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3. Aal-i-Imraan

The Family of Imraan · Medinan · 200 ayahs

سُورَةُ آلِ عِمۡرَانَ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 51–60 of 200

51

إِنَّ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبُّكُمْ فَٱعْبُدُوهُ ۗ هَٰذَا صِرَٰطٌۭ مُّسْتَقِيمٌۭ

पस तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो बेशक ख़ुदा ही मेरा और तुम्हारा परवरदिगार है

ऐसा इसलिए है क्योंकि अल्लाह ही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। चुनाँचे वही अकेली आज्ञा मानने और डरने के योग्य है। अतः तुम अकेले उसी की इबादत करो। यह जो मैंने तुम्हें अल्लाह की इबादत करने और उससे डरने का आदेश दिया है, यही सीधा मार्ग है, जिसमें कोई टेढ़ नहीं।

Aal-i-Imraan 3:51Listen in Qur'an →
52

۞ فَلَمَّآ أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنْهُمُ ٱلْكُفْرَ قَالَ مَنْ أَنصَارِىٓ إِلَى ٱللَّهِ ۖ قَالَ ٱلْحَوَارِيُّونَ نَحْنُ أَنصَارُ ٱللَّهِ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَٱشْهَدْ بِأَنَّا مُسْلِمُونَ

पस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ़्र (पर अड़े रहना) देखा तो (आख़िर) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए

जब ईसा अलैहिस्सलाम को उनके कुफ़्र पर आग्रह का आभास हुआ, तो उन्होंने बनी इसराईल को संबोधित करते हुए कहा : अल्लाह की ओर बुलाने में मेरी सहायता कौन करेगा? उनके अनुयायियों में से चुनिंदा लोगों ने कहा : हम अल्लाह के धर्म के समर्थक हैं। हम अल्लाह पर ईमान लाए और हमने आपका अनुसरण किया। और - ऐ ईसा! - आप गवाह रहें कि हम अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानते हुए और उसकी आज्ञाकारिता के साथ उसके अधीन हैं।

Aal-i-Imraan 3:52Listen in Qur'an →
53

رَبَّنَآ ءَامَنَّا بِمَآ أَنزَلْتَ وَٱتَّبَعْنَا ٱلرَّسُولَ فَٱكْتُبْنَا مَعَ ٱلشَّٰهِدِينَ

और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं

ह़वारियों ने यह भी कहा : ऐ हमारे पालनहार! हम उस इंजील पर ईमान लाए जो तूने उतारा तथा हमने ईसा अलैहिस्सलाम का अनुसरण किया। अतः तू हमें उन सत्य की गवाही देने वालों में शामिल कर ले, जो तुझपर और तेरे रसूलों पर ईमान लाए।

Aal-i-Imraan 3:53Listen in Qur'an →
54

وَمَكَرُوا۟ وَمَكَرَ ٱللَّهُ ۖ وَٱللَّهُ خَيْرُ ٱلْمَٰكِرِينَ

और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले

बनी इसराईल के काफिरों ने साजिश रची और उन्होंने ईसा अलैहिस्सलाम की हत्या करने का प्रयास किया। तो अल्लाह ने उनके खिलाफ गुप्त योजना बनाई। इसलिए उसने उन्हें उनकी गुमराही में छोड़ दिया और एक अन्य व्यक्ति को ईसा अलैहिस्सलाम से मिलता जुलता रूप-रंग प्रदान कर दिया। और अल्लाह योजना बनाने वालों में सबसे अच्छा है। क्योंकि अल्लाह अपने दुश्मनों के विरूद्ध जो योजना बनाता है, उससे बढ़कर किसी की योजना नहीं हो सकती।

Aal-i-Imraan 3:54Listen in Qur'an →
55

إِذْ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَىٰٓ إِنِّى مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَىَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَجَاعِلُ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوكَ فَوْقَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَٰمَةِ ۖ ثُمَّ إِلَىَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ

और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है

अल्लाह ने उनके विरुद्ध उस समय भी योजना बनाई, जब उसने ईसा अलैहिस्सलाम को संबोधित करते हुए कहा : ऐ ईसा! मैं तुम्हें मृत्यु के बिना क़ब्ज़ कर लूँगा, और तुम्हारे शरीर और आत्मा को अपने पास उठा लूँगा, तथा तुम्हें उन लोगों की गंदगी से शुद्ध और उनसे दूर कर दूँगा, जिन्होंने तुम्हारे साथ कुफ़्र किया और उन लोगों को जिन्होंने सच्चे धर्म पर तुम्हारा अनुसरण किया - जिसमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान लाना भी शामिल है - प्रमाण और प्रभुत्व एवं गौरव के साथ क़ियामत के दिन तक उन लोगों के ऊपर कर दूँगा, जिन्होंने तुम्हारा इनकार किया। फिर तुम्हें क़ियामत के दिन मेरी ही ओर लौटकर आना है। तो मैं तुम्हारे बीच सच्चाई के साथ उस चीज़ के बारे में फैसला करूँगा, जिसमें तुम मतभेद किया करते थे।

Aal-i-Imraan 3:55Listen in Qur'an →
56

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فَأُعَذِّبُهُمْ عَذَابًۭا شَدِيدًۭا فِى ٱلدُّنْيَا وَٱلْءَاخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّٰصِرِينَ

तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा पस जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनपर दुनिया और आख़िरत (दोनों में) सख्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा

जिन लोगों ने आपका और उस सत्य का इनकार किया जो आप उनके पास लेकर आए, तो मैं उन्हें दुनिया में क़त्ल, क़ैद तथा अपमान आदि के द्वारा, तथा आख़िरत में आग की यातना के द्वारा कठोर दंड दूँगा। और उनके पास कोई सहायक न होंगे, जो उनसे यातना दूर कर सकें।

Aal-i-Imraan 3:56Listen in Qur'an →
57

وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلظَّٰلِمِينَ

और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता

और जो लोग आपपर और उस सत्य पर ईमान लाए जो आप उनके पास लेकर आए, और नमाज़, ज़कात, रोज़ा और रिश्तेदारों के साथ सद्व्यवहार इत्यादि जैसे अच्छे कर्म किए; अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा, उसमें कुछ कमी नहीं करेगा। यह बात मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व से पहले मसीह के अनुयायियों के बारे में है, जिनकी स्वयं मसीह ने शुभ सूचना दी थी। और अल्लाह अत्याचारियों से प्रेम नहीं करता। और सबसे बड़ा अत्याचार अल्लाह के साथ किसी को साझी बनाना तथा उसके रसूलों को झुठलाना है।

Aal-i-Imraan 3:57Listen in Qur'an →
58

ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ ٱلْءَايَٰتِ وَٱلذِّكْرِ ٱلْحَكِيمِ

(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कुदरते ख़ुदा की निशानियॉ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं

यह जो हम आपको ईसा अलैहिस्सलाम का समाचार पढ़कर सुना रहे हैं, इस बात को प्रमाणित करने वाली स्पष्ट निशानियों में से है कि आपकी ओर जो कुछ उतारा गया है वह सत्य है। तथा वह डरने वालों के लिए दृढ़ उपदेश है, जिसमें बातिल (असत्य) का समावेश नहीं हो सकता।

Aal-i-Imraan 3:58Listen in Qur'an →
59

إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ ٱللَّهِ كَمَثَلِ ءَادَمَ ۖ خَلَقَهُۥ مِن تُرَابٍۢ ثُمَّ قَالَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया

निःसंदहे अल्लाह के निकट ईसा अलैहिस्सलाम को पैदा करने का उदाहरण, आदम अलैहिस्सलाम को, बिना पिता और माता के, थोड़ी-सी मिट्टी से पैदा करन की तरह है। केवल अल्लाह ने उससे कहा : "मानव बन जा" तो वह वैसा ही हो गया, जैसा अल्लाह ने चाहा था। फिर ये लोग कैसे दावा करते हैं कि ईसा अलैहिस्सलाम पूज्य हैं, यह तर्क देते हुए कि वह बिना पिता के पैदा किए गए थे? हालाँकि वे स्वीकार करते हैं कि आदम अलैहिस्सलाम मानव हैं, जबकि वह बिना पिता और माता के पैदा किए गए थे?!

Aal-i-Imraan 3:59Listen in Qur'an →
60

ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْمُمْتَرِينَ

(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना

ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में जिस सच्चाई में कोई संदेह नहीं, वह वही है जो आपपर आपके पालनहार की ओर से उतरी है। अतः आप संदेह एवं संकोच करने वालों में से न बनें, बल्कि आपको उस सत्य पर दृढ़ रहना चाहिए जिस पर आप क़ायम हैं।

Aal-i-Imraan 3:60Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.