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3. Aal-i-Imraan

The Family of Imraan · Medinan · 200 ayahs

سُورَةُ آلِ عِمۡرَانَ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 11–20 of 200

11

كَدَأْبِ ءَالِ فِرْعَوْنَ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا فَأَخَذَهُمُ ٱللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ ۗ وَٱللَّهُ شَدِيدُ ٱلْعِقَابِ

(उनकी भी) क़ौमे फ़िरऔन और उनसे पहले वालों की सी हालत है कि उन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो खुदा ने उन्हें उनके गुनाहों की पादाश (सज़ा) में ले डाला और ख़ुदा सख्त सज़ा देने वाला है

इन काफिरों की स्थिति फ़िरऔन के लोगों और उनसे पहले के लोगों की तरह है, जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसकी आयतों (निशानियों) को झुठलाया था। तो अल्लाह ने उन्हें उनके पापों के कारण दंडित किया और उनके धन और उनकी औलाद ने उन्हें कोई लाभ नहीं पहुँचाया। और अल्लाह उसे कठोर सज़ा देने वाला है, जिसने उसका इनकार किया और उसकी आयतों (निशानियों) को झुठलाया।

Aal-i-Imraan 3:11Listen in Qur'an →
12

قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ سَتُغْلَبُونَ وَتُحْشَرُونَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ ۚ وَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ

(ऐ रसूल) जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनसे कह दो कि बहुत जल्द तुम (मुसलमानो के मुक़ाबले में) मग़लूब (हारे हुए) होंगे और जहन्नुम में इकट्ठे किये जाओगे और वह (क्या) बुरा ठिकाना है

(ऐ रसूल!) विभिन्न धर्मों के मानने वाले काफ़िरों से कह दें : ईमान वाले शीघ्र ही तुम्हें पराजित कर देंगे और तुम कुफ़्र की हालत में मरोगे तथा अल्लाह तुम्हें जहन्नम की आग में इकट्ठा करेगा। और वह तुम्हारे लिए बहुत बुरा ठिकाना है।

Aal-i-Imraan 3:12Listen in Qur'an →
13

قَدْ كَانَ لَكُمْ ءَايَةٌۭ فِى فِئَتَيْنِ ٱلْتَقَتَا ۖ فِئَةٌۭ تُقَٰتِلُ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ وَأُخْرَىٰ كَافِرَةٌۭ يَرَوْنَهُم مِّثْلَيْهِمْ رَأْىَ ٱلْعَيْنِ ۚ وَٱللَّهُ يُؤَيِّدُ بِنَصْرِهِۦ مَن يَشَآءُ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةًۭ لِّأُو۟لِى ٱلْأَبْصَٰرِ

बेशक तुम्हारे (समझाने के) वास्ते उन दो (मुख़ालिफ़ गिरोहों में जो (बद्र की लड़ाई में) एक दूसरे के साथ गुथ गए (रसूल की सच्चाई की) बड़ी भारी निशानी है कि एक गिरोह ख़ुदा की राह में जेहाद करता था और दूसरा काफ़िरों का जिनको मुसलमान अपनी ऑख से दुगना देख रहे थे (मगर ख़ुदा ने क़लील ही को फ़तह दी) और ख़ुदा अपनी मदद से जिस की चाहता है ताईद करता है बेशक ऑख वालों के वास्ते इस वाक़ये में बड़ी इबरत है

तुम्हारे लिए उन दो दलों में एक संकेत और सीख थी, जो बद्र के दिन लड़ने के लिए आपस में मिले थे। उनमें से एक दल ईमान वालों का था और वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके साथियों का दल था। वे अल्लाह के रास्ते में इस उद्देश्य से युद्ध कर रहे थे ताकि अल्लाह की बात सर्वोच्च हो और काफ़िरों की बात नीची हो। और दूसरा दल काफ़िरों का था और वे मक्का के काफ़िर थे, जो गर्व, दिखावा और धार्मिक पक्षपात के तौर पर निकले थे। ईमान वाले उनको अपनी आँखों से वास्तविकता में दोगुना देख रहे थे। तो अल्लाह ने अपने दोस्तों को विजय प्रदान की और अल्लाह जिसे चाहता है अपने विजय के साथ उसका समर्थन करता है। निःसंदेह इसमें इबरत और उपदेश है समझ-बूझ रखने वालों के लिए, ताकि उन्हें मालूम हो जाए कि विजय ईमान वालों के लिए है, अगरचे उनकी संख्या कम हो, और यह कि पराजय असत्यवादियों के लिए है, भले ही उनकी संख्या अधिक हो।

Aal-i-Imraan 3:13Listen in Qur'an →
14

زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ ٱلشَّهَوَٰتِ مِنَ ٱلنِّسَآءِ وَٱلْبَنِينَ وَٱلْقَنَٰطِيرِ ٱلْمُقَنطَرَةِ مِنَ ٱلذَّهَبِ وَٱلْفِضَّةِ وَٱلْخَيْلِ ٱلْمُسَوَّمَةِ وَٱلْأَنْعَٰمِ وَٱلْحَرْثِ ۗ ذَٰلِكَ مَتَٰعُ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَٱللَّهُ عِندَهُۥ حُسْنُ ٱلْمَـَٔابِ

दुनिया में लोगों को उनकी मरग़ूब चीज़े (मसलन) बीवियों और बेटों और सोने चॉदी के बड़े बड़े लगे हुए ढेरों और उम्दा उम्दा घोड़ों और मवेशियों ओर खेती के साथ उलफ़त भली करके दिखा दी गई है ये सब दुनयावी ज़िन्दगी के (चन्द रोज़ा) फ़ायदे हैं और (हमेशा का) अच्छा ठिकाना तो ख़ुदा ही के यहॉ है

अल्लाह सूचित कर रहा है कि उसने लोगों के लिए - उनकी परीक्षा लेने के लिए - सांसारिक इच्छाओं का प्रेम सुसज्जित कर दिया है, जैसे कि महिलाएँ, बेटे, सोने और चाँदी के एकत्रित ख़ज़ाने, निशान लगाए हुए अच्छे नस्ल के घोड़े, ऊँट, गाय और भेड़ जैसे मवेशी और भूमि की खेती। यह सांसारिक जीवन का सामान है, जिससे कुछ समय के लिए लाभ उठाया जाता है, फिर वह ख़त्म हो जाता है। इसलिए मोमिन को इससे चिपकना नहीं चाहिए। और अल्लाह के पास ही उत्तम ठिकाना है और वह जन्नत है, जिसकी चौड़ाई आकाशों एवं धरती के बराबर है।

Aal-i-Imraan 3:14Listen in Qur'an →
15

۞ قُلْ أَؤُنَبِّئُكُم بِخَيْرٍۢ مِّن ذَٰلِكُمْ ۚ لِلَّذِينَ ٱتَّقَوْا۟ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَأَزْوَٰجٌۭ مُّطَهَّرَةٌۭ وَرِضْوَٰنٌۭ مِّنَ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِٱلْعِبَادِ

(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि क्या मैं तुमको उन सब चीज़ों से बेहतर चीज़ बता दूं (अच्छा सुनो) जिन लोगों ने परहेज़गारी इख्तेयार की उनके लिए उनके परवरदिगार के यहॉ (बेहिश्त) के वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं (और वह) हमेशा उसमें रहेंगे और उसके अलावा उनके लिए साफ सुथरी बीवियॉ हैं और (सबसे बढ़कर) ख़ुदा की ख़ुशनूदी है और ख़ुदा (अपने) उन बन्दों को खूब देख रहा हे जो दुआऐं मॉगा करते हैं

(ऐ रसूल!) कह दीजिए : क्या मैं तुम्हें इन इच्छाओं से बेहतर चीज़ के बारे में बताऊँ? जो लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता करके और उसकी अवज्ञा को त्यागकर उससे डरते हैं, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे हमेशा रहने वाले हैं, न उन्हें मौत आएगी और न उनका विनाश होगा। उनके लिए उसमें ऐसी पत्नियाँ होंगी जो अपनी संरचना और आचरण में सभी बुराइयों से शुद्ध होंगी। इसके बावजूद, उनपर अल्लाह की ओर से प्रसन्नता उतरेगी, फिर वह उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा। और अल्लाह अपने बंदों के हालात से अवगत है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है, और वह उन्हें उनपर बदला देगा।

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16

ٱلَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَآ إِنَّنَآ ءَامَنَّا فَٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

कि हमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) ईमान लाए हैं पस तू भी हमारे गुनाहों को बख्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा

ये जन्नत वाले ही हैं जो अपने पालनहार से दुआ करते हुए कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हम तुझपर ईमान लाए और उसपर भी जो कुछ तूने अपने रसूलों पर उतारा है, तथा हमने तेरी शरीयत का पालन किया। अतः तू हमारे द्वारा किए गए पापों को क्षमा कर दे और हमें आग की यातना से बचा।

Aal-i-Imraan 3:16Listen in Qur'an →
17

ٱلصَّٰبِرِينَ وَٱلصَّٰدِقِينَ وَٱلْقَٰنِتِينَ وَٱلْمُنفِقِينَ وَٱلْمُسْتَغْفِرِينَ بِٱلْأَسْحَارِ

(यही लोग हैं) सब्र करने वाले और सच बोलने वाले और (ख़ुदा के) फ़रमाबरदार और (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करने वाले और पिछली रातों में (ख़ुदा से तौबा) इस्तग़फ़ार करने वाले

जो आज्ञाकारिता के काम करने और बुरे कामों को त्यागने, तथा उनपर आने वाली विपत्तियों पर धैर्य रखने वाले हैं, तथा वे अपने कथनों और कार्यों में सच्चे हैं, और वे पूरी तरह से अल्लाह के आज्ञाकारी हैं, और वे अल्लाह की राह में अपना धन खर्च करने वाले हैं, तथा वे रात की अंतिम घड़ियों में अल्लाह से क्षमा माँगने वाले हैं। क्योंकि उस समय दुआ स्वीकार होने की संभावना अधिक होती है और दिल व्यस्तताओं से खाली होता है।

Aal-i-Imraan 3:17Listen in Qur'an →
18

شَهِدَ ٱللَّهُ أَنَّهُۥ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ وَٱلْمَلَٰٓئِكَةُ وَأُو۟لُوا۟ ٱلْعِلْمِ قَآئِمًۢا بِٱلْقِسْطِ ۚ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

ज़रूर ख़ुदा और फ़रिश्तों और इल्म वालों ने गवाही दी है कि उसके सिवा कोई माबूद क़ाबिले परसतिश नहीं है और वह ख़ुदा अद्ल व इन्साफ़ के साथ (कारख़ानाए आलम का) सॅभालने वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं (वही हर चीज़ पर) ग़ालिब और दाना है (सच्चा) दीन तो ख़ुदा के नज़दीक यक़ीनन (बस यही) इस्लाम है

अल्लाह ने गवाही दी कि निःसंदेह वही वास्तव में इबादत के योग्य पूज्य है। उसके सिवा कोई उपासना के योग्य नहीं। ऐसा उसने शरई और ब्रह्मांडीय आयतों (निशानियों) को स्थापित करके किया है, जो उसके एकमात्र पूज्य होने को दर्शाती हैं। तथा फरिश्तों ने भी इसकी गवाही दी, और ज्ञान वाले लोगों ने तौहीद (एकेश्वरवाद) को लोगों के लिए स्पष्ट करने और उन्हें उसकी ओर आमंत्रित करने के द्वारा इसकी गवाही दी। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े तथ्य अर्थात् इस बात की गवाही दी कि अल्लाह ही एकमात्र पूज्य है और वह अपनी सृष्टि और शरीयत में न्याय स्थापित करने वाला है। उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, वह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, अपनी रचना, प्रबंधन और शरीयतसाज़ी में पूर्ण हिकमत वाला है।

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19

إِنَّ ٱلدِّينَ عِندَ ٱللَّهِ ٱلْإِسْلَٰمُ ۗ وَمَا ٱخْتَلَفَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ مَا جَآءَهُمُ ٱلْعِلْمُ بَغْيًۢا بَيْنَهُمْ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَإِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ

और अहले किताब ने जो उस दीने हक़ से इख्तेलाफ़ किया तो महज़ आपस की शरारत और असली (अम्र) मालूम हो जाने के बाद (ही क्या है) और जिस शख्स ने ख़ुदा की निशानियों से इन्कार किया तो (वह समझ ले कि यक़ीनन ख़ुदा (उससे) बहुत जल्दी हिसाब लेने वाला है

नि:संदेह अल्लाह के निकट स्वीकार्य धर्म इस्लाम है। इस्लाम का मतलब है आज्ञाकारिता के साथ अकेले अल्लाह के प्रति अधीनता और उपासना (बंदगी) के साथ उसके प्रति समर्पण; तथा सभी रसूलों पर उनकी अंतिम कड़ी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तक ईमान लाना, जिनपर अल्लाह ने रसूलों का सिलसिला समाप्त कर दिया। अतः अल्लाह आपकी शरीयत के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेगा। यहूदियों और ईसाइयों ने अपने धर्म के बारे में जो भी मतभेद किया और विभिन्न समूहों और दलों में विभाजित हो गए, वह उनके पास ज्ञान आने के साथ उनपर तर्क स्थापित होने के बाद, ईर्ष्या और दुनिया की लालच के कारण था। तथा जो अल्लाह की उसके रसूल पर अवतरित आयतों का इनकार करे, तो निःसंदेह अल्लाह उससे बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है, जिसने उसका इनकार किया और उसके रसूलों को झुठलाया।

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20

فَإِنْ حَآجُّوكَ فَقُلْ أَسْلَمْتُ وَجْهِىَ لِلَّهِ وَمَنِ ٱتَّبَعَنِ ۗ وَقُل لِّلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ وَٱلْأُمِّيِّۦنَ ءَأَسْلَمْتُمْ ۚ فَإِنْ أَسْلَمُوا۟ فَقَدِ ٱهْتَدَوا۟ ۖ وَّإِن تَوَلَّوْا۟ فَإِنَّمَا عَلَيْكَ ٱلْبَلَٰغُ ۗ وَٱللَّهُ بَصِيرٌۢ بِٱلْعِبَادِ

(ऐ रसूल) पस अगर ये लोग तुमसे (ख्वाह मा ख्वाह) हुज्जत करे तो कह दो मैंने ख़ुदा के आगे अपना सरे तस्लीम ख़म कर दिया है और जो मेरे ताबे है (उन्होंने) भी) और ऐ रसूल तुम अहले किताब और जाहिलों से पूंछो कि क्या तुम भी इस्लाम लाए हो (या नही) पस अगर इस्लाम लाए हैं तो बेख़टके राहे रास्त पर आ गए और अगर मुंह फेरे तो (ऐ रसूल) तुम पर सिर्फ़ पैग़ाम (इस्लाम) पहुंचा देना फ़र्ज़ है (बस) और ख़ुदा (अपने बन्दों) को देख रहा है

(ऐ रसूल!) अगर वे आपसे उस सत्य के संबंध में झगड़ें, जो आपपर अल्लाह की ओर से उतरा है, तो उन्हें उत्तर देते हुए कह दीजिए : मैं और ईमान वालों में से मेरा अनुसरण करने वाले अल्लाह को समर्पित हो गए। और (ऐ रसूल!) किताब वालों और मुश्रिकों से पूछिए : क्या तुम लोग अल्लाह के प्रति, उसके लिए विशुद्ध होकर और जो मैं लाया हूँ उसका अनुसरण करते हुए, समर्पित हो गए? यदि वे अल्लाह के प्रति समर्पित हो जाएँ और आपकी शरीयत का अनुसरण करें, तो निःसंदेह उन्होंने हिदायत का मार्ग अपना लिया। और अगर वे इस्लाम से मुँह फेर लें, तो आपका काम केवल अपनी बात उन तक पहुँचा देना है और उनका मामला अल्लाह के हवाले है। क्योंकि वह अपने बंदों को ख़ूब देखने वाला है, और वह प्रत्येक कार्यकर्ता को उसके कार्य का बदला देगा।

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Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.