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16. An-Nahl

The Bee · Meccan · 128 ayahs

سُورَةُ النَّحۡلِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 51–60 of 128

51

۞ وَقَالَ ٱللَّهُ لَا تَتَّخِذُوٓا۟ إِلَٰهَيْنِ ٱثْنَيْنِ ۖ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۖ فَإِيَّٰىَ فَٱرْهَبُونِ

और ख़ुदा ने फरमाया था कि दो दो माबूद न बनाओ माबूद तो बस वही यकता ख़ुदा है सिर्फ मुझी से डरते रहो

अल्लाह ने अपने सभी बंदों से कहा : दो पूज्य न बनाओ। सत्य पूज्य तो केवल एक है, उसका कोई दूजा और साझी नहीं। इसलिए मुझी से डरो और मेरे सिवा किसी से न डरो।

52

وَلَهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَلَهُ ٱلدِّينُ وَاصِبًا ۚ أَفَغَيْرَ ٱللَّهِ تَتَّقُونَ

और जो कुछ आसमानों में हैं और जो कुछ ज़मीन में हैं (ग़रज़) सब कुछ उसी का है और ख़ालिस फरमाबरदारी हमेशा उसी को लाज़िम (जरूरी) है तो क्या तुम लोग ख़ुदा के सिवा (किसी और से भी) डरते हो

आकाशों और धरती की सारी चीज़ें केवल उसी की हैं; वही उनका पैदा करने वाला, उनका मालिक और उनका प्रबंध करने वाला है। तथा आज्ञापालन, अधीनता और निष्ठा अकेले उसी के लिए सिद्ध है। तो क्या तुम अल्लाह के अलावा से डरते हो?! ऐसा नहीं होना चाहिए, बल्कि केवल उसी (अल्लाह) से डरो।

53

وَمَا بِكُم مِّن نِّعْمَةٍۢ فَمِنَ ٱللَّهِ ۖ ثُمَّ إِذَا مَسَّكُمُ ٱلضُّرُّ فَإِلَيْهِ تَجْـَٔرُونَ

और जितनी नेअमतें तुम्हारे साथ हैं (सब ही की तरफ से हैं) फिर जब तुमको तकलीफ छू भी गई तो तुम उसी के आगे फरियाद करने लगते हो

(ऐ लोगो!) तुम्हारे पास जो भी धार्मिक या सांसारिक नेमत है, सब अल्लाह पाक की दी हुई है, किसी दूसरे की नहीं। फिर जब तुम विपत्ति, या बीमारी, या ग़रीबी से पीड़ित होते हो, तो केवल उसी के सामने गिड़गिड़ाकर दुआ करते हो, ताकि वह तुम्हारी विपत्ति को तुमसे दूर कर दे। इसलिए जो नेमतें प्रदान करता है और विपत्तियों को दूर करता है, वही है जिसकी एकमात्र इबादत की जानी चाहिए।

54

ثُمَّ إِذَا كَشَفَ ٱلضُّرَّ عَنكُمْ إِذَا فَرِيقٌۭ مِّنكُم بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ

फिर जब वह तुमसे तकलीफ को दूर कर देता है तो बस फौरन तुममें से कुछ लोग अपने परवरदिगार को शरीक ठहराते हैं

फिर जब वह तुम्हारी दुआ को स्वीकार कर लेता है और तुम्हारा दुःख दूर कर देता है, तो तुममें से कुछ लोग अपने पालनहार के साथ साझी बनाने लगते हैं। चुनाँचे उसके साथ उसके अलावा की इबादत करने लगते हैं। तो यह कैसी नीचता है?!

55

لِيَكْفُرُوا۟ بِمَآ ءَاتَيْنَٰهُمْ ۚ فَتَمَتَّعُوا۟ ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ

ताकि जो (नेअमतें) हमने उनको दी है उनकी नाशुक्री करें तो (ख़ैर दुनिया में चन्द रोज़ चैन कर लो फिर तो अनक़रीब तुमको मालूम हो जाएगा

अल्लाह के साथ साझी ठहराने के कारण वे अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों - जिनमें कष्ट दूर करना भी शामिल है - की नाशुक्री करने लगे। इसीलिए उनसे कहा गया : तुम जिन नेमतों में हो उनसे थोड़ा लाभ उठा लो, यहाँ तक कि अल्लाह का तत्काल और विलंबित अज़ाब आ जाए।

56

وَيَجْعَلُونَ لِمَا لَا يَعْلَمُونَ نَصِيبًۭا مِّمَّا رَزَقْنَٰهُمْ ۗ تَٱللَّهِ لَتُسْـَٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمْ تَفْتَرُونَ

और हमने जो रोज़ी उनको दी है उसमें से ये लोग उन बुतों का हिस्सा भी क़रार देते है जिनकी हक़ीकत नहीं जानते तो ख़ुदा की (अपनी) क़िस्म जो इफ़तेरा परदाज़ियाँ तुम करते थे (क़यामत में) उनकी बाज़पुर्स (पूछ गछ) तुम से ज़रुर की जाएगी

और मुश्रिक लोग हमारे दिए हुए अपने धनों में से एक भाग अपनी उन मूर्तियों के लिए भी निर्धारित करते हैं, जो कुछ नहीं जानती हैं (क्योंकि वे निर्जीव चीज़ें हैं, और न ही वे लाभ या हानि पहुँचाने का अधिकार रखती हैं), वे इसके द्वारा उनकी निकटता प्राप्त करना चाहते हैं। अल्लाह की क़सम! (ऐ मुश्रिको!) तुमसे क़ियामत के दिन तुम्हारे इस दावे के बारे में ज़रूर पूछा जाएगा कि ये मूर्तियाँ पूज्य हैं और यह कि तुम्हारे धन में उनका भी एक हिस्सा है।

57

وَيَجْعَلُونَ لِلَّهِ ٱلْبَنَٰتِ سُبْحَٰنَهُۥ ۙ وَلَهُم مَّا يَشْتَهُونَ

और ये लोग ख़ुदा के लिए बेटियाँ तजवीज़ करते हैं (सुबान अल्लाह) वह उस से पाक व पाकीज़ा है

बहुदेववादी लोग अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं और यह विश्वास रखते हैं कि अल्लाह की बेटियाँ फ़रिश्ते हैं। वह अल्लाह के लिए वह कुछ चुनते हैं, जिसे अपने लिए पसंद नहीं करते। उनके इस कृत्य से अल्लाह पवित्र एवं पाक है। दूसरी तरफ़ वे खुद अपने लिए बेटों का होना पसंद करते हैं। तो इससे बड़ा पाप और क्या हो सकता है?!

58

وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِٱلْأُنثَىٰ ظَلَّ وَجْهُهُۥ مُسْوَدًّۭا وَهُوَ كَظِيمٌۭ

और अपने लिए (बेटे) जो मरग़ूब (दिल पसन्द) हैं और जब उसमें से किसी एक को लड़की पैदा होने की जो खुशख़बरी दीजिए रंज के मारे मुँह काला हो जाता है

और जब इन मुश्रिकों में से किसी को लड़की पैदा होने की शुभ सूचना दी जाती है, तो यह ख़बर उसपर इतनी नागवार गुज़रती है कि उसका चेहरा काला पड़ जाता है, तथा उसका दिल शोक और दुख से भर जाता है। फिर वह अल्लाह की ओर उस चीज़ की निस्बत करता है, जिसे अपने लिए पसंद नहीं करता!

59

يَتَوَٰرَىٰ مِنَ ٱلْقَوْمِ مِن سُوٓءِ مَا بُشِّرَ بِهِۦٓ ۚ أَيُمْسِكُهُۥ عَلَىٰ هُونٍ أَمْ يَدُسُّهُۥ فِى ٱلتُّرَابِ ۗ أَلَا سَآءَ مَا يَحْكُمُونَ

और वह ज़हर का सा घूँट पीकर रह जाता है (बेटी की) जिसकी खुशखबरी दी गई है अपनी क़ौम के लोगों से छिपा फिरता है (और सोचता है) कि क्या इसको ज़िल्लत उठाके ज़िन्दा रहने दे या (ज़िन्दा ही) इसको ज़मीन में गाड़ दे-देखो तुम लोग किस क़दर बुरा एहकाम (हुक्म) लगाते हैं

बेटी पैदा होने की सूचना उसे इतनी बुरी लगती है कि लोगों से छिपता फिरता है। वह दिल ही दिल में सोचता है कि क्या इस नवजात को अपमान और दीनता के साथ अपने पास रखे या उसे ज़िंदा धरती में गाड़ दे? कितना बुरा निर्णय है, जो बहुदेववादी करते हैं कि अपने पालनहार के लिए वह कुछ ठहराते हैं, जिसे अपने लिए नापसंद करते हैं।

60

لِلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْءَاخِرَةِ مَثَلُ ٱلسَّوْءِ ۖ وَلِلَّهِ ٱلْمَثَلُ ٱلْأَعْلَىٰ ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ

बुरी (बुरी) बातें तो उन्हीं लोगों के लिए ज्यादा मुनासिब हैं जो आख़िरत का यक़ीन नहीं रखते और ख़ुदा की शान के लायक़ तो आला सिफते (बहुत बड़ी अच्छाइया) हैं और वही तो ग़ालिब है

आख़िरत पर विश्वास न रखने वाले काफ़िरों की बुरी विशेषता है, जैसे- बच्चे की आवश्यकता, अज्ञानता और कुफ़्र आदि। जबकि अल्लाह के प्रताप, पूर्णता, संपन्नता, बेनियाज़ी और ज्ञान जैसे उच्चतम प्रशंसनीय गुण हैं। वह पवित्र अल्लाह अपने राज्य में प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। अपनी रचना, प्रबंधन और क़ानूनसाज़ी में हिकमत वाला है।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.