فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلُونَ
ग़रज़ जब (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्ते) लूत के बाल बच्चों के पास आए तो लूत ने कहा कि तुम तो (कुछ) अजनबी लोग (मालूम होते हो)
फिर जब अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते पुरुषों की शक्ल में लूत के घर वालों के पास आए।
سُورَةُ الحِجۡرِ
Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies
Ayahs 61–70 of 99
فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلُونَ
ग़रज़ जब (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्ते) लूत के बाल बच्चों के पास आए तो लूत ने कहा कि तुम तो (कुछ) अजनबी लोग (मालूम होते हो)
फिर जब अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते पुरुषों की शक्ल में लूत के घर वालों के पास आए।
قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌۭ مُّنكَرُونَ
फरिश्तों ने कहा (नहीं) बल्कि हम तो आपके पास वह (अज़ाब) लेकर आए हैं
लूत अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : तुम अनजान लोग हो।
قَالُوا۟ بَلْ جِئْنَٰكَ بِمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَمْتَرُونَ
जिसके बारे में आपकी क़ौम के लोग शक़ रखते थे
संदेशवाहक फ़रिश्तों ने लूत अलैहिस्सलाम से कहा : डरिए मत। बल्कि - ऐ लूत! - हम आपके पास वह यातना लेकर आए हैं, जिसके बारे में आपकी जाति के लोग संदेह किया करते थे, जो उनका विनाश करने वाली है।
وَأَتَيْنَٰكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ
(कि आए न आए) और हम आप के पास (अज़ाब का) कलई (सही) हुक्म लेकर आए हैं और हम बिल्कुल सच कहते हैं
हम आपके पास वह सच्चाई लेकर आए हैं जिसमें कोई मज़ाक़ नहीं है, और हमने आपको जो कुछ बताया है उसमें हम बिल्कुल सच्चे हैं।
فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍۢ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَٱتَّبِعْ أَدْبَٰرَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌۭ وَٱمْضُوا۟ حَيْثُ تُؤْمَرُونَ
बस तो आप कुछ रात रहे अपने लड़के बालों को लेकर निकल जाइए और आप सब के सब पीछे रहिएगा और उन लोगों में से कोई मुड़कर पीछे न देखे और जिधर (जाने) का हुक्म दिया गया है (शाम) उधर (सीधे) चले जाओ और हमने लूत के पास इस अम्र का क़तई फैसला कहला भेजा
इसलिए रात के एक हिस्से के बीत जाने के बाद अपने परिवार के साथ चल पड़ें। तथा आप स्वयं उनके पीछे-पीछे चलें। और आप लोगों में से कोई भी पीछे मुड़कर न देखे कि उनके साथ क्या हुआ। और अल्लाह ने आप लोगों को जहाँ जाने का आदेश दिया है, वहाँ चलते जाओ।
وَقَضَيْنَآ إِلَيْهِ ذَٰلِكَ ٱلْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَٰٓؤُلَآءِ مَقْطُوعٌۭ مُّصْبِحِينَ
कि बस सुबह होते होते उन लोगों की जड़ काट डाली जाएगी
और हमने लूत अलैहिस्सलाम को वह़्य (प्रकाशना) द्वारा उस मामले से सूचित कर दिया जिसका हमने निर्णय किया था कि सुबह होते ही इनके अंतिम व्यक्ति तक को विनष्ट करके इनका उन्मूलन कर दिया जाएगा।
وَجَآءَ أَهْلُ ٱلْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ
और (ये बात हो रही थीं कि) शहर के लोग (मेहमानों की ख़बर सुन कर बुरी नीयत से) खुशियाँ मनाते हुए आ पहुँचे
और सदूम वाले, दुष्कर्म करने की लालच में, लूत अलैहिस्सलाम के अतिथियों पर बहुत खुश होकर आए।
قَالَ إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ ضَيْفِى فَلَا تَفْضَحُونِ
लूत ने (उनसे कहा) कि ये लोग मेरे मेहमान है तो तुम (इन्हें सताकर) मुझे रुसवा बदनाम न करो
लूत अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : ये लोग मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे उस चीज़ के द्वारा अपमानित न करो जो तुम उनके साथ करना चाहते हो।
وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ
और ख़ुदा से डरो और मुझे ज़लील न करो
इस अश्लीलता को छोड़कर अल्लाह से डरो और अपने इस जघन्य कार्य से मुझे अपमानित न करो।
قَالُوٓا۟ أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ ٱلْعَٰلَمِينَ
वह लोग कहने लगे क्यों जी हमने तुम को सारे जहाँन के लोगों (के आने) की मनाही नहीं कर दी थी
उनकी जाति ने उनसे कहा : क्या हमने आपको किसी भी व्यक्ति को अतिथि बनाने से मना नहीं किया?
Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.