الٓمٓر ۚ تِلْكَ ءَايَٰتُ ٱلْكِتَٰبِ ۗ وَٱلَّذِىٓ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ٱلْحَقُّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ
अलिफ़ लाम मीम रा ये किताब (क़ुरान) की आयतें है और तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से जो कुछ तुम्हारे पास नाज़िल किया गया है बिल्कुल ठीक है मगर बहुतेरे लोग ईमान नहीं लाते
{अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ रा॰।} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। इस सूरत की ये उच्च आयतें और क़ुरआन जिसे अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है, वह सत्य हैं, जिसमें कोई संशय नहीं है, और इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह अल्लाह की ओर से है। किंतु अधिकांश लोग हठ और अहंकार के कारण इसपर ईमान नहीं लाते।