إِلَّا ٱلَّذِينَ صَبَرُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌۭ وَأَجْرٌۭ كَبِيرٌۭ
मगर जिन लोगों ने सब्र किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसे नहीं) ये वह लोग हैं जिनके वास्ते (ख़ुदा की) बख़्शिस और बहुत बड़ी (खरी) मज़दूरी है
परन्तु जिन लोगों ने तकलीफों एवं आज्ञाकारिता पर धैर्य से काम लिया तथा गुनाहों से दूर रहे और अच्छे कार्य करते रहे, तो उनका मामला दूसरा है। वे निराशा से पीड़ित नहीं होते, न अल्लाह की नेमतों की नाशुक्री करते और न ही लोगों के सामने शेखी पघारते हैं। इन विशेषताओं से सुसज्जित लोगों के लिए उनके पालनहार कि ओर से उनके गुनाहों की क्षमा है तथा आख़िरत में उनके लिए बड़ा प्रतिफल है।