Muslim99Muslim99
← Tafsir library

3. Aal-i-Imraan

The Family of Imraan · Medinan · 200 ayahs

سُورَةُ آلِ عِمۡرَانَ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 191–200 of 200

191

ٱلَّذِينَ يَذْكُرُونَ ٱللَّهَ قِيَٰمًۭا وَقُعُودًۭا وَعَلَىٰ جُنُوبِهِمْ وَيَتَفَكَّرُونَ فِى خَلْقِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَٰطِلًۭا سُبْحَٰنَكَ فَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

जो लोग उठते बैठते करवट लेते (अलगरज़ हर हाल में) ख़ुदा का ज़िक्र करते हैं और आसमानों और ज़मीन की बनावट में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं और (बेसाख्ता) कह उठते हैं कि ख़ुदावन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा

ये वही लोग हैं जो खड़े, बैठे और लेटे, हर स्थिति में अल्लाह को याद करते हैं तथा आकाश और धरती की रचना में चिंतन करते हैं और कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! तूने इतनी बड़ी सृष्टि को व्यर्थ नहीं बनाया है। तू बिना उद्देश्य कार्य करने से पवित्र है। अतः तू हमें नेकियों की तौफ़ीक़ देकर और बुराइयों से सुरक्षितकर आग के अज़ाब से बचा ले।

Aal-i-Imraan 3:191Listen in Qur'an →
192

رَبَّنَآ إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ ٱلنَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُۥ ۖ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنْ أَنصَارٍۢ

ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं

(ऐ हमारे पालनहार) तूने अपनी सृष्टि में से जिसे जहन्नम में डाल दिया, तो वास्तव में उसे तूने अपमानित किया। और क़यामत के दिन अत्याचारियों का कोई सहायक न होगा, जो उनसे अल्लाह के अज़ाब और उसकी सज़ा को टाल सके।

Aal-i-Imraan 3:192Listen in Qur'an →
193

رَّبَّنَآ إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًۭا يُنَادِى لِلْإِيمَٰنِ أَنْ ءَامِنُوا۟ بِرَبِّكُمْ فَـَٔامَنَّا ۚ رَبَّنَا فَٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّـَٔاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ ٱلْأَبْرَارِ

ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले

ऐ हमारे पालनहार! हमने एक ईमान की ओर बुलाने वाले को सुना – और वह तेरे पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं - जो यह कहकर बुला रहे थे : (लोगो,) तुम अपने पालनहार अल्लाह पर ईमान लाओ, जो कि एकमात्र पूज्य है। तो हम उसपर ईमान ले आए जिसकी ओर वह बुला रहे थे और उनकी शरीयत का पालन किया। अतः तू हमारे पापों को छिपाए रख और हमें बेनकाब न कर, तथा हमारी बुराइयों को क्षमा कर दे और उनपर हमारी पकड़ न कर, और हमें अच्छे कार्यों के करने और बुराइयों को छोड़ने की तौफीक़ देकर हमें सदाचारी लोगों के साथ मृत्यु दे।

Aal-i-Imraan 3:193Listen in Qur'an →
194

رَبَّنَا وَءَاتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ ۗ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ

और ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं

ऐ हमारे पालनहार! तूने अपने रसूलों की ज़बानी इस दुनिया में जिस मार्गदर्शन और मदद व विजय का हम से वादा किया था, वह हमें प्रदान कर और क़यामत के दिन जहन्नम में डालकर हमें अपमानित न कर। ऐ हमारे पालनहार! वास्तव में तू बड़ा उदार है, अपना वचन नहीं तोड़ता।

Aal-i-Imraan 3:194Listen in Qur'an →
195

فَٱسْتَجَابَ لَهُمْ رَبُّهُمْ أَنِّى لَآ أُضِيعُ عَمَلَ عَٰمِلٍۢ مِّنكُم مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ ۖ بَعْضُكُم مِّنۢ بَعْضٍۢ ۖ فَٱلَّذِينَ هَاجَرُوا۟ وَأُخْرِجُوا۟ مِن دِيَٰرِهِمْ وَأُوذُوا۟ فِى سَبِيلِى وَقَٰتَلُوا۟ وَقُتِلُوا۟ لَأُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَلَأُدْخِلَنَّهُمْ جَنَّٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ ثَوَابًۭا مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ ۗ وَٱللَّهُ عِندَهُۥ حُسْنُ ٱلثَّوَابِ

तो उनके परवरदिगार ने दुआ कुबूल कर ली और (फ़रमाया) कि हम तुममें से किसी काम करने वाले के काम को अकारत नहीं करते मर्द हो या औरत (उस में कुछ किसी की खुसूसियत नहीं क्योंकि) तुम एक दूसरे (की जिन्स) से हो जो लोग (हमारे लिए वतन आवारा हुए) और शहर बदर किए गए और उन्होंने हमारी राह में अज़ीयतें उठायीं और (कुफ्फ़र से) जंग की और शहीद हुए मैं उनकी बुराईयों से ज़रूर दरगुज़र करूंगा और उन्हें बेहिश्त के उन बाग़ों में ले जाऊॅगा जिनके नीचे नहरें जारी हैं ख़ुदा के यहॉ ये उनके किये का बदला है और ख़ुदा (ऐसा ही है कि उस) के यहॉ तो अच्छा ही बदला है

उनके पालनहार ने उनकी प्रार्थना का उत्तर दिया : मैं तुम्हारे कर्मों का बदला बर्बाद नहीं करता, चाहे वह कम हो या ज़्यादा और कार्य करने वाला पुरुष हो या महिला। क्योंकि इस धर्म में तुम सब लोगों का हुक्म एक है। न तो किसी पुरुष की नेकी में वृद्धि की जाएगी और न तो किसी महिला की नेकी में कमी की जाएगी। अतः जिन लोगों ने अल्लाह के रास्ते में हिजरत की, और काफ़िरों ने उन्हें उनके घरों से निकाल दिया, और उन्हें अपने पालनहार के आज्ञापालन के कारण कष्ट दिया गया, और उन्होंने अल्लाह के रास्ते में लड़ाई की और अल्लाह के शब्द (वचन) को सर्वोच्च करने के लिए शहीद कर दिए गए, तो मैं क़यामत के दिन अवश्य उनकी बुराइयों को क्षमा कर दूँगा और उन्हें नज़रंदाज़ कर दूँगा, और उन्हें अवश्य ऐसी जन्नतों में दाख़िल करूँगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। यह अल्लाह की ओर से बदला होगा। और अल्लाह के पास ऐसा उत्तम बदला है जिसका कोई उदाहरण नहीं।

Aal-i-Imraan 3:195Listen in Qur'an →
196

لَا يَغُرَّنَّكَ تَقَلُّبُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى ٱلْبِلَٰدِ

(ऐ रसूल) काफ़िरों का शहरों शहरों चैन करते फिरना तुम्हे धोखे में न डाले

(ऐ नबी) शहर में काफिरों का चलना-फिरना और उसमें उनका आधिपत्य, तथा उनके व्यापार और आजीविका का विस्तार आपको धोखे में न डाल दे कि उनकी स्थिति को देखकर आप शोक और चिंता से ग्रस्त हो जाएँ।

Aal-i-Imraan 3:196Listen in Qur'an →
197

مَتَٰعٌۭ قَلِيلٌۭ ثُمَّ مَأْوَىٰهُمْ جَهَنَّمُ ۚ وَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ

ये चन्द रोज़ा फ़ायदा हैं फिर तो (आख़िरकार) उनका ठिकाना जहन्नुम ही है और क्या ही बुरा ठिकाना है

यह दुनिया दरअसल थोड़ी सी सुख-सामग्री है, जिसे स्थायित्व प्राप्त नहीं है। फिर उसके बाद उनका ठिकाना जहाँ वे क़यामत के दिन लौटकर जाएँगे : जहन्नम है। और आग उनके लिए बहुत बुरा ठिकाना है।

Aal-i-Imraan 3:197Listen in Qur'an →
198

لَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوْا۟ رَبَّهُمْ لَهُمْ جَنَّٰتٌۭ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا نُزُلًۭا مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ ۗ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ خَيْرٌۭ لِّلْأَبْرَارِ

मगर जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की परहेज़गारी (इख्तेयार की उनके लिए बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारीं हैं और वह हमेशा उसी में रहेंगे ये ख़ुदा की तरफ़ से उनकी (दावत है और जो साज़ो सामान) ख़ुदा के यहॉ है वह नेको कारों के वास्ते दुनिया से कहीं बेहतर है

परन्तु जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहे, उनके लिए ऐसी जन्नतें हैं, जिनके महलों के नीचे से नहरें बह रही हैं, जिनमें वे सदैव रहेंगे। यह अल्लाह के पास से तैयार किया हुआ बदला है। और अल्लाह ने अपने सदाचारी बंदों के लिए जो कुछ तैयार कर रखा है, वह दुनिया की उन सुख-सामग्रियों से उत्तम और श्रेष्ठ है, जिनका काफ़िर लोग आनंद ले रहे हैं।

Aal-i-Imraan 3:198Listen in Qur'an →
199

وَإِنَّ مِنْ أَهْلِ ٱلْكِتَٰبِ لَمَن يُؤْمِنُ بِٱللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْكُمْ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيْهِمْ خَٰشِعِينَ لِلَّهِ لَا يَشْتَرُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ ثَمَنًۭا قَلِيلًا ۗ أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ أَجْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ

और अहले किताब में से कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर हैं जो ख़ुदा पर और जो (किताब) तुम पर नाज़िल हुई और जो (किताब) उनपर नाज़िल हुई (सब पर) ईमान रखते हैं ख़ुदा के आगे सर झुकाए हुए हैं और ख़ुदा की आयतों के बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनियावी फ़ायदे) नहीं लेते ऐसे ही लोगों के वास्ते उनके परवरदिगार के यहॉ अच्छा बदला है बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब करने वाला है

सभी अह्ले किताब एक समान नहीं हैं। उनमें से एक गिरोह ऐसा भी है, जो अल्लाह पर और तुम्हारी ओर उतारी गई हिदायत एवं सत्य पर ईमान रखते हैं, तथा उस पर भी ईमान रखते हैं जो कुछ उनकी पुस्तकों में उतारा गया है। वे अल्लाह के रसूलों के बीच कोई अंतर नहीं करते हैं। वे अल्लाह के आगे, उसके पास जो कुछ (प्रतिफल) है उसकी इच्छा में, समर्पित और विनम्र रहते हैं। वे अल्लाह की आयतों के बदले इस दुनिया की सामग्री का थोड़ा-सा मूल्य नहीं लेते हैं। इन गुणों से विशिष्ट इन लोगों के लिए उनके पालनहार के पास बहुत बड़ा बदला है। निःसंदेह अल्लाह कर्मों का शीघ्र हिसाब लेने वाला और उनपर शीघ्र बदला देने वाला है।

Aal-i-Imraan 3:199Listen in Qur'an →
200

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱصْبِرُوا۟ وَصَابِرُوا۟ وَرَابِطُوا۟ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ

ऐ ईमानदारों (दीन की तकलीफ़ों को) और दूसरों को बर्दाश्त की तालीम दो और (जिहाद के लिए) कमरें कस लो और ख़ुदा ही से डरो ताकि तुम अपनी दिली मुराद पाओ

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! तुम शरीयत के आदेशों की पाबंदी करने पर तथा अपने ऊपर आनेवाली दुनिया की आपदाओं पर धैर्य से काम लो, तथा धैर्य के मामले में काफिरों से आगे रहो, चुनाँचे वे तुमसे अधिक धैर्य रखने वाले न होने पाएँ, और अल्लाह के रास्ते में जिहाद पर डटे रहो, और अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहो, ताकि तुम्हें आग से मुक्ति और जन्नत में प्रवेश के द्वारा अपना उद्देश्य प्राप्त हो जाए।

Aal-i-Imraan 3:200Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.