قَالُوا۟ يَٰشُعَيْبُ مَا نَفْقَهُ كَثِيرًۭا مِّمَّا تَقُولُ وَإِنَّا لَنَرَىٰكَ فِينَا ضَعِيفًۭا ۖ وَلَوْلَا رَهْطُكَ لَرَجَمْنَٰكَ ۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيْنَا بِعَزِيزٍۢ
और वह लोग कहने लगे ऐ शुएब जो बाते तुम कहते हो उनमें से अक्सर तो हमारी समझ ही में नहीं आयी और इसमें तो शक नहीं कि हम तुम्हें अपने लोगों में बहुत कमज़ोर समझते है और अगर तुम्हारा क़बीला न होता तो हम तुम को (कब का) संगसार कर चुके होते और तुम तो हम पर किसी तरह ग़ालिब नहीं आ सकते
शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने शुऐब से कहा : हम तुम्हारी लाई हुई बहुत-सी बातें नहीं समझते हैं। और चूँकि तुम्हारी आँखों में कमज़ोरी या अंधापन आ गया है, इसलिए हम तुम्हें अपने बीच कमज़ोर समझते हैं। यदि तुम्हारा कुल हमारे धर्म पर न होता, तो हम अवश्य तुम्हें पत्थर फेंककर मार डालते। तथा तुम हमारे निकट प्रिय (प्रतिष्ठित) भी नहीं हो कि हम तुम्हारी हत्या करने से डरें। हम केवल तुम्हारे कुल के सम्मान में तुम्हारी हत्या से रुके हुए हैं।