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16. An-Nahl

The Bee · Meccan · 128 ayahs

سُورَةُ النَّحۡلِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 61–70 of 128

61

وَلَوْ يُؤَاخِذُ ٱللَّهُ ٱلنَّاسَ بِظُلْمِهِم مَّا تَرَكَ عَلَيْهَا مِن دَآبَّةٍۢ وَلَٰكِن يُؤَخِّرُهُمْ إِلَىٰٓ أَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ۖ فَإِذَا جَآءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَـْٔخِرُونَ سَاعَةًۭ ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ

और अगर (कहीं) ख़ुदा अपने बन्दों की नाफरमानियों की गिरफ़त करता तो रुए ज़मीन पर किसी एक जानदार को बाक़ी न छोड़ता मगर वह तो एक मुक़र्रर वक्त तक उन सबको मोहलत देता है फिर जब उनका (वह) वक्त अा पहुँचेगा तो न एक घड़ी पीछे हट सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं

यदि अल्लाह लोगों को उनके अत्याचार और क़ुफ़्र के कारण दंडित करने लगे, तो धरती पर चलने वाले किसी मनुष्य या जानवर को न छोड़े। लेकिन वह महिमावान उन्हें अपने ज्ञान में निर्दिष्ट एक समय के लिए विलंबित कर देता है। फिर जब उसके ज्ञान में निर्दिष्ट वह समय आ जाता है, तो वे थोड़े समय के लिए भी न पीछे रहते हैं और न आगे बढ़ते हैं।

62

وَيَجْعَلُونَ لِلَّهِ مَا يَكْرَهُونَ وَتَصِفُ أَلْسِنَتُهُمُ ٱلْكَذِبَ أَنَّ لَهُمُ ٱلْحُسْنَىٰ ۖ لَا جَرَمَ أَنَّ لَهُمُ ٱلنَّارَ وَأَنَّهُم مُّفْرَطُونَ

और ये लोग खुद जिन बातों को पसन्द नहीं करते उनको ख़ुदा के वास्ते क़रार देते हैं और अपनी ही ज़बान से ये झूठे दावे भी करते हैं कि (आख़िरत में भी) उन्हीं के लिए भलाई है (भलाई तो नहीं मगर) हाँ उनके लिए जहन्नुम की आग ज़रुरी है और यही लोग सबसे पहले (उसमें) झोंके जाएँगें

वे अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं, जिन्हें अपने लिए पसंद नहीं करते। और उनकी ज़बानें झूठ बोलती हैं कि यदि वे पुनः जीवित किए भी गए, जैसा कि मुसलमानों का दावा है, तो उनके लिए अल्लाह के पास सबसे अच्छी स्थिति होगी। जबकि सच्चाई यह है कि जहन्नम उन्हीं के लिए है। वे उसमें छोड़ दिए जाएँगे, उससे बाहर कभी नहीं निकलेंगे।

63

تَٱللَّهِ لَقَدْ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٍۢ مِّن قَبْلِكَ فَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيْطَٰنُ أَعْمَٰلَهُمْ فَهُوَ وَلِيُّهُمُ ٱلْيَوْمَ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌۭ

(ऐ रसूल) ख़ुदा की (अपनी) कसम तुमसे पहले उम्मतों के पास बहुतेरे पैग़म्बर भेजे तो शैतान ने उनकी कारस्तानियों को उम्दा कर दिखाया तो वही (शैतान) आज भी उन लोगों का सरपरस्त बना हुआ है हालॉकि उनके वास्ते दर्दनाक अज़ाब है

अल्लाह की क़सम! (ऐ रसूल) हमने आपके पहले के समुदायों की ओर भी रसूल भेजे थे। तो शैतान ने उनके शिर्क, कुफ़्र और अवज्ञा जैसे बुरे कार्यों को उनके लिए सुंदर बना दिया। तो वही क़ियामत के दिन उनका तथाकथित सहायक है। इसलिए वे उसी से मदद माँगें। और उनके लिए क़ियामत के दिन दर्दनाक यातना है।

64

وَمَآ أَنزَلْنَا عَلَيْكَ ٱلْكِتَٰبَ إِلَّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِى ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ ۙ وَهُدًۭى وَرَحْمَةًۭ لِّقَوْمٍۢ يُؤْمِنُونَ

और हमने तुम पर किताब (क़ुरान) तो इसी लिए नाज़िल की ताकि जिन बातों में ये लोग बाहम झगड़ा किए हैं उनको तुम साफ साफ बयान करो (और यह किताब) ईमानदारों के लिए तो (अज़सरतापा) हिदायत और रहमत है

और (ऐ रसूल!) हमने आप पर यह क़ुरआन इसलिए उतारा है, ताकि आप सभी लोगों के लिए एकेश्वरवाद, मरणोपरांत पुनर्जीवन और शरीयत के अहकाम खोल-खोलकर बयान कर दें, जिनमें उन्होंने मतभेद किया है। और इसलिए कि यह क़ुरआन अल्लाह और उसके रसूलों पर तथा क़ुरआन की लाई हुए बातों पर ईमान रखने वालों के लिए मार्गदर्शक और दया बन जाए। क्योंकि वही सत्य से लाभ उठाने वाले हैं।

65

وَٱللَّهُ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَحْيَا بِهِ ٱلْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَآ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةًۭ لِّقَوْمٍۢ يَسْمَعُونَ

और ख़ुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया तो उसके ज़रिए ज़मीन को मुर्दा होने के बाद ज़िन्दा (शादाब) (हरी भरी) किया क्या कुछ शक नहीं कि इसमें जो लोग बसते हैं उनके वास्ते (कुदरते ख़ुदा की) बहुत बड़ी निशानी है

अल्लाह ने आसमान की ओर से बारिश बरसाई, फिर सूखी बंजर धरती को, उससे पौधे उगाकर पुनर्जीवित किया। निःसंदेह आकाश की ओर से बारिश उतारने और उसके द्वारा पृथ्वी के पौधों को उगाने में, उन लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति का एक स्पष्ट संकेत है, जो अल्लाह की वाणी को सुनते और उसपर चिंतन-मनन करते हैं।

66

وَإِنَّ لَكُمْ فِى ٱلْأَنْعَٰمِ لَعِبْرَةًۭ ۖ نُّسْقِيكُم مِّمَّا فِى بُطُونِهِۦ مِنۢ بَيْنِ فَرْثٍۢ وَدَمٍۢ لَّبَنًا خَالِصًۭا سَآئِغًۭا لِّلشَّٰرِبِينَ

और इसमें शक़ नहीं कि चौपायों में भी तुम्हारे लिए (इबरत की बात) है कि उनके पेट में ख़ाक, बला, गोबर और ख़ून (जो कुछ भरा है) उसमें से हमे तुमको ख़ालिस दूध पिलाते हैं जो पीने वालों के लिए खुशगवार है

और (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए, ऊँटों, गायों और भेड़ों में एक उपदेश है। हम तुम्हें इन जानवरों के थनों से दूध पिलाते हैं, जो उनके पेट में मौजूद मल और उनके शरीर में मौजूद रक्त के बीच से निकलता है। किंतु इसके बावजूद साफ, शुद्ध तथा स्वादिष्ट दूध निकलता है, जो पीने वालों के लिए सुखद होता है।

67

وَمِن ثَمَرَٰتِ ٱلنَّخِيلِ وَٱلْأَعْنَٰبِ تَتَّخِذُونَ مِنْهُ سَكَرًۭا وَرِزْقًا حَسَنًا ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةًۭ لِّقَوْمٍۢ يَعْقِلُونَ

और इसी तरह खुरमें और अंगूर के फल से (हम तुमको शीरा पिलाते हैं) जिसकी (कभी तो) तुम शराब बना लिया करते हो और कभी अच्छी रोज़ी (सिरका वगैरह) इसमें शक नहीं कि इसमें भी समझदार लोगों के लिए (क़ुदरत ख़ुदा की) बड़ी निशानी है

और तुम्हारे लिए, हमारी ओर से प्राप्त होने वाले खजूर और अंगूर जैसे फलों में भी एक उपदेश है। उनसे तुम नशीला पदार्थ बनाते हो, जिससे बुद्धि चली जाती है, और यह अच्छा नहीं है। तथा तुम उनसे अच्छी जीविका भी बनाते हो, जिसका तुम लाभ उठाते हो, जैसे खजूर, किशमिश, सिरका और शीरा। इन सब चीज़ों में उन लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति और अनुग्रह का संकेत है, जो बुद्धि से काम लेते हैं, क्योंकि वही लोग उपदेश ग्रहण करते हैं।

68

وَأَوْحَىٰ رَبُّكَ إِلَى ٱلنَّحْلِ أَنِ ٱتَّخِذِى مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًۭا وَمِنَ ٱلشَّجَرِ وَمِمَّا يَعْرِشُونَ

और (ऐ रसूल) तुम्हारे परवरदिगार ने शहद की मक्खियों के दिल में ये बात डाली कि तू पहाड़ों और दरख्तों और ऊँची ऊँची ट्ट्टियाँ (और मकानात पाट कर) बनाते हैं

और (ऐ रसूल!) तेरे पालनहार ने मधुमक्खियों के दिल में यह बात डाल दी और उन्हें निर्देशित किया कि : तुम पर्वतों में अपने लिए घर बनाओ, तथा पेड़ों में और उसमें घर बनाओ, जो लोग निर्माण करते और छत बनाते हैं।

69

ثُمَّ كُلِى مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ فَٱسْلُكِى سُبُلَ رَبِّكِ ذُلُلًۭا ۚ يَخْرُجُ مِنۢ بُطُونِهَا شَرَابٌۭ مُّخْتَلِفٌ أَلْوَٰنُهُۥ فِيهِ شِفَآءٌۭ لِّلنَّاسِ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةًۭ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ

उनमें अपने छत्ते बना फिर हर तरह के फलों (के पूर से) (उनका अर्क़) चूस कर फिर अपने परवरदिगार की राहों में ताबेदारी के साथ चली मक्खियों के पेट से पीने की एक चीज़ निकलती है (शहद) जिसके मुख्तलिफ रंग होते हैं इसमें लोगों (के बीमारियों) की शिफ़ा (भी) है इसमें शक़ नहीं कि इसमें ग़ौर व फ़िक्र करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की बहुत बड़ी निशानी है)

फिर उन सभी फलों से खा, जो तू चाहे और उन रास्तों पर चल, जिनपर चलने के लिए तेरे पालनहार ने तुझे प्रेरित किया है। उन मधुमक्खियों के पेट से विभिन्न रंगों का शहद निकलता है। कुछ सफ़ेद, तो कुछ पीला और कुछ किसी और रंग का। इसमें लोगों के लिए शिफ़ा (आरोग्य) है। वे इसके साथ बीमारियों का इलाज करते हैं। निःसंदेह मधुमक्खियों को यह बात सिखाने और उनके पेट से निकलने वाले शहद में, उन लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति और उसके अपनी सृष्टि के मामलों के प्रबंधन का प्रमाण है, जो सोच-विचार करते हैं। क्योंकि वही शिक्षा ग्रहण करते हैं।

70

وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ ثُمَّ يَتَوَفَّىٰكُمْ ۚ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰٓ أَرْذَلِ ٱلْعُمُرِ لِكَىْ لَا يَعْلَمَ بَعْدَ عِلْمٍۢ شَيْـًٔا ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۭ قَدِيرٌۭ

और ख़ुदा ही ने तुमको पैदा किया फिर वही तुमको (दुनिया से) उठा लेगा और तुममें से बाज़ ऐसे भी हैं जो ज़लील ज़िन्दगी (सख्त बुढ़ापे) की तरफ लौटाए जाते हैं (बहुत कुछ) जानने के बाद (ऐसे सड़ीले हो गए कि) कुछ नहीं जान सके बेशक ख़ुदा (सब कुछ) जानता और (हर तरह की) कुदरत रखता है

और अल्लाह ही ने तुम्हें बिना किसी पूर्व नमूने के पैदा किया है। फिर तुम्हारी आयु ख़त्म होने पर तुम्हें मृत्यु देगा। और तुममें से किसी को आयु के सबसे बुरे चरण तक पहुँचा दिया जाता है और वह पुढ़ापा है। फिर वह उसमें से कुछ भी नहीं जानता, जो वह पहले जानता था। अल्लाह सब कुछ जानने वाला है, उससे बंदों का कोई कार्य छिपा नहीं है। वह हर चीज़ में सक्षम है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.