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16. An-Nahl

The Bee · Meccan · 128 ayahs

سُورَةُ النَّحۡلِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 31–40 of 128

31

جَنَّٰتُ عَدْنٍۢ يَدْخُلُونَهَا تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَٰرُ ۖ لَهُمْ فِيهَا مَا يَشَآءُونَ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْزِى ٱللَّهُ ٱلْمُتَّقِينَ

सदा बहार (हरे भरे) बाग़ हैं जिनमें (वे तकल्लुफ) जा पहुँचेगें उनके नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग जो चाहेगें उनके लिए मुयय्या (मौजूद) है यूँ ख़ुदा परहेज़गारों (को उनके किए) की जज़ा अता फरमाता है

वे निवास और स्थिरता के बागों में प्रवेश करेंगे, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बह रही होंगी। उन्हें उन बाग़ों में खाने-पीने आदि की वे सारी चीज़ें मिलेंगी, जिनकी वे इच्छा प्रकट करेंगे। इसी तरह का बदला, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के समुदाय के भय रखने वाले लोगों को देगा, पिछले समुदायों के भय रखने वाले लोगों को भी देगा।

32

ٱلَّذِينَ تَتَوَفَّىٰهُمُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ طَيِّبِينَ ۙ يَقُولُونَ سَلَٰمٌ عَلَيْكُمُ ٱدْخُلُوا۟ ٱلْجَنَّةَ بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

(ये) वह लोग हैं जिनकी रुहें फरिश्ते इस हालत में क़ब्ज़ करतें हैं कि वह (नजासते कुफ्र से) पाक व पाकीज़ा होते हैं तो फरिश्ते उनसे (निहायत तपाक से) कहते है सलामुन अलैकुम जो नेकियाँ दुनिया में तुम करते थे उसके सिले में जन्नत में (बेतकल्लुफ) चले जाओ

जिनकी रूह़ मौत का फ़रिश्ता और उसके सहयोगी फ़रिश्ते इस हाल में निकालते हैं कि उनके दिल कुफ़्र से पवित्र हों, तो फ़रिश्ते उन्हें यह कहकर संबोधित करते हैं : तुमपर शांति हो। तुम हर मुसीबत से सुरक्षित रहो। तुम जन्नत में प्रवेश कर जाओ, इस कारण कि तुम दुनिया में शुद्ध अक़ीदे पर थे और अच्छे कार्य करते थे।

33

هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّآ أَن تَأْتِيَهُمُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ أَوْ يَأْتِىَ أَمْرُ رَبِّكَ ۚ كَذَٰلِكَ فَعَلَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَمَا ظَلَمَهُمُ ٱللَّهُ وَلَٰكِن كَانُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ

(ऐ रसूल) क्या ये (अहले मक्का) इसी बात के मुन्तिज़र है कि उनके पास फरिश्ते (क़ब्ज़े रुह को) आ ही जाएँ या (उनके हलाक करने को) तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब ही आ पहुँचे जो लोग उनसे पहले हो गुज़रे हैं वह ऐसी बातें कर चुके हैं और ख़ुदा ने उन पर (ज़रा भी) जुल्म नहीं किया बल्कि वह लोग ख़ुद कुफ़्र की वजह से अपने ऊपर आप जुल्म करते रहे

क्या ये झुठलाने वाले बहुदेववादी इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि मौत का फ़रिश्ता और उसके सहयोगी फ़रिश्ते उनकी रूह निकालने और उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारने के लिए उनके पास आ जाएँ, या दुनिया ही में अज़ाब के द्वारा उनका उन्मूलन करने के लिए अल्लाह का आदेश आ जाए? इसी तरह का कार्य जो मक्का के मुश्रिक (बहुदेववादी) कर रहे हैं, इनसे पहले के बहुदेववादियों ने किया था। इसलिए अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया। और अल्लाह ने उन्हें नष्ट करके उनपर अत्याचार नहीं किया, लेकिन वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया करते थे, अल्लाह के इनकार द्वारा खुद को विनाश की जगहों में उतारकर।

34

فَأَصَابَهُمْ سَيِّـَٔاتُ مَا عَمِلُوا۟ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ

फिर जो जो करतूतें उनकी थी उसकी सज़ा में बुरे नतीजे उनको मिले और जिस (अज़ाब) की वह हँसी उड़ाया करते थे उसने उन्हें (चारो तरफ से) घेर लिया

चुनाँचे उनपर उनके उन कार्य की सज़ा उतर आई, जो वे किया करते थे, और उन्हें उस यातना ने घेर लिया, जिसके द्वारा नसीहत किए जाने पर वे उसका मज़ाक उड़ाया करते थे।

35

وَقَالَ ٱلَّذِينَ أَشْرَكُوا۟ لَوْ شَآءَ ٱللَّهُ مَا عَبَدْنَا مِن دُونِهِۦ مِن شَىْءٍۢ نَّحْنُ وَلَآ ءَابَآؤُنَا وَلَا حَرَّمْنَا مِن دُونِهِۦ مِن شَىْءٍۢ ۚ كَذَٰلِكَ فَعَلَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ فَهَلْ عَلَى ٱلرُّسُلِ إِلَّا ٱلْبَلَٰغُ ٱلْمُبِينُ

और मुशरेकीन कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम ही उसके सिवा किसी और चीज़ की इबादत करते और न हमारे बाप दादा और न हम बग़ैर उस (की मर्ज़ी) के किसी चीज़ को हराम कर बैठते जो लोग इनसे पहले हो गुज़रे हैं वह भी ऐसे (हीला हवाले की) बातें कर चुके हैं तो (कहा करें) पैग़म्बरों पर तो उसके सिवा कि एहकाम को साफ साफ पहुँचा दे और कुछ भी नहीं

और अल्लाह के साथ अन्य चीज़ों की पूजा करने वालों ने कहा : यदि अल्लाह चाहता कि हम केवल उसी की पूजा करें और किसी को उसका साझी न बनाएँ, तो हम उसके सिवा किसी को न पूजते। न हम और न ही हमसे पहले हमारे बाप-दादा। इसी तरह यदि वह चाहता कि हम किसी चीज़ को हराम न ठहराएँ, तो हम उसे हराम न ठहराते। इसी तरह के झूठे तर्क पिछले काफ़िरों ने भी दिए थे। अतः रसूलों का कर्तव्य केवल उस चीज़ को स्पष्ट रूप से पहुँचा देना है, जिसके पहुँचाने का उन्हें आदेश दिया गया है और निश्चय उन्होंने अपना काम कर दिया है। और काफ़िर लोगों के पास भाग्य को बहाना बनाने में कोई तर्क नहीं है, जबकि अल्लाह ने उन्हें इरादा और चयन का अधिकार दिया है और उनकी ओर अपने रसूल भेजे हैं।

36

وَلَقَدْ بَعَثْنَا فِى كُلِّ أُمَّةٍۢ رَّسُولًا أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ وَٱجْتَنِبُوا۟ ٱلطَّٰغُوتَ ۖ فَمِنْهُم مَّنْ هَدَى ٱللَّهُ وَمِنْهُم مَّنْ حَقَّتْ عَلَيْهِ ٱلضَّلَٰلَةُ ۚ فَسِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَٱنظُرُوا۟ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلْمُكَذِّبِينَ

और हमने तो हर उम्मत में एक (न एक) रसूल इस बात के लिए ज़रुर भेजा कि लोगों ख़ुदा की इबादत करो और बुतों (की इबादत) से बचे रहो ग़रज़ उनमें से बाज़ की तो ख़ुदा ने हिदायत की और बाज़ के (सर) पर गुमराही सवार हो गई तो ज़रा तुम लोग रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (पैग़म्बराने ख़ुदा के) झुठलाने वालों को क्या अन्जाम हुआ

हमने पिछले हर समुदाय में एक रसूल भेजा, जो अपने समुदाय के लोगों को आदेश देता कि वे एक अल्लाह की इबादत करें और उसके अलावा मूर्तियों, शैतानों और अन्य चीज़ों की इबादत छोड़ दें। चुनाँचे उनमें से कुछ को अल्लाह ने सामर्थ्य प्रदान किया और वे अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूल की लाई हुई बातों का पालन किए। तथा उनमें से कुछ ऐसे थे जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसके रसूल की अवज्ञा की, तो अल्लाह ने उन्हें सामर्थ्य नहीं दिया। अतः उनपर गुमराही सिद्ध हो गई। इसलिए धरती में चलो-फिरो, ताकि अपनी आँखों से देखो कि झुठलाने वालों पर यातना और विनाश आने के बाद उनका अंजाम कैसा हुआ?

37

إِن تَحْرِصْ عَلَىٰ هُدَىٰهُمْ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى مَن يُضِلُّ ۖ وَمَا لَهُم مِّن نَّٰصِرِينَ

(ऐ रसूल) अगर तुमको इन लोगों के राहे रास्त पर जाने का हौका है (तो बे फायदा) क्योंकि ख़ुदा तो हरगिज़ उस शख़्श की हिदायत नहीं करेगा जिसको (नाज़िल होने की वजह से) गुमराही में छोड़ देता है और न उनका कोई मददगार है

(ऐ रसूल!) यदि आप इन लोगों को निमंत्रण देने का अपना भरसक प्रयास कर लें और उनके सत्य मार्ग पर आने के लिए बहुत लालायित रहें और उसके कारणों को अपनाएँ; किंतु अल्लाह जिसे गुमराह कर दे, उसे सीधी राह नहीं दिखाता। और ऐसे लोगों को अल्लाह के अलावा कोई नहीं मिलेगा, जो उनसे यातना को दूर करके उनकी मदद करे।

38

وَأَقْسَمُوا۟ بِٱللَّهِ جَهْدَ أَيْمَٰنِهِمْ ۙ لَا يَبْعَثُ ٱللَّهُ مَن يَمُوتُ ۚ بَلَىٰ وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّۭا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ

(कि अज़ाब से बचाए) और ये कुफ्फार ख़ुदा की जितनी क़समें उनके इमकान में तुम्हें खा (कर कहते) हैं कि जो शख़्श मर जाता है फिर उसको ख़ुदा दोबारा ज़िन्दा नहीं करेगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ ज़रुर ऐसा करेगा इस पर अपने वायदे की (वफा) लाज़िम व ज़रुरी है मगर बहुतेरे आदमी नहीं जानते हैं

इन पुनर्जीवन को झुठलाने वालों ने अतिशयोक्ति करते हुए बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पक्की क़समें खाते हुए कहा : अल्लाह मरने वाले को दोबारा ज़िंदा करके नहीं उठाएगा। जबकि उनके पास इसके लिए कोई तर्क नहीं है। क्यों नहीं! अल्लाह हर मरने वाले को ज़िंदा करके उठाएगा। यह उसके ऊपर सच्चा वादा है। किंतु अधिकतर लोग इस बात को नहीं जानते कि अल्लाह मृतकों को दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा। यही कारण है कि वे पुनर्जीवन का इनकार करते हैं।

39

لِيُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِى يَخْتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعْلَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَنَّهُمْ كَانُوا۟ كَٰذِبِينَ

(दोबारा ज़िन्दा करना इसलिए ज़रुरी है) कि जिन बातों पर ये लोग झगड़ा करते हैं उन्हें उनके सामने साफ वाज़ेए कर देगा और ताकि कुफ्फार ये समझ लें कि ये लोग (दुनिया में) झूठे थे

अल्लाह उन सभी लोगों को क़ियामत के दिन दोबारा जीवित करके उठाएगा, ताकि उनके लिए उन बातों की वास्तविकता को स्पष्ट कर दे, जिनके बारे में वे मतभेद किया करते थे, जैसे एकेश्वरवाद, पुनर्जीवन और नुबुव्वत और ताकि काफ़िर लोग जान लें कि वे अल्लाह के साथ साझी होने के अपने दावे में और पूनर्जीवन के इनकार में झूठे थे।

40

إِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَىْءٍ إِذَآ أَرَدْنَٰهُ أَن نَّقُولَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि 'हो जा' बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)

जब हम मृतकों को पुनर्जीवित करना और उन्हें उठाना चाहें, तो हमें कोई चीज़ इससे रोक नहीं सकती। जब हम किसी चीज़ को पैदा करना चाहते हैं, तो उसे केवल यह कहते हैं कि : (हो जा), तो वह अनिवार्य रूप से हो जाती है।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.