Muslim99Muslim99
← Tafsir library

16. An-Nahl

The Bee · Meccan · 128 ayahs

سُورَةُ النَّحۡلِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 1–10 of 128

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

1

أَتَىٰٓ أَمْرُ ٱللَّهِ فَلَا تَسْتَعْجِلُوهُ ۚ سُبْحَٰنَهُۥ وَتَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ

ऐ कुफ्फ़ारे मक्का (ख़ुदा का हुक्म (क़यामत गोया) आ पहुँचा तो (ऐ काफिरों बे फायदे) तुम इसकी जल्दी न मचाओ जिस चीज़ को ये लोग शरीक क़रार देते हैं उससे वह ख़ुदा पाक व पाकीज़ा और बरतर है

(ऐ काफ़िरो!) अल्लाह ने तुम्हें यातना देने का जो निर्णय किया है, उसका समय निकट आ गया। अतः समय से पहले उसके जल्द आने की माँग न करो। अल्लाह सर्वशक्तिमान मुश्रिकों के उसके लिए साझी ठहराने से पवित्र और सर्वोच्च है।

2

يُنَزِّلُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ بِٱلرُّوحِ مِنْ أَمْرِهِۦ عَلَىٰ مَن يَشَآءُ مِنْ عِبَادِهِۦٓ أَنْ أَنذِرُوٓا۟ أَنَّهُۥ لَآ إِلَٰهَ إِلَّآ أَنَا۠ فَٱتَّقُونِ

वही अपने हुक्म से अपने बन्दों में से जिसके पास चाहता है 'वहीं' देकर फ़रिश्तों को भेजता है कि लोगों को इस बात से आगाह कर दें कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मुझी से डरते रहो

अल्लाह फ़रिश्तों को वह़्य के साथ, अपने आदेश से, अपने रसूलों में से जिस पर चाहता है, उतारता है कि (ऐ रसूलो!) लोगों को अल्लाह का साझी बनाने से डराओ। क्योंकि मेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। अतः (ऐ लोगो!) मेरे आदेशों का पालन करके और मेरी मना की हुई बातों से बचकर मुझसे डरो।

3

خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ ۚ تَعَٰلَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ

उसी ने सारे आसमान और ज़मीन मसलहत व हिकमत से पैदा किए तो ये लोग जिसको उसका यशरीक बनाते हैं उससे कहीं बरतर है

अल्लाह ने आकाशों तथा धरती को किसी पिछले नमूने के बिना सत्य के साथ पैदा किया। अतः उसने उन्हें व्यर्थ नहीं बनाया, बल्कि उन्हें इसलिए बनाया, ताकि उनसे उसकी महानता का प्रमाण ग्रहण किया जाए। वह लोगों के उसके साथ दूसरों को साझी बनाने से पवित्र है।

4

خَلَقَ ٱلْإِنسَٰنَ مِن نُّطْفَةٍۢ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌۭ مُّبِينٌۭ

उसने इन्सान को नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हम ही से) खुल्लम खुल्ला झगड़ने वाला हो गया

उसने मनुष्य को एक तुच्छ वीर्य की बूँद से पैदा किया। फिर वह एक अवस्था (रचना) के बाद दूसरी अवस्था (रचना) में स्थानांतिरत होकर बढ़ता गया। फिर देखते-देखते वह सत्य को मिटाने के लिए असत्य के साथ खुल्लम-खुल्ला झगड़ने वाला बन गया।

5

وَٱلْأَنْعَٰمَ خَلَقَهَا ۗ لَكُمْ فِيهَا دِفْءٌۭ وَمَنَٰفِعُ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ

उसी ने चरपायों को भी पैदा किया कि तुम्हारे लिए ऊन (ऊन की खाल और ऊन) से जाडे क़ा सामान है

(ऐ लोगो!) उसने ऊँट, गाय और बकरी आदि चौपायों को तुम्हारे हितों के लिए पैदा किए हैं। इन हितों में से एक उनके ऊनों और बालों से गर्मी प्राप्त करना है, तथा अन्य हित उनके दूध, उनकी खालों और उनकी पीठ पर सवारी करने में हैं और उनमें से कुछ तुम्हारे खाने के काम आते हैं।

6

وَلَكُمْ فِيهَا جَمَالٌ حِينَ تُرِيحُونَ وَحِينَ تَسْرَحُونَ

इसके अलावा और भी फायदें हैं और उनमें से बाज़ को तुम खाते हो और जब तुम उन्हें सिरे शाम चराई पर से लाते हो जब सवेरे ही सवेरे चराई पर ले जाते हो

और चौपायों में तुम्हारे लिए शोभा व सुंदरता है, जब तुम उन्हें शाम को (चराकर घर) लाते हो और जब तुम उन्हें सुबह में चरागाह ले जाते हो।

7

وَتَحْمِلُ أَثْقَالَكُمْ إِلَىٰ بَلَدٍۢ لَّمْ تَكُونُوا۟ بَٰلِغِيهِ إِلَّا بِشِقِّ ٱلْأَنفُسِ ۚ إِنَّ رَبَّكُمْ لَرَءُوفٌۭ رَّحِيمٌۭ

तो उनकी वजह से तुम्हारी रौनक़ भी है और जिन शहरों तक बग़ैर बड़ी जान ज़ोख़म में डाले बगैर के पहुँच न सकते थे वहाँ तक ये चौपाए भी तुम्हारे बोझे भी उठा लिए फिरते हैं इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा शफीक़ मेहरबान है

और ये चौपाए जिन्हें हमने तुम्हारे लिए पैदा किया है, तुम्हारी यात्राओं में तुम्हारे भारी-भरकम सामान ऐसे नगरों तक उठाकर ले जाते हैं, जहाँ तुम बड़ा कष्ट उठाए बिना नहीं पहुँच सकते थे। निःसंदेह (ऐ लोगो!) तुम्हारा पालनहार तुम पर बड़ा मेहरबान और दयावान् है कि इन चौपायों को तुम्हारे वश में कर दिया है।

8

وَٱلْخَيْلَ وَٱلْبِغَالَ وَٱلْحَمِيرَ لِتَرْكَبُوهَا وَزِينَةًۭ ۚ وَيَخْلُقُ مَا لَا تَعْلَمُونَ

और (उसी ने) घोड़ों ख़च्चरों और गधों को (पैदा किया) ताकि तुम उन पर सवार हो और (इसमें) ज़ीनत (भी) है

और अल्लाह ने तुम्हारे लिए घोड़े, खच्चर और गधे पैदा किए, ताकि तुम उनकी सवारी करो, और उनपर अपना सामान लादो और ताकि वे लोगों के बीच तुम्हारी शोभा बनें। और वह ऐसी चीज़ें पैदा करता है, जो तुम नहीं जानते।

9

وَعَلَى ٱللَّهِ قَصْدُ ٱلسَّبِيلِ وَمِنْهَا جَآئِرٌۭ ۚ وَلَوْ شَآءَ لَهَدَىٰكُمْ أَجْمَعِينَ

(उसके अलावा) और चीज़े भी पैदा करेगा जिनको तुम नहीं जानते हो और (ख़ुश्क व तर में) सीधी राह (की हिदायत तो ख़ुदा ही के ज़िम्मे हैं और बाज़ रस्ते टेढे हैं

और अल्लाह ही के ज़िम्मे उसकी प्रसन्नता की ओर ले जाने वाले सीधे रास्ते को बयान करना है, जो कि इस्लाम है। जबकि कुछ रास्ते, सत्य से हटे हुए शैतान के रास्ते हैं। और इस्लाम के मार्ग के अलावा, हर रास्ता टेढ़ा है। यदि अल्लाह तुम सभी को ईमान की तौफ़ीक़ प्रदान करना चाहता, तो तुम सभी को इसकी तौफ़ीक़ दे देता।

10

هُوَ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ ۖ لَّكُم مِّنْهُ شَرَابٌۭ وَمِنْهُ شَجَرٌۭ فِيهِ تُسِيمُونَ

और अगर ख़ुदा चाहता तो तुम सबको मज़िले मक़सूद तक पहुँचा देता वह वही (ख़ुदा) है जिसने आसमान से पानी बरसाया जिसमें से तुम सब पीते हो और इससे दरख्त शादाब होते हैं

वही अल्लाह सर्वशक्तिमान है, जिसने तुम्हारे लिए बादल से कुछ पानी उतारा। उस पानी में से कुछ तुम्हारे लिए पेय है जिसे तुम खुद पीते और तुम्हारे जानवर (भी) पीते हैं, तथा उसी में से कुछ से पेड़-पौधे उगते हैं, जिनमें तुम अपने जानवरों को चराते हो।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.