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10. Yunus

Jonas · Meccan · 109 ayahs

سُورَةُ يُونُسَ

Reading Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies

Ayahs 61–70 of 109

61

وَمَا تَكُونُ فِى شَأْنٍۢ وَمَا تَتْلُوا۟ مِنْهُ مِن قُرْءَانٍۢ وَلَا تَعْمَلُونَ مِنْ عَمَلٍ إِلَّا كُنَّا عَلَيْكُمْ شُهُودًا إِذْ تُفِيضُونَ فِيهِ ۚ وَمَا يَعْزُبُ عَن رَّبِّكَ مِن مِّثْقَالِ ذَرَّةٍۢ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فِى ٱلسَّمَآءِ وَلَآ أَصْغَرَ مِن ذَٰلِكَ وَلَآ أَكْبَرَ إِلَّا فِى كِتَٰبٍۢ مُّبِينٍ

(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मशग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौशन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है

(ऐ रसूल!) आप जिस कार्य में भी होते हैं और क़ुरआन में से जो कुछ भी पढ़ते हैं, तथा (ऐ मोमिनों!) तुम जो काम भी करते हो, हम तुम्हें जानते हुए देख रहे होते हैं और तुम्हें सुन रहे होते हैं, जब तुम कार्य करना शुरू करते हो। तुम्हारे पालनहार के ज्ञान से आकाश या धरती में कणभर भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं होती। तथा इससे कम वज़न या इससे अधिक वज़न की कोई चीज़ नहीं है, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक में दर्ज है, जो न कोई छोटी बात छोड़ती है और न बड़ी, बल्कि सबको अपने अंदर समाहित कर रखा है।

62

أَلَآ إِنَّ أَوْلِيَآءَ ٱللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ

आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजुर्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे

सुन लो! निःसंदेह अल्लाह के मित्रों को न भविष्य में क़ियामत की भयावहता का डर होगा और न वे दुनिया के छूट जाने वाले आनंद पर शोकाकुल होंगे।

63

ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَكَانُوا۟ يَتَّقُونَ

ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़ुदा से) डरते थे

ये अल्लाह के मित्र वे लोग हैं, जो अल्लाह पर और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान रखते थे तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते थे।

64

لَهُمُ ٱلْبُشْرَىٰ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَفِى ٱلْءَاخِرَةِ ۚ لَا تَبْدِيلَ لِكَلِمَٰتِ ٱللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ

उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की ज़िन्दगी में भी और आख़िरत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है

उनके लिए, उनके पालनहार की ओर से, दुनिया में प्रसन्नता प्रदान करने वाले अच्छे स्वप्न या लोगों की प्रशंसा के रूप में शुभ-सूचना है, तथा उनके लिए फ़रिश्तों की ओर से शुभ समाचार है जब उनके प्राण निकाले जाते हैं, तथा मृत्यु के बाद एवं प्रलय के दिन। अल्लाह ने उनसे जो वादा किया है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। यह प्रतिफल ही महान सफलता है; क्योंकि इसमें उद्देश्य की प्राप्ति एवं भय से मुक्ति है।

65

وَلَا يَحْزُنكَ قَوْلُهُمْ ۘ إِنَّ ٱلْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًا ۚ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ

और (ऐ रसूल) उन (कुफ्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक़ नहीं कि सारी इज्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है

(ऐ रसूल!) ये लोग आपके धर्म के बारे में जो तिरस्कार और लांछन की बातें करते हैं, आप उससे दुःखी न हों। निःसंदेह समस्त प्रभुत्व एवं आधिपत्य अल्लाह ही के लिए है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। वह उनकी बातों का सुनने वाला और उनके कार्यों का जानने वाला है और जल्द ही उन्हें उसका बदला देगा।

66

أَلَآ إِنَّ لِلَّهِ مَن فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ ۗ وَمَا يَتَّبِعُ ٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ شُرَكَآءَ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَإِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ

आगाह रहो इसमें शक़ नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फर्ज़ी) शरीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख्याली बातें किया करते हैं

सुन लो! जो कोई आकाशों में है और जो कोई धरती में है, सब का मालिक एकमात्र अल्लाह है। और ये बहुदेववादी लोग जो अल्लाह को छोड़कर दूसरे साझीदारों की पूजा करते हैं, वे किस चीज़ का अनुसरण कर रहे हैं?! वास्तव में, वे केवल संदेह का पालन करते हैं, तथा अपने साझीदारों की अल्लाह की ओर निसबत करनें में मात्र झूठ बोल रहे हैं। अल्लाह उनकी बातों से सर्वोच्च एवं महान है।

67

هُوَ ٱلَّذِى جَعَلَ لَكُمُ ٱلَّيْلَ لِتَسْكُنُوا۟ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَسْمَعُونَ

वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौशनी में देखो भालो उसमें शक़ नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)

वही अकेला है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए रात बनाई, ताकि तुम उसमें हरकत (चलने-फिरने) और थकान से आराम पा सको और दिन को प्रकाशमान बनाया, ताकि उसमें जीवनयापन के लिए लाभदायक वस्तुओं की तलाश में दौड़-धूप कर सको। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए स्पष्ट निशानियाँ हैं, जो मानने और स्वीकार करने के उद्देश्य से सुनते हैं।

68

قَالُوا۟ ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ وَلَدًۭا ۗ سُبْحَٰنَهُۥ ۖ هُوَ ٱلْغَنِىُّ ۖ لَهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۚ إِنْ عِندَكُم مِّن سُلْطَٰنٍۭ بِهَٰذَآ ۚ أَتَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ

लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यू ही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो

बहुदेववादियों के एक समूह ने कहा : अल्लाह ने फ़रिश्तों को अपनी पुत्रियाँ बनाया है! अल्लाह उनके इस बात से पवित्र है। वह पवित्र अल्लाह अपनी सभी सृष्टियों से बेनियाज़ है। जो कुछ अकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सबका मालिक वही है। तुम्हारे पास (ऐ बहुदेववादियो!) तुम्हारे इस कथन का कोई प्रमाण नहीं है। क्या तुम बिना किसी प्रमाण के अल्लाह पर एक गंभीर बात कहते हो - कि तुम उसकी ओर संतान की निसबत करते हो - जिसकी सच्चाई तुम नहीं जानते?!

69

قُلْ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَفْتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلْكَذِبَ لَا يُفْلِحُونَ

ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निःसंदेह जो लोग अल्लाह की ओर संतान की निसबत करके उसपर झूठ गढ़ते हैं, वे अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं होंगे और न उस चीज़ से मुक्ति पा सकेंगे, जिससे वे डर रहे हैं।

70

مَتَٰعٌۭ فِى ٱلدُّنْيَا ثُمَّ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ ٱلْعَذَابَ ٱلشَّدِيدَ بِمَا كَانُوا۟ يَكْفُرُونَ

(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आख़िर हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें

अतः वे संसार की सुख-सामग्रियों और नेमतों का जो आनंद ले रहे हैं, उससे धोखा न खाएँ। क्योंकि यह एक क्षणभंगुर थोड़ा-सा सुख है। फिर उन्हें क़ियामत के दिन हमारे ही पास लौटना है। फिर हम उन्हें उनके अल्लाह का इनकार करने और उसके रसूल को झुठलाने के कारण कठोर यातना का मज़ा चखाएँगे।

Commentary: Al-Mukhtasar in Interpreting the Noble Qur'an by Tafsir Center for Quranic Studies. Qur'an text and translation via AlQuran Cloud.