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11. Hud

Hud · Meccan · 123 ayahs

سُورَةُ هُودٍ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 51–60 of 123

51

يَٰقَوْمِ لَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَى ٱلَّذِى فَطَرَنِىٓ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ

ऐ मेरी क़ौम मै उस (समझाने पर तुमसे कुछ मज़दूरी नहीं मॉगता मेरी मज़दूरी तो बस उस शख़्श के ज़िम्मे है जिसने मुझे पैदा किया तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते

ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं अपने पालनहार की ओर से तुम्हें उपदेश देने और उसकी ओर तुम्हें आमंत्रित करने का कोई मुआवज़ा नहीं माँगता। मेरा बदला केवल उस अल्लाह पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम यह नहीं समझते और मेरे आह्वान को स्वीकार नहीं करते?

52

وَيَٰقَوْمِ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًۭا وَيَزِدْكُمْ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمْ وَلَا تَتَوَلَّوْا۟ مُجْرِمِينَ

और ऐ मेरी क़ौम अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ मॉगों फिर उसकी बारगाह में अपने (गुनाहों से) तौबा करो तो वह तुम पर मूसलाधार मेह आसमान से बरसाएगा ख़ुश्क साली न होगी और तुम्हारी क़ूवत (ताक़त) में और क़ूवत बढ़ा देगा और मुजरिम बन कर उससे मुँह न मोड़ों

और ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह से क्षमा माँगो, फिर अपने गुनाहों से - जिनमें से सबसे बड़ा शिर्क है - उसके समक्ष तौबा करो। वह उसके फलस्वरूप तुमपर बहुत बारिश बरसाएगा और तुम्हारे संतान और धन में वृद्धि करके तुम्हें अधिक शक्ति एवं सम्मान प्रदान करेगा। और मैं तुम्हें जिसकी ओर आमंत्रित कर रहा हूँ, उससे मुँह मत फेरो। अन्यथा तुम मेरे आह्वान से मुँह फेरने, अल्लाह के साथ कुफ्र करने और मेरी लाई हुई बात को झुठलाने के कारण, अपराधियों में से हो जाओगे।

53

قَالُوا۟ يَٰهُودُ مَا جِئْتَنَا بِبَيِّنَةٍۢ وَمَا نَحْنُ بِتَارِكِىٓ ءَالِهَتِنَا عَن قَوْلِكَ وَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ

वह लोग कहने लगे ऐ हूद तुम हमारे पास कोई दलील लेकर तो आए नहीं और तुम्हारे कहने से अपने ख़ुदाओं को तो छोड़ने वाले नहीं और न हम तुम पर ईमान लाने वाले हैं

उनकी जाति के लोगों ने कहा : ऐ हूद! तुम हमारे पास कोई ऐसा स्पष्ट प्रमाण लेकर नहीं आए, जो हमें तुमपर ईमान लाने के लिए आमादा करे। और हम तुम्हारी बिना तर्क की बात पर अपने देवी-देवताओं की पूजा छोड़ने वाले नहीं हैं। तथा तुम जो अपने रसूल होने का दावा करते हो, उसमें हम तुमपर विश्वास नहीं कर रहे हैं।

54

إِن نَّقُولُ إِلَّا ٱعْتَرَىٰكَ بَعْضُ ءَالِهَتِنَا بِسُوٓءٍۢ ۗ قَالَ إِنِّىٓ أُشْهِدُ ٱللَّهَ وَٱشْهَدُوٓا۟ أَنِّى بَرِىٓءٌۭ مِّمَّا تُشْرِكُونَ

हम तो बस ये कहते हैं कि हमारे ख़ुदाओं में से किसने तुम्हें मजनून (दीवाना) बना दिया है (इसी वजह से तुम) बहकी बहकी बातें करते हो हूद ने जवाब दिया बेशक मै ख़ुदा को गवाह करता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि तुम ख़ुदा के सिवा (दूसरों को) उसका शरीक बनाते हो

हम तो यही कहेंगे कि चूँकि तुम हमें अपने देवी-देवताओं की पूजा से रोकते थे, इसलिए हमारे किसी देवता ने तुम्हें पागल कर दिया है! हूद ने कहा : मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं तुम्हारे उन देवी-देवताओं की पूजा से बरी हूँ, जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो। अतः तुम और तुम्हारे वे पूज्य जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि उन्होंने मुझे पागल कर दिया है, सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो और मुझे कोई मोहलत न दो।

55

مِن دُونِهِۦ ۖ فَكِيدُونِى جَمِيعًۭا ثُمَّ لَا تُنظِرُونِ

इसमे मै बेज़ार हूँ तो तुम सब के सब मेरे साथ मक्कारी करो और मुझे (दम मारने की) मोहलत भी न दो तो मुझे परवाह नहीं

हम तो यही कहेंगे कि चूँकि तुम हमें अपने देवी-देवताओं की पूजा से रोकते थे, इसलिए हमारे किसी देवता ने तुम्हें पागल कर दिया है! हूद ने कहा : मैं अल्लाह को गवाह बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं तुम्हारे उन देवी-देवताओं की पूजा से बरी हूँ, जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो। अतः तुम और तुम्हारे वे पूज्य जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि उन्होंने मुझे पागल कर दिया है, सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो और मुझे कोई मोहलत न दो।

56

إِنِّى تَوَكَّلْتُ عَلَى ٱللَّهِ رَبِّى وَرَبِّكُم ۚ مَّا مِن دَآبَّةٍ إِلَّا هُوَ ءَاخِذٌۢ بِنَاصِيَتِهَآ ۚ إِنَّ رَبِّى عَلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ

मै तो सिर्फ ख़ुदा पर भरोसा रखता हूँ जो मेरा भी परवरदिगार है और तुम्हारा भी परवरदिगार है और रुए ज़मीन पर जितने चलने वाले हैं सबकी चोटी उसी के साथ है इसमें तो शक़ ही नहीं कि मेरा परवरदिगार (इन्साफ की) सीधी राह पर है

मैंने अकेले अल्लाह पर भरोसा किया तथा अपने मामले में उसी का सहारा लिया है। क्योंकि वही मेरा और तुम्हारा पालनहार है। धरती पर जो भी जीव चलता है, वह अल्लाह के अधीन उसकी संप्रभुता और अधिकार के मातहत है। वह उसे जैसे चाहता है, फेरता है। निःसंदेह मेरा पालनहार सत्य और न्याय पर है। इसलिए वह कदापि तुम्हें मेरे ऊपर सशक्त नहीं करेगा। क्योंकि मैं सत्य पर हूँ और तुम झूठ पर हो।

57

فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّآ أُرْسِلْتُ بِهِۦٓ إِلَيْكُمْ ۚ وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّى قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُۥ شَيْـًٔا ۚ إِنَّ رَبِّى عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ حَفِيظٌۭ

इस पर भी अगर तुम उसके हुक्म से मुँह फेरे रहो तो जो हुक्म दे कर मैं तुम्हारे पास भेजा गया था उसे तो मैं यक़ीनन पहुँचा चुका और मेरा परवरदिगार (तुम्हारी नाफरमानी पर तुम्हें हलाक करें) तुम्हारे सिवा दूसरी क़ौम को तुम्हारा जानशीन करेगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते इसमें तो शक़ नहीं है कि मेरा परवरदिगार हर चीज़ का निगेहबान है

यदि तुमने मेरे लाए हुए संदेश से उपेक्षा किया और उससे पीछे हट गए, तो मेरा काम केवल तुम्हें संदेश पहुँचा देना है। और वास्तव में, मैंने वह सब कुछ तुम्हें पहुँचा दिया है, जिसके साथ अल्लाह ने मुझे भेजा था और मुझे उसके पहुँचाने का आदेश दिया था। अब तुमपर तर्क स्थापित हो चुका है। शीघ्र ही मेरा पालनहार तुम्हें विनष्ट कर देगा और तुम्हारे अलावा दूसरी जाति को लाएगा, जो तुम्हारे उत्तराधिकारी होंगे। तुम अपने झुठलाने और मुँह मोड़ने से अल्लाह को कोई छोटा या बड़ा नुक़सान नहीं पहुँचा सकते। क्योंकि वह अपने बंदों से बेनियाज़ है। निःसंदेह, मेरा पालनहार प्रत्येक वस्तु पर संरक्षक है। इसलिए वही तुम्हारी बुरी चाल से मेरी रक्षा करता है।

58

وَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًۭا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍۢ مِّنَّا وَنَجَّيْنَٰهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍۢ

और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने हूद को और जो लोग उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दिया और उन सबको सख्त अज़ाब से बचा लिया

और जब उन्हें नष्ट करने का हमारा आदेश आ गया, तो हमने हूद और उनके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया एवं कृपा से बचा लिया। तथा उन्हें उस गंभीर यातना से छुटकारा दिलाया, जिसके द्वारा हमने उनकी जाति के काफ़िर लोगों को दंडित किया था।

59

وَتِلْكَ عَادٌۭ ۖ جَحَدُوا۟ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا۟ رُسُلَهُۥ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍۢ

(ऐ रसूल) ये हालात क़ौमे आद के हैं जिन्होंने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया और उसके पैग़म्बरों की नाफ़रमानी की और हर सरकश (दुश्मने ख़ुदा) के हुक्म पर चलते रहें

ये वही आद जाति के लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह की निशानियों का इनकार किया, अपने रसूल हूद की अवज्ञा की और हर ऐसे व्यक्ति के आदेश का पालन किया, जो सत्य के आगे अभिमान करने वाला, उद्दंड था, न वह सत्य को स्वीकार करता और न ही उसका अनुसरण करता था।

60

وَأُتْبِعُوا۟ فِى هَٰذِهِ ٱلدُّنْيَا لَعْنَةًۭ وَيَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ ۗ أَلَآ إِنَّ عَادًۭا كَفَرُوا۟ رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًۭا لِّعَادٍۢ قَوْمِ هُودٍۢ

और इस दुनिया में भी लानत उनके पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) देख क़ौमे आद ने अपने परवरदिगार का इन्कार किया देखो हूद की क़ौमे आद (हमारी बारगाह से) धुत्कारी पड़ी है

उनके साथ इस दुनिया के जीवन में अल्लाह की दया से दूरी और अपमान लगा रहा तथा क़ियामत के दिन भी वे अल्लाह की दया से वंचित रहेंगे। और यह उनके कुफ्र के कारण होगा। याद रखो, अल्लाह ने उन्हें हर भलाई से दूर और हर बुराई से क़रीब कर दिया है।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.