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15. Al-Hijr

The Rock · Meccan · 99 ayahs

سُورَةُ الحِجۡرِ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 21–30 of 99

21

وَإِن مِّن شَىْءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ

और हमारे यहाँ तो हर चीज़ के बेशुमार खज़ाने (भरे) पड़े हैं और हम (उसमें से) एक जची तली मिक़दार भेजते रहते है

इनसानों और जानवरों के लाभ की जितनी वस्तुएँ हैं, हम उन्हें पैदा करने और लोगों को उनसे लाभ पहुँचाने का सामर्थ्य रखते हैं। और हम उनमें से जिस चीज़ को पैदा करते हैं, उसे अपनी हिकमत और अपनी इच्छा के अनुसार एक निश्चित मात्रा ही में पैदा करते हैं।

22

وَأَرْسَلْنَا ٱلرِّيَٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَسْقَيْنَٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمْ لَهُۥ بِخَٰزِنِينَ

और हम ही ने वह हवाएँ भेजी जो बादलों को पानी से (भरे हुए) है फिर हम ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने तुम लोगों को वह पानी पिलाया और तुम लोगों ने तो कुछ उसको जमा करके नहीं रखा था

और हमने हवाएँ भेजीं जो बादलों को पानी से गर्भित करती हैं। फिर उन गर्भित बादलों से बारिश बरसाई और तुम्हें बारिश के पानी से सैराब किया। और (ऐ लोगो!) तुम इस पानी को धरती के अंदर स्रोतों और कुओं के रूप में संग्रह करने वाले नहीं हो। परंतु यह केवल अल्लाह है जो इसे धरती में संग्रह करता है।

23

وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَنَحْنُ ٱلْوَٰرِثُونَ

और इसमें शक़ नहीं कि हम ही (लोगों को) जिलाते और हम ही मार डालते हैं और (फिर) हम ही (सब के) वाली वारिस हैं

निःसंदेह हम ही मृतकों को, उन्हें अनस्तित्व से अस्तित्व में लाकर तथा मृत्यु के बाद उन्हें पुनर्जीवित कर, जीवन प्रदान करते हैं। और जब जीवित लोग अपनी नियत अवधि पूरी कर लेते हैं, तो हम उन्हें मौत देते हैं। तथा हम ही बाक़ी रहने वाले हैं, जो धरती एवं उसके ऊपर मौजूद सारी चीज़ों के उत्तराधिकारी बनेंगे।

24

وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَـْٔخِرِينَ

और बेशक हम ही ने तुममें से उन लोगों को भी अच्छी तरह समझ लिया जो पहले हो गुज़रे और हमने उनको भी जान लिया जो बाद को आने वाले हैं

निश्चित रूप से हमें उन लोगों का ज्ञान है, जो तुमसे पहले पैदा हुए और मर चुके, तथा हमें उन लोगों का भी ज्ञान है जिनका बाद में जन्म एवं मृत्यु होगी। इसमें से कुछ भी हमसे छिपा नहीं है।

25

وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٌۭ

और इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार वही है जो उन सब को (क़यामत में कब्रों से) उठाएगा बेशक वह हिक़मत वाला वाक़िफकार है

(ऐ रसूल!) निश्चय आपका पालनहार क़ियामत के दिन उन सबको एकत्र करेगा। ताकि अच्छे कार्य करने वाले को उसके अच्छे कार्य का बदला दे और बुरे कार्य करने वाले को उसके बुरे कार्य का बदला दे। वह अपने प्रबंधन में हिकमत वाला, तथा सब कुछ जानने वाला है, उससे कोई बात छिपी नहीं रहती।

26

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ مِن صَلْصَٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ

और बेशक हम ही ने आदमी को ख़मीर (गुंधी) दी हुईसड़ी मिट्टी से जो (सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा किया

हमने आदम को सूखी मिट्टी से पैदा किया, जिसे ठोकर मारी जाए तो आवाज़ दे। और यह मिट्टी जिससे उन्हें बनाया गया, काले रंग की थी और ज़्यादा दिनों तक रहने के कारण बदबूदार हो गई थी।

27

وَٱلْجَآنَّ خَلَقْنَٰهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ

और हम ही ने जिन्नात को आदमी से (भी) पहले वे धुएँ की तेज़ आग से पैदा किया

और हमने आदम अलैहिस्सलाम को पैदा करने से पहले जिन्नों के पिता को तीव्र गर्मी वाली आग से पैदा किया।

28

وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّى خَٰلِقٌۢ بَشَرًۭا مِّن صَلْصَٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ

और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम्हारे परवरदिगार ने फरिश्तों से कहा कि मैं एक आदमी को खमीर दी हुई मिट्टी से (जो सूखकर) खन खन बोलने लगे पैदा करने वाला हूँ

(ऐ रसूल!) उस समय को याद कीजिए, जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से और इबलीस से (जो कि फ़रिश्तों के साथ था) कहा : मैं काली बदबूदार, खनखनाती हुई सूखी मिट्टी से एक इनसान बनाऊँगा।

29

فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَٰجِدِينَ

तो जिस वक्त मै उसको हर तरह से दुरुस्त कर चुके और उसमें अपनी (तरफ से) रुह फूँक दूँ तो सब के सब उसके सामने सजदे में गिर पड़ना

जब मैं उसकी शक्ल-सूरत ठीक-ठाक कर दूँ और उसकी रचना को पूरा कर लूँ, तो तुम सब मेरी आज्ञा के अनुपालन में और उसे अभिवादन करते हुए उसके आगे सजदे में गिर जाओ।

30

فَسَجَدَ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ

ग़रज़ फरिश्ते तो सब के सब सर ब सजूद हो गए

तो फ़रिश्तों ने आज्ञापालन किया और सब के सब उनके आगे सजदे में गिर गए, जैसा कि उनके पालनहार ने उन्हें आदेश दिया था।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.