Muslim99Muslim99
← Tafsir library

16. An-Nahl

The Bee · Meccan · 128 ayahs

سُورَةُ النَّحۡلِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 91–100 of 128

91

وَأَوْفُوا۟ بِعَهْدِ ٱللَّهِ إِذَا عَٰهَدتُّمْ وَلَا تَنقُضُوا۟ ٱلْأَيْمَٰنَ بَعْدَ تَوْكِيدِهَا وَقَدْ جَعَلْتُمُ ٱللَّهَ عَلَيْكُمْ كَفِيلًا ۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ

और जब तुम लोग बाहम क़ौल व क़रार कर लिया करो तो ख़ुदा के एहदो पैमान को पूरा करो और क़समों को उनके पक्का हो जाने के बाद न तोड़ा करो हालॉकि तुम तो ख़ुदा को अपना ज़ामिन बना चुके हो जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उसे ज़रुर जानता है

अल्लाह या उसके बंदों को दिए हुए हर वचन को पूरा करो, और अल्लाह की क़सम खाकर क़समों को सुदृढ़ करने के बाद, उन्हें मत तोड़ो, हालाँकि तुमने अल्लाह को अपने आपपर गवाह बनाया है कि तुम अपनी क़समों को पूरा करोगे। निश्चय अल्लाह जानता है, जो कुछ तुम करते हो। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

92

وَلَا تَكُونُوا۟ كَٱلَّتِى نَقَضَتْ غَزْلَهَا مِنۢ بَعْدِ قُوَّةٍ أَنكَٰثًۭا تَتَّخِذُونَ أَيْمَٰنَكُمْ دَخَلًۢا بَيْنَكُمْ أَن تَكُونَ أُمَّةٌ هِىَ أَرْبَىٰ مِنْ أُمَّةٍ ۚ إِنَّمَا يَبْلُوكُمُ ٱللَّهُ بِهِۦ ۚ وَلَيُبَيِّنَنَّ لَكُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ مَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ

और तुम लोग (क़समों के तोड़ने में) उस औरत के ऐसे न हो जो अपना सूत मज़बूत कातने के बाद टुकड़े टुकड़े करके तोड़ डाले कि अपने एहदो को आपस में उस बात की मक्कारी का ज़रिया बनाने लगो कि एक गिरोह दूसरे गिरोह से (ख्वामख़वाह) बढ़ जाए इससे बस ख़ुदा तुमको आज़माता है (कि तुम किसी की पालाइश करते हो) और जिन बातों में तुम दुनिया में झगड़ते थे क़यामत के दिन ख़ुदा खुद तुम से साफ साफ बयान कर देगा

तुम प्रतिज्ञाओं को तोड़कर उस मूर्ख स्त्री की तरह मूर्ख और अल्पबुद्धि मत बनो, जिसने पूरी मेहनत से, अच्छी तरह ऊन या सूत काता, फिर उसे उधेड़कर रख दिया। उसने सूत कातने और उसे उधेड़ने में मेहनत की, लेकिन उसे वह नहीं मिला जो वह चाहती थी। तुम अपनी क़समों को एक-दूसरे को धोखा देने का साधन बनाते हो, ताकि तुम्हारा समुदाय तुम्हारे दुश्मन के समुदाय से अधिक और मज़बूत हो जाए। वास्तव में, अल्लाह तुम्हारा प्रतिज्ञाओं की पूर्ति के साथ परीक्षण करता है कि तुम उन्हें पूरा करते हो, या उन्हें तोड़ते हो? और अल्लाह क़ियामत के दिन उन सारे मामलों को निश्चित रूप से स्पष्ट कर देगा, जिनके बारे में तुम दुनिया में मतभेद किया करते थे। चुनाँचे वह बता देगा कि कौन सत्य पर था और कौन असत्य पर, तथा कौन सच्चा था और कौन झूठा।

93

وَلَوْ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمْ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ وَلَٰكِن يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَلَتُسْـَٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ

और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको एक ही (किस्म के) गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसकी चाहता है हिदायत करता है और जो कुछ तुम लोग दुनिया में किया करते थे उसकी बाज़ पुर्स (पुछ गछ) तुमसे ज़रुर की जाएगी

औ अगर अल्लाह चाहता तो तुम्हें एक ही समुदाय बना देता, जो सत्य मार्ग पर चल रहा होता, मगर अल्लाह जिसे चाहता है, अपने न्याय के अनुसार सत्य से दूर कर देता है और प्रतिज्ञाओं के अनुपालन से वंचित कर देता है। और जिसे चाहता है अपनी कृपा से उसका सामर्थ्य प्रदान करता है। और क़ियामत के दिन तुमसे उसके बारे में अवश्य पूछा जाएगा, जो तुम दुनिया में किया करते थे।

94

وَلَا تَتَّخِذُوٓا۟ أَيْمَٰنَكُمْ دَخَلًۢا بَيْنَكُمْ فَتَزِلَّ قَدَمٌۢ بَعْدَ ثُبُوتِهَا وَتَذُوقُوا۟ ٱلسُّوٓءَ بِمَا صَدَدتُّمْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۖ وَلَكُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌۭ

और तुम अपनी क़समों को आपस में के फसाद का सबब न बनाओ ताकि (लोगों के) क़दम जमने के बाद (इस्लाम से) उखड़ जाएँ और फिर आख़िरकार क़यामत में तुम्हें लोगों को ख़ुदा की राह से रोकने की पादाश (रोकने के बदले) में अज़ाब का मज़ा चखना पड़े और तुम्हारे वास्ते बड़ा सख्त अज़ाब हो

और तुम अपनी क़समों को धोखे का साधन न बनाओ कि अपने मन की इच्छाओं का पालन करते हुए, एक-दूसरे को धोखा दो। चुनाँचे जब चाहो क़समें तोड़ दो और जब चाहो पूरा करो। क्योंकि अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम्हारे पैर सीधे मार्ग से, उसपर जमन के उपरांत भी, हट जाएंँगे और तुम स्वयं अल्लाह के रास्ते से भटकने और दूसरों को उससे भटकाने के कारण यातना चखोगे और तुम्हारे लिए कई गुना यातना होगी।

95

وَلَا تَشْتَرُوا۟ بِعَهْدِ ٱللَّهِ ثَمَنًۭا قَلِيلًا ۚ إِنَّمَا عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيْرٌۭ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ

और ख़ुदा के एहदो पैमान के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी नफा) न लो अगर तुम जानते (बूझते) हो तो (समझ लो कि) जो कुछ ख़ुदा के पास है वह उससे कहीं बेहतर है

और अल्लाह की प्रतिज्ञा को थोड़ी सी क़ीमत से न बदलो कि उसकी प्रतिज्ञा को तोड़ दो और उसे पूरी न करो। वास्तविकता यह है कि इस संसार में अल्लाह जो विजय और ग़नीमत के धन प्रदान करेगा और आख़िरत में जो स्थायी आनंद प्रदान करेगा, वह तुम्हारे लिए उस थोड़े से मुआवज़े से बेहतर है, जो तुम्हें प्रतिज्ञा तोड़ने पर प्राप्त होता है, यदि तुम इस तथ्य को जानते हो।

96

مَا عِندَكُمْ يَنفَدُ ۖ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ بَاقٍۢ ۗ وَلَنَجْزِيَنَّ ٱلَّذِينَ صَبَرُوٓا۟ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

(क्योंकि माल दुनिया से) जो कुछ तुम्हारे पास है एक न एक दिन ख़त्म हो जाएगा और (अज्र) ख़ुदा के पास है वह हमेशा बाक़ी रहेगा और जिन लोगों ने दुनिया में सब्र किया था उनको (क़यामत में) उनके कामों का हम अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता करेंगें

(ऐ लोगो!) जो धन, सुख-सामग्री और नेमतें तुम्हारे पास हैं, वे ख़त्म हो जाएँगी, भले ही वे बहुत अधिक हों। जबकि अल्लाह के पास जो बदला है, वह बाकी रहने वाला है। तो तुम कैसे बाक़ी रहने वाले पर एक नश्वर को वरीयता देते हो? और हम उन लोगों को, जो अपनी प्रतिज्ञाओं पर क़ायम रहे और उन्हें किसी हाल में नहीं तोड़ा, उनका बदला उनके उत्तम कार्यों के अनुसार प्रदान करेंगे। अतः हम उन्हें एक नेकी बदला दस गुना से, सात सौ गुना तक, बल्कि उससे भी अधिक गुना तक देंगे।

97

مَنْ عَمِلَ صَٰلِحًۭا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌۭ فَلَنُحْيِيَنَّهُۥ حَيَوٰةًۭ طَيِّبَةًۭ ۖ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَجْرَهُم بِأَحْسَنِ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

मर्द हो या औरत जो शख़्श नेक काम करेगा और वह ईमानदार भी हो तो हम उसे (दुनिया में भी) पाक व पाकीज़ा जिन्दगी बसर कराएँगें और (आख़िरत में भी) जो कुछ वह करते थे उसका अच्छे से अच्छा अज्र व सवाब अता फरमाएँगें

जो भी शरीयत के अनुसार नेक काम करे, चाहे वह पुरुष हो या महिला, और वह अल्लाह पर ईमान रखने वाला हो, तो हम उसे अल्लाह के फ़ैसले से संतुष्टि और उसके साथ संतोष और नेक कार्यों की तौफ़ीक़ से भरा हुआ एक अच्छा जीवन प्रदान करेंगे और हम आख़िरत में उन्हें, दुनिया में उनके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों का, सर्वश्रेष्ठ बदला प्रदान करेंगे।

98

فَإِذَا قَرَأْتَ ٱلْقُرْءَانَ فَٱسْتَعِذْ بِٱللَّهِ مِنَ ٱلشَّيْطَٰنِ ٱلرَّجِيمِ

और जब तुम क़ुरान पढ़ने लगो तो शैतान मरदूद (के वसवसो) से ख़ुदा की पनाह तलब कर लिया करो

अतः (ऐ मोमिन!) जब तुम क़ुरआन पढ़ना चाहो, तो अल्लाह से दुआ करो को वह तुम्हें अल्लाह की दया से निष्कासित शैतान के वसवसे (बुरे ख़याल) से सुरक्षित रखे।

99

إِنَّهُۥ لَيْسَ لَهُۥ سُلْطَٰنٌ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ

इसमें शक नहीं कि जो लोग ईमानदार हैं और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं उन पर उसका क़ाबू नहीं चलता

शैतान का ज़ोर उन लोगों पर नहीं चलता, जो अल्लाह पर ईमान लाए और वे अपने सभी कार्यों में केवल अपने पालनहार पर भरोसा रखते हैं।

100

إِنَّمَا سُلْطَٰنُهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ يَتَوَلَّوْنَهُۥ وَٱلَّذِينَ هُم بِهِۦ مُشْرِكُونَ

उसका क़ाबू चलता है तो बस उन्हीं लोगों पर जो उसको दोस्त बनाते हैं और जो लोग उसको ख़ुदा का शरीक बनाते हैं

बुरे ख़यालों द्वारा उसका प्रभुत्व तो केवल उन लोगों पर है, जो उसे अपना दोस्त बनाते हैं और उसके बहकावे में उसका पालन करते हैं, तथा उसके बहकाने के कारण अल्लाह का साझी बनाने वाले हैं, उसके साथ दूसरे की पूजा करते हैं।

An-Nahl 16:100Listen in Qur'an →

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.