۞ يَوْمَ تَأْتِى كُلُّ نَفْسٍۢ تُجَٰدِلُ عَن نَّفْسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍۢ مَّا عَمِلَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और (उस दिन को याद) करो जिस दिन हर शख़्श अपनी ज़ात के बारे में झगड़ने को आ मौजूद होगा
और (ऐ रसूल!) उस दिन को याद करें, जिस दिन परिस्थिति इतनी गंभीर होगी कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी ओर से झगड़ रहा होगा। वह किसी दूसरे की ओर से नहीं झगड़ेगा। तथा हर इनसान को उसके अच्छे और बुरे कार्यों का पूरा बदला दिया जाएगा। और उनपर इस प्रकार का कोई अत्याचार नहीं होगा कि उनकी नेकियाँ घटा दी जाएँ या उनके गुनाह बढ़ा दिए जाएँ।