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11. Hud

Hud · Meccan · 123 ayahs

سُورَةُ هُودٍ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 91–100 of 123

91

قَالُوا۟ يَٰشُعَيْبُ مَا نَفْقَهُ كَثِيرًۭا مِّمَّا تَقُولُ وَإِنَّا لَنَرَىٰكَ فِينَا ضَعِيفًۭا ۖ وَلَوْلَا رَهْطُكَ لَرَجَمْنَٰكَ ۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيْنَا بِعَزِيزٍۢ

और वह लोग कहने लगे ऐ शुएब जो बाते तुम कहते हो उनमें से अक्सर तो हमारी समझ ही में नहीं आयी और इसमें तो शक नहीं कि हम तुम्हें अपने लोगों में बहुत कमज़ोर समझते है और अगर तुम्हारा क़बीला न होता तो हम तुम को (कब का) संगसार कर चुके होते और तुम तो हम पर किसी तरह ग़ालिब नहीं आ सकते

शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने शुऐब से कहा : हम तुम्हारी लाई हुई बहुत-सी बातें नहीं समझते हैं। और चूँकि तुम्हारी आँखों में कमज़ोरी या अंधापन आ गया है, इसलिए हम तुम्हें अपने बीच कमज़ोर समझते हैं। यदि तुम्हारा कुल हमारे धर्म पर न होता, तो हम अवश्य तुम्हें पत्थर फेंककर मार डालते। तथा तुम हमारे निकट प्रिय (प्रतिष्ठित) भी नहीं हो कि हम तुम्हारी हत्या करने से डरें। हम केवल तुम्हारे कुल के सम्मान में तुम्हारी हत्या से रुके हुए हैं।

92

قَالَ يَٰقَوْمِ أَرَهْطِىٓ أَعَزُّ عَلَيْكُم مِّنَ ٱللَّهِ وَٱتَّخَذْتُمُوهُ وَرَآءَكُمْ ظِهْرِيًّا ۖ إِنَّ رَبِّى بِمَا تَعْمَلُونَ مُحِيطٌۭ

शुएब ने कहा ऐ मेरी क़ौम क्या मेरे कबीले का दबाव तुम पर ख़ुदा से भी बढ़ कर है (कि तुम को उसका ये ख्याल) और ख़ुदा को तुम लोगों ने अपने वास्ते पीछे डाल दिया है बेशक मेरा परवरदिगार तुम्हारे सब आमाल पर अहाता किए हुए है

शुऐब ने अपनी जाति के लगों से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या मेरा क़बीला तुम्हारे निकट तुम्हारे पालनहार अल्लाह से अधिक सम्मानित एवं प्रभावशाली है?! और तुम लोगों ने अल्लाह को अपने पीछे छोड़ दिया, जब तुम उसके उस नबी पर ईमान नहीं लाए, जिसे उसने तुम्हारी ओर भेजा था। निश्चय ही मेरे पालनहार ने उसे अपने घेरे में ले रखा है जो कुछ तुम कर रहे हो। तुम्हारे कामों मे से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और वह तुम्हें इस दुनिया में विनाश के साथ और आख़िरत में अज़ाब की शक्ल में बदला देगा।

93

وَيَٰقَوْمِ ٱعْمَلُوا۟ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّى عَٰمِلٌۭ ۖ سَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌۭ يُخْزِيهِ وَمَنْ هُوَ كَٰذِبٌۭ ۖ وَٱرْتَقِبُوٓا۟ إِنِّى مَعَكُمْ رَقِيبٌۭ

और ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) करो मैं भी (बजाए खुद) कुछ करता हू अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है जा उसको (लोगों की नज़रों में) रुसवा कर देगा और (ये भी मालूम हो जाएगा कि) कौन झूठा है तुम भी मुन्तिज़र रहो मैं भी तुम्हारे साथ इन्तेज़ार करता हूँ

और ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने सामर्थ्य के अनुसार अपने मन पसंद तरीक़े पर काम करो, मैं (भी) अपने पसंद किए हुए तरीक़े पर अपने सामर्थ्य भर कार्य कर रहा हूँ। शीघ्र ही तुम्हें पता चाल जाएगा कि हममें से किसके पास, उसे दंडित करने के लिए, अपमानित करने वाली यातना आती है और हममें से कौन अपने दावे में झूठा है। अतः प्रतीक्षा करो कि अल्लाह क्या निर्णय करता है, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

94

وَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًۭا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍۢ مِّنَّا وَأَخَذَتِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ٱلصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا۟ فِى دِيَٰرِهِمْ جَٰثِمِينَ

और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने शुएब और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से बचा लिया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक चिंघाड़ ने ले डाला फिर तो वह सबके सब अपने घरों में औंधे पड़े रह गए

और जब शुऐब की जाति के लोगों को नष्ट करने का हमारा आदेश आ गया, तो हमने अपनी दया से शुऐब और उनके साथ ईमान लाने वालों को बचा लिया। और उसकी जाति के अत्याचारियों को एक विनाशकारी भयानक ध्वनि ने पकड़ लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई और वे इस तरह औंधे पड़े हुए थे कि उनके चेहरे मिट्टी से चिपक गए थे।

95

كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا۟ فِيهَآ ۗ أَلَا بُعْدًۭا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ

(और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में कभी बसे ही न थे सुन रखो कि जिस तरह समूद (ख़ुदा की बारगाह से) धुत्कारे गए उसी तरह अहले मदियन की भी धुत्कारी हुई

वे ऐसे हो गए, जैसे वे इससे पहले कभी वहाँ बसे ही नहीं थे। सुन रखो, मदयन के लोग अल्लाह के प्रकोप के उतरने के कारण उसकी दया से दूर कर दिए गए, जैसे समूद के लोग अल्लाह का क्रोध उतरने के कारण उसकी दया से दूर कर दिए गए थे।

96

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَا وَسُلْطَٰنٍۢ مُّبِينٍ

और बेशक हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलील देकर

और हमने मूसा को अल्लाह की तौह़ीद को दर्शाने वाली अपनी निशानियों तथा जो कुछ वह लेकर आए थे उसकी सत्यता को प्रमाणित करने वाले अपने स्पष्ट तर्कों के साथ भेजा।

97

إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَإِي۟هِۦ فَٱتَّبَعُوٓا۟ أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَآ أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍۢ

फिरऔन और उसके अम्र (सरदारों) के पास (पैग़म्बर बना कर) भेजा तो लोगों ने फिरऔन ही का हुक्म मान लिया (और मूसा की एक न सुनी) हालॉकि फिरऔन का हुक्म कुछ जॅचा समझा हुआ न था

हमने उन्हें फ़िरऔन और उसकी जाति के गणमान्य लोगों की ओर भेजा। तो इन गणमान्य लोगों ने फ़िरऔन के अल्लाह का इनकार करने के आदेश को मान लिया। जबकि फ़िरऔन का आदेश सत्य तक पहुँचाने वाला नहीं था कि उसे माना जाता।

98

يَقْدُمُ قَوْمَهُۥ يَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ فَأَوْرَدَهُمُ ٱلنَّارَ ۖ وَبِئْسَ ٱلْوِرْدُ ٱلْمَوْرُودُ

क़यामत के दिन वह अपनी क़ौम के आगे आगे चलेगा और उनको दोज़ख़ में ले जाकर झोंक देगा और ये लोग किस क़दर बड़े घाट उतारे गए

क़ियामत के दिन फिरऔन अपनी जाति की आग की ओर अगुवाई करेगा यहाँ तक कि उन्हें उसमें दाखिल कर देगा और वह बहुत ही बुरा उतरने का स्थान है जहाँ वह उन्हें ले जाएगा।

99

وَأُتْبِعُوا۟ فِى هَٰذِهِۦ لَعْنَةًۭ وَيَوْمَ ٱلْقِيَٰمَةِ ۚ بِئْسَ ٱلرِّفْدُ ٱلْمَرْفُودُ

और (इस दुनिया) में भी लानत उनके पीछे पीछे लगा दी गई और क़यामत के दिन भी (लगी रहेगी) क्या बुरा इनाम है जो उन्हें मिला

अल्लाह ने उन्हें डुबाकर विनष्ट करने के साथ-साथ, दुनिया के जीवन में उनपर धिक्कार, अभिशाप और अपनी दया से दूरी और निष्कासन अंकित कर दिया। तथा क़ियामत के दिन भी उनपर अपनी दया से दूरी और निष्कासन अंकित कर दिया। उनका दुनिया एवं आख़िरत दोनों जगहों में धिक्कार और अज़ाब का भागीदार बनना कितना बुरा है!

100

ذَٰلِكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْقُرَىٰ نَقُصُّهُۥ عَلَيْكَ ۖ مِنْهَا قَآئِمٌۭ وَحَصِيدٌۭ

(ऐ रसूल) ये चन्द बस्तियों के हालात हैं जो हम तुम से बयान करते हैं उनमें से बाज़ तो (उस वक्त तक) क़ायम हैं और बाज़ का तहस नहस हो गया

इस सूरत में बस्तियों के समाचार में से जो उल्लेख किया गया है, हम (ऐ रसूल) आपको उसके बारे में बता रहे हैं। इनमें से कुछ बस्तियाँ ऐसी हैं, जिनके निशान अभी बाक़ी हैं और कुछ ऐसी हैं, जिनके निशान मिट चुके हैं और उनका कोई चिह्न बाक़ी नहीं है।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.