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10. Yunus

Jonas · Meccan · 109 ayahs

سُورَةُ يُونُسَ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 1–10 of 109

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

1

الٓر ۚ تِلْكَ ءَايَٰتُ ٱلْكِتَٰبِ ٱلْحَكِيمِ

अलिफ़ लाम रा ये आयतें उस किताब की हैं जो अज़सरतापा (सर से पैर तक) हिकमत से मलूउ (भरी) है

{अलिफ़, लाम, रा।} इस प्रकार के अक्षरों के बारे में सूरतुल-बक़रा के आरंभ में बात की जा चुकी है। इस सूरत में तिलावत की गई ये आयतें सुदृढ़ एवं मज़बूत क़ुरआन की आयतें हैं, जो हिकमत और अहकाम पर आधारित है।

2

أَكَانَ لِلنَّاسِ عَجَبًا أَنْ أَوْحَيْنَآ إِلَىٰ رَجُلٍۢ مِّنْهُمْ أَنْ أَنذِرِ ٱلنَّاسَ وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَنَّ لَهُمْ قَدَمَ صِدْقٍ عِندَ رَبِّهِمْ ۗ قَالَ ٱلْكَٰفِرُونَ إِنَّ هَٰذَا لَسَٰحِرٌۭ مُّبِينٌ

क्या लोगों को इस बात से बड़ा ताज्जुब हुआ कि हमने उन्हीं लोगों में से एक आदमी के पास वही भेजी कि (बे ईमान) लोगों को डराओ और ईमानदारो को इसकी ख़ुश ख़बरी सुना दो कि उनके लिए उनके परवरदिगार की बारगाह में बुलन्द दर्जे है (मगर) कुफ्फार (उन आयतों को सुनकर) कहने लगे कि ये (शख्स तो यक़ीनन सरीही जादूगर) है

क्या लोगों के लिए यह आश्चर्य की बात है कि हमने उनकी जाति ही के एक व्यक्ति पर, उसे यह आदेश देते हुए, वह़्य (प्रकाशना) उतारी कि लोगों को अल्लाह की यातना से सचेत कर दे?! (ऐ रसूल!) आप अल्लाह पर ईमान लाने वाले लोगों को यह प्रसन्न करने वाली सूचना दे दें कि उन्होंने जो भी अच्छे कर्म आगे भेजे हैं, उसके प्रतिफल के तौर पर उनके लिए उनके पालानहार के पास उच्च स्थान (पद) है। काफिरों ने कहा : निःसंदेह यह आदमी जो इन आयतों को लेकर आया है, एक स्पष्ट जादूगर है।

3

إِنَّ رَبَّكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍۢ ثُمَّ ٱسْتَوَىٰ عَلَى ٱلْعَرْشِ ۖ يُدَبِّرُ ٱلْأَمْرَ ۖ مَا مِن شَفِيعٍ إِلَّا مِنۢ بَعْدِ إِذْنِهِۦ ۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمْ فَٱعْبُدُوهُ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुमरा परवरदिगार वही ख़ुदा है जिसने सारे आसमान व ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया फिर उसने अर्श को बुलन्द किया वही हर काम का इन्तज़ाम करता है (उसके सामने) कोई (किसी का) सिफारिशी नहीं (हो सकता) मगर उसकी इजाज़त के बाद वही ख़ुदा तो तुम्हारा परवरदिगार है तो उसी की इबादत करो तो क्या तुम अब भी ग़ौर नही करते

निःसंदेह (ऐ आश्चर्य करने वालो!) तुम्हारा पालनहार वही अल्लाह है, जिसने भव्य आकाशों तथा विशाल धरती को छह दिनों में बनाया, फिर वह अर्श पर बुलंद हुआ। तो तुम्हें कैसे आश्चर्य होता है कि उसने तुम्हारी ही जाति में से एक आदमी को रसूल बनाकर भेजा?! वह अपने विशाल राज्य में अकेले ही निर्णय लेता है और फ़ैसले करता है। उसके पास उसकी अनुमति तथा अनुशंसा करने वाले से उसकी संतुष्टि के बिना कोई व्यक्ति किसी चीज़ के बारे में अनुशंसा नहीं कर सकता। इन गुणों से विशेषित अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है। अतः निष्ठापूर्वक एकमात्र उसी की उपासना करो। तो क्या तुम उसके एकेश्वरवाद के इन सभी प्रमाणों एवं तर्कों से शिक्षा ग्रहण नहीं करतेॽ जिसके पास थोड़ी-सी भी शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता होगी, वह उसे जान लेगा और उसपर ईमान लाएगा।

4

إِلَيْهِ مَرْجِعُكُمْ جَمِيعًۭا ۖ وَعْدَ ٱللَّهِ حَقًّا ۚ إِنَّهُۥ يَبْدَؤُا۟ ٱلْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ لِيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ بِٱلْقِسْطِ ۚ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَهُمْ شَرَابٌۭ مِّنْ حَمِيمٍۢ وَعَذَابٌ أَلِيمٌۢ بِمَا كَانُوا۟ يَكْفُرُونَ

तुम सबको (आख़िर) उसी की तरफ लौटना है ख़ुदा का वायदा सच्चा है वही यक़ीनन मख़लूक को पहली मरतबा पैदा करता है फिर (मरने के बाद) वही दुबारा जिन्दा करेगा ताकि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको इन्साफ के साथ जज़ाए (ख़ैर) अता फरमाएगा और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया उन के लिए उनके कुफ्र की सज़ा में पीने को खौलता हुआ पानी और दर्दनाक अज़ाब होगा

क़ियामत के दिन तुम सब को उसी एक अल्लाह की ओर लौटना है, ताकि वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल प्रदान करे। अल्लाह ने लोगों से इसका सच्चा वादा किया है, जो वह नहीं तोड़ेगा। निःसंदेह वह इसमें सक्षम है। वह किसी पिछले उदाहरण के बिना सृष्टि की रचना का आरंभ करता है और फिर उसकी मृत्यु के पश्चात उसे पुनः जीवित करेगा, ताकि उन लोगों को न्याय के साथ प्रतिफल प्रदान करे, जो अल्लाह पर ईमान लाए और सत्कर्म किए। वह न उनकी नेकियों को घटाएगा और न उनके गुनाहों को बढ़ाएगा। जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया, उनके लिए उनके इस इनकार के कारण खौलते हुए जल का पेय होगा, जो उनकी आँतों के टुकड़े-टुकड़े कर देगा तथा उनके लिए दर्दनाक यातना होगी।

5

هُوَ ٱلَّذِى جَعَلَ ٱلشَّمْسَ ضِيَآءًۭ وَٱلْقَمَرَ نُورًۭا وَقَدَّرَهُۥ مَنَازِلَ لِتَعْلَمُوا۟ عَدَدَ ٱلسِّنِينَ وَٱلْحِسَابَ ۚ مَا خَلَقَ ٱللَّهُ ذَٰلِكَ إِلَّا بِٱلْحَقِّ ۚ يُفَصِّلُ ٱلْءَايَٰتِ لِقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ

वही वह (ख़ुदाए क़ादिर) है जिसने आफ़ताब को चमकदार और महताब को रौशन बनाया और उसकी मंज़िलें मुक़र्रर की ताकि तुम लोग बरसों की गिनती और हिसाब मालूम करो ख़ुदा ने उसे हिकमत व मसलहत से बनाया है वह (अपनी) आयतों का वाक़िफ़कार लोगों के लिए तफ़सीलदार बयान करता है

वही है, जिसने सूर्य को ज्योति फैलाने वाला बनाया और चाँद को प्रकाशमान बनाया, जिससे रोशनी प्राप्त की जाती है। साथ ही चाँद की अट्ठाईस मंज़िलों के अनुसार उसकी गति निर्धारित की। मंज़िल से अभिप्राय वह दूरी है, जिसे चाँद हर दिन और रात तय करता है। यह सब इसलिए किया, ताकि (ऐ लोगो!) तुम सूरज के द्वारा दिनों की संख्या तथा चाँद के द्वारा महीनों एवं वर्षों की संख्या जान सको। अल्लाह ने आकाशों और धरती तथा उनके बीच की चीज़ों को सत्य के साथ ही पैदा किया है; ताकि लोगों को अपनी शक्ति और महानता के दर्शन कराए। अल्लाह अपने एकेश्वरवाद के इन स्पष्ट प्रमाणों और उज्ज्वल तर्कों को ऐसे लोगों के लिए खोल-खोलकर बयान करता है, जो इनसे उसके एकेश्वरवाद का पता लगाना जानते हैं।

6

إِنَّ فِى ٱخْتِلَٰفِ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ وَمَا خَلَقَ ٱللَّهُ فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَّقُونَ

इसमें ज़रा भी शक़ नहीं कि रात दिन के उलट फेर में और जो कुछ ख़ुदा ने आसमानों और ज़मीन में बनाया है (उसमें) परहेज़गारों के वास्ते बहुतेरी निशानियाँ हैं

निःसंदेह बंदों पर रात और दिन के एक-दूसरे के बाद आने में, उसके साथ होने वाले अंधकार और प्रकाश में तथा दोनों में से किसी एक के छोटे और दूसरे के लंबे होने में और आकाशों तथा धरती के अंदर मौजूद सारी सृष्टियों में, निश्चय उन लोगों के लिए अल्लाह की शक्ति को दर्शाने वाली निशानियाँ हैं, जो अल्लाह से उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर डरते हैं।

7

إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَآءَنَا وَرَضُوا۟ بِٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَٱطْمَأَنُّوا۟ بِهَا وَٱلَّذِينَ هُمْ عَنْ ءَايَٰتِنَا غَٰفِلُونَ

इसमें भी शक़ नहीं कि जिन लोगों को (क़यामत में) हमारी (बारगाह की) हुज़ूरी का ठिकाना नहीं और दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी से निहाल हो गए और उसी पर चैन से बैठे हैं और जो लोग हमारी आयतों से ग़ाफिल हैं

निःसंदेह जो काफ़िर लोग अल्लाह से मिलने की आशा नहीं रखते कि उससे डरें या उसकी लालसा करें, तथा वे सदैव रहने वाले परलोक के जीवन के बजाय इस दुनिया के नश्वर जीवन से प्रसन्न हो गए और उनके दिल उसपर खुश होकर उससे संतुष्ट हो गए और वे लोग जो अल्लाह की निशानियों और उसके प्रमाणों से मुँह फेरने वाले और उनसे असावधान हैं।

8

أُو۟لَٰٓئِكَ مَأْوَىٰهُمُ ٱلنَّارُ بِمَا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ

यही वह लोग हैं जिनका ठिकाना उनकी करतूत की बदौलत जहन्नुम है

इन गुणों से विशेषित लोगों का ठिकाना, जहाँ वे शरण लेंगे, जहन्नम है; इस कारण कि उन्होंने कुफ़्र किया और क़ियामत के दिन को झुठलाया।

9

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّٰلِحَٰتِ يَهْدِيهِمْ رَبُّهُم بِإِيمَٰنِهِمْ ۖ تَجْرِى مِن تَحْتِهِمُ ٱلْأَنْهَٰرُ فِى جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ

बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें उनका परवरदिगार उनके ईमान के सबब से मंज़िल मक़सूद तक पहुँचा देगा कि आराम व आसाइश के बाग़ों में (रहेगें) और उन के नीचे नहरें जारी होगी

निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, अल्लाह उन्हें उनके ईमान के कारण सुकर्म का मार्ग दिखाएगा, जो उसकी प्रसन्नता की ओर ले जाने वाला है। फिर, क़ियामत के दिन, अल्लाह उन्हें सदैव रहने वाली नेमत भरी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जहाँ उनके नीचे से नहरें प्रवाहित होंगी।

10

دَعْوَىٰهُمْ فِيهَا سُبْحَٰنَكَ ٱللَّهُمَّ وَتَحِيَّتُهُمْ فِيهَا سَلَٰمٌۭ ۚ وَءَاخِرُ دَعْوَىٰهُمْ أَنِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ

उन बाग़ों में उन लोगों का बस ये कौल होगा ऐ ख़ुदा तू पाक व पाकीज़ा है और उनमें उनकी बाहमी (आपसी) खैरसलाही (मुलाक़ात) सलाम से होगी और उनका आख़िरी क़ौल ये होगा कि सब तारीफ ख़ुदा ही को सज़ावार है जो सारे जहाँन का पालने वाला है

जन्नत में उनकी प्रार्थना अल्लाह की तसबीह व तक़दीस (प्रशंसा और पवित्रता) होगी तथा उन्हें अल्लाह का अभिवादन, फ़रिश्तों का अभिवादन और उनका एक-दूसरे का अभिवादन : सलाम (शांति) होगा, तथा उनकी प्रार्थना का अंत सभी प्राणियों के पालनहार की प्रशंसा पर होगा।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.