وَلَوْ يُؤَاخِذُ ٱللَّهُ ٱلنَّاسَ بِظُلْمِهِم مَّا تَرَكَ عَلَيْهَا مِن دَآبَّةٍۢ وَلَٰكِن يُؤَخِّرُهُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَـْٔخِرُونَ سَاعَةًۭ ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ
और अगर (कहीं) ख़ुदा अपने बन्दों की नाफरमानियों की गिरफ़त करता तो रुए ज़मीन पर किसी एक जानदार को बाक़ी न छोड़ता मगर वह तो एक मुक़र्रर वक्त तक उन सबको मोहलत देता है फिर जब उनका (वह) वक्त अा पहुँचेगा तो न एक घड़ी पीछे हट सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
यदि अल्लाह लोगों को उनके अत्याचार और क़ुफ़्र के कारण दंडित करने लगे, तो धरती पर चलने वाले किसी मनुष्य या जानवर को न छोड़े। लेकिन वह महिमावान उन्हें अपने ज्ञान में निर्दिष्ट एक समय के लिए विलंबित कर देता है। फिर जब उसके ज्ञान में निर्दिष्ट वह समय आ जाता है, तो वे थोड़े समय के लिए भी न पीछे रहते हैं और न आगे बढ़ते हैं।