका रास्ता नज़र नहीं आता, तथा वे उसे स्वीकार करने के इरादे से सुनने से बहरे हो गए। फिर अल्लाह ने अपने अनुग्रह से उनकी तौबा क़बूल की। फिर इसके बाद वे पुनः सत्य से अंधे हो गए, और उसे सुनने से बहरे हो गए। उनमें से बहुतों के साथ ऐसा हुआ। तथा वे जो कुछ करते हैं, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है। इसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें इसका बदला देगा।