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12. Yusuf

Joseph · Meccan · 111 ayahs

سُورَةُ يُوسُفَ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 41–50 of 111

41

يَٰصَىٰحِبَىِ ٱلسِّجْنِ أَمَّآ أَحَدُكُمَا فَيَسْقِى رَبَّهُۥ خَمْرًۭا ۖ وَأَمَّا ٱلْءَاخَرُ فَيُصْلَبُ فَتَأْكُلُ ٱلطَّيْرُ مِن رَّأْسِهِۦ ۚ قُضِىَ ٱلْأَمْرُ ٱلَّذِى فِيهِ تَسْتَفْتِيَانِ

ऐ मेरे क़ैद ख़ाने के दोनो रफीक़ो (अच्छा अब ताबीर सुनो तुममें से एक (जिसने अंगूर देखा रिहा होकर) अपने मालिक को शराब पिलाने का काम करेगा और (दूसरा) जिसने रोटियाँ सर पर (देखी हैं) तो सूली दिया जाएगा और चिड़िया उसके सर से (नोच नोच) कर खाएगी जिस अम्र को तुम दोनों दरयाफ्त करते थे (वह ये है और) फैसला हो चुका है

ऐ मेरे जेल के दोनों साथियो! जहाँ तक उसकी बात है, जिसने यह देखा कि वह शराब बनाने के लिए अंगूर निचोड़ रहा है, वह जेल से बाहर निकल जाएगा और अपने काम पर लौट आएगा और राजा को शराब पिलाएगा। और जहाँ तक उसकी बात है, जिसने यह देखा कि उसके सिर के ऊपर रोटी है, जिसे पक्षी खा रहे हैं, तो उसे क़त्ल कर दिया जाएगा और सूली पर चढ़ा दिया जाएगा। फिर पक्षी उसके सिर का मांस खाएँगे। तुमने जिस मामले के बारे में पूछा था, उसका फैसला हो चुका है। इसलिए वह अनिवार्य रूप से होकर रहेगा।

42

وَقَالَ لِلَّذِى ظَنَّ أَنَّهُۥ نَاجٍۢ مِّنْهُمَا ٱذْكُرْنِى عِندَ رَبِّكَ فَأَنسَىٰهُ ٱلشَّيْطَٰنُ ذِكْرَ رَبِّهِۦ فَلَبِثَ فِى ٱلسِّجْنِ بِضْعَ سِنِينَ

और उन दोनों में से जिसकी निस्बत यूसुफ ने समझा था वह रिहा हो जाएगा उससे कहा कि अपने मालिक के पास मेरा भी तज़किरा करना (कि मैं बेजुर्म क़ैद हूँ) तो शैतान ने उसे अपने आक़ा से ज़िक्र करना भुला दिया तो यूसुफ क़ैद ख़ाने में कई बरस रहे

यूसुफ़ ने उन दोनों युवकों में से जिसके बारे में समझा था कि वह रिहा हो जाएगा (और वह राजा को शराब पिलाने वाला था) उससे कहा : राजा के पास मेरी कहानी और मेरे मामले का ज़िक्र करना; शायद वह मुझे जेल से निकाल दे। किन्तु शैतान ने शराब पिलाने वाले को राजा के पास यूसुफ़ का उल्लेख करना भुला दिया। इसलिए उसके बाद यूसुफ़ को कई वर्षों तक जेल में रहना पड़ा।

43

وَقَالَ ٱلْمَلِكُ إِنِّىٓ أَرَىٰ سَبْعَ بَقَرَٰتٍۢ سِمَانٍۢ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌۭ وَسَبْعَ سُنۢبُلَٰتٍ خُضْرٍۢ وَأُخَرَ يَابِسَٰتٍۢ ۖ يَٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَأُ أَفْتُونِى فِى رُءْيَٰىَ إِن كُنتُمْ لِلرُّءْيَا تَعْبُرُونَ

और (इसी असना (बीच) में) बादशाह ने (भी ख्वाब देखा और) कहा मैने देखा है कि सात मोटी ताज़ी गाए हैं उनको सात दुबली पतली गाय खाए जाती हैं और सात ताज़ी सब्ज़ बालियॉ (देखीं) और फिर (सात) सूखी बालियॉ ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों अगर तुम लोगों को ख्वाब की ताबीर देनी आती हो तो मेरे (इस) ख्वाब के बारे में हुक्म लगाओ

राजा ने कहा : मैंने सपने में देखा है कि सात मोटी गाएँ हैं, जिन्हें सात कमज़ोर गाएँ खा रही हैं। इसी तरह मैंने सात हरी बालियाँ और सात सूखी बालियाँ देखी हैं। ऐ प्रमुखो और गणमान्य लोगो! मुझे मेरे इस सपने का अर्थ बताओ, यदि तुम सपने का अर्थ जानने वाले हो।

44

قَالُوٓا۟ أَضْغَٰثُ أَحْلَٰمٍۢ ۖ وَمَا نَحْنُ بِتَأْوِيلِ ٱلْأَحْلَٰمِ بِعَٰلِمِينَ

उन लोगों ने अर्ज़ की कि ये तो (कुछ) ख्वाब परेशॉ (सा) है और हम लोग ऐसे ख्वाब (परेशॉ) की ताबीर तो नहीं जानते हैं

उन लोगों ने कहा : आपका सपना, उलझे हुए सपनों का मिश्रण है। और जो ऐसा हो उसकी कोई व्याख्या नहीं है और हम मिश्रित सपनों की व्याख्या से अवगत नहीं हैं।

45

وَقَالَ ٱلَّذِى نَجَا مِنْهُمَا وَٱدَّكَرَ بَعْدَ أُمَّةٍ أَنَا۠ أُنَبِّئُكُم بِتَأْوِيلِهِۦ فَأَرْسِلُونِ

और जिसने उन दोनों में से रिहाई पाई थी (साकी) और उसको एक ज़माने के बाद (यूसुफ का क़िस्सा) याद आया बोल उठा कि मुझे (क़ैद ख़ाने तक) जाने दीजिए तो मैं उसकी ताबीर बताए देता हूँ

और दोनों क़ैदी युवकों में से रिहाई पाने वाले साक़ी (शराब पिलानेवाले व्यक्ति) ने, जिसे एक अवधि के बाद यूसुफ़ अलैहिस्सलाम और उनके सपने के अर्थ का ज्ञान रखने के बारे में याद आया, तो कहा : मैं आप लोगों को राजा के सपने का अर्थ एक ऐसे व्यक्ति से पूछने के बाद बता सकता हूँ, जिसके पास सपनों के अर्थ का ज्ञान है। इसलिए - ऐ राजा - मुझे यूसुफ़ के पास भेजें, ताकि वह आपके सपने का अर्थ बताएँ।

46

يُوسُفُ أَيُّهَا ٱلصِّدِّيقُ أَفْتِنَا فِى سَبْعِ بَقَرَٰتٍۢ سِمَانٍۢ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌۭ وَسَبْعِ سُنۢبُلَٰتٍ خُضْرٍۢ وَأُخَرَ يَابِسَٰتٍۢ لَّعَلِّىٓ أَرْجِعُ إِلَى ٱلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَعْلَمُونَ

(ग़रज़ वह गया और यूसुफ से कहने लगा) ऐ यूसुफ ऐ बड़े सच्चे (यूसुफ) ज़रा हमें ये तो बताइए कि सात मोटी ताज़ी गायों को सात पतली गाय खाए जाती है और सात बालियॉ हैं हरी कचवा और फिर (सात) सूखी मुरझाई (इसकी ताबीर क्या है) तो मैं लोगों के पास पलट कर जाऊँ (और बयान करुँ)

चुनाँचे जब रिहाई पाने वाला व्यक्ति यूसुफ़ के पास पहुँचा, तो उनसे कहा : ऐ यूसुफ़! ऐ सच्चे इनसान! हमें ऐसे व्यक्ति के सपने का अर्थ बताइँ, जिसने देखा कि सात मोटी गायों को सात दुबली गाएँ खा रही हैं, तथा उसने सात हरी बालियों और सात सूखी बालियों को देखा है। ताकि मैं राजा और उसके साथियों के पास वापस जाऊँ और वे राजा के सपने का अर्थ जान सकें। तथा वे आपकी प्रतिष्ठा और आपकी स्थिति जान सकें।

47

قَالَ تَزْرَعُونَ سَبْعَ سِنِينَ دَأَبًۭا فَمَا حَصَدتُّمْ فَذَرُوهُ فِى سُنۢبُلِهِۦٓ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّمَّا تَأْكُلُونَ

ताकि उनको भी (तुम्हारी क़दर) मालूम हो जाए यूसुफ ने कहा (इसकी ताबीर ये है) कि तुम लोग लगातार सात बरस काश्तकारी करते रहोगे तो जो (फसल) तुम काटो उस (के दाने) को बालियों में रहने देना (छुड़ाना नहीं) मगर थोड़ा (बहुत) जो तुम खुद खाओ

यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने इस सपने की व्याख्या करते हुए कहा : तुम लगातार सात सालों तक पूरी मेहनत के साथ खेती करोगे। अतः सात सालों में से हर साल जो भी फ़सल काटो, उसे कीड़ा लगने से बचाने के लिए उसकी बालियों में रहने दो। सिवाय थोड़े से अनाज के जिसे तुम्हें खाने के लिए ज़रूरत पड़े।

48

ثُمَّ يَأْتِى مِنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ سَبْعٌۭ شِدَادٌۭ يَأْكُلْنَ مَا قَدَّمْتُمْ لَهُنَّ إِلَّا قَلِيلًۭا مِّمَّا تُحْصِنُونَ

उसके बाद बड़े सख्त (खुश्क साली (सूखे) के) सात बरस आएंगें कि जो कुछ तुम लोगों ने उन सातों साल के वास्ते पहले जमा कर रखा होगा सब खा जाएंगें मगर बहुत थोड़ा सा जो तुम (बीज के वास्ते) बचा रखोगे

फिर उन सात उपजाऊ वर्षों के बाद, जिनमें तुम खूब खेती करोगे, सात अकाल वाले वर्ष आएँगे, जिनमें लोग उपजाऊ सालों में काटी हुए सारी फ़सलों को खा जाएँगे। सिवाय थोड़े से हिस्से के जिसे तुम बीज के तौर पर सुरक्षित कर लोगे।

49

ثُمَّ يَأْتِى مِنۢ بَعْدِ ذَٰلِكَ عَامٌۭ فِيهِ يُغَاثُ ٱلنَّاسُ وَفِيهِ يَعْصِرُونَ

(बस) फिर उसके बाद एक साल आएगा जिसमें लोगों के लिए खूब मेंह बरसेगी (और अंगूर भी खूब फलेगा) और लोग उस साल (उन्हें) शराब के लिए निचोड़ेगें

फिर उन अकाल वाले सालों के बाद एक ऐसा साल आएगा जिसमें ख़ूब बारिश होगी और खेतियाँ उगेंगी, और लोग उन चीज़ों का रस निचोड़ेंगे, जिनका रस निचोड़ने की आवश्यकता होती है, जैसे कि अंगूर, ज़ैतून और ईख आदि।

50

وَقَالَ ٱلْمَلِكُ ٱئْتُونِى بِهِۦ ۖ فَلَمَّا جَآءَهُ ٱلرَّسُولُ قَالَ ٱرْجِعْ إِلَىٰ رَبِّكَ فَسْـَٔلْهُ مَا بَالُ ٱلنِّسْوَةِ ٱلَّٰتِى قَطَّعْنَ أَيْدِيَهُنَّ ۚ إِنَّ رَبِّى بِكَيْدِهِنَّ عَلِيمٌۭ

(ये ताबीर सुनते ही) बादशाह ने हुक्म दिया कि यूसुफ को मेरे हुज़ूर में तो ले आओ फिर जब (शाही) चौबदार (ये हुक्म लेकर) यूसुफ के पास आया तो युसूफ ने कहा कि तुम अपनी सरकार के पास पलट जाओ और उनसे पूछो कि (आप को) कुछ उन औरतों का हाल भी मालूम है जिन्होने (मुझे देख कर) अपने अपने हाथ काट डाले थे कि या मैं उनका तालिब था

जब राजा को पता चला कि यूसुफ़ ने उसके सपने का अर्थ बताया है, तो उसने अपने सहयोगियों से कहा : उसे जेल से बाहर निकालो और मेरे पास लाओ। लेकिन जब राजा का दूत यूसुफ़ के पास आया, तो उन्होंने उससे कहा : तुम अपने स्वामी राजा के पास वापस जाओ और उससे उन महिलाओं की कहानी के बारे में पूछो, जिन्होंने अपने हाथ घायल कर लिए थे, ताकि जेल से निकलने से पहले उनकी बेगुनाही स्पष्ट हो जाए। निःसंदेह, उन्होंने मुझे रिझाने का जो प्रयास किया था, उसे मेरा पालनहार जानता है। वह उससे छिपा नहीं है।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.