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5. Al-Maaida

The Table · Medinan · 120 ayahs

سُورَةُ المَائـِدَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 11–20 of 120

11

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَتَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ هَمَّ قَوْمٌ أَن يَبْسُطُوٓا۟ إِلَيْكُمْ أَيْدِيَهُمْ فَكَفَّ أَيْدِيَهُمْ عَنكُمْ ۖ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ

ऐ ईमानदारों ख़ुदा ने जो एहसानात तुमपर किए हैं उनको याद करो और ख़ूसूसन जब एक क़बीले ने तुम पर दस्त दराज़ी का इरादा किया था तो ख़ुदा ने उनके हाथों को तुम तक पहुंचने से रोक दिया और ख़ुदा से डरते रहो और मोमिनीन को ख़ुदा ही पर भरोसा रखना चाहिए

ऐ ईमान वालो! अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अल्लाह के इस उपकार को याद करो कि उसने तुम्हें सुरक्षा प्रदान की और तुम्हारे दुश्मनों के दिलों में भय डाल दिया, जब उन्होंने तुम्हें पकड़ने और तुम्हारा उन्मूलन करने के लिए तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाना चाहा। चुनाँचे अल्लाह ने उन्हें तुमसे फेर दिया और तुम्हें उनसे बचा लिया। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर उससे डरो। तथा मोमिनों को चाहिए कि वे अपने धार्मिक और सांसारिक हितों की प्राप्ति में केवल अल्लाह पर भरोसा करें।

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12

۞ وَلَقَدْ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَٰقَ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَبَعَثْنَا مِنْهُمُ ٱثْنَىْ عَشَرَ نَقِيبًۭا ۖ وَقَالَ ٱللَّهُ إِنِّى مَعَكُمْ ۖ لَئِنْ أَقَمْتُمُ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَيْتُمُ ٱلزَّكَوٰةَ وَءَامَنتُم بِرُسُلِى وَعَزَّرْتُمُوهُمْ وَأَقْرَضْتُمُ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًۭا لَّأُكَفِّرَنَّ عَنكُمْ سَيِّـَٔاتِكُمْ وَلَأُدْخِلَنَّكُمْ جَنَّٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ ۚ فَمَن كَفَرَ بَعْدَ ذَٰلِكَ مِنكُمْ فَقَدْ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ

और इसमें भी शक नहीं कि ख़ुदा ने बनी इसराईल से (भी ईमान का) एहद व पैमान ले लिया था और हम (ख़ुदा) ने इनमें के बारह सरदार उनपर मुक़र्रर किए और ख़ुदा ने बनी इसराईल से फ़रमाया था कि मैं तो यक़ीनन तुम्हारे साथ हूं अगर तुम भी पाबन्दी से नमाज़ पढ़ते और ज़कात देते रहो और हमारे पैग़म्बरों पर ईमान लाओ और उनकी मदद करते रहो और ख़ुदा (की ख़ुशनूदी के वास्ते लोगों को) क़र्जे हसना देते रहो तो मैं भी तुम्हारे गुनाह तुमसे ज़रूर दूर करूंगा और तुमको बेहिश्त के उन (हरे भरे ) बाग़ों में जा पहुंचाऊॅगा जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी हैं फिर तुममें से जो शख्स इसके बाद भी इन्कार करे तो यक़ीनन वह राहे रास्त से भटक गया

निश्चय अल्लाह ने बनी इसराईल से उस बात का दृढ़ वचन लिया, जिसका शीघ्र ही उल्लेख किया जाएगा, तथा उसने उनपर बारह प्रमुख नियुक्त किए, जिनमें से प्रत्येक अपने अधीन रहने वालों की देखरेख करते थे। तथा अल्लाह ने बनी इसराईल से कहा : मैं सहायता और समर्थन के द्वारा तुम्हारे साथ हूँ, यदि तुम सबसे पूर्ण तरीक़े से नमाज़ अदा करते रहे, अपने धनों की ज़कात देते रहे, मेरे सभी रसूलों को उनके बीच भेदभाव (अंतर) किए बिना सत्य माना, उनका सम्मान किया, उनकी सहायता की और भले कामों पर खर्च किया। यदि तुमने यह सब किया, तो निश्चय मैं उन बुराइयों को तुमसे अवश्य दूर कर दूँगा, जो तुमने की हैं, तथा मैं क़ियामत के दिन तुम्हें ऐसे बाग़ों में अवश्य प्रवेश दूँगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। फिर जिसने इस दृढ़ वचन लिए जाने के बाद कुफ़्र किया, तो निश्चय वह जानबूझकर सत्य के मार्ग से अलग हो गया।

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13

فَبِمَا نَقْضِهِم مِّيثَٰقَهُمْ لَعَنَّٰهُمْ وَجَعَلْنَا قُلُوبَهُمْ قَٰسِيَةًۭ ۖ يُحَرِّفُونَ ٱلْكَلِمَ عَن مَّوَاضِعِهِۦ ۙ وَنَسُوا۟ حَظًّۭا مِّمَّا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ ۚ وَلَا تَزَالُ تَطَّلِعُ عَلَىٰ خَآئِنَةٍۢ مِّنْهُمْ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّنْهُمْ ۖ فَٱعْفُ عَنْهُمْ وَٱصْفَحْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلْمُحْسِنِينَ

पस हमने उनकीे एहद शिकनी की वजह से उनपर लानत की और उनके दिलों को (गोया) हमने ख़ुद सख्त बना दिया कि (हमारे) कलमात को उनके असली मायनों से बदल कर दूसरे मायनो में इस्तेमाल करते हैं और जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा भुला बैठे और (ऐ रसूल) अब तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा एक न एक की ख्यानत पर बराबर मुत्तेला होते रहते हो तो तुम उन (के क़सूर) को माफ़ कर दो और (उनसे) दरगुज़र करो (क्योंकि) ख़ुदा एहसान करने वालों को ज़रूर दोस्त रखता है

उनके उस वचन का उल्लंघन करने के कारण, जो उनसे लिया गया था, हमने उन्हें अपनी दया से निष्कासित कर दिया, तथा उनके दिलों को कठोर और सख़्त बना दिया, जिस तक न तो कोई अच्छाई पहुँचती है और न ही उसे कोई नसीहत लाभ देती है। वे (अल्लाह के) शब्दों को उनके स्थानों से फेर देते हैं, इस प्रकार कि उनके शब्दों को बदल देते हैं और उनके अर्थों की व्याख्या इस तरह करते हैं जो उनकी इच्छाओं से मेल खाती है। तथा उन्होंने उनमें से कुछ बातों पर अमल करना छोड़ दिया, जिनका उन्हें उपदेश दिया गया था। (ऐ रसूल!) आपके पास उनकी अल्लाह तथा उसके मोमिन बंदों के साथ किसी न किसी विश्वासघात की ख़बर आती रहेगी। परंतु उनमें से कुछ लोगों को छोड़कर, जिन्होंने उस वचन को पूरा किया, जो उनसे लिया गया था। अतः आप उन्हें क्षमा कर दें, उनकी पकड़ न करें और उन्हें माफ़ कर दें। क्योंकि यह उपकार में से है और अल्लाह उपकार करने वालों से प्रेम करता है।

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14

وَمِنَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّا نَصَٰرَىٰٓ أَخَذْنَا مِيثَٰقَهُمْ فَنَسُوا۟ حَظًّۭا مِّمَّا ذُكِّرُوا۟ بِهِۦ فَأَغْرَيْنَا بَيْنَهُمُ ٱلْعَدَاوَةَ وَٱلْبَغْضَآءَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِ ۚ وَسَوْفَ يُنَبِّئُهُمُ ٱللَّهُ بِمَا كَانُوا۟ يَصْنَعُونَ

और जो लोग कहते हैं कि हम नसरानी हैं उनसे (भी) हमने ईमान का एहद (व पैमान) लिया था मगर जब जिन जिन बातों की उन्हें नसीहत की गयी थी उनमें से एक बड़ा हिस्सा (रिसालत) भुला बैठे तो हमने भी (उसकी सज़ा में) क़यामत तक उनमें बाहम अदावत व दुशमनी की बुनियाद डाल दी और ख़ुदा उन्हें बहुत जल्द (क़यामत के दिन) बता देगा कि वह क्या क्या करते थे

जिस तरह हमने यहूदियों से दृढ़ वचन लिया था, उसी तरह हमने उन लोगों से भी वचन लिया, जिन्होंने अपनी पवित्रता जताते हुए कहा कि वे ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वाले हैं। फिर उन्होंने उसमें से एक भाग पर अमल करना छोड़ दिया, जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था, जैसा कि यहूदियों में से उनके पूर्वजों ने किया था। तथा हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक के लिए शत्रुता तथा सख़्त घृणा डाल दी। अतः वे आपस में लड़ने वाले बन गए, वे एक-दूसरे को काफ़िर कहने लगे। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें बताएगा जो कुछ वे किया करते थे और उन्हें उसका बदला देगा।

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15

يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ قَدْ جَآءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًۭا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ ٱلْكِتَٰبِ وَيَعْفُوا۟ عَن كَثِيرٍۢ ۚ قَدْ جَآءَكُم مِّنَ ٱللَّهِ نُورٌۭ وَكِتَٰبٌۭ مُّبِينٌۭ

ऐ अहले किताब तुम्हारे पास हमारा पैगम्बर (मोहम्मद सल्ल) आ चुका जो किताबे ख़ुदा की उन बातों में से जिन्हें तुम छुपाया करते थे बहुतेरी तो साफ़ साफ़ बयान कर देगा और बहुतेरी से (अमदन) दरगुज़र करेगा तुम्हरे पास तो ख़ुदा की तरफ़ से एक (चमकता हुआ) नूर और साफ़ साफ़ बयान करने वाली किताब (कुरान) आ चुकी है

ऐ किताब वालो! अर्थात् तौरात वाले यहूदियो और इंजील वाले ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो तुम्हारे लिए उनमें से बहुत-सी बातों को स्पष्ट रूप से बयान करते हैं, जो तुम अपने ऊपर उतरने वाली किताब में से छिपाया करते थे, तथा उसमें से बहुत कुछ नज़रअंदाज़ कर देते हैं जिसमें तुम्हें बेनक़ाब करने के सिवा कोई लाभ नहीं। क़ुरआन तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से एक पुस्तक के रूप में आया है, और यह एक प्रकाश है जिससे प्रकाश प्राप्त किया जाता है, तथा हर उस चीज़ के लिए एक स्पष्ट पुस्तक है, जिसकी लोगों के अपने सांसारिक और आख़िरत के मामलों में आवश्यकता होती है।

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16

يَهْدِى بِهِ ٱللَّهُ مَنِ ٱتَّبَعَ رِضْوَٰنَهُۥ سُبُلَ ٱلسَّلَٰمِ وَيُخْرِجُهُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ بِإِذْنِهِۦ وَيَهْدِيهِمْ إِلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ

जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के पाबन्द हैं उनको तो उसके ज़रिए से राहे निजात की हिदायत करता है और अपने हुक्म से (कुफ़्र की) तारीकी से निकालकर (ईमान की) रौशनी में लाता है और राहे रास्त पर पहुंचा देता है

अल्लाह इस किताब के द्वारा उन लोगों को, जो उसे प्रसन्न करने वाली चीज़ों जैसे ईमान और अच्छे कर्म का अनुसरण करते हैं, अल्लाह की यातना से सुरक्षा के रास्तों का मार्गदर्शन करता है, जो कि जन्नत की ओर ले जाने वाले रास्ते हैं। तथा उन्हें अपनी अनुमति से कुफ़्र और अवज्ञा के अँधेरे से बाहर निकालकर ईमान और आज्ञाकारिता के प्रकाश में लाता है, और उन्हें सीधे रास्ते, इस्लाम के मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करता है।

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17

لَّقَدْ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓا۟ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلْمَسِيحُ ٱبْنُ مَرْيَمَ ۚ قُلْ فَمَن يَمْلِكُ مِنَ ٱللَّهِ شَيْـًٔا إِنْ أَرَادَ أَن يُهْلِكَ ٱلْمَسِيحَ ٱبْنَ مَرْيَمَ وَأُمَّهُۥ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا ۗ وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ

जो लोग उसके क़ायल हैं कि मरियम के बेटे मसीह बस ख़ुदा हैं वह ज़रूर काफ़िर हो गए (ऐ रसूल) उनसे पूंछो तो कि भला अगर ख़ुदा मरियम के बेटे मसीह और उनकी मॉ को और जितने लोग ज़मीन में हैं सबको मार डालना चाहे तो कौन ऐसा है जिसका ख़ुदा से भी ज़ोर चले (और रोक दे) और सारे आसमान और ज़मीन में और जो कुछ भी उनके दरमियान में है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है जो चाहता है पैदा करता है और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है

निश्चय ईसाइयों में से उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिनका कहना है कि निःसंदेह अल्लाह मरयम का पुत्र मसीह ही है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मरयम के बेटे ईसा मसीह को विनष्ट करने से, उनकी माँ (मरयम) को विनष्ट करने से तथा धरती पर उपस्थित सभी लोगों को विनष्ट करने से, अल्लाह को कौन रोक सकता है यदि वह उन्हें नष्ट करना चाहे?! यदि कोई भी उसे इससे रोकने में सक्षम नहीं है, तो यह इंगित करता है कि अल्लाह के अलावा कोई पूज्य नहीं है और यह कि : ईसा बिन मरयम, उनकी माता तथा शेष सृष्टि सब अल्लाह की रचना हैं। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। वह जो चाहता है, पैदा करता है और उसने जिन चीज़ों को पैदा करना चाहा है, उनमें से ईसा अलैहिस्सलाम भी हैं। चुनाँचे वह उसके बंदे और उसके रसूल हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

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18

وَقَالَتِ ٱلْيَهُودُ وَٱلنَّصَٰرَىٰ نَحْنُ أَبْنَٰٓؤُا۟ ٱللَّهِ وَأَحِبَّٰٓؤُهُۥ ۚ قُلْ فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنُوبِكُم ۖ بَلْ أَنتُم بَشَرٌۭ مِّمَّنْ خَلَقَ ۚ يَغْفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ ۚ وَلِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ وَإِلَيْهِ ٱلْمَصِيرُ

और नसरानी और यहूदी तो कहते हैं कि हम ही ख़ुदा के बेटे और उसके चहेते हैं (ऐ रसूल) उनसे तुम कह दो (कि अगर ऐसा है) तो फिर तुम्हें तुम्हारे गुनाहों की सज़ा क्यों देता है (तुम्हारा ख्याल लग़ो है) बल्कि तुम भी उसकी मख़लूक़ात से एक बशर हो ख़ुदा जिसे चाहेगा बख़ देगा और जिसको चाहेगा सज़ा देगा आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के दरमियान में है सब ख़ुदा ही का मुल्क है और सबको उसी की तरफ़ लौट कर जाना है

यहूदी और ईसाई दोनों ने दावा किया कि वे अल्लाह के पुत्र और उसके प्रिय हैं। (ऐ रसूल!) आप उनके जवाब में कह दें : अल्लाह तुम्हें तुम्हारे द्वारा किए गए पापों के कारण दंड क्यों देता है?! यदि तुम उसके प्रियजन होते, जैसा कि तुमने दावा किया है, तो वह तुम्हें इस दुनिया में हत्या और विरूपण के साथ तथा परलोक में आग के द्वारा दंड न देता; क्योंकि वह जिसे प्यार करता है उसे यातना नहीं देता है। बल्कि तुम भी अन्य सभी मनुष्यों की तरह मनुष्य हो। जो उनमें से अच्छा कर्म करेगा, वह उसे जन्नत का प्रतिफल देगा, और जो कोई भी बुराई करेगा, वह उसे (जहन्नम की) आग से दंडित करेगा। अल्लाह जिसे चाहता है, अपनी कृपा से क्षमा करता है और वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से दंडित करता है। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। और अकेले उसी की ओर लौटकर जाना है।

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19

يَٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَٰبِ قَدْ جَآءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ عَلَىٰ فَتْرَةٍۢ مِّنَ ٱلرُّسُلِ أَن تَقُولُوا۟ مَا جَآءَنَا مِنۢ بَشِيرٍۢ وَلَا نَذِيرٍۢ ۖ فَقَدْ جَآءَكُم بَشِيرٌۭ وَنَذِيرٌۭ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۭ

ऐ अहले किताब जब पैग़म्बरों की आमद में बहुत रूकावट हुई तो हमारा रसूल तुम्हारे पास आया जो एहकामे ख़ुदा को साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम कहीं ये न कह बैठो कि हमारे पास तो न कोई ख़ुशख़बरी देने वाला (पैग़म्बर) आया न (अज़ाब से) डराने वाला अब तो (ये नहीं कह सकते क्योंकि) यक़ीनन तुम्हारे पास ख़ुशख़बरी देने वाला और डराने वाला पैग़म्बर आ गया और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है

ऐ किताब वाले यहूदियो तथा ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं। वह ऐसे समय में आए हैं जब रसूलों का आगमन एक समय से बंद था तथा उनके आगमन की सख़्त आवश्यकता थी। ताकि तुम क्षमाप्रार्थी बनकर यह न को : हमारे पास कोई रसूल नहीं आया, जो हमें अल्लाह के प्रतिफल की शुभ सूचना देता और हमें उसके दंड से सावधान करता। अतः (अब) तुम्हारे पास मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो उसके प्रतिफल की शुभ सूचना देने वाले और उसके दंड से सावधान करने वाले हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ की क्षमता रखने वाला है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। और रसूलों को भेजना और उनके क्रम को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर समाप्त कर देना उसकी क्षमता में से है।

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20

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ يَٰقَوْمِ ٱذْكُرُوا۟ نِعْمَةَ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ إِذْ جَعَلَ فِيكُمْ أَنۢبِيَآءَ وَجَعَلَكُم مُّلُوكًۭا وَءَاتَىٰكُم مَّا لَمْ يُؤْتِ أَحَدًۭا مِّنَ ٱلْعَٰلَمِينَ

ऐ रसूल उनको वह वक्त याद (दिलाओ) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा था कि ऐ मेरी क़ौम जो नेअमते ख़ुदा ने तुमको दी है उसको याद करो इसलिए कि उसने तुम्हीं लोगों से बहुतेरे पैग़म्बर बनाए और तुम ही लोगों को बादशाह (भी) बनाया और तुम्हें वह नेअमतें दी हैं जो सारी ख़ुदायी में किसी एक को न दीं

(ऐ रसूल!) उस समय को याद करो, जब मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति बनी इसराईल से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अपने ऊपर अल्लाह की उस नेमत को याद करो जब उसने तुममें से कुछ नबी बनाए, जो तुम्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाते थे, तथा तुम्हें बादशाह बनाए कि तुम खुद के मामलों के मालिक हो गए जबकि तुम दास और ग़ुलाम हुआ करते थे, तथा उसने तुम्हें अपनी नेमतों में से वह प्रदान किया, जो उसने तुम्हारे समय में दुनिया वालों में से किसी को भी नहीं दिया।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.