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5. Al-Maaida

The Table · Medinan · 120 ayahs

سُورَةُ المَائـِدَةِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 111–120 of 120

111

وَإِذْ أَوْحَيْتُ إِلَى ٱلْحَوَارِيِّۦنَ أَنْ ءَامِنُوا۟ بِى وَبِرَسُولِى قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا وَٱشْهَدْ بِأَنَّنَا مُسْلِمُونَ

और जब मैने हवारियों से इलहाम किया कि मुझ पर और मेरे रसूल पर ईमान लाओ तो अर्ज़ करने लगे हम ईमान लाए और तू गवाह रहना कि हम तेरे फरमाबरदार बन्दे हैं

तथा तुम अपने ऊपर मेरे इस उपकार को भी याद करो कि मैंने तुम्हें कुछ सहायक प्रदान किए जब मैंने हवारियों (साथियों) के दिल में यह बात डाल दी कि वे मुझ पर और तुम पर ईमान लाएँ। तो उन्होंने आज्ञा मानी और जवाब देते हुए कहा : हम ईमान लाए, और - ऐ हमारे रब! - तू गवाह रह कि हम तेरे आज्ञाकारी और अधीन हैं।

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112

إِذْ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ يَٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ هَلْ يَسْتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَيْنَا مَآئِدَةًۭ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ۖ قَالَ ٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ

(वह वक्त याद करो) जब हवारियों ने ईसा से अर्ज़ की कि ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या आप का ख़ुदा उस पर क़ादिर है कि हम पर आसमान से (नेअमत की) एक ख्वान नाज़िल फरमाए ईसा ने कहा अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा से डरो (ऐसी फरमाइश जिसमें इम्तेहान मालूम हो न करो)

उस समय को याद करो, जब हवारियों ने कहा कि क्या आपका पालनहार, यदि आप उससे दुआ करें, तो हमपर आकाश से एक थाल (भोजन सहित दस्तर-ख़्वान) उतार सकता है? तो ईसा (अलैहिस्सलाम) उन्हें अल्लाह से डरने और जो कुछ उन्होंने माँगा था, उसे त्यागने का आदेश देकर उन्हें उत्तर दिया। क्योंकि हो सकता है उसमें उनकी कोई परीक्षा हो, और उनसे कहा : जीविका की तलाश में अपने रब पर भरोसा करो, यदि तुम मोमिन हो।

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113

قَالُوا۟ نُرِيدُ أَن نَّأْكُلَ مِنْهَا وَتَطْمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعْلَمَ أَن قَدْ صَدَقْتَنَا وَنَكُونَ عَلَيْهَا مِنَ ٱلشَّٰهِدِينَ

वह अर्ज़ करने लगे हम तो फक़त ये चाहते है कि इसमें से (बरतकन) कुछ खाएँ और हमारे दिल को (आपकी रिसालत का पूरा पूरा) इत्मेनान हो जाए और यक़ीन कर लें कि आपने हमसे (जो कुछ कहा था) सच फरमाया था और हम लोग इस पर गवाह रहें

हवारियों ने ईसा से कहा : हम चाहते हैं कि इस दस्तर-ख़्वान से खाएँ, और हमारे दिल अल्लाह की शक्ति की पूर्णता से और इस बात से आश्वस्त हो जाएँ कि आप उसके रसूल हैं, तथा हम निश्चित रूप से जान लें कि आप अल्लाह के पास से जो कुछ लेकर आए हैं, उसमें आपने हमसे सच्च कहा है, और हम उन लोगों के लिए इस बात के साक्षी बन जाएँ, जो यहाँ मौजूद नहीं हैं।

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114

قَالَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ ٱللَّهُمَّ رَبَّنَآ أَنزِلْ عَلَيْنَا مَآئِدَةًۭ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ تَكُونُ لَنَا عِيدًۭا لِّأَوَّلِنَا وَءَاخِرِنَا وَءَايَةًۭ مِّنكَ ۖ وَٱرْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلرَّٰزِقِينَ

(तब) मरियम के बेटे ईसा ने (बारगाहे ख़ुदा में) अर्ज़ की ख़ुदा वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान (नेअमत) नाज़िल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए (और हमारे हक़ में) तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है

ईसा अलैहिस्सलाम ने उनके अनुरोध का उत्तर दिया और अल्लाह से यह कहते हुए दुआ की : हे हमारे रब! हमपर खाने का एक दस्तर-ख़्वान उतार दे, जिसके उतरने के दिन को हम एक पर्व बनाकर तेरे लिए आभार प्रकट करते हुए उसका सम्मान करें, तथा वह तेरे एकत्व (एकमात्र पूज्य होने) की निशानी और प्रमाण, तथा जिस चीज़ के साथ मैं भेजा गया हूँ उसकी सच्चाई का प्रमाण हो। तथा हमें ऐसी जीविका प्रदान कर, जो तेरी इबादत करने में हमारी मदद करे, और - ऐ हमारे रब! - तू सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।

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115

قَالَ ٱللَّهُ إِنِّى مُنَزِّلُهَا عَلَيْكُمْ ۖ فَمَن يَكْفُرْ بَعْدُ مِنكُمْ فَإِنِّىٓ أُعَذِّبُهُۥ عَذَابًۭا لَّآ أُعَذِّبُهُۥٓ أَحَدًۭا مِّنَ ٱلْعَٰلَمِينَ

खुदा ने फरमाया मै ख्वान तो तुम पर ज़रुर नाज़िल करुगाँ (मगर याद रहे कि) फिर तुममें से जो भी शख़्श उसके बाद काफ़िर हुआ तो मै उसको यक़ीन ऐसे सख्त अज़ाब की सज़ा दूँगा कि सारी ख़ुदायी में किसी एक पर भी वैसा (सख्त) अज़ाब न करुगाँ

अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम की दुआ क़बूल कर ली और फरमाया : मैं यह दस्तर-ख़्वान उतारने वाला हूँ, जो तुमने अपने ऊपर उतारने की माँग की है। अतः जो कोई भी उसके उतरने के बाद कुफ्र करे, वह केवल खुद को दोषी ठहराए। क्योंकि मैं उसे ऐसी कड़ी यातना दूँगा, जो किसी और को नहीं दूँगा। क्योंकि उसने प्रकाशमान (स्पष्ट) निशानी देखी, इसलिए उसका कुफ़्र हठ का कुफ़्र है। तथा अल्लाह ने उनसे अपना वचन पूरा किया, सो उसे उनपर उतार दिया।

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116

وَإِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ءَأَنتَ قُلْتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِى وَأُمِّىَ إِلَٰهَيْنِ مِن دُونِ ٱللَّهِ ۖ قَالَ سُبْحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِىٓ أَنْ أَقُولَ مَا لَيْسَ لِى بِحَقٍّ ۚ إِن كُنتُ قُلْتُهُۥ فَقَدْ عَلِمْتَهُۥ ۚ تَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِى وَلَآ أَعْلَمُ مَا فِى نَفْسِكَ ۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلْغُيُوبِ

और (वह वक्त भी याद करो) जब क़यामत में ईसा से ख़ुदा फरमाएग कि (क्यों) ऐ मरियम के बेटे ईसा क्या तुमने लोगों से ये कह दिया था कि ख़ुदा को छोड़कर मुझ को और मेरी माँ को ख़ुदा बना लो ईसा अर्ज़ करेगें सुबहान अल्लाह मेरी तो ये मजाल न थी कि मै ऐसी बात मुँह से निकालूं जिसका मुझे कोई हक़ न हो (अच्छा) अगर मैने कहा होगा तो तुझको ज़रुर मालूम ही होगा क्योंकि तू मेरे दिल की (सब बात) जानता है हाँ अलबत्ता मै तेरे जी की बात नहीं जानता (क्योंकि) इसमें तो शक़ ही नहीं कि तू ही ग़ैब की बातें ख़ूब जानता है

और उस समय को याद करो, जब अल्लाह तआला क़ियामत के दिन ईसा बिन मरयम अलैहिमस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ ईसा बिन मरयम! क्या तुमने लोगों से कहा था : मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के अलावा पूज्य बना लो? तो ईसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार की पवित्रता बयान करते हुए कहेंगे : मेरे लिए उचित ही नहीं कि मैं उनसे सत्य के अलावा कुछ कहूँ। और यदि मान लिया जाए कि मैंने ऐसा कहा था, तो निश्चय तुझे उसका ज्ञान है, क्योंकि तुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। तू जानता है जो कुछ मैं अपने दिल में छिपाता हूँ, और मुझे नहीं पता जो तेरे मन में है। निश्चय अकेला तू ही है जो हर परोक्ष (अनुपस्थित), हर छिपी हुई और हर प्रत्यक्ष चीज़ को जानता है।

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117

مَا قُلْتُ لَهُمْ إِلَّا مَآ أَمَرْتَنِى بِهِۦٓ أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبَّكُمْ ۚ وَكُنتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًۭا مَّا دُمْتُ فِيهِمْ ۖ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَنِى كُنتَ أَنتَ ٱلرَّقِيبَ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ شَهِيدٌ

तूने मुझे जो कुछ हुक्म दिया उसके सिवा तो मैने उनसे कुछ भी नहीं कहा यही कि ख़ुदा ही की इबादत करो जो मेरा और तुम्हारा सबका पालने वाला है और जब तक मैं उनमें रहा उन की देखभाल करता रहा फिर जब तूने मुझे (दुनिया से) उठा लिया तो तू ही उनका निगेहबान था और तू तो ख़ुद हर चीज़ का गवाह (मौजूद) है

ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से कहा : मैंने उनसे केवल वही कहा, जो कुछ तूने मुझे कहने का आदेश दिया था कि उन्हें एकमात्र तेरी इबादत करने का आदेश दूँ। और जब तक मैं उनके बीच मौजूद था तो वे जो कुछ कहते थे मैं उसकी निगरानी करता था। फिर जब तूने मुझे जीवित आकाश पर उठाकर उनके बीच मेरे रहने की अवधि का समापन कर दिया, तो - ऐ मेरे रब! - तू ही उनके कर्मों का संरक्षक था, और तू हर चीज़ का साक्षी है, कोई भी चीज़ तुझसे छिपी नहीं। अतः जो कुछ मैंने उनसे कहा और जो कुछ उन्होंने मेरे बाद कहा, वह तुझसे छिपा नहीं।

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118

إِن تُعَذِّبْهُمْ فَإِنَّهُمْ عِبَادُكَ ۖ وَإِن تَغْفِرْ لَهُمْ فَإِنَّكَ أَنتَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

तू अगर उन पर अज़ाब करेगा तो (तू मालिक है) ये तेरे बन्दे हैं और अगर उन्हें बख्श देगा तो (कोई तेरा हाथ नहीं पकड़ सकता क्योंकि) बेशक तू ज़बरदस्त हिकमत वाला है

(ऐ मेरे पालनहार!) यदि तू उन्हें दंड दे, तो बेशक वे तेरे बंदे हैं, तू उनके साथ जो चाहे करे, और यदि तू उनमें से ईमान लाने वालों पर उपकार करते हुए उन्हें क्षमा कर दे, तो कोई तुझे उससे रोकने वाला नहीं। क्योंकि तू सबपर प्रभुत्वशाली है जिसे पराजित नहीं किया जा सकता, तथा अपने प्रबंधन में हिकमत वाला है।

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119

قَالَ ٱللَّهُ هَٰذَا يَوْمُ يَنفَعُ ٱلصَّٰدِقِينَ صِدْقُهُمْ ۚ لَهُمْ جَنَّٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًۭا ۚ رَّضِىَ ٱللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا۟ عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ

ख़ुदा फरमाएगा कि ये वह दिन है कि सच्चे बन्दों को उनकी सच्चाई (आज) काम आएगी उनके लिए (हरे भरे बेहिश्त के) वह बाग़ात है जिनके (दरख्तो के) नीचे नहरे जारी हैं (और) वह उसमें अबादुल आबाद तक रहेंगे ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से खुश यही बहुत बड़ी कामयाबी है

अल्लाह ईसा अलैहिस्सलाम से कहेगा : यह एक ऐसा दिन है जब सच्चे इरादों, कर्मों और बातों वालों को उनकी सच्चाई लाभ देगी। उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें प्रवाहित हैं, वे उनमें सदा सर्वदा के लिए रहेंगे, उन्हें कभी मृत्यु नहीं आएगी। अल्लाह उनसे प्रसन्न होगा, अतः वह उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा तथा वे शाश्वत आनंद प्राप्त होने के कारण अल्लाह से प्रसन्न होंगे। यह प्रतिफल और (अल्लाह का) उनसे प्रसन्न होना ही महान सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं।

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120

لِلَّهِ مُلْكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا فِيهِنَّ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ قَدِيرٌۢ

सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उनमें है सब ख़ुदा ही की सल्तनत है और वह हर चीज़ पर क़ादिर (व तवाना) है

आकाशों तथा धरती का राज्य अकेले अल्लाह ही का है, वही उनका स्रष्टा और उनके मामलों का प्रबंध करने वाला है, तथा उनमें विद्यमान् सभी प्राणियों का राज्य उसी का है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.